प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन
Light – Reflection and Refraction
बिहार बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान के सम्पूर्ण हिंदी नोट्स
अध्याय का परिचय
प्रकाश हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है। हम किसी वस्तु को तभी देख पाते हैं जब उस वस्तु से आने वाला या उससे परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। इस अध्याय में हम प्रकाश के परावर्तन (Reflection), अपवर्तन (Refraction), गोलीय दर्पण, लेंस तथा उनसे बनने वाले प्रतिबिंबों का अध्ययन करेंगे।
दर्पण द्वारा प्रकाश की दिशा बदलने की घटना परावर्तन कहलाती है, जबकि प्रकाश के एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करने पर उसकी दिशा में होने वाला परिवर्तन अपवर्तन कहलाता है।
विषय सूची
- प्रकाश क्या है?
- प्रकाश का परावर्तन
- परावर्तन के नियम
- गोलीय दर्पण
- गोलीय दर्पण के मुख्य भाग
- R और f का संबंध
- दर्पण के लिए किरण नियम
- अवतल दर्पण में प्रतिबिंब
- उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब
- दर्पण की चिह्न परिपाटी
- दर्पण सूत्र
- दर्पण में आवर्धन
- दर्पणों के उपयोग
- प्रकाश का अपवर्तन
- अपवर्तन के नियम
- अपवर्तनांक
- काँच की पट्टी से अपवर्तन
- गोलीय लेंस
- लेंस के मुख्य भाग
- उत्तल लेंस
- अवतल लेंस
- लेंस की चिह्न परिपाटी
- लेंस सूत्र
- लेंस का आवर्धन
- लेंस की क्षमता
- वर्ण-विक्षेपण
- सम्पूर्ण आंतरिक परावर्तन
- हल किए गए उदाहरण
- महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
- Quick Revision
1. प्रकाश क्या है?
प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जिसकी सहायता से हम वस्तुओं को देख पाते हैं। प्रकाश सामान्यतः समांगी माध्यम में सीधी रेखा में चलता है।
प्रकाश से संबंधित प्रमुख घटनाएँ
- प्रकाश का परावर्तन
- प्रकाश का अपवर्तन
- प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण
2. प्रकाश का परावर्तन
जब प्रकाश की किरण किसी चमकीली या परावर्तक सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light) कहते हैं।
मुख्य शब्द
- आपतित किरण: सतह पर गिरने वाली प्रकाश किरण।
- परावर्तित किरण: सतह से टकराकर वापस लौटने वाली किरण।
- अभिलम्ब: आपतन बिंदु पर सतह के लंबवत खींची गई काल्पनिक रेखा।
- आपतन कोण (i): आपतित किरण और अभिलम्ब के बीच का कोण।
- परावर्तन कोण (r): परावर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच का कोण।
3. प्रकाश के परावर्तन के नियम
प्रथम नियम: आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।
द्वितीय नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं।
4. गोलीय दर्पण
जिस दर्पण की परावर्तक सतह किसी खोखले गोले के एक भाग के समान होती है, उसे गोलीय दर्पण (Spherical Mirror) कहते हैं।
गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं
1. अवतल दर्पण (Concave Mirror): जिस गोलीय दर्पण की अंदर की ओर धँसी हुई सतह परावर्तक होती है, उसे अवतल दर्पण कहते हैं। यह समानांतर किरणों को एक बिंदु पर एकत्र कर सकता है, इसलिए इसे अभिसारी दर्पण भी कहते हैं।
2. उत्तल दर्पण (Convex Mirror): जिस गोलीय दर्पण की बाहर की ओर उभरी हुई सतह परावर्तक होती है, उसे उत्तल दर्पण कहते हैं। यह प्रकाश किरणों को फैलाता है।
5. गोलीय दर्पण के मुख्य भाग
- ध्रुव (P): दर्पण की परावर्तक सतह का मध्य बिंदु।
- वक्रता केंद्र (C): उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है।
- वक्रता त्रिज्या (R): P और C के बीच की दूरी।
- मुख्य अक्ष: P और C से गुजरने वाली सीधी रेखा।
