Class 10 Science Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Notes

Class 10 Science Chapter 11 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार Notes
Class 10 Science • Chapter 11

मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

Human Eye and the Colourful World – सम्पूर्ण हिंदी नोट्स

अध्याय का परिचय

हमारी आँखें प्रकृति द्वारा दिया गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकाशीय अंग हैं। मानव नेत्र की सहायता से हम वस्तुओं का आकार, रंग, दूरी तथा स्थिति पहचानते हैं। आँख में प्रवेश करने वाला प्रकाश विभिन्न भागों से होकर गुजरता है और अंततः रेटिना (Retina) पर वस्तु का प्रतिबिंब बनाता है।

इस अध्याय में हम मानव नेत्र की संरचना एवं कार्य, नेत्र की समंजन क्षमता, दृष्टि दोष तथा उनके सुधार, प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन, श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण, वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकाश के प्रकीर्णन जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन करेंगे।

मुख्य विषय: मानव नेत्र, समंजन क्षमता, निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष, जरा-दूरदृष्टिता, प्रिज्म, वर्ण-विक्षेपण, वायुमंडलीय अपवर्तन, तारों का टिमटिमाना तथा प्रकाश का प्रकीर्णन।

1. मानव नेत्र (Human Eye)

मानव नेत्र: मानव नेत्र एक प्राकृतिक प्रकाशीय यंत्र है जिसकी सहायता से हम अपने आसपास की वस्तुओं को देख पाते हैं।

मानव नेत्र का आकार लगभग गोलाकार होता है। इसका व्यास लगभग 2.3 cm होता है। आँख का अधिकांश भाग नेत्रगोलक (Eyeball) से बना होता है। प्रकाश आँख में कॉर्निया से प्रवेश करता है और नेत्र लेंस की सहायता से रेटिना पर केंद्रित होता है।

2. मानव नेत्र की संरचना

मानव नेत्र की संरचना Class 10 Science Chapter 11
चित्र – मानव नेत्र की संरचना एवं उसके प्रमुख भाग

ऊपर दिए गए चित्र में मानव नेत्र के प्रमुख भागों को दर्शाया गया है। अब चित्र में दिए गए प्रत्येक महत्वपूर्ण भाग को विस्तार से समझते हैं।

कॉर्निया (Cornea)

कॉर्निया आँख का पारदर्शी अग्र भाग है। प्रकाश की किरणें सबसे पहले कॉर्निया से होकर आँख में प्रवेश करती हैं। आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश का अधिकांश अपवर्तन कॉर्निया की बाहरी सतह पर होता है।

परितारिका (Iris)

परितारिका कॉर्निया के पीछे स्थित एक गहरे रंग की पेशीय संरचना है। यह पुतली के आकार को नियंत्रित करके आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है।

पुतली (Pupil)

परितारिका के मध्य स्थित छोटे छिद्र को पुतली कहते हैं। तेज प्रकाश में पुतली छोटी तथा कम प्रकाश में बड़ी हो जाती है।

नेत्र लेंस (Eye Lens)

यह पारदर्शी तथा लचीला उत्तल लेंस होता है। यह प्रकाश किरणों को रेटिना पर केंद्रित करता है। इसकी वक्रता बदल सकती है, जिससे इसकी फोकस दूरी भी बदलती है।

पक्ष्माभी पेशियाँ (Ciliary Muscles)

ये पेशियाँ नेत्र लेंस की वक्रता को बदलती हैं। इसी कारण आँख पास और दूर दोनों प्रकार की वस्तुओं पर फोकस कर पाती है।

रेटिना (Retina)

रेटिना नेत्रगोलक के पीछे स्थित प्रकाश-संवेदी पर्दा है। नेत्र लेंस वस्तु का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब रेटिना पर बनाता है। रेटिना में प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ होती हैं जो प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलती हैं।

दृष्टि तंत्रिका (Optic Nerve)

दृष्टि तंत्रिका रेटिना से प्राप्त विद्युत संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती है। मस्तिष्क इन संकेतों की व्याख्या करता है और हमें वस्तु दिखाई देती है।

परीक्षा बिंदु: नेत्र लेंस का मुख्य कार्य प्रकाश को रेटिना पर फोकस करना है, जबकि रेटिना प्रकाश-संवेदी सतह का कार्य करती है।

3. मानव नेत्र में प्रतिबिंब कैसे बनता है?

