Class 10 Economics Chapter 6 वैश्वीकरण Notes

Class 10 Economics Chapter 6 वैश्वीकरण Notes
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वैश्वीकरण

Chapter 6 – सम्पूर्ण नोट्स

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अध्याय परिचय

आज दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रही हैं। वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और सूचनाओं का एक देश से दूसरे देश तक प्रवाह पहले की तुलना में आसान हुआ है। इस बढ़ती आर्थिक परस्पर निर्भरता को वैश्वीकरण के रूप में समझा जाता है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेशी निवेश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आधुनिक संचार, तेज परिवहन और आर्थिक नीतियों में बदलाव ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अध्याय में मुख्य रूप से पढ़ेंगे:
वैश्वीकरण, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेशी निवेश, आर्थिक सुधार, उदारीकरण, निजीकरण, LPG नीति, WTO, SEZ तथा वैश्वीकरण के प्रभाव।

इस अध्याय में पढ़ेंगे

1. वैश्वीकरण क्या है?

विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं का व्यापार, निवेश, उत्पादन, तकनीक तथा अन्य आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से एक-दूसरे से अधिक जुड़ने की प्रक्रिया को वैश्वीकरण (Globalisation) कहा जाता है।
देश
↔
व्यापार
↔
निवेश
↔
तकनीक
↔
विश्व अर्थव्यवस्था

वैश्वीकरण के कारण किसी देश में उत्पादित वस्तु दूसरे देशों के बाजारों में बेची जा सकती है और कंपनियाँ दूसरे देशों में उत्पादन तथा निवेश कर सकती हैं।

2. वैश्वीकरण की प्रमुख विशेषताएँ

01

वस्तुओं का प्रवाह

देशों के बीच वस्तुओं का आयात और निर्यात बढ़ता है।

02

पूँजी का प्रवाह

एक देश की कंपनियाँ दूसरे देशों में निवेश कर सकती हैं।

03

तकनीक का प्रसार

नई तकनीक अलग-अलग देशों तक तेजी से पहुँच सकती है।

04

बाजारों का जुड़ाव

राष्ट्रीय बाजारों का विश्व बाजार से संबंध बढ़ता है।

05

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ

MNC अनेक देशों में उत्पादन और व्यापार करती हैं।

06

प्रतिस्पर्धा

देशी और विदेशी उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

परीक्षा बिंदु:
वस्तु, पूँजी और तकनीक का अंतरराष्ट्रीय प्रवाह वैश्वीकरण की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

3. वैश्वीकरण को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक

परिवहन

तेज परिवहन से वस्तुओं को दूर-दूर तक पहुँचाना आसान हुआ।

संचार

संचार तकनीक ने दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों को तेजी से जोड़ा।

इंटरनेट

सूचना और व्यावसायिक संचार का आदान-प्रदान तेज हुआ।

व्यापार

अंतरराष्ट्रीय व्यापार ने अलग-अलग देशों के बाजारों को जोड़ा।

विदेशी निवेश

कंपनियों द्वारा दूसरे देशों में पूँजी निवेश बढ़ा।

आर्थिक नीतियाँ

व्यापार और निवेश संबंधी कई प्रतिबंधों में बदलाव किया गया।

4. बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC)

ऐसी कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन, निवेश या व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित करती है, उसे बहुराष्ट्रीय कंपनी (Multinational Corporation – MNC) कहा जाता है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में कारखाने स्थापित कर सकती हैं, स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकती हैं अथवा किसी स्थानीय कंपनी में निवेश कर सकती हैं।

याद रखें:
MNC = Multinational Corporation / Multinational Company

5. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों में कैसे निवेश करती हैं?

नया कारखाना

कंपनी दूसरे देश में नई उत्पादन इकाई स्थापित कर सकती है।

स्थानीय कंपनी को खरीदना

MNC किसी स्थानीय कंपनी का अधिग्रहण या उसमें बड़ी हिस्सेदारी ले सकती है।

साझेदारी

कंपनी स्थानीय उत्पादकों या कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन कर सकती है।

परीक्षा में याद रखें:
नए कारखाने की स्थापना, स्थानीय कंपनी को खरीदना और स्थानीय कंपनी से साझेदारी—MNC द्वारा दूसरे देशों में निवेश के प्रमुख तरीके हो सकते हैं।

6. विदेशी निवेश

जब किसी देश की कंपनी या निवेशक दूसरे देश में उत्पादन, व्यवसाय अथवा अन्य आर्थिक गतिविधि के उद्देश्य से पूँजी लगाता है, तो इसे विदेशी निवेश कहा जाता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)

