Class 10 History Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका Notes in Hindi

Class 10 History Chapter 5 अर्थव्यवस्था और आजीविका Notes in Hindi
Class 10 History • Chapter 5

अर्थव्यवस्था और आजीविका

सम्पूर्ण एवं आसान हिंदी नोट्स

1. अर्थव्यवस्था और आजीविका का अर्थ

मनुष्य को जीवन चलाने के लिए भोजन, कपड़ा, मकान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की जरूरत होती है।

इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मनुष्य अलग-अलग प्रकार के काम करता है।

कोई खेती करता है, कोई मजदूरी करता है, कोई व्यापार करता है और कोई उद्योग में काम करता है।

आजीविका:
जिस काम या साधन से व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आय प्राप्त करता है, उसे आजीविका कहते हैं।
अर्थव्यवस्था:
उत्पादन, वितरण, व्यापार और उपभोग से जुड़ी गतिविधियों की पूरी व्यवस्था को अर्थव्यवस्था कहते हैं।

औद्योगीकरण ने लोगों की अर्थव्यवस्था और आजीविका दोनों में बहुत बड़ा परिवर्तन किया।

2. औद्योगीकरण क्या है?

पहले अधिकांश वस्तुएँ हाथों और साधारण औजारों की सहायता से बनाई जाती थीं।

बाद में मशीनों का प्रयोग बढ़ने लगा।

बड़े-बड़े कारखाने स्थापित हुए।

उत्पादन की मात्रा तेजी से बढ़ने लगी।

इसी परिवर्तन को औद्योगीकरण कहा जाता है।

औद्योगीकरण:
जब उत्पादन में मशीनों और बड़े कारखानों का प्रयोग तेजी से बढ़ता है तथा उद्योग अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को औद्योगीकरण कहते हैं।
आसान भाषा में:
हाथ से उत्पादन → मशीन से उत्पादन → बड़े कारखाने → अधिक उत्पादन = औद्योगीकरण

3. औद्योगिक क्रांति से पहले उत्पादन व्यवस्था

औद्योगिक क्रांति से पहले यूरोप में बड़े आधुनिक कारखाने बहुत कम थे।

अधिकांश वस्तुएँ घरों या छोटी कार्यशालाओं में बनाई जाती थीं।

कारीगर अपने हाथों और साधारण औजारों से उत्पादन करते थे।

व्यापारी कच्चा माल गाँवों में रहने वाले कारीगरों को देते थे।

कारीगर अपने घर पर वस्तु तैयार करते थे।

तैयार वस्तु व्यापारी वापस लेकर बाजार में बेचता था।

इस प्रकार की व्यवस्था को घरेलू उत्पादन या प्रोटो-औद्योगीकरण से जोड़ा जाता है।

प्रोटो-औद्योगीकरण:
आधुनिक कारखानों के विकास से पहले व्यापारियों द्वारा ग्रामीण परिवारों और कारीगरों के माध्यम से बड़े पैमाने पर वस्तुओं का उत्पादन कराने की व्यवस्था।

4. औद्योगिक क्रांति

18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से ब्रिटेन में उत्पादन की तकनीक तेजी से बदलने लगी।

नई मशीनों का आविष्कार हुआ।

भाप की शक्ति का उपयोग बढ़ा।

कारखानों की संख्या बढ़ी।

हाथ से होने वाले उत्पादन की जगह मशीन आधारित उत्पादन ने लेना शुरू किया।

औद्योगिक क्रांति:
उत्पादन की पुरानी हस्तनिर्मित व्यवस्था से मशीन और कारखाना आधारित उत्पादन व्यवस्था की ओर हुए बड़े परिवर्तन को औद्योगिक क्रांति कहा जाता है।

औद्योगिक क्रांति के प्रमुख परिणाम

  • उत्पादन तेजी से बढ़ा।
  • नई मशीनों का प्रयोग बढ़ा।
  • बड़े कारखाने स्थापित हुए।
  • नए औद्योगिक नगर विकसित हुए।
  • मजदूर वर्ग का विस्तार हुआ।
  • व्यापार और बाजार का विस्तार हुआ।

5. औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में क्यों हुई?

औद्योगिक क्रांति के प्रारंभिक विकास में ब्रिटेन सबसे आगे था।

इसके पीछे कई कारण थे।

1. पूँजी की उपलब्धता

व्यापार और औपनिवेशिक गतिविधियों से ब्रिटिश व्यापारियों के पास निवेश के लिए पूँजी उपलब्ध थी।

2. कच्चे माल की उपलब्धता

ब्रिटेन और उसके व्यापारिक नेटवर्क से उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल प्राप्त होता था।

3. कोयला और लोहा

कोयला और लौह अयस्क मशीनों, ऊर्जा और औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण थे।

4. बाजार

ब्रिटिश व्यापारिक और औपनिवेशिक विस्तार ने तैयार माल के लिए बड़े बाजार उपलब्ध कराए।

5. तकनीकी आविष्कार

नई मशीनों और भाप की शक्ति के विकास ने उत्पादन की गति बढ़ाई।

6. परिवहन

सड़क, नहर, बंदरगाह और बाद में रेलवे के विकास से माल ढुलाई आसान हुई।

6. वस्त्र उद्योग में परिवर्तन

औद्योगिक क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव कपड़ा उद्योग पर पड़ा।

पहले सूत कातने और कपड़ा बुनने का काम मुख्य रूप से हाथ से किया जाता था।

नई मशीनों के आने से सूत और कपड़े का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ा।

कुछ महत्वपूर्ण आविष