  1. वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणें कॉर्निया में प्रवेश करती हैं।
  2. कॉर्निया प्रकाश का अपवर्तन करता है।
  3. प्रकाश पुतली से होकर नेत्र लेंस तक पहुँचता है।
  4. नेत्र लेंस प्रकाश को और अधिक अभिसारित करता है।
  5. रेटिना पर वस्तु का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब बनता है।
  6. रेटिना की प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ संकेत उत्पन्न करती हैं।
  7. दृष्टि तंत्रिका इन संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती है।
  8. मस्तिष्क संकेतों की व्याख्या करके हमें वस्तु का बोध कराता है।

4. नेत्र की समंजन क्षमता (Power of Accommodation)

नेत्र की समंजन क्षमता Power of Accommodation
चित्र – निकट एवं दूर की वस्तुओं के लिए नेत्र लेंस का समंजन
समंजन क्षमता: नेत्र लेंस द्वारा अपनी फोकस दूरी को आवश्यकता के अनुसार बदलकर विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देखने की क्षमता को नेत्र की समंजन क्षमता कहते हैं।

दूर की वस्तु देखते समय

पक्ष्माभी पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं। नेत्र लेंस अपेक्षाकृत पतला हो जाता है तथा उसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है। इससे दूर स्थित वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।

पास की वस्तु देखते समय

पक्ष्माभी पेशियाँ सिकुड़ती हैं। इससे नेत्र लेंस अधिक मोटा और अधिक वक्र हो जाता है तथा उसकी फोकस दूरी घट जाती है। इसलिए पास की वस्तु भी स्पष्ट दिखाई देती है।

नेत्र की समंजन क्षमता असीमित नहीं होती। बहुत पास रखी वस्तु को सामान्य आँख स्पष्ट रूप से नहीं देख सकती।

5. निकट बिंदु और दूर बिंदु

निकट बिंदु (Near Point)

वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी वस्तु को आँख बिना तनाव के स्पष्ट देख सकती है, आँख का निकट बिंदु कहलाता है।

सामान्य युवा व्यक्ति का निकट बिंदु ≈ 25 cm

दूर बिंदु (Far Point)

वह अधिकतम दूरी जिस तक आँख किसी वस्तु को स्पष्ट देख सकती है, दूर बिंदु कहलाता है। सामान्य आँख के लिए दूर बिंदु अनंत (∞) माना जाता है।

बिंदु सामान्य आँख के लिए
निकट बिंदु लगभग 25 cm
दूर बिंदु अनंत (∞)

6. दृष्टि दोष (Defects of Vision)

जब आँख किसी वस्तु का प्रतिबिंब ठीक रेटिना पर नहीं बना पाती अथवा विभिन्न दूरियों की वस्तुओं पर ठीक प्रकार से फोकस नहीं कर पाती, तो ऐसी स्थिति को दृष्टि दोष कहा जाता है।

मुख्य अपवर्तक दृष्टि दोष हैं:

  • निकट दृष्टि दोष (Myopia)
  • दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)
  • जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)

7. निकट दृष्टि दोष (Myopia)

निकट दृष्टि दोष Myopia और उसका सुधार
चित्र – Myopia में प्रतिबिंब की स्थिति तथा अवतल लेंस द्वारा सुधार
निकट दृष्टि दोष: वह दृष्टि दोष जिसमें व्यक्ति निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है लेकिन दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता, निकट दृष्टि दोष कहलाता है।

Myopia में क्या होता है?

दूर की वस्तु से आने वाली लगभग समानांतर किरणें सामान्यतः रेटिना पर केंद्रित होनी चाहिए। Myopia से प्रभावित आँख में ये किरणें रेटिना के आगे केंद्रित हो जाती हैं।

कारण

  • नेत्र लेंस की वक्रता आवश्यकता से अधिक होना।
  • नेत्र लेंस की अभिसारी शक्ति अधिक होना।
  • नेत्रगोलक का सामान्य से अधिक लंबा हो जाना।

सुधार

Myopia को उचित शक्ति के अवतल लेंस (Concave Lens) से ठीक किया जाता है। अवतल लेंस आने वाली प्रकाश किरणों को थोड़ा अपसारित कर देता है, जिसके बाद नेत्र लेंस उन्हें रेटिना पर केंद्रित कर देता है।

याद रखें: Myopia → दूर की वस्तु धुंधली → प्रतिबिंब रेटिना के आगे → सुधार के लिए अवतल लेंस।

8. दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)

दूर दृष्टि दोष Hypermetropia और उसका सुधार
चित्र – Hypermetropia तथा उत्तल लेंस द्वारा उसका सुधार
दूर दृष्टि दोष: वह दृष्टि दोष जिसमें व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकता है लेकिन पास की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता, दूर दृष्टि दोष कहलाता है।

इस दोष में क्या होता है?

