Class 10 Economics Chapter 5 रोजगार एवं सेवाएं Notes

Class 10 Economics Chapter 5 रोजगार एवं सेवाएं Notes
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रोजगार एवं सेवाएं

Chapter 5 – सम्पूर्ण नोट्स

BSEB EXAM GUIDE

अध्याय परिचय

मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य करता है। जब किसी व्यक्ति को ऐसा काम मिलता है जिससे उसे आय प्राप्त होती है, तो इसे सामान्य रूप से रोजगार कहा जाता है।

अर्थव्यवस्था में लोग कृषि, उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बैंकिंग, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे अनेक क्षेत्रों में काम करते हैं। इन गतिविधियों को समझने के लिए अर्थव्यवस्था को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में बाँटा जाता है।

आधुनिक अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी सेवाएँ आर्थिक तथा सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अध्याय में मुख्य रूप से पढ़ेंगे:
रोजगार, आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, आधारभूत संरचना, मानव पूँजी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य, बेरोजगारी, छिपी बेरोजगारी, ग्रामीण रोजगार तथा रोजगार कार्यक्रम।

इस अध्याय में पढ़ेंगे

1. रोजगार क्या है?

जब कोई व्यक्ति उत्पादन या सेवा से संबंधित ऐसा कार्य करता है जिससे उसे आय या आजीविका प्राप्त होती है, तो उसे सामान्य रूप से रोजगार (Employment) कहा जाता है।
उदाहरण:
किसान का खेती करना, शिक्षक का पढ़ाना, डॉक्टर का चिकित्सा सेवा देना, मजदूर का कारखाने में काम करना और कर्मचारी का बैंक में कार्य करना रोजगार के उदाहरण हैं।
व्यक्ति
→
कार्य
→
आय / आजीविका

2. कार्यशील जनसंख्या

अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन से जुड़ी जनसंख्या आर्थिक गतिविधियों में योगदान करती है। रोजगार की स्थिति को समझने में कार्यशील जनसंख्या का अध्ययन महत्वपूर्ण होता है।

सरल रूप में:
काम करने वाले व्यक्ति → उत्पादन एवं सेवाएँ → आय → आर्थिक गतिविधि

3. आर्थिक गतिविधियों के तीन प्रमुख क्षेत्र

आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में समझा जाता है।

01

प्राथमिक क्षेत्र

प्राकृतिक संसाधनों से सीधे संबंधित गतिविधियाँ।

02

द्वितीयक क्षेत्र

कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलने वाली गतिविधियाँ।

03

तृतीयक क्षेत्र

विभिन्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करने वाली गतिविधियाँ।

4. प्राथमिक क्षेत्र

जिस क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष उपयोग से संबंधित होती हैं, उसे प्राथमिक क्षेत्र कहा जाता है।

प्रमुख उदाहरण

🌾 कृषि
🐄 पशुपालन
🎣 मत्स्य पालन
🌳 वानिकी

भारत जैसे देश में कृषि लंबे समय से रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

5. द्वितीयक क्षेत्र

वह क्षेत्र जिसमें कच्चे माल को प्रसंस्करण या निर्माण द्वारा दूसरी वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है, द्वितीयक क्षेत्र कहलाता है।

उदाहरण

  • कारखाने
  • निर्माण उद्योग
  • कपड़ा उद्योग
  • खाद्य प्रसंस्करण
  • भवन निर्माण
कच्चा माल
→
उत्पादन / निर्माण
→
तैयार वस्तु
उदाहरण:
कपास → कपड़ा उद्योग → कपड़ा

6. तृतीयक क्षेत्र

जिस क्षेत्र में वस्तुओं के उत्पादन के बजाय मुख्य रूप से सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, उसे तृतीयक क्षेत्र या सेवा क्षेत्र कहा जाता है।
शिक्षा