- मुख्य फोकस (F): मुख्य अक्ष के समानांतर किरणों के परावर्तन के बाद मिलने या मिलती हुई प्रतीत होने का बिंदु।
- फोकस दूरी (f): ध्रुव P और मुख्य फोकस F के बीच की दूरी।
- द्वारक (Aperture): दर्पण की परावर्तक सतह का प्रभावी व्यास।
6. वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी में संबंध
छोटे द्वारक वाले गोलीय दर्पण के लिए वक्रता त्रिज्या R और फोकस दूरी f में संबंध होता है:
अथवा
7. गोलीय दर्पण के लिए प्रमुख किरण नियम
अवतल दर्पण
- मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली किरण परावर्तन के बाद मुख्य फोकस F से गुजरती है।
- मुख्य फोकस F से होकर आने वाली किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर जाती है।
- वक्रता केंद्र C से होकर आने वाली किरण उसी मार्ग से वापस लौटती है।
- ध्रुव P पर गिरने वाली किरण परावर्तन के नियम के अनुसार परावर्तित होती है।
उत्तल दर्पण
मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली किरण परावर्तन के बाद ऐसी प्रतीत होती है मानो वह दर्पण के पीछे स्थित मुख्य फोकस F से आ रही हो।
8. अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | वास्तविक एवं उल्टा | अत्यंत छोटा |
| C से परे | C और F के बीच | वास्तविक एवं उल्टा | छोटा |
| C पर | C पर | वास्तविक एवं उल्टा | वस्तु के समान |
| C और F के बीच | C से परे | वास्तविक एवं उल्टा | बड़ा |
| F पर | अनंत पर | वास्तविक एवं उल्टा | अत्यधिक बड़ा |
| F और P के बीच | दर्पण के पीछे | आभासी एवं सीधा | बड़ा |
9. उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
उत्तल दर्पण में वस्तु की स्थिति चाहे कहीं भी हो, प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे P और F के बीच बनता है।
- प्रतिबिंब आभासी होता है।
- प्रतिबिंब सीधा होता है।
- प्रतिबिंब वस्तु से छोटा होता है।
10. गोलीय दर्पण के लिए चिह्न परिपाटी
दर्पणों के लिए New Cartesian Sign Convention का प्रयोग किया जाता है।
- सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव P से मापी जाती हैं।
- मुख्य अक्ष पर प्रकाश की आपतित दिशा में मापी गई दूरी धनात्मक (+) होती है।
- आपतित प्रकाश की दिशा के विपरीत मापी गई दूरी ऋणात्मक (−) होती है।
- मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक होती है।
- मुख्य अक्ष के नीचे की ऊँचाई ऋणात्मक होती है।
11. दर्पण सूत्र
वस्तु दूरी u, प्रतिबिंब दूरी v और फोकस दूरी f के बीच संबंध को दर्पण सूत्र कहते हैं।
यह सूत्र अवतल तथा उत्तल दोनों प्रकार के गोलीय दर्पणों के लिए लागू होता है। मान रखते समय चिह्न परिपाटी का पालन करना आवश्यक है।
12. दर्पण में आवर्धन
प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धन कहते हैं।
जहाँ,
- m = आवर्धन
- hi = प्रतिबिंब की ऊँचाई
- ho = वस्तु की ऊँचाई
- v = प्रतिबिंब दूरी
- u = वस्तु दूरी
13. अवतल एवं उत्तल दर्पण के उपयोग
अवतल दर्पण के उपयोग
- शेविंग मिरर के रूप में।
- दंत चिकित्सक द्वारा दाँत का बड़ा प्रतिबिंब देखने में।
- टॉर्च और वाहन की हेडलाइट के परावर्तक में।
- सौर भट्ठी में सूर्य की किरणों को केंद्रित करने में।
उत्तल दर्पण के उपयोग
- वाहनों में पीछे देखने वाले दर्पण के रूप में।
- दुकानों एवं सुरक्षा स्थानों पर बड़े क्षेत्र की निगरानी में।
- सड़क के तीखे मोड़ों पर सुरक्षा दर्पण के रूप में।
14. प्रकाश का अपवर्तन
जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में तिरछे प्रवेश करती है, तो उसकी चाल बदलने के कारण उसकी दिशा भी बदल जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light) कहते हैं।
किरण किस दिशा में मुड़ती है?
- विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने पर किरण अभिलम्ब की ओर मुड़ती है।
- सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाने पर किरण अभिलम्ब से दूर मुड़ती है।
- अभिलम्ब के अनुदिश प्रवेश करने पर प्रकाश की दिशा नहीं बदलती।
15. प्रकाश के अपवर्तन के नियम
प्रथम नियम: आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं।
द्वितीय नियम: किसी निश्चित रंग के प्रकाश और निश्चित दो माध्यमों के लिए आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात नियत रहता है।
इसे Snell का नियम कहते हैं।
16. अपवर्तनांक
किसी माध्यम का अपवर्तनांक यह बताता है कि निर्वात की तुलना में उस माध्यम में प्रकाश की चाल कितनी कम है।
जहाँ,
- n = माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक
- c = निर्वात में प्रकाश की चाल
- v = उस माध्यम में प्रकाश की चाल
निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग:
17. आयताकार काँच की पट्टी से प्रकाश का अपवर्तन
जब प्रकाश की किरण वायु से काँच की पट्टी में प्रवेश करती है, तो वह अभिलम्ब की ओर मुड़ती है। काँच से पुनः वायु में निकलते समय वह अभिलम्ब से दूर मुड़ती है।
काँच की पट्टी की दोनों विपरीत सतहें समानांतर होने के कारण अंतिम निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर होती है।
लेकिन निर्गत किरण की स्थिति मूल आपतित किरण की दिशा से कुछ हट जाती है। इसे पार्श्व विस्थापन (Lateral Displacement) कहते हैं।
18. गोलीय लेंस
दो सतहों से घिरा हुआ पारदर्शी माध्यम, जिसकी कम-से-कम एक सतह गोलीय हो, गोलीय लेंस (Spherical Lens) कहलाता है।
लेंस के दो मुख्य प्रकार
उत्तल लेंस (Convex Lens): यह बीच में मोटा और किनारों पर पतला होता है। यह मुख्य अक्ष के समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर एकत्र करता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस कहते हैं।
अवतल लेंस (Concave Lens): यह बीच में पतला और किनारों पर मोटा होता है। यह प्रकाश किरणों को फैलाता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस कहते हैं।
19. लेंस के मुख्य भाग
- प्रकाशिक केंद्र (O): लेंस का केंद्रीय बिंदु।
- मुख्य अक्ष: दोनों गोलीय सतहों के वक्रता केंद्रों को मिलाने वाली रेखा।
- मुख्य फोकस: मुख्य अक्ष के समानांतर किरणों के अपवर्तन के बाद मिलने या मिलती हुई प्रतीत होने का बिंदु।
- फोकस दूरी (f): प्रकाशिक केंद्र और मुख्य फोकस के बीच की दूरी।
लेंस की दोनों ओर एक-एक मुख्य फोकस होता है, जिन्हें सामान्यतः F1 और F2 से दर्शाया जाता है।
20. उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रकृति | आकार |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F₂ पर | वास्तविक एवं उल्टा | अत्यंत छोटा |
| 2F₁ से परे | F₂ और 2F₂ के बीच | वास्तविक एवं उल्टा | छोटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | वास्तविक एवं उल्टा | समान |
| F₁ और 2F₁ के बीच | 2F₂ से परे | वास्तविक एवं उल्टा | बड़ा |
| F₁ पर | अनंत पर | वास्तविक एवं उल्टा | अत्यधिक बड़ा |
| O और F₁ के बीच | वस्तु की ओर | आभासी एवं सीधा | बड़ा |
21. अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
अवतल लेंस में वस्तु की लगभग किसी भी सामान्य स्थिति के लिए प्रतिबिंब प्रकाशिक केंद्र O और फोकस F₁ के बीच बनता है।
- प्रतिबिंब आभासी होता है।
- प्रतिबिंब सीधा होता है।
- प्रतिबिंब वस्तु से छोटा होता है।
22. लेंस के लिए चिह्न परिपाटी
- सभी दूरियाँ लेंस के प्रकाशिक केंद्र O से मापी जाती हैं।
- आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरी धनात्मक होती है।