पास रखी वस्तु से आने वाली किरणें रेटिना पर केंद्रित होने के स्थान पर रेटिना के पीछे केंद्रित होने की प्रवृत्ति रखती हैं। प्रभावित व्यक्ति का निकट बिंदु सामान्य 25 cm से अधिक दूर हो जाता है।

कारण

  • नेत्र लेंस की अभिसारी शक्ति कम होना।
  • नेत्र लेंस की फोकस दूरी अधिक होना।
  • नेत्रगोलक का सामान्य से छोटा होना।

सुधार

Hypermetropia को उचित शक्ति के उत्तल लेंस (Convex Lens) द्वारा ठीक किया जाता है। उत्तल लेंस किरणों को नेत्र में प्रवेश करने से पहले अभिसारित करता है, जिससे अंतिम प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।

याद रखें: Hypermetropia → पास की वस्तु धुंधली → प्रतिबिंब रेटिना के पीछे → उत्तल लेंस से सुधार।

9. जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)

Presbyopia जरा दूरदृष्टिता और Bifocal Lens
चित्र – आयु बढ़ने पर समंजन क्षमता में कमी तथा द्विफोकसी लेंस
जरा-दूरदृष्टिता: आयु बढ़ने के साथ आँख की समंजन क्षमता कम होने के कारण पास की वस्तुओं को स्पष्ट देखने में होने वाली कठिनाई को Presbyopia कहते हैं।

मुख्य कारण

  • आयु के साथ पक्ष्माभी पेशियों का कमजोर होना।
  • नेत्र लेंस का लचीलापन कम होना।
  • आँख की समंजन क्षमता का कम होना।
  • निकट बिंदु का धीरे-धीरे आँख से दूर जाना।

सुधार

यदि व्यक्ति को केवल पास की वस्तु देखने में समस्या है तो उचित अभिसारी लेंस की आवश्यकता हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति में निकट और दूर दोनों प्रकार की दृष्टि संबंधी समस्या मौजूद हो, तो आवश्यकता के अनुसार द्विफोकसी (Bifocal) या अन्य उपयुक्त corrective lenses का उपयोग किया जा सकता है।

द्विफोकसी लेंस (Bifocal Lens)

पारंपरिक bifocal lens में अलग-अलग दूरी के लिए अलग optical powers वाले भाग होते हैं। सामान्यतः ऊपर का भाग दूर तथा नीचे का भाग पढ़ने/निकट दृष्टि के लिए उपयोग किया जाता है। किस प्रकार का lens आवश्यक होगा यह मौजूद refractive defects पर निर्भर करता है।

10. दृष्टि दोषों की तुलना

दोष समस्या प्रतिबिंब सुधार
Myopia दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं रेटिना के आगे अवतल लेंस
Hypermetropia पास की वस्तु स्पष्ट नहीं रेटिना के पीछे उत्तल लेंस
Presbyopia आयु के साथ निकट दृष्टि में कठिनाई समंजन क्षमता में कमी आवश्यकतानुसार corrective lens

11. काँच के प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन

काँच के प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन
चित्र – त्रिकोणीय काँच के प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन

प्रिज्म दो समतल अपवर्तक सतहों से घिरा पारदर्शी माध्यम होता है, जिसकी अपवर्तक सतहें एक-दूसरे से एक निश्चित कोण पर झुकी होती हैं।

जब प्रकाश किरण वायु से काँच के प्रिज्म में प्रवेश करती है तो उसका अपवर्तन होता है। प्रिज्म से बाहर निकलते समय किरण दोबारा अपवर्तित होती है। परिणामस्वरूप निर्गत किरण की दिशा मूल आपतित किरण की दिशा से बदल जाती है।

विचलन कोण (Angle of Deviation)

आपतित किरण की मूल दिशा और प्रिज्म से निकलने वाली निर्गत किरण की दिशा के बीच बनने वाले कोण को विचलन कोण (Angle of Deviation) कहते हैं।

