नियंत्रण एवं समन्वय
Control and Coordination
Bihar Board Class 10 Science के सम्पूर्ण हिंदी नोट्स
विषय सूची
1. नियंत्रण एवं समन्वय क्या है?
उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूते ही हाथ पीछे खींच लेना केवल मांसपेशियों का कार्य नहीं है। त्वचा उद्दीपन को पहचानती है, तंत्रिकाएँ संदेश ले जाती हैं और मांसपेशियाँ प्रतिक्रिया करती हैं। इन सभी के बीच उचित तालमेल ही समन्वय है।
2. उद्दीपन एवं प्रतिक्रिया
उद्दीपन (Stimulus)
वातावरण में होने वाला ऐसा परिवर्तन जिसे कोई जीव महसूस कर सके और जिसके प्रति प्रतिक्रिया दे सके, उद्दीपन कहलाता है।
उदाहरण: प्रकाश, गर्मी, ठंड, ध्वनि, स्पर्श, गंध, स्वाद, गुरुत्व आदि।
प्रतिक्रिया (Response)
किसी उद्दीपन के कारण जीव द्वारा की गई क्रिया को प्रतिक्रिया कहते हैं।
3. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
तंत्रिका तंत्र शरीर के विभिन्न भागों से सूचना प्राप्त करता है, उसका विश्लेषण करता है और उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए संदेश भेजता है।
तंत्रिका तंत्र की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई न्यूरॉन है।
तंत्रिका तंत्र के मुख्य कार्य
- बाहरी तथा आंतरिक उद्दीपनों को ग्रहण करना।
- सूचना को मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचाना।
- सूचना का विश्लेषण करना।
- उचित आदेश उत्पन्न करना।
- मांसपेशियों एवं ग्रंथियों की क्रियाओं का नियंत्रण करना।
4. न्यूरॉन या तंत्रिका कोशिका
न्यूरॉन के मुख्य भाग
1. डेंड्राइट (Dendrite)
ये कोशिका द्रव्य से निकली छोटी शाखाएँ होती हैं। ये अन्य कोशिकाओं या ग्राही अंगों से सूचना प्राप्त करती हैं।
2. कोशिका द्रव्य / साइटोन (Cell Body / Cyton)
इसमें केंद्रक पाया जाता है। यह न्यूरॉन की विभिन्न जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
3. एक्सॉन (Axon)
यह न्यूरॉन का लंबा तंतु होता है जो तंत्रिका आवेग को कोशिका द्रव्य से दूर दूसरे न्यूरॉन या प्रभावी अंग तक पहुँचाता है।
4. मायलिन आवरण (Myelin Sheath)
कई न्यूरॉनों के एक्सॉन पर एक सुरक्षात्मक मायलिन आवरण पाया जाता है, जो तंत्रिका आवेग के तीव्र संचरण में सहायता करता है।
5. सिनैप्टिक बटन
एक्सॉन के अंतिम सिरे पर उपस्थित शाखित संरचनाएँ अगले न्यूरॉन तक संदेश पहुँचाने में सहायता करती हैं।
5. तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse)
न्यूरॉन के माध्यम से संचरित होने वाला विद्युत-रासायनिक संकेत तंत्रिका आवेग कहलाता है।
जब किसी ग्राही को उद्दीपन मिलता है, तो उसमें विद्युत संकेत उत्पन्न होता है। यह संकेत संवेदी न्यूरॉन के माध्यम से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचता है।
6. सिनैप्स (Synapse)
तंत्रिका आवेग एक्सॉन के अंतिम सिरे तक पहुँचने पर कुछ रासायनिक पदार्थों को मुक्त करता है। ये रसायन सिनैप्स को पार करके अगले न्यूरॉन में नया विद्युत संकेत उत्पन्न करते हैं।
7. मानव तंत्रिका तंत्र का विभाजन
| भाग | मुख्य अंग | कार्य |
|---|---|---|
| केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) | मस्तिष्क और मेरुरज्जु | सूचनाओं का विश्लेषण तथा नियंत्रण |
| परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) | कपाल एवं मेरु तंत्रिकाएँ | CNS को शरीर के अन्य भागों से जोड़ना |
