जैव प्रक्रम (Life Processes)
Bihar Board Class 10 Science Notes | सम्पूर्ण हिंदी नोट्स
📚 विषय सूची
1. जैव प्रक्रम क्या हैं?
जीवित जीवों को केवल भोजन की आवश्यकता नहीं होती। शरीर को ऊर्जा प्राप्त करनी होती है, उपयोगी पदार्थों को विभिन्न अंगों तक पहुँचाना होता है तथा हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना भी आवश्यक होता है।
मुख्य जैव प्रक्रम
- पोषण (Nutrition) – भोजन प्राप्त करना और उसका उपयोग करना।
- श्वसन (Respiration) – भोजन से ऊर्जा मुक्त करना।
- परिवहन (Transportation) – आवश्यक पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाना।
- उत्सर्जन (Excretion) – हानिकारक उपापचयी अपशिष्टों को बाहर निकालना।
2. पोषण (Nutrition)
भोजन जीव को ऊर्जा प्रदान करता है तथा नई कोशिकाओं और ऊतकों के निर्माण के लिए आवश्यक पदार्थ उपलब्ध कराता है।
पोषण के मुख्य प्रकार
- स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition)
- विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
3. स्वपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition)
हरे पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और जल का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में भोजन तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में क्लोरोफिल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक पदार्थ
- कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
- जल (H₂O)
- सूर्य का प्रकाश
- क्लोरोफिल
4. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
सूर्य का प्रकाश एवं क्लोरोफिल की उपस्थिति में
प्रकाश संश्लेषण की मुख्य घटनाएँ
- क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण।
- प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन।
- जल के अणुओं का हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विघटन।
- कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
5. रंध्र (Stomata)
पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले अत्यंत छोटे छिद्रों को रंध्र या स्टोमेटा कहते हैं। प्रत्येक रंध्र के चारों ओर दो रक्षक कोशिकाएँ होती हैं।
रंध्र के कार्य
- कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का आदान-प्रदान।
- वाष्पोत्सर्जन द्वारा जलवाष्प का निष्कासन।
- प्रकाश संश्लेषण के लिए CO₂ उपलब्ध कराना।
जब रक्षक कोशिकाओं में जल प्रवेश करता है तो वे फूल जाती हैं और रंध्र खुल जाता है। जल की कमी होने पर वे सिकुड़ती हैं और रंध्र बंद हो जाता है।
6. विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
इसके प्रमुख प्रकार
- प्राणीसम पोषण (Holozoic) – मनुष्य, अमीबा आदि।
- मृतजीवी पोषण (Saprophytic) – कवक आदि।
- परजीवी पोषण (Parasitic) – अमरबेल, जूँ आदि।
7. अमीबा में पोषण
अमीबा एक एककोशिकीय जीव है। यह अपने भोजन को कूटपाद (Pseudopodia) की सहायता से ग्रहण करता है।
अमीबा में पोषण की प्रक्रिया
- अमीबा भोजन के चारों ओर कूटपाद बनाता है।
- कूटपाद भोजन को घेर लेते हैं।
- भोजन खाद्य रिक्तिका के अंदर पहुँच जाता है।
- पाचक एंजाइम भोजन का पाचन करते हैं।
- पचा हुआ भोजन कोशिकाद्रव्य में अवशोषित हो जाता है।
- अपचित पदार्थ कोशिका झिल्ली से बाहर निकाल दिया जाता है।
8. मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
मानव पाचन तंत्र में आहार नाल तथा उससे संबंधित विभिन्न पाचक ग्रंथियाँ शामिल होती हैं। भोजन मुख से प्रवेश करता है और पाचन तथा अवशोषण की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है।