प्रिज्म में प्रकाश सामान्यतः उसके आधार की ओर विचलित होता है।

12. श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion)

प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का वर्ण विक्षेपण
चित्र – प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का सात रंगों में विभाजन
वर्ण-विक्षेपण: श्वेत प्रकाश के अपने विभिन्न संघटक रंगों में विभाजित होने की घटना को प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

जब श्वेत प्रकाश काँच के प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो उसके विभिन्न रंग अलग-अलग मात्रा में अपवर्तित होते हैं। इसलिए श्वेत प्रकाश सात प्रमुख रंगों के बैंड में विभाजित दिखाई देता है।

VIBGYOR = Violet • Indigo • Blue • Green • Yellow • Orange • Red

काँच के प्रिज्म में सामान्यतः बैंगनी प्रकाश सबसे अधिक तथा लाल प्रकाश सबसे कम विचलित होता है।

13. वर्णक्रम (Spectrum)

श्वेत प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण से प्राप्त विभिन्न रंगों के क्रमबद्ध बैंड को वर्णक्रम (Spectrum) कहते हैं।
क्रम रंग English
1बैंगनीViolet
2जामुनीIndigo
3नीलाBlue
4हराGreen
5पीलाYellow
6नारंगीOrange
7लालRed
महत्वपूर्ण: लाल रंग का विचलन सबसे कम और बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक होता है।

14. वर्णों का पुनः संयोजन

यदि पहले प्रिज्म से प्राप्त सात रंगों के वर्णक्रम को उचित स्थिति में रखे दूसरे उल्टे प्रिज्म से गुजारा जाए, तो विभिन्न रंग पुनः मिलकर लगभग श्वेत प्रकाश उत्पन्न करते हैं।

इससे यह स्पष्ट होता है कि श्वेत प्रकाश अनेक रंगों का मिश्रण है।

15. इंद्रधनुष का निर्माण

इंद्रधनुष एक प्राकृतिक वर्णक्रम है जो सामान्यतः वर्षा के बाद आकाश में दिखाई देता है। सूर्य का प्रकाश जल की सूक्ष्म बूंदों में प्रवेश करने पर अपवर्तित और वर्ण-विक्षेपित होता है। बूंद के भीतर प्रकाश का आंतरिक परावर्तन होता है और बाहर निकलते समय प्रकाश पुनः अपवर्तित होता है।

इस प्रकार जल की अनेक बूंदें छोटे-छोटे प्रिज्म की तरह कार्य करती हैं और हमें रंगों का सुंदर चाप दिखाई देता है।

इंद्रधनुष के निर्माण में मुख्य घटनाएँ: अपवर्तन + वर्ण-विक्षेपण + आंतरिक परावर्तन।

16. वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction)

पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों से गुजरते समय प्रकाश किरणों के लगातार अपवर्तित होने की घटना को वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं।

वायुमंडल की सभी परतों का तापमान और घनत्व समान नहीं होता। इसलिए उनका अपवर्तनांक भी समान नहीं रहता। जब प्रकाश इन अलग-अलग परतों से गुजरता है, तो उसका मार्ग लगातार थोड़ा-थोड़ा बदलता रहता है।

17. तारों का टिमटिमाना

वायुमंडलीय अपवर्तन और तारों का टिमटिमाना
चित्र – वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारों का टिमटिमाना

ऊपर दिए गए चित्र में तारे से आने वाला प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों से गुजरता हुआ दिखाया गया है। प्रत्येक परत का अपवर्तनांक थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए प्रकाश का मार्ग लगातार बदलता रहता है।

तारे क्यों टिमटिमाते हैं?

तारे पृथ्वी से बहुत दूर होने के कारण लगभग बिंदु प्रकाश स्रोत की तरह दिखाई देते हैं। तारे का प्रकाश पृथ्वी के अस्थिर वायुमंडल से गुजरते समय लगातार अपवर्तित होता रहता है।

वायुमंडल की भौतिक परिस्थितियाँ लगातार बदलती रहती हैं। इसलिए तारे की आभासी स्थिति तथा हमारी आँख तक पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा में छोटे-छोटे परिवर्तन होते रहते हैं। कभी तारा अधिक चमकीला और कभी कम चमकीला दिखाई देता है। यही तारों का टिमटिमाना कहलाता है।

तारा वास्तविक स्थिति से ऊपर क्यों दिखाई देता है?

वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे से आने वाली किरण का मार्ग मुड़ता है। आँख उस किरण को सीधी दिशा में पीछे बढ़ाकर देखती है, इसलिए तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊपर प्रतीत हो सकती है।

ग्रह सामान्यतः क्यों नहीं टिमटिमाते?

ग्रह तारों की तुलना में पृथ्वी के काफी निकट हैं और वे हमें विस्तृत प्रकाश स्रोत (Extended Source) के रूप में दिखाई देते हैं। ग्रह के विभिन्न भागों से आने वाले प्रकाश में होने वाले उतार-चढ़ाव औसत हो जाते हैं। इसलिए ग्रहों में तारों जैसा स्पष्ट टिमटिमाना सामान्यतः दिखाई नहीं देता।

परीक्षा उत्तर: तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है।

18. सूर्योदय पहले और सूर्यास्त देर से दिखाई देना

सूर्योदय पहले और सूर्यास्त देर से दिखाई देना Atmospheric Refraction
चित्र – वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य की वास्तविक एवं आभासी स्थिति

चित्र में सूर्य की वास्तविक स्थिति क्षितिज के नीचे होने पर भी उसकी आभासी स्थिति क्षितिज के ऊपर दिखाई गई है। इसका कारण वायुमंडलीय अपवर्तन है।

अग्रिम सूर्योदय (Advance Sunrise)

वास्तविक सूर्योदय से ठीक पहले सूर्य ज्यामितीय रूप से क्षितिज के नीचे होता है। सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों से गुजरते समय मुड़ती हैं और प्रेक्षक की आँख तक पहुँचती हैं।

आँख इन किरणों को सीधी दिशा में पीछे की ओर बढ़ाकर देखती है, इसलिए सूर्य अपनी वास्तविक स्थिति से ऊपर दिखाई देता है। परिणामस्वरूप हमें सूर्य वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले दिखाई दे सकता है।

विलंबित सूर्यास्त (Delayed Sunset)

इसी प्रकार वास्तविक सूर्यास्त के बाद सूर्य क्षितिज से नीचे जा चुका होता है, लेकिन वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण उसकी किरणें कुछ समय तक हमारी आँख तक पहुँचती रहती हैं। इसलिए सूर्य लगभग 2 मिनट बाद तक दिखाई दे सकता है।

इस प्रकार वास्तविक सूर्योदय और वास्तविक सूर्यास्त के बीच दिखाई देने वाले दिन की अवधि लगभग 4 मिनट बढ़ी हुई प्रतीत हो सकती है।
कारण याद रखें: अग्रिम सूर्योदय और विलंबित सूर्यास्त दोनों वायुमंडलीय अपवर्तन के परिणाम हैं।

19. प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)

प्रकाश का प्रकीर्णन नीला आकाश और लाल सूर्य
चित्र – प्रकाश के प्रकीर्णन से नीला आकाश तथा लाल सूर्य का दिखाई देना
जब प्रकाश किसी माध्यम में उपस्थित सूक्ष्म कणों से टकराकर विभिन्न दिशाओं में फैल जाता है, तो इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

ऊपर के चित्र में दिन के समय नीले आकाश तथा सूर्योदय/सूर्यास्त के समय सूर्य के लाल दिखाई देने की घटना को दिखाया गया है। दोनों घटनाएँ प्रकाश के प्रकीर्णन से संबंधित हैं।

आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?

सूर्य का श्वेत प्रकाश वायुमंडल में प्रवेश करने पर वायु के अणुओं और बहुत छोटे कणों से टकराता है। छोटी तरंगदैर्ध्य वाला प्रकाश, विशेष रूप से नीला प्रकाश, लंबी तरंगदैर्ध्य वाले लाल प्रकाश की तुलना में अधिक प्रकीर्णित होता है।

यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश विभिन्न दिशाओं से हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसलिए साफ दिन में आकाश हमें नीला दिखाई देता है।

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?

सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज के पास होता है। उस समय सूर्य के प्रकाश को हमारी आँख तक पहुँचने से पहले वायुमंडल में अपेक्षाकृत अधिक लंबा मार्ग तय करना पड़ता है।

इस लंबे मार्ग में नीले तथा अन्य छोटी तरंगदैर्ध्य वाले रंगों का अधिकांश प्रकाश विभिन्न दिशाओं में प्रकीर्णित हो जाता है। लाल रंग का प्रकाश कम प्रकीर्णित होता है और उसका बड़ा भाग हमारी आँख तक पहुँच जाता है। इसलिए सूर्य लाल या नारंगी दिखाई देता है।

एक लाइन में:
नीला आकाश → छोटी तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन।
लाल सूर्योदय/सूर्यास्त → लंबा वायुमंडलीय मार्ग और लाल प्रकाश का अपेक्षाकृत कम प्रकीर्णन।

20. टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect)

सूक्ष्म या कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण प्रकाश किरण के मार्ग का दिखाई देना टिंडल प्रभाव कहलाता है।

उदाहरण

  • धुएँ से भरे कमरे में खिड़की से आती सूर्य की किरणों का मार्ग दिखाई देना।
  • कोहरे में वाहन की हेडलाइट की किरण दिखाई देना।
  • घने जंगल में पेड़ों के बीच से आती सूर्य की किरणों का मार्ग दिखाई देना।

21. वायुमंडलीय अपवर्तन और प्रकीर्णन में अंतर

वायुमंडलीय अपवर्तन प्रकाश का प्रकीर्णन
विभिन्न अपवर्तनांक वाली वायु परतों से गुजरने पर प्रकाश का मार्ग मुड़ता है। सूक्ष्म कणों से टकराकर प्रकाश विभिन्न दिशाओं में फैलता है।
तारों के टिमटिमाने का कारण। आकाश के नीले दिखाई देने का कारण।
अग्रिम सूर्योदय एवं विलंबित सूर्यास्त का कारण। सूर्योदय/सूर्यास्त में सूर्य के लाल दिखाई देने से संबंधित।
सामान्य गलती: तारों का टिमटिमाना प्रकीर्णन के कारण नहीं, बल्कि वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है।

22. महत्वपूर्ण अंतर

Myopia और Hypermetropia

Myopia Hypermetropia
निकट की वस्तु स्पष्ट दिखाई देती है। दूर की वस्तु अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है।
दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं दिखाई देती। निकट की वस्तु स्पष्ट नहीं दिखाई देती।
प्रतिबिंब रेटिना के आगे बनता है। प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनने की प्रवृत्ति रखता है।
अवतल लेंस से सुधार। उत्तल लेंस से सुधार।

23. परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण बिंदु

  1. मानव नेत्र में प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।
  2. नेत्र लेंस की वक्रता पक्ष्माभी पेशियाँ नियंत्रित करती हैं।
  3. सामान्य युवा व्यक्ति की स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी लगभग 25 cm है।
  4. सामान्य आँख का दूर बिंदु अनंत होता है।
  5. Myopia का सुधार अवतल लेंस से किया जाता है।
  6. Hypermetropia का सुधार उत्तल लेंस से किया जाता है।
  7. Presbyopia मुख्यतः आयु से संबंधित समंजन क्षमता की कमी है।
  8. प्रिज्म में लाल रंग सबसे कम तथा बैंगनी सबसे अधिक विचलित होता है।
  9. श्वेत प्रकाश के रंगों में विभाजन को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।
  10. तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है।
  11. ग्रह विस्तृत स्रोत होने के कारण सामान्यतः स्पष्ट रूप से नहीं टिमटिमाते।
  12. अग्रिम सूर्योदय व विलंबित सूर्यास्त वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होते हैं।
  13. आकाश का नीला रंग प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण है।
  14. सूर्योदय/सूर्यास्त में सूर्य का लाल रंग भी प्रकीर्णन से संबंधित है।
  15. प्रकाश किरण का मार्ग दिखाई देना टिंडल प्रभाव का उदाहरण हो सकता है।

24. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. नेत्र की समंजन क्षमता क्या है?

उत्तर: नेत्र लेंस द्वारा अपनी फोकस दूरी बदलकर विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देखने की क्षमता को समंजन क्षमता कहते हैं।

प्रश्न 2. सामान्य आँख की स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कितनी होती है?

उत्तर: लगभग 25 cm।

प्रश्न 3. निकट दृष्टि दोष क्या है?

उत्तर: वह दोष जिसमें निकट की वस्तुएँ स्पष्ट लेकिन दूर की वस्तुएँ अस्पष्ट दिखाई देती हैं, निकट दृष्टि दोष या Myopia कहलाता है।

प्रश्न 4. Myopia का सुधार किस लेंस से होता है?