स्कूल, कॉलेज एवं प्रशिक्षण सेवाएँ।

स्वास्थ्य

अस्पताल एवं चिकित्सा सेवाएँ।

बैंकिंग

वित्तीय एवं बैंकिंग सेवाएँ।

परिवहन

लोगों और वस्तुओं का आवागमन।

संचार

सूचना के आदान-प्रदान की सेवाएँ।

IT

सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित सेवाएँ।

याद रखें:
तृतीयक क्षेत्र = सेवा क्षेत्र

7. तीनों क्षेत्रों में अंतर

क्षेत्र मुख्य गतिविधि उदाहरण
प्राथमिक प्राकृतिक संसाधनों से सीधे उत्पादन कृषि, पशुपालन
द्वितीयक निर्माण एवं प्रसंस्करण उद्योग, कारखाना
तृतीयक सेवाएँ प्रदान करना शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग

8. सेवा क्षेत्र का महत्व

आधुनिक अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का महत्व बहुत अधिक है। यह अन्य आर्थिक क्षेत्रों को भी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है।

✓

रोजगार
सेवा क्षेत्र रोजगार के अनेक अवसर उत्पन्न करता है।

✓

शिक्षा
मानव संसाधन के ज्ञान और कौशल को बढ़ाती है।

✓

स्वास्थ्य
स्वस्थ और उत्पादक मानव संसाधन बनाने में सहायक है।

✓

परिवहन
उत्पादन और बाजार को जोड़ने में सहायता करता है।

✓

बैंकिंग
बचत, भुगतान और ऋण जैसी वित्तीय सुविधाएँ उपलब्ध कराती है।

✓

संचार
सूचना के तेज आदान-प्रदान में सहायता करता है।

9. सरकारी और गैर-सरकारी सेवाएँ

सरकारी सेवाएँ

सरकार या सरकारी संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएँ।

  • सरकारी शिक्षा
  • सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ
  • प्रशासन
  • कानून-व्यवस्था
  • अन्य सार्वजनिक सेवाएँ

गैर-सरकारी / निजी सेवाएँ

निजी व्यक्तियों, संस्थाओं या व्यवसायों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएँ।

  • निजी विद्यालय
  • निजी अस्पताल
  • निजी बैंकिंग सेवाएँ
  • परिवहन
  • IT एवं व्यावसायिक सेवाएँ

10. आधारभूत संरचना

आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं को आधारभूत संरचना (Infrastructure) कहा जाता है।

आधारभूत संरचना के दो व्यापक रूप

आर्थिक आधारभूत संरचना

  • परिवहन
  • संचार
  • ऊर्जा
  • बैंकिंग
  • सिंचाई

सामाजिक आधारभूत संरचना

  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • स्वच्छता
  • अन्य सामाजिक सुविधाएँ

11. मानव पूँजी

मनुष्य में निहित ज्ञान, शिक्षा, कौशल, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जैसी उत्पादक क्षमताओं को मानव पूँजी (Human Capital) के रूप में समझा जाता है।
शिक्षा
+
स्वास्थ्य
+
कौशल
→
मानव पूँजी

मानव पूँजी में सुधार से व्यक्ति की कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ सकती है। इसी कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर किया गया व्यय आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

12. शिक्षा एवं स्वास्थ्य का महत्व

शिक्षा

शिक्षा व्यक्ति के ज्ञान, कौशल और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है। बेहतर शिक्षा रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त करने में सहायक हो सकती है।

स्वास्थ्य

स्वस्थ व्यक्ति अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है। अच्छा स्वास्थ्य उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

याद रखें:
शिक्षा + स्वास्थ्य + कौशल = बेहतर मानव संसाधन

13. बेरोजगारी क्या है?