8. मानव मस्तिष्क (Human Brain)
मस्तिष्क शरीर का प्रमुख नियंत्रण एवं समन्वय केंद्र है। यह खोपड़ी के भीतर सुरक्षित रहता है। मस्तिष्क को झटकों से बचाने में उसके चारों ओर उपस्थित द्रव भी सहायता करता है।
मस्तिष्क के प्रमुख भाग
(A) अग्र मस्तिष्क (Forebrain)
यह मस्तिष्क का प्रमुख सोचने वाला भाग है। इसमें प्रमस्तिष्क (Cerebrum) प्रमुख है।
- सोचना एवं समझना
- स्मृति
- सीखना
- इच्छानुसार क्रियाओं का नियंत्रण
- संवेदी सूचनाओं की व्याख्या
(B) मध्य मस्तिष्क (Midbrain)
यह अग्र मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क के बीच स्थित होता है तथा कुछ अनैच्छिक प्रतिक्रियाओं एवं संवेदी संकेतों से संबंधित कार्यों में भाग लेता है।
(C) पश्च मस्तिष्क (Hindbrain)
अनुमस्तिष्क (Cerebellum): शरीर का संतुलन, मुद्रा तथा ऐच्छिक गतियों की शुद्धता बनाए रखने में सहायक।
मेडुला (Medulla): श्वसन, रक्तचाप, उल्टी, लार आना जैसी अनेक अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण।
9. मेरुरज्जु (Spinal Cord)
मेरुरज्जु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह मस्तिष्क के निचले भाग से प्रारंभ होकर कशेरुक दंड के भीतर स्थित रहती है।
मेरुरज्जु के प्रमुख कार्य
- शरीर और मस्तिष्क के बीच संदेशों का आदान-प्रदान।
- अनेक प्रतिवर्त क्रियाओं का नियंत्रण।
- संवेदी तथा प्रेरक आवेगों के संचरण का मार्ग प्रदान करना।
10. प्रतिवर्त क्रिया (Reflex Action)
उदाहरण:
- गर्म वस्तु को छूते ही हाथ पीछे खींच लेना।
- आँख के सामने अचानक वस्तु आने पर पलक झपकना।
- काँटा चुभने पर पैर तुरंत पीछे खींचना।
प्रतिवर्त क्रिया शरीर को हानिकारक परिस्थितियों से शीघ्र बचाने में सहायता करती है।
11. प्रतिवर्त चाप (Reflex Arc)
प्रतिवर्त चाप के घटक
- ग्राही (Receptor) – उद्दीपन को ग्रहण करता है।
- संवेदी न्यूरॉन – संदेश मेरुरज्जु तक ले जाता है।
- मेरुरज्जु – संदेश को संसाधित करने में भाग लेती है।
- प्रेरक न्यूरॉन – आदेश प्रभावी अंग तक ले जाता है।
- प्रभावी अंग – मांसपेशी या ग्रंथि जो प्रतिक्रिया करती है।
12. ग्राही एवं संवेदी अंग (Receptors and Sense Organs)
हमारे शरीर में विशेष कोशिकाएँ या संरचनाएँ वातावरण से सूचना प्राप्त करती हैं। इन्हें ग्राही (Receptors) कहते हैं।
| संवेदी अंग | मुख्य उद्दीपन |
|---|---|
| आँख | प्रकाश |
| कान | ध्वनि तथा संतुलन |
| नाक | गंध |
| जीभ | स्वाद |
| त्वचा | स्पर्श, ताप, दबाव आदि |
13. मानव नेत्र (Human Eye)
मानव नेत्र प्रकाश को ग्रहण करने वाला महत्वपूर्ण संवेदी अंग है। इसमें उपस्थित प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ प्रकाश को तंत्रिका संकेतों में बदलती हैं।
दृष्टिपटल (Retina)
रेटिना पर प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ पाई जाती हैं। प्रकाश के प्रभाव से इनमें विद्युत संकेत उत्पन्न होते हैं जो दृष्टि तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।
रॉड एवं कोन कोशिकाएँ
- Rod Cells: कम प्रकाश में देखने में सहायक।
- Cone Cells: रंगों को पहचानने तथा तेज प्रकाश में देखने में सहायक।
14. मानव कान (Human Ear)
कान ध्वनि ग्रहण करने के साथ-साथ शरीर के संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कान के तीन मुख्य भाग