आहार नाल के प्रमुख अंग
- मुख एवं मुख गुहा
- ग्रसनी
- ग्रासनली
- आमाशय
- छोटी आँत
- बड़ी आँत
- मलाशय
- गुदा
प्रमुख पाचक ग्रंथियाँ
- लार ग्रंथियाँ
- यकृत
- अग्न्याशय
9. मानव में पाचन की प्रक्रिया
1. मुख
मुख में दाँत भोजन को छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं। लार भोजन को गीला करती है। लार में उपस्थित सैलिवरी एमाइलेज स्टार्च को सरल शर्करा में बदलना प्रारंभ करता है।
2. ग्रासनली
ग्रासनली की पेशियों की लयबद्ध गति को क्रमाकुंचन (Peristalsis) कहते हैं। इसके द्वारा भोजन आमाशय तक पहुँचता है।
3. आमाशय
आमाशय की भित्ति में उपस्थित ग्रंथियाँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, पेप्सिन तथा म्यूकस का स्राव करती हैं।
- HCl – अम्लीय माध्यम बनाता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है।
- पेप्सिन – प्रोटीन के पाचन में सहायता करता है।
- म्यूकस – आमाशय की आंतरिक परत को अम्ल से बचाता है।
4. छोटी आँत
छोटी आँत में भोजन का अधिकांश पाचन पूरा होता है और पचे हुए पोषक पदार्थों का अवशोषण होता है।
पित्त रस यकृत में बनता है और पित्ताशय में संग्रहित होता है। यह वसा को छोटी बूंदों में तोड़कर उसके पाचन को आसान बनाता है।
अग्न्याशयी रस में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा के पाचन में सहायक एंजाइम होते हैं।
5. विल्ली (Villi)
छोटी आँत की भीतरी सतह पर उँगली जैसी असंख्य संरचनाएँ होती हैं जिन्हें विल्ली कहते हैं। ये अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ाती हैं।
6. बड़ी आँत
यहाँ अपचित भोजन से जल और कुछ लवणों का अवशोषण होता है। शेष पदार्थ मल के रूप में मलाशय में पहुँचता है और गुदा द्वारा बाहर निकलता है।
10. श्वसन (Respiration)
कोशिकाएँ ग्लूकोज में संचित रासायनिक ऊर्जा को सीधे उपयोग नहीं करतीं। श्वसन के दौरान इस ऊर्जा का एक भाग ATP के रूप में संचित होता है।
11. वायवीय एवं अवायवीय श्वसन
| आधार | वायवीय श्वसन | अवायवीय श्वसन |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन | आवश्यक | आवश्यक नहीं |
| ग्लूकोज का विघटन | पूर्ण | अपूर्ण |
| ऊर्जा | अधिक | कम |
| अंतिम उत्पाद | CO₂ + H₂O | एथेनॉल + CO₂ या लैक्टिक अम्ल |
| मुख्य स्थान | माइटोकॉन्ड्रिया | कोशिकाद्रव्य |
यीस्ट में अवायवीय श्वसन
मांसपेशियों में
अधिक व्यायाम के समय ऑक्सीजन की कमी होने पर ग्लूकोज का आंशिक विघटन होकर लैक्टिक अम्ल बन सकता है। इसके संचय से मांसपेशियों में ऐंठन या थकान महसूस हो सकती है।
12. मानव श्वसन तंत्र
मानव में गैसों के आदान-प्रदान के लिए विशेष श्वसन तंत्र पाया जाता है। वायु नासिका से प्रवेश करके फेफड़ों तक पहुँचती है।
नासिका में उपस्थित बाल और श्लेष्मा वायु में मौजूद धूल तथा अन्य कणों को रोकने में सहायता करते हैं।
श्वासनली उपास्थि के छल्लों द्वारा समर्थित होती है, जिससे वायु मार्ग सामान्यतः खुला रहता है।
डायफ्राम की भूमिका
- श्वास अंदर लेते समय: डायफ्राम नीचे की ओर चपटा होता है, वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है और वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है।
- श्वास बाहर छोड़ते समय: डायफ्राम ऊपर की ओर उठता है, वक्ष गुहा का आयतन कम होता है और वायु बाहर निकलती है।
13. वायु कूपिकाएँ (Alveoli)
इनकी दीवार बहुत पतली होती है तथा इनके चारों ओर रक्त केशिकाओं का जाल होता है। इससे गैसों का आदान-प्रदान आसानी से होता है।
- ऑक्सीजन वायु कूपिकाओं से रक्त में जाती है।
- कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से वायु कूपिकाओं में आती है।