जब काम करने की इच्छा और योग्यता रखने वाला व्यक्ति प्रचलित परिस्थितियों में उपयुक्त रोजगार प्राप्त नहीं कर पाता, तो ऐसी स्थिति को बेरोजगारी कहा जाता है।

बेरोजगारी केवल व्यक्ति की आय को प्रभावित नहीं करती, बल्कि उपलब्ध मानव संसाधन का पूर्ण उपयोग न होने का भी संकेत हो सकती है।

14. बेरोजगारी के प्रमुख प्रकार

01

खुली बेरोजगारी

जब व्यक्ति काम करने को तैयार हो लेकिन उसे रोजगार न मिले।

02

मौसमी बेरोजगारी

जब वर्ष के कुछ समय रोजगार मिले और शेष समय काम उपलब्ध न हो।

03

छिपी बेरोजगारी

जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों और कुछ लोगों को हटाने पर भी कुल उत्पादन में विशेष कमी न आए।

15. छिपी बेरोजगारी

ऐसी स्थिति जिसमें काम में आवश्यकता से अधिक व्यक्ति लगे हों और कुछ व्यक्तियों को हटाने के बाद भी उत्पादन में विशेष कमी न आए, छिपी या प्रच्छन्न बेरोजगारी कहलाती है।
उदाहरण:
यदि किसी खेत का काम 4 व्यक्ति आसानी से कर सकते हैं, लेकिन उसी काम में 7 व्यक्ति लगे हैं और अतिरिक्त 3 व्यक्तियों को हटाने पर भी उत्पादन लगभग समान रहता है, तो उन अतिरिक्त व्यक्तियों को छिपी बेरोजगारी से जोड़ा जा सकता है।
परीक्षा बिंदु:
छिपी बेरोजगारी विशेष रूप से कृषि क्षेत्र से संबंधित प्रश्नों में पूछी जाती है।

16. मौसमी बेरोजगारी

कुछ आर्थिक गतिविधियों में वर्ष भर समान मात्रा में काम उपलब्ध नहीं होता। विशेषकर कृषि से जुड़ी कई गतिविधियाँ मौसम और फसल चक्र पर निर्भर होती हैं।

जब व्यक्ति को वर्ष के केवल कुछ महीनों में रोजगार मिलता है और बाकी समय रोजगार उपलब्ध नहीं रहता, तो इसे मौसमी बेरोजगारी कहते हैं।

17. ग्रामीण रोजगार

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन केवल कृषि पर अत्यधिक निर्भरता रोजगार संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकती है।

ग्रामीण रोजगार बढ़ाने के कुछ साधन

सिंचाई

कृषि गतिविधियों का विस्तार करने में सहायता।

कुटीर उद्योग

स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।

लघु उद्योग

ग्रामीण एवं छोटे नगरों में रोजगार के अवसर बढ़ा सकते हैं।

पशुपालन

कृषि के साथ अतिरिक्त आय और रोजगार का साधन।

कौशल विकास

नई प्रकार की नौकरियों के लिए लोगों की क्षमता बढ़ाता है।

आधारभूत संरचना

सड़क, बिजली और संचार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में सहायक हैं।

18. ग्रामीण रोजगार से जुड़े प्रमुख कार्यक्रम

जवाहर रोजगार योजना

जवाहर रोजगार योजना (JRY) वर्ष 1989 में शुरू की गई थी। इसका संबंध ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से था।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

ग्रामीण परिवारों को मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने के लिए रोजगार गारंटी व्यवस्था का विशेष महत्व है।

मनरेगा (MGNREGA)

ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों तक अकुशल शारीरिक मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी देने की व्यवस्था से संबंधित है।
परीक्षा में याद रखें:
JRY → 1989
MGNREGA → 100 दिनों के रोजगार की गारंटी

19. सूचना प्रौद्योगिकी एवं रोजगार

सूचना प्रौद्योगिकी के विकास से सेवा क्षेत्र में नए प्रकार के रोजगार और व्यवसाय विकसित हुए हैं।

कंप्यूटर सेवाएँ
सॉफ्टवेयर
डिजिटल सेवाएँ
ऑनलाइन बैंकिंग
ई-कॉमर्स
संचार सेवाएँ

नई तकनीक रोजगार की प्रकृति को बदल सकती है। इसलिए बदलती अर्थव्यवस्था में शिक्षा और कौशल विकास का महत्व भी बढ़ जाता है।