- बाह्य कर्ण
- मध्य कर्ण
- आंतरिक कर्ण
आंतरिक कान में स्थित कॉक्लिया (Cochlea) ध्वनि से संबंधित है, जबकि अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायक होती हैं।
15. जन्तुओं में रासायनिक समन्वय
तंत्रिका तंत्र बहुत तेजी से संदेश पहुँचाता है, लेकिन शरीर में कुछ प्रक्रियाएँ ऐसी होती हैं जिनके लिए अपेक्षाकृत धीमे तथा लंबे समय तक प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता होती है। यह कार्य हार्मोन करते हैं।
हार्मोन सामान्यतः रक्त के माध्यम से अपने लक्ष्य अंग या लक्ष्य ऊतक तक पहुँचते हैं।
16. मानव शरीर की प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियाँ
17. प्रमुख मानव हार्मोन एवं उनके कार्य
| ग्रंथि | हार्मोन | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| पीयूष / पिट्यूटरी | वृद्धि हार्मोन | शरीर की वृद्धि को नियंत्रित करना |
| थायरॉइड | थायरॉक्सिन | कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा के उपापचय को नियंत्रित करना |
| अग्न्याशय | इंसुलिन | रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना |
| अधिवृक्क | एड्रेनालिन | आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर को तैयार करना |
| वृषण | टेस्टोस्टेरोन | पुरुषों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास |
| अंडाशय | एस्ट्रोजन | महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास |
थायरॉक्सिन और आयोडीन
थायरॉइड ग्रंथि को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है। भोजन में आयोडीन की कमी से थायरॉइड ग्रंथि बढ़ सकती है और घेंघा (Goitre) हो सकता है।
एड्रेनालिन
भय, तनाव या आपातकालीन परिस्थिति में एड्रेनालिन का स्राव बढ़ता है। इससे हृदय गति और श्वसन दर बढ़ सकती है तथा मांसपेशियों तक अधिक रक्त पहुँचाया जाता है।
इंसुलिन
इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण है। इसकी पर्याप्त मात्रा न बनने पर रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है।
18. पौधों में नियंत्रण एवं समन्वय
पौधों में जन्तुओं जैसा तंत्रिका तंत्र नहीं होता, फिर भी वे प्रकाश, गुरुत्व, जल, स्पर्श तथा रसायनों जैसे बाहरी उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।
पौधों में समन्वय मुख्यतः रासायनिक पदार्थों अर्थात पादप हार्मोनों तथा वृद्धि में परिवर्तन द्वारा होता है।
पौधों में गति के दो प्रमुख प्रकार
- वृद्धि पर निर्भर गति – अपेक्षाकृत धीमी तथा प्रायः स्थायी।
- वृद्धि से स्वतंत्र गति – कोशिकाओं में जल की मात्रा आदि में परिवर्तन के कारण हो सकती है।
उदाहरण के लिए छुई-मुई (Mimosa) के पत्ते छूने पर मुड़ जाते हैं। यह वृद्धि के कारण नहीं बल्कि कोशिकाओं में जल की मात्रा में परिवर्तन से संबंधित प्रतिक्रिया है।
19. अनुवर्तन गति (Tropic Movement)
यदि वृद्धि उद्दीपन की दिशा में होती है तो इसे धनात्मक अनुवर्तन और यदि उद्दीपन से विपरीत दिशा में होती है तो इसे ऋणात्मक अनुवर्तन कहते हैं।
20. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
- तना सामान्यतः प्रकाश की ओर बढ़ता है – धनात्मक प्रकाशानुवर्तन।
- जड़ सामान्यतः प्रकाश से दूर बढ़ती है – ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन।
तना प्रकाश की ओर क्यों मुड़ता है?