- आपतित प्रकाश की दिशा के विपरीत मापी गई दूरी ऋणात्मक होती है।
- मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक होती है।
- मुख्य अक्ष के नीचे की ऊँचाई ऋणात्मक होती है।
23. लेंस सूत्र
वस्तु दूरी u, प्रतिबिंब दूरी v और फोकस दूरी f के बीच संबंध:
यह सूत्र पतले गोलीय लेंस के लिए उपयोग किया जाता है। संख्यात्मक प्रश्नों में सभी राशियों के चिह्न सही लगाना आवश्यक है।
24. लेंस में आवर्धन
यदि |m| > 1 है तो प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा और यदि |m| < 1 है तो प्रतिबिंब वस्तु से छोटा होता है।
25. लेंस की क्षमता (Power of Lens)
किसी लेंस की प्रकाश किरणों को अभिसारित या अपसारित करने की क्षमता को लेंस की क्षमता कहते हैं।
यहाँ f को मीटर में लिया जाता है।
लेंस की क्षमता का SI मात्रक डायोप्टर (Dioptre, D) है।
- उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक होती है।
- अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है।
26. श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण
जब श्वेत प्रकाश किसी काँच के प्रिज्म से गुजरता है, तो वह अपने विभिन्न रंगों में विभाजित हो जाता है। इस घटना को वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of Light) कहते हैं।
प्राप्त रंगों के समूह को वर्णक्रम (Spectrum) कहते हैं।
सात रंग
बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इन्हें अंग्रेजी में VIBGYOR क्रम से याद किया जाता है।
प्रिज्म में अलग-अलग रंगों के लिए अपवर्तन अलग-अलग होता है। लाल प्रकाश का विचलन सबसे कम और बैंगनी प्रकाश का विचलन सबसे अधिक होता है।
27. सम्पूर्ण आंतरिक परावर्तन
जब प्रकाश किसी प्रकाशीय रूप से सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश बाहर निकलने के बजाय पूर्णतः उसी सघन माध्यम में परावर्तित हो जाता है। इस घटना को सम्पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection – TIR) कहते हैं।
TIR की आवश्यक शर्तें
- प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाना चाहिए।
- आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होना चाहिए।
क्रांतिक कोण
सघन माध्यम में वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, क्रांतिक कोण (Critical Angle) कहलाता है।
उपयोग
- ऑप्टिकल फाइबर में।
- कुछ प्रकार के प्रिज्मीय प्रकाशीय उपकरणों में।
- दूरबीन तथा अन्य प्रकाशीय यंत्रों में प्रिज्म व्यवस्था में।
28. वास्तविक एवं आभासी प्रतिबिंब में अंतर
| वास्तविक प्रतिबिंब | आभासी प्रतिबिंब |
|---|---|
| प्रकाश किरणें वास्तव में मिलती हैं। | किरणें केवल मिलती हुई प्रतीत होती हैं। |
| पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है। | पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। |
| सामान्यतः उल्टा होता है। | सामान्यतः सीधा होता है। |
29. अवतल और उत्तल दर्पण में अंतर
| अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण |
|---|---|
| परावर्तक सतह अंदर की ओर होती है। | परावर्तक सतह बाहर की ओर होती है। |
| अभिसारी प्रकृति का होता है। | अपसारी प्रकृति का होता है। |
| वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रतिबिंब बना सकता है। | वास्तविक वस्तु का आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
| फोकस दर्पण के सामने होता है। | फोकस दर्पण के पीछे होता है। |
30. उत्तल और अवतल लेंस में अंतर
| उत्तल लेंस | अवतल लेंस |
|---|---|
| बीच में मोटा होता है। | बीच में पतला होता है। |
| प्रकाश को अभिसारित करता है। | प्रकाश को अपसारित करता है। |
| फोकस दूरी धनात्मक होती है। | फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। |