- असंख्य वायु कूपिकाएँ गैसों के आदान-प्रदान के लिए बहुत बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं।
14. परिवहन (Transportation)
बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में नहीं होतीं। इसलिए पदार्थों के परिवहन के लिए विशेष तंत्र की आवश्यकता होती है।
मनुष्य में परिवहन तंत्र के प्रमुख भाग हैं:
- हृदय
- रक्त
- रक्त वाहिकाएँ
- लसीका
15. रक्त (Blood)
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जो शरीर में पदार्थों के परिवहन का प्रमुख माध्यम है।
रक्त के मुख्य घटक
- प्लाज्मा: रक्त का तरल भाग। इसमें भोजन, CO₂, हार्मोन और अन्य घुलित पदार्थों का परिवहन होता है।
- लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC): हीमोग्लोबिन की सहायता से ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं।
- श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC): शरीर को संक्रमण और रोगजनकों से बचाने में सहायता करती हैं।
- प्लेटलेट्स: रक्त के थक्के बनने में सहायता करते हैं।
16. मानव हृदय (Human Heart)
हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त को लगातार पंप करता है। यह वक्ष गुहा में दोनों फेफड़ों के बीच, थोड़ा बाईं ओर स्थित होता है।
हृदय के चार कक्ष
- दायाँ आलिंद (Right Atrium)
- दायाँ निलय (Right Ventricle)
- बायाँ आलिंद (Left Atrium)
- बायाँ निलय (Left Ventricle)
हृदय का दायाँ भाग मुख्यतः ऑक्सीजन-रहित रक्त को फेफड़ों की ओर भेजता है, जबकि बायाँ भाग ऑक्सीजन-युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न भागों में भेजता है।
वाल्व का कार्य
हृदय के वाल्व रक्त को विपरीत दिशा में बहने से रोकते हैं और रक्त के एकदिशीय प्रवाह को बनाए रखने में सहायता करते हैं।
17. द्वि-संचरण (Double Circulation)
1. फुफ्फुसीय परिसंचरण
इसमें ऑक्सीजन-रहित रक्त फेफड़ों तक जाता है और ऑक्सीजन प्राप्त करने के बाद हृदय में लौटता है।
2. दैहिक परिसंचरण
इसमें ऑक्सीजन-युक्त रक्त शरीर के अंगों तक पहुँचता है और ऑक्सीजन-रहित रक्त पुनः हृदय में लौटता है।
18. रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels)
| विशेषता | धमनी | शिरा | केशिका |
|---|---|---|---|
| रक्त प्रवाह | हृदय से बाहर | हृदय की ओर | धमनियों और शिराओं को जोड़ती हैं |
| भित्ति | मोटी एवं लचीली | अपेक्षाकृत पतली | अत्यंत पतली, लगभग एक कोशिका मोटी |
| दबाव | अधिक | कम | बहुत कम |
| वाल्व | सामान्यतः अनुपस्थित | उपस्थित | अनुपस्थित |
19. लसीका (Lymph)
लसीका के कार्य
- ऊतकों से अतिरिक्त द्रव को वापस रक्त में पहुँचाने में सहायता।
- छोटी आँत से अवशोषित वसा के परिवहन में सहायता।
- शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में भूमिका।
20. पौधों में परिवहन
पौधों में जल, खनिज तथा भोजन के परिवहन के लिए दो प्रमुख संवहनी ऊतक होते हैं:
- जाइलम (Xylem) – जल और खनिजों का परिवहन।
- फ्लोएम (Phloem) – तैयार भोजन का परिवहन।
21. जाइलम (Xylem)
जड़ों के मूल रोम मिट्टी से जल और घुले हुए खनिजों का अवशोषण करते हैं। ये पदार्थ जाइलम तक पहुँचते हैं और फिर तने से होते हुए पत्तियों तक जाते हैं।
वाष्पोत्सर्जन खिंचाव
पत्तियों से रंध्रों द्वारा जलवाष्प के रूप में जल की हानि को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। इससे जाइलम में एक खिंचाव उत्पन्न होता है जो जड़ों से जल को ऊपर खींचने में सहायता करता है।
22. फ्लोएम (Phloem)
फ्लोएम द्वारा भोजन के परिवहन की प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं।