एक ओर से प्रकाश मिलने पर तने में ऑक्सिन का वितरण असमान हो जाता है। छायादार भाग की कोशिकाएँ अधिक लंबी होती हैं, जिसके कारण तना प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है।
21. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism / Gravitropism)
- जड़: गुरुत्व की दिशा में बढ़ती है – धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन।
- तना: गुरुत्व के विपरीत दिशा में बढ़ता है – ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन।
22. जलानुवर्तन, स्पर्शानुवर्तन एवं रसायनानुवर्तन
जलानुवर्तन (Hydrotropism)
जल या नमी के प्रति पौधे के भाग की दिशात्मक वृद्धि को जलानुवर्तन कहते हैं। जड़ें सामान्यतः नमी की दिशा में बढ़ती हैं।
स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism)
स्पर्श के प्रति दिशात्मक वृद्धि को स्पर्शानुवर्तन कहते हैं। लताओं के प्रतान किसी सहारे को छूकर उसके चारों ओर लिपट जाते हैं।
रसायनानुवर्तन (Chemotropism)
किसी रासायनिक पदार्थ के प्रति दिशात्मक वृद्धि को रसायनानुवर्तन कहते हैं। पुष्प में परागनली का बीजांड की ओर बढ़ना इसका प्रमुख उदाहरण है।
23. पौध हार्मोन (Plant Hormones)
कुछ पादप हार्मोन वृद्धि को प्रोत्साहित करते हैं जबकि कुछ वृद्धि को रोकने या विशेष अवस्थाओं को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं।
24. ऑक्सिन (Auxin)
ऑक्सिन पौधे की वृद्धि से संबंधित महत्वपूर्ण हार्मोन है। यह विशेष रूप से तने के बढ़ते हुए भागों में बनता है।
ऑक्सिन के प्रमुख कार्य
- कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने में सहायता।
- तने की वृद्धि को बढ़ावा देना।
- प्रकाशानुवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका।
25. अन्य प्रमुख पौध हार्मोन
| हार्मोन | प्रमुख कार्य |
|---|---|
| ऑक्सिन (Auxin) | कोशिका वृद्धि और प्रकाशानुवर्तन में सहायता |
| जिबरेलिन (Gibberellin) | तने की वृद्धि को प्रोत्साहित करता है |
| साइटोकाइनिन (Cytokinin) | कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है |
| एब्सिसिक अम्ल (ABA) | वृद्धि को रोकने वाला हार्मोन; तनाव की परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण |
| एथिलीन (Ethylene) | फलों के पकने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका |
Auxin – वृद्धि
Gibberellin – तने की वृद्धि
Cytokinin – कोशिका विभाजन
ABA – वृद्धि अवरोधक
26. महत्वपूर्ण अंतर
तंत्रिका नियंत्रण और हार्मोनल नियंत्रण में अंतर
| तंत्रिका नियंत्रण | हार्मोनल नियंत्रण |
|---|---|
| संदेश तंत्रिका आवेग के रूप में जाता है। | संदेश हार्मोन के रूप में जाता है। |
| सामान्यतः बहुत तेज होता है। | तुलनात्मक रूप से धीमा हो सकता है। |
| प्रभाव प्रायः कम समय तक रहता है। | प्रभाव अपेक्षाकृत लंबे समय तक रह सकता है। |
| तंत्रिकाओं द्वारा संदेश पहुँचता है। | हार्मोन रक्त द्वारा लक्ष्य अंग तक पहुँचते हैं। |
प्रतिवर्त क्रिया और ऐच्छिक क्रिया
| प्रतिवर्त क्रिया | ऐच्छिक क्रिया |
|---|---|
| स्वतः और तीव्र होती है। | व्यक्ति की इच्छा के अनुसार होती है। |
| प्रायः सुरक्षा से संबंधित होती है। | सोच-विचार के बाद भी की जा सकती है। |
| मेरुरज्जु महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। | मस्तिष्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। |
27. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
28. Quick Revision – एक नजर में पूरा अध्याय
तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई।
मस्तिष्क + मेरुरज्जु।
तीव्र, स्वतः और अनैच्छिक प्रतिक्रिया।
प्रतिवर्त क्रिया में आवेग के संचरण का मार्ग।
सोच, स्मृति, सीखना और ऐच्छिक क्रियाएँ।
संतुलन एवं गतियों का समन्वय।
कई अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण।
रासायनिक संदेशवाहक।
उपापचय के नियंत्रण में महत्वपूर्ण।
रक्त ग्लूकोज स्तर के नियंत्रण में सहायक।
आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर को तैयार करता है।
वृद्धि और प्रकाशानुवर्तन में महत्वपूर्ण।
तने की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है।
वृद्धि को रोकने वाला पादप हार्मोन।
जल/नमी के प्रति दिशात्मक वृद्धि।
अध्याय सारांश
जीवों को वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को पहचानकर उचित प्रतिक्रिया करनी पड़ती है। जन्तुओं में तंत्रिका तंत्र तीव्र संदेशों का संचरण करता है, जबकि हार्मोन रासायनिक समन्वय स्थापित करते हैं। मस्तिष्क और मेरुरज्जु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के प्रमुख भाग हैं।
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, फिर भी वे प्रकाश, गुरुत्व, जल और स्पर्श जैसे उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। पादप हार्मोन पौधों की वृद्धि, विकास और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