| वास्तविक तथा आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है। | वास्तविक वस्तु का आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है। |
31. महत्वपूर्ण सूत्र
| राशि | सूत्र |
|---|---|
| दर्पण सूत्र | 1/f = 1/v + 1/u |
| दर्पण आवर्धन | m = hi/ho = −v/u |
| वक्रता त्रिज्या | R = 2f |
| अपवर्तनांक | n = c/v |
| Snell का नियम | n₁ sin i = n₂ sin r |
| लेंस सूत्र | 1/f = 1/v − 1/u |
| लेंस आवर्धन | m = hi/ho = v/u |
| लेंस की क्षमता | P = 1/f (f मीटर में) |
32. हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण
उदाहरण 1 – दर्पण सूत्र
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। वस्तु दर्पण से 30 cm सामने रखी गई है। प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात करें।
चिह्न परिपाटी के अनुसार: f = −15 cm, u = −30 cm
−1/15 = 1/v − 1/30
1/v = −1/15 + 1/30 = −1/30
अतः प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30 cm की दूरी पर बनेगा।
उदाहरण 2 – लेंस सूत्र
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 10 cm है। वस्तु लेंस से 15 cm सामने रखी गई है। प्रतिबिंब दूरी ज्ञात करें।
f = +10 cm, u = −15 cm
1/10 = 1/v + 1/15
1/v = 1/10 − 1/15 = 1/30
अतः वास्तविक प्रतिबिंब लेंस की दूसरी ओर 30 cm पर बनेगा।
उदाहरण 3 – लेंस की क्षमता
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 25 cm है। क्षमता ज्ञात करें।
f = 25 cm = 0.25 m
अतः लेंस की क्षमता +4 डायोप्टर है।
उदाहरण 4 – अपवर्तनांक
किसी माध्यम में प्रकाश की चाल 2 × 108 m/s है। उस माध्यम का अपवर्तनांक ज्ञात करें।
अतः माध्यम का अपवर्तनांक 1.5 है।
33. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
- परावर्तन में आपतन कोण = परावर्तन कोण।
- अवतल दर्पण अभिसारी और उत्तल दर्पण अपसारी होता है।
- गोलीय दर्पण के लिए R = 2f होता है।
- उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
- दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u।
- दर्पण का आवर्धन: m = −v/u।
- विरल से सघन माध्यम में प्रकाश अभिलम्ब की ओर मुड़ता है।
- सघन से विरल माध्यम में प्रकाश अभिलम्ब से दूर मुड़ता है।
- अपवर्तनांक n = c/v।
- काँच की समानांतर पट्टी में निर्गत किरण आपतित किरण के समानांतर होती है।
- उत्तल लेंस अभिसारी तथा अवतल लेंस अपसारी होता है।
- लेंस सूत्र: 1/f = 1/v − 1/u।
- लेंस का आवर्धन: m = v/u।
- लेंस की क्षमता P = 1/f होती है।
- क्षमता का SI मात्रक डायोप्टर है।
34. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
(2) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं।
35. Quick Revision
- Reflection: प्रकाश का सतह से टकराकर वापस लौटना।
- i = r: परावर्तन का प्रथम नियम।
- Concave Mirror: अभिसारी दर्पण।
- Convex Mirror: अपसारी दर्पण।
- R = 2f: गोलीय दर्पण का महत्वपूर्ण संबंध।
- Mirror Formula: 1/f = 1/v + 1/u
- Mirror Magnification: m = −v/u
- Refraction: माध्यम बदलने पर प्रकाश की दिशा में परिवर्तन।
- Refractive Index: n = c/v
- Snell’s Law: n₁ sin i = n₂ sin r
- Convex Lens: अभिसारी लेंस।
- Concave Lens: अपसारी लेंस।
- Lens Formula: 1/f = 1/v − 1/u
- Lens Magnification: m = v/u
- Power: P = 1/f
- Unit of Power: Dioptre (D)
- Dispersion: श्वेत प्रकाश का विभिन्न रंगों में विभाजन।
परीक्षा में क्या जरूर तैयार करें?
विशेष रूप से ray diagrams और numerical questions का अभ्यास करें, क्योंकि इनमें सही चिह्न परिपाटी का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण है।