यह प्रक्रिया ऊर्जा की सहायता से होती है और आवश्यकता के अनुसार भोजन का परिवहन ऊपर तथा नीचे दोनों दिशाओं में हो सकता है।
23. उत्सर्जन (Excretion)
यदि नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट तथा अन्य हानिकारक पदार्थ शरीर में जमा होते रहें तो वे कोशिकाओं के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए उनका निष्कासन आवश्यक है।
मनुष्य में नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्टों को बाहर निकालने का प्रमुख कार्य वृक्क करते हैं।
24. मानव उत्सर्जन तंत्र
मानव उत्सर्जन तंत्र का प्रमुख कार्य रक्त को छानकर नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्टों तथा अतिरिक्त जल और लवणों को मूत्र के रूप में बाहर निकालना है।
मुख्य अंग
- दो वृक्क (Kidneys) – रक्त को छानकर मूत्र बनाते हैं।
- दो मूत्रवाहिनियाँ (Ureters) – वृक्क से मूत्र को मूत्राशय तक पहुँचाती हैं।
- मूत्राशय (Urinary Bladder) – मूत्र को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है।
- मूत्रमार्ग (Urethra) – मूत्र को शरीर से बाहर निकालता है।
25. नेफ्रॉन (Nephron)
प्रत्येक वृक्क में बड़ी संख्या में नेफ्रॉन पाए जाते हैं। प्रत्येक नेफ्रॉन रक्त के निस्यंदन तथा मूत्र निर्माण में भाग लेता है।
नेफ्रॉन के प्रमुख भाग
- ग्लोमेरुलस (Glomerulus)
- बोमैन संपुट (Bowman’s Capsule)
- वृक्क नलिका (Renal Tubule)
- संग्रह नलिका (Collecting Duct)
ग्लोमेरुलस महीन रक्त केशिकाओं का गुच्छा है। यह बोमैन संपुट के अंदर स्थित होता है। रक्त के निस्यंदन की प्रारंभिक प्रक्रिया यहीं होती है।
26. मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
मूत्र निर्माण को मुख्य रूप से तीन चरणों में समझा जा सकता है:
1. निस्यंदन (Filtration)
ग्लोमेरुलस में रक्त उच्च दबाव से छनता है। जल, यूरिया, लवण, ग्लूकोज और अन्य छोटे अणु बोमैन संपुट में पहुँचते हैं। रक्त कोशिकाएँ और बड़े प्रोटीन सामान्यतः रक्त में ही रहते हैं।
2. चयनात्मक पुनरवशोषण (Selective Reabsorption)
शरीर के लिए उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, आवश्यक लवण तथा आवश्यक मात्रा में जल वृक्क नलिका से पुनः रक्त में अवशोषित कर लिए जाते हैं।
3. नलिकीय स्राव एवं मूत्र का निर्माण
कुछ अतिरिक्त आयन और अपशिष्ट नलिका में स्रावित किए जाते हैं। शेष द्रव मूत्र के रूप में संग्रह नलिका से होकर आगे बढ़ता है।
मूत्र की मात्रा का नियंत्रण
मूत्र में जल की मात्रा शरीर में उपलब्ध जल और घुले हुए अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा पर निर्भर करती है। शरीर आवश्यकता के अनुसार जल के पुनरवशोषण को नियंत्रित करता है।
27. पौधों में उत्सर्जन
पौधों में मनुष्य की तरह कोई विशेष उत्सर्जन तंत्र नहीं होता। वे विभिन्न तरीकों से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते या संग्रहित करते हैं।
- ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे गैसीय अपशिष्ट रंध्रों द्वारा बाहर निकल सकते हैं।
- अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा बाहर निकलता है।
- कुछ अपशिष्ट पत्तियों, छाल तथा पुराने ऊतकों में जमा किए जाते हैं।
- पत्तियों के गिरने से उनमें संचित अपशिष्ट भी पौधे से अलग हो जाते हैं।
- कुछ पौधे अपशिष्ट पदार्थों को रेजिन और गोंद के रूप में संग्रहित करते हैं।
- कुछ पदार्थ जड़ों द्वारा आसपास की मिट्टी में छोड़े जा सकते हैं।
28. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