20. रोजगार और आर्थिक विकास

रोजगार से लोगों को आय प्राप्त होती है। आय बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की माँग बढ़ सकती है, जिससे उत्पादन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

रोजगार
→
आय
→
माँग
→
उत्पादन
→
आर्थिक गतिविधि

21. महत्वपूर्ण शब्दावली

रोजगार

आय या आजीविका प्रदान करने वाला कार्य।

प्राथमिक क्षेत्र

प्राकृतिक संसाधनों से सीधे संबंधित क्षेत्र।

द्वितीयक क्षेत्र

निर्माण एवं प्रसंस्करण से संबंधित क्षेत्र।

तृतीयक क्षेत्र

सेवाओं से संबंधित क्षेत्र।

मानव पूँजी

ज्ञान, कौशल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मानवीय क्षमताएँ।

बेरोजगारी

काम करने की इच्छा और योग्यता के बावजूद रोजगार न मिलना।

मौसमी बेरोजगारी

वर्ष के कुछ समय ही रोजगार मिलना।

छिपी बेरोजगारी

आवश्यकता से अधिक लोगों का किसी कार्य में लगे होना।

22. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

1. प्राथमिक क्षेत्र का प्रमुख उदाहरण कृषि है।

2. उद्योग द्वितीयक क्षेत्र का उदाहरण है।

3. तृतीयक क्षेत्र को सेवा क्षेत्र भी कहते हैं।

4. शिक्षा और स्वास्थ्य सामाजिक आधारभूत संरचना के महत्वपूर्ण अंग हैं।

5. शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल मानव पूँजी के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं।

6. कृषि क्षेत्र में छिपी बेरोजगारी देखने को मिल सकती है।

7. वर्ष के कुछ समय काम न मिलने की स्थिति मौसमी बेरोजगारी है।

8. जवाहर रोजगार योजना 1989 में शुरू हुई।

9. मनरेगा ग्रामीण रोजगार गारंटी से संबंधित है।

10. मनरेगा के अंतर्गत पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए 100 दिनों तक रोजगार की गारंटी का प्रावधान है।

11. सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण भाग है।

12. सेवा क्षेत्र रोजगार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

23. महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. रोजगार क्या है?

उत्तर: आय या आजीविका प्रदान करने वाले उत्पादन अथवा सेवा संबंधी कार्य को रोजगार कहा जाता है।

प्रश्न 2. प्राथमिक क्षेत्र क्या है?

उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष उपयोग से संबंधित आर्थिक गतिविधियों वाला क्षेत्र प्राथमिक क्षेत्र कहलाता है।

प्रश्न 3. द्वितीयक क्षेत्र का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: निर्माण उद्योग।

प्रश्न 4. सेवा क्षेत्र किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस क्षेत्र में मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, उसे सेवा या तृतीयक क्षेत्र कहते हैं।

प्रश्न 5. मानव पूँजी क्या है?

उत्तर: मनुष्य में निहित शिक्षा, ज्ञान, कौशल, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जैसी उत्पादक क्षमताओं को मानव पूँजी कहते हैं।

प्रश्न 6. बेरोजगारी क्या है?

उत्तर: काम करने की इच्छा और योग्यता होने के बावजूद उपयुक्त रोजगार न मिलने की स्थिति बेरोजगारी कहलाती है।

प्रश्न 7. छिपी बेरोजगारी क्या है?

उत्तर: जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों और कुछ लोगों को हटाने पर भी उत्पादन में विशेष कमी न आए, तो इसे छिपी बेरोजगारी कहते हैं।

प्रश्न 8. मौसमी बेरोजगारी क्या है?

उत्तर: जब व्यक्ति को वर्ष के कुछ समय ही रोजगार मिले और बाकी समय काम उपलब्ध न हो, तो उसे मौसमी बेरोजगारी कहते हैं।

प्रश्न 9. जवाहर रोजगार योजना कब शुरू हुई?