जब विदेशी निवेशक किसी दूसरे देश में उद्यम या उत्पादन संबंधी गतिविधि में प्रत्यक्ष निवेश करता है, तो इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment – FDI) कहा जाता है।

विदेशी कंपनी
→
पूँजी निवेश
→
उत्पादन / व्यवसाय

7. भारत में आर्थिक सुधार और 1991

भारत में आर्थिक सुधारों की दिशा में 1991 एक महत्वपूर्ण वर्ष माना जाता है। जुलाई 1991 में नई आर्थिक नीति से जुड़े सुधारों की प्रक्रिया शुरू की गई।

इन सुधारों में अर्थव्यवस्था पर कई प्रकार के नियंत्रण कम करने, निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से अधिक जोड़ने पर बल दिया गया।

1991
नई आर्थिक नीति

उदारीकरण • निजीकरण • वैश्वीकरण

बहुत महत्वपूर्ण:
भारत में नई आर्थिक नीति / आर्थिक सुधारों का प्रमुख आरंभ — 1991

8. उदारीकरण

अर्थव्यवस्था में व्यापार, उद्योग और निवेश पर लगे अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों तथा नियंत्रणों को कम करने की प्रक्रिया को उदारीकरण (Liberalisation) कहते हैं।

उदारीकरण के प्रमुख उद्देश्य

  • आर्थिक गतिविधियों में अनावश्यक नियंत्रण कम करना
  • व्यापार और निवेश को सरल बनाना
  • प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना
एक लाइन में:
अनावश्यक आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना या कम करना = उदारीकरण

9. निजीकरण

अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका और भागीदारी बढ़ाने की प्रक्रिया को निजीकरण (Privatisation) कहा जाता है।

इसके अंतर्गत कुछ आर्थिक गतिविधियों में सरकारी क्षेत्र की तुलना में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।

सरल अंतर:
उदारीकरण → प्रतिबंध कम करना
निजीकरण → निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना

10. LPG नीति

नई आर्थिक नीति को समझने के लिए तीन प्रमुख शब्द बहुत महत्वपूर्ण हैं: Liberalisation, Privatisation और Globalisation.

L

Liberalisation

उदारीकरण

P

Privatisation

निजीकरण

G

Globalisation

वैश्वीकरण

LPG = Liberalisation + Privatisation + Globalisation

11. विश्व व्यापार संगठन (WTO)

WTO का पूरा नाम World Trade Organization अर्थात विश्व व्यापार संगठन है।
पूरा नाम

World Trade Organization

स्थापना

1995

मुख्यालय

जेनेवा, स्विट्जरलैंड

मुख्य क्षेत्र

अंतरराष्ट्रीय व्यापार

WTO देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों और समझौतों के लिए एक संस्थागत व्यवस्था प्रदान करता है।

परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण:
WTO स्थापना — 1995
WTO मुख्यालय — जेनेवा
WTO — अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित संगठन

12. अंतरराष्ट्रीय व्यापार

दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के क्रय-विक्रय को अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहा जाता है।

निर्यात

अपने देश से वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे देश के बाजार में भेजना निर्यात कहलाता है।

आयात

दूसरे देश से वस्तुओं या सेवाओं को अपने देश में लाना आयात कहलाता है।

भारत
↔
अंतरराष्ट्रीय व्यापार
↔
विश्व बाजार

13. विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)

SEZ का पूरा नाम Special Economic Zone अर्थात विशेष आर्थिक क्षेत्र है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र ऐसे निर्धारित क्षेत्र होते हैं जहाँ निवेश, उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक सुविधाएँ और नीतिगत प्रावधान किए जा सकते हैं।

पूरा नाम

Special Economic Zone

संक्षिप्त नाम

SEZ

मुख्य उद्देश्य

निवेश और निर्यात को प्रोत्साहन

संबंध

उद्योग एवं व्यापार

परीक्षा बिंदु:
निर्यात संवर्धन क्षेत्र (EPZ) को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में परिवर्तित करने से संबंधित प्रश्न महत्वपूर्ण है।

14. वैश्वीकरण और उपभोक्ता

वैश्वीकरण के कारण विभिन्न देशों और कंपनियों के उत्पाद एक ही बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं के सामने वस्तुओं और सेवाओं के अधिक विकल्प आ सकते हैं।

✓

अधिक विकल्प
विभिन्न कंपनियों के उत्पाद उपलब्ध हो सकते हैं।

✓

प्रतिस्पर्धा
कंपनियों के बीच बाजार प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

✓

नई तकनीक
तकनीकी बदलावों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँच सकता है।