उत्तर: जीव के जीवन को बनाए रखने के लिए शरीर में लगातार होने वाली आवश्यक प्रक्रियाएँ जैव प्रक्रम कहलाती हैं। पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
उत्तर: वह प्रक्रिया जिसमें हरे पौधे क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में CO₂ तथा जल से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं, प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।
उत्तर: रंध्र पौधों में गैसों के आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सर्जन में सहायता करते हैं।
उत्तर: छोटी आँत लंबी और कुंडलित होती है तथा उसकी भीतरी सतह पर अनेक विल्ली होती हैं, जो अवशोषण के लिए बहुत बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं।
उत्तर: उनकी दीवार पतली होती है, उनके चारों ओर रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है और वे बहुत बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं।
उत्तर: जब एक पूर्ण परिसंचरण चक्र में रक्त हृदय से दो बार गुजरता है तो इसे द्वि-संचरण कहते हैं।
उत्तर: धमनी रक्त को हृदय से दूर ले जाती है, जबकि शिरा रक्त को हृदय की ओर लाती है।
उत्तर: जाइलम जड़ों से जल तथा खनिज लवणों को पौधे के ऊपरी भागों तक पहुँचाता है।
उत्तर: फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।
उत्तर: नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है, जो रक्त के निस्यंदन और मूत्र निर्माण में भाग लेती है।
उत्तर: हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है और मुख्य रूप से ऑक्सीजन के परिवहन में सहायता करता है।
उत्तर: पित्त वसा को छोटी बूंदों में विभाजित कर उसके पाचन को आसान बनाता है तथा छोटी आँत में अम्लीय भोजन को क्षारीय माध्यम उपलब्ध कराने में सहायता करता है।
उत्तर: कोशिका में मुक्त ऊर्जा ATP के रूप में संचित की जाती है और विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग किया जाता है।
उत्तर: वाष्पोत्सर्जन जड़ों से जल और खनिजों के ऊपर उठने में सहायता करता है तथा पौधे के तापमान के नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है।
उत्तर: दो वृक्क, दो मूत्रवाहिनियाँ, मूत्राशय और मूत्रमार्ग मानव उत्सर्जन तंत्र के मुख्य अंग हैं।
29. Quick Revision
- जीवन को बनाए रखने वाली आवश्यक क्रियाएँ जैव प्रक्रम कहलाती हैं।
- मुख्य जैव प्रक्रम – पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन।
- हरे पौधे स्वपोषी होते हैं।
- प्रकाश संश्लेषण के लिए CO₂, जल, प्रकाश और क्लोरोफिल आवश्यक हैं।
- पत्तियों में गैसीय आदान-प्रदान मुख्यतः रंध्रों द्वारा होता है।
- अमीबा भोजन ग्रहण करने के लिए कूटपाद बनाता है।
- लार में सैलिवरी एमाइलेज पाया जाता है।
- आमाशय में HCl, पेप्सिन और म्यूकस महत्वपूर्ण हैं।
- छोटी आँत में विल्ली पोषक पदार्थों के अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र बढ़ाती हैं।
- ATP को कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है।
- फेफड़ों की वायु कूपिकाएँ गैसों के आदान-प्रदान की मुख्य सतह हैं।
- मानव हृदय में चार कक्ष होते हैं।
- मनुष्य में द्वि-संचरण पाया जाता है।
- RBC ऑक्सीजन के परिवहन में सहायता करती हैं।
- WBC शरीर की रक्षा में महत्वपूर्ण हैं।
- प्लेटलेट्स रक्त का थक्का बनाने में सहायता करते हैं।
- जाइलम जल एवं खनिजों का परिवहन करता है।
- फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
- नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है।
- मूत्र निर्माण में निस्यंदन, पुनरवशोषण और स्राव महत्वपूर्ण चरण हैं।