उत्तर: 1989 में।

प्रश्न 10. मनरेगा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी उपलब्ध कराना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

प्रश्न 11. मनरेगा में कितने दिनों के रोजगार का प्रावधान है?

उत्तर: एक वित्तीय वर्ष में पात्र ग्रामीण परिवार के लिए 100 दिनों तक अकुशल शारीरिक मजदूरी वाले रोजगार का प्रावधान है।

प्रश्न 12. सामाजिक आधारभूत संरचना के दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर: शिक्षा और स्वास्थ्य।

24. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों को समझाइए।

उत्तर:

प्राकृतिक संसाधनों से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित गतिविधियाँ प्राथमिक क्षेत्र में आती हैं। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन इसके उदाहरण हैं।

कच्चे माल को दूसरी वस्तुओं में बदलने वाली निर्माण एवं प्रसंस्करण गतिविधियाँ द्वितीयक क्षेत्र में आती हैं। उद्योग और कारखाने इसके उदाहरण हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, परिवहन और संचार जैसी सेवाएँ तृतीयक या सेवा क्षेत्र में आती हैं।

प्रश्न 2. सेवा क्षेत्र का महत्व बताइए।

उत्तर:

सेवा क्षेत्र आधुनिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, परिवहन और संचार जैसी सेवाएँ लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ कृषि और उद्योग के विकास में भी सहायता करती हैं।

सेवा क्षेत्र रोजगार के अवसर उत्पन्न करता है और मानव संसाधन तथा आर्थिक गतिविधियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 3. मानव पूँजी क्या है? शिक्षा और स्वास्थ्य का महत्व बताइए।

उत्तर:

मनुष्य के ज्ञान, शिक्षा, कौशल, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य से संबंधित उत्पादक क्षमताओं को मानव पूँजी कहा जाता है।

शिक्षा व्यक्ति का ज्ञान और कौशल बढ़ाती है, जबकि अच्छा स्वास्थ्य उसे अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने में सहायता करता है। इसलिए शिक्षा और स्वास्थ्य मानव पूँजी निर्माण के महत्वपूर्ण आधार हैं।

प्रश्न 4. छिपी बेरोजगारी को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

जब किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं और कुछ लोगों को उस काम से हटाने पर भी उत्पादन में विशेष कमी नहीं आती, तो इसे छिपी या प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि किसी खेत का कार्य चार लोग कर सकते हैं लेकिन वहाँ सात लोग काम कर रहे हैं और तीन लोगों के हटने पर भी उत्पादन लगभग समान रहता है, तो अतिरिक्त तीन व्यक्तियों को छिपी बेरोजगारी से जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 5. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के उपाय बताइए।

उत्तर:

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए कृषि के साथ-साथ कुटीर एवं लघु उद्योग, पशुपालन, सिंचाई, कौशल विकास और ग्रामीण आधारभूत संरचना को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।

ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम भी जरूरतमंद परिवारों को मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते हैं।

25. Quick Revision

01

कृषि: प्राथमिक क्षेत्र

02

उद्योग: द्वितीयक क्षेत्र

03

सेवाएँ: तृतीयक क्षेत्र

04

तृतीयक क्षेत्र: सेवा क्षेत्र

05

मानव पूँजी: शिक्षा + स्वास्थ्य + कौशल

06

छिपी बेरोजगारी: आवश्यकता से अधिक श्रमिक

07

मौसमी बेरोजगारी: कुछ समय ही रोजगार

08

JRY: 1989

09

MGNREGA: ग्रामीण रोजगार गारंटी

10

रोजगार: आय और आजीविका का साधन

परीक्षा के लिए जरूर तैयार करें

प्राथमिक-द्वितीयक-तृतीयक क्षेत्र का अंतर, सेवा क्षेत्र का महत्व, मानव पूँजी, आर्थिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना, बेरोजगारी की परिभाषा, छिपी बेरोजगारी, मौसमी बेरोजगारी, जवाहर रोजगार योजना और मनरेगा को अच्छी तरह तैयार करें।

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