✓

विश्व बाजार
अंतरराष्ट्रीय उत्पाद स्थानीय बाजारों तक पहुँच सकते हैं।

15. वैश्वीकरण और उत्पादक

वैश्वीकरण उत्पादकों के लिए नए अवसर और नई चुनौतियाँ दोनों पैदा कर सकता है। कुछ उत्पादकों को बड़े बाजार, नई तकनीक और निवेश का लाभ मिल सकता है, जबकि छोटे उत्पादकों को बड़ी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

संभावित अवसर

  • बड़े बाजार तक पहुँच
  • नई तकनीक
  • विदेशी निवेश
  • निर्यात के अवसर

संभावित चुनौतियाँ

  • कड़ी प्रतिस्पर्धा
  • छोटे उत्पादकों पर दबाव
  • बाजार में बड़ी कंपनियों का प्रभाव
  • असमान लाभ की संभावना

16. वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव

1

व्यापार का विस्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से संपर्क बढ़ता है।

2

नई तकनीक
आधुनिक तकनीक का प्रसार तेज हो सकता है।

3

निवेश
विदेशी निवेश के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

4

उपभोक्ता विकल्प
विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ उपलब्ध हो सकती हैं।

5

नए बाजार
उत्पादकों को दूसरे देशों के बाजार मिल सकते हैं।

6

प्रतिस्पर्धा
उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

17. वैश्वीकरण की चुनौतियाँ / नकारात्मक प्रभाव

वैश्वीकरण का प्रभाव सभी व्यक्तियों, क्षेत्रों और उत्पादकों पर समान होना आवश्यक नहीं है। इससे कुछ वर्गों को अधिक लाभ मिल सकता है जबकि अन्य वर्गों को कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

छोटे उत्पादकों पर दबाव

बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा छोटे उत्पादकों के लिए कठिन हो सकती है।

रोजगार संबंधी चुनौती

उत्पादन और तकनीक में बदलाव से कुछ प्रकार के रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्र

वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रभाव ग्रामीण और कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

असमान लाभ

वैश्वीकरण से होने वाले लाभ अलग-अलग समूहों में समान रूप से वितरित नहीं होते।

18. उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण में अंतर

प्रक्रिया अर्थ
उदारीकरण अनावश्यक आर्थिक प्रतिबंधों और नियंत्रणों को कम करना।
निजीकरण अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना।
वैश्वीकरण देश की अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था से अधिक जुड़ना।

19. महत्वपूर्ण शब्दावली

वैश्वीकरण

विश्व की अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते आर्थिक जुड़ाव की प्रक्रिया।

MNC

एक से अधिक देशों में व्यावसायिक गतिविधि करने वाली कंपनी।

विदेशी निवेश

दूसरे देश में पूँजी लगाना।

उदारीकरण

अनावश्यक आर्थिक प्रतिबंध कम करना।

निजीकरण

निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना।

WTO

World Trade Organization.

SEZ

Special Economic Zone.

FDI

Foreign Direct Investment.

20. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

1. भारत में आर्थिक सुधारों का महत्वपूर्ण वर्ष 1991 है।

2. नई आर्थिक नीति जुलाई 1991 से संबंधित है।

3. LPG का अर्थ Liberalisation, Privatisation और Globalisation है।

4. अनावश्यक आर्थिक प्रतिबंधों को कम करना उदारीकरण है।

5. निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना निजीकरण है।

6. MNC एक से अधिक देशों में व्यावसायिक गतिविधियाँ करती है।

7. WTO की स्थापना 1995 में हुई।

8. WTO का मुख्यालय जेनेवा, स्विट्जरलैंड में है।

9. WTO अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित संगठन है।

10. FDI का अर्थ Foreign Direct Investment है।

11. SEZ का अर्थ Special Economic Zone है।

12. वैश्वीकरण से उत्पादक और उपभोक्ता दोनों प्रभावित होते हैं।

21. महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. वैश्वीकरण क्या है?

उत्तर: विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं का व्यापार, निवेश, उत्पादन और तकनीक के माध्यम से एक-दूसरे से अधिक जुड़ने की प्रक्रिया वैश्वीकरण कहलाती है।

प्रश्न 2. भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया का प्रमुख आरंभ कब माना जाता है?

उत्तर: 1991 के आर्थिक सुधारों के साथ।

प्रश्न 3. बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है?

उत्तर: ऐसी कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन, निवेश या व्यावसायिक गतिविधियाँ करती है, बहुराष्ट्रीय कंपनी कहलाती है।

प्रश्न 4. उदारीकरण क्या है?