उत्तर: उचित शक्ति के अवतल लेंस से।

प्रश्न 5. Hypermetropia में प्रतिबिंब कहाँ बनता है?

उत्तर: निकट की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनने की प्रवृत्ति रखता है।

प्रश्न 6. Hypermetropia का सुधार कैसे किया जाता है?

उत्तर: उचित शक्ति के उत्तल लेंस द्वारा।

प्रश्न 7. Presbyopia क्यों होता है?

उत्तर: आयु बढ़ने पर नेत्र लेंस का लचीलापन तथा पक्ष्माभी पेशियों की क्षमता कम होने से समंजन क्षमता घट जाती है, जिससे Presbyopia उत्पन्न होता है।

प्रश्न 8. वर्ण-विक्षेपण क्या है?

उत्तर: श्वेत प्रकाश के अपने संघटक रंगों में विभाजित होने की घटना को वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।

प्रश्न 9. प्रिज्म में कौन-सा रंग सबसे अधिक विचलित होता है?

उत्तर: बैंगनी रंग। लाल रंग सबसे कम विचलित होता है।

प्रश्न 10. तारे क्यों टिमटिमाते हैं?

उत्तर: तारे से आने वाले प्रकाश के पृथ्वी के अस्थिर वायुमंडल में लगातार अपवर्तित होने के कारण उसकी आभासी स्थिति और चमक में परिवर्तन होता रहता है, इसलिए तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं।

प्रश्न 11. ग्रह सामान्यतः क्यों नहीं टिमटिमाते?

उत्तर: ग्रह विस्तृत प्रकाश स्रोत की तरह दिखाई देते हैं। उनके विभिन्न भागों से आने वाले प्रकाश के उतार-चढ़ाव औसत हो जाते हैं, इसलिए उनका टिमटिमाना स्पष्ट नहीं दिखाई देता।

प्रश्न 12. सूर्योदय वास्तविक समय से पहले क्यों दिखाई देता है?

उत्तर: वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य की किरणें मुड़कर हमारी आँख तक पहुँच जाती हैं जबकि वास्तविक सूर्य अभी क्षितिज के नीचे होता है।

प्रश्न 13. आकाश नीला क्यों दिखाई देता है?

उत्तर: वायुमंडल के सूक्ष्म कण छोटी तरंगदैर्ध्य वाले नीले प्रकाश को लाल प्रकाश की तुलना में अधिक प्रकीर्णित करते हैं। यही प्रकीर्णित नीला प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचने के कारण आकाश नीला दिखाई देता है।

प्रश्न 14. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है?

उत्तर: उस समय सूर्य के प्रकाश को वायुमंडल में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। छोटी तरंगदैर्ध्य वाला प्रकाश अधिक प्रकीर्णित हो जाता है, जबकि लाल प्रकाश अपेक्षाकृत कम प्रकीर्णित होकर हमारी आँख तक पहुँचता है।

प्रश्न 15. टिंडल प्रभाव क्या है?

उत्तर: सूक्ष्म या कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण प्रकाश किरण के मार्ग के दिखाई देने की घटना को टिंडल प्रभाव कहते हैं।

25. Quick Revision

  • प्रतिबिंब बनता है: रेटिना पर
  • पुतली नियंत्रित करती है: आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा
  • लेंस की वक्रता नियंत्रित करती हैं: पक्ष्माभी पेशियाँ
  • निकट बिंदु: लगभग 25 cm
  • सामान्य दूर बिंदु: अनंत
  • Myopia: Concave Lens
  • Hypermetropia: Convex Lens
  • Presbyopia: आयु से संबंधित समंजन क्षमता में कमी
  • श्वेत प्रकाश: सात प्रमुख रंगों में विभाजित हो सकता है
  • सबसे अधिक विचलन: बैंगनी
  • सबसे कम विचलन: लाल
  • तारों का टिमटिमाना: वायुमंडलीय अपवर्तन
  • अग्रिम सूर्योदय: वायुमंडलीय अपवर्तन
  • विलंबित सूर्यास्त: वायुमंडलीय अपवर्तन
  • नीला आकाश: प्रकाश का प्रकीर्णन
  • लाल सूर्य: लंबा वायुमंडलीय मार्ग + प्रकीर्णन
  • प्रकाश का मार्ग दिखाई देना: टिंडल प्रभाव