उत्तर: अर्थव्यवस्था पर लगे अनावश्यक प्रतिबंधों और नियंत्रणों को कम करने की प्रक्रिया उदारीकरण कहलाती है।

प्रश्न 5. निजीकरण क्या है?

उत्तर: अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका और भागीदारी बढ़ाने की प्रक्रिया निजीकरण कहलाती है।

प्रश्न 6. LPG का पूरा रूप क्या है?

उत्तर: Liberalisation, Privatisation and Globalisation.

प्रश्न 7. WTO की स्थापना कब हुई?

उत्तर: 1995 में।

प्रश्न 8. WTO का मुख्यालय कहाँ है?

उत्तर: जेनेवा, स्विट्जरलैंड।

प्रश्न 9. विदेशी निवेश क्या है?

उत्तर: जब किसी देश की कंपनी या निवेशक दूसरे देश में पूँजी लगाता है, तो उसे विदेशी निवेश कहते हैं।

प्रश्न 10. SEZ का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: Special Economic Zone.

प्रश्न 11. अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्या है?

उत्तर: दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहलाता है।

प्रश्न 12. MNC दूसरे देशों में निवेश कैसे कर सकती है?

उत्तर: नए कारखाने स्थापित करके, स्थानीय कंपनियों को खरीदकर या स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी करके।

22. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. वैश्वीकरण क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर:

विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं का व्यापार, निवेश, उत्पादन, तकनीक और अन्य आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से एक-दूसरे से अधिक जुड़ना वैश्वीकरण कहलाता है।

इसकी प्रमुख विशेषताओं में वस्तुओं और सेवाओं का अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पूँजी का प्रवाह, तकनीक का प्रसार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार तथा विश्व बाजारों का बढ़ता जुड़ाव शामिल है।

प्रश्न 2. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण में किस प्रकार भूमिका निभाती हैं?

उत्तर:

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ एक से अधिक देशों में उत्पादन और निवेश करती हैं। वे दूसरे देशों में नए कारखाने स्थापित कर सकती हैं, स्थानीय कंपनियों को खरीद सकती हैं अथवा उनके साथ साझेदारी कर सकती हैं।

इससे विभिन्न देशों के उत्पादन और बाजार एक-दूसरे से जुड़ते हैं तथा पूँजी और तकनीक का अंतरराष्ट्रीय प्रवाह बढ़ सकता है।

प्रश्न 3. उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण को समझाइए।

उत्तर:

उदारीकरण का अर्थ अर्थव्यवस्था पर लगे अनावश्यक प्रतिबंधों और नियंत्रणों को कम करना है।

निजीकरण का अर्थ आर्थिक गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भूमिका और भागीदारी बढ़ाना है।

वैश्वीकरण का अर्थ देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं से अधिक जोड़ना है।

इन तीनों को संक्षेप में LPG कहा जाता है।

प्रश्न 4. वैश्वीकरण के लाभ एवं चुनौतियाँ बताइए।

उत्तर:

वैश्वीकरण से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेशी निवेश, नई तकनीक और उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं के विकल्प बढ़ सकते हैं। उत्पादकों को बड़े बाजार तक पहुँच मिल सकती है।

दूसरी ओर, बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा छोटे उत्पादकों के लिए कठिन हो सकती है। वैश्वीकरण का लाभ सभी क्षेत्रों और लोगों को समान मात्रा में मिलना आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 5. WTO क्या है? इसका वैश्वीकरण से क्या संबंध है?

उत्तर:

WTO का पूरा नाम World Trade Organization है। इसकी स्थापना 1995 में हुई और इसका मुख्यालय जेनेवा में है।

यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों और समझौतों के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्वीकरण की प्रक्रिया में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।

23. Quick Revision

01

आर्थिक सुधार: 1991

02

L: Liberalisation

03

P: Privatisation

04

G: Globalisation

05

MNC: बहुराष्ट्रीय कंपनी

06

FDI: Foreign Direct Investment

07

WTO: 1995

08

WTO मुख्यालय: जेनेवा

09

SEZ: Special Economic Zone

10

उदारीकरण: अनावश्यक प्रतिबंध कम करना

परीक्षा के लिए जरूर तैयार करें

वैश्वीकरण की परिभाषा, वैश्वीकरण की विशेषताएँ, MNC, विदेशी निवेश, 1991 की नई आर्थिक नीति, उदारीकरण, निजीकरण, LPG, WTO की स्थापना और मुख्यालय, SEZ तथा वैश्वीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव को अच्छी तरह तैयार करें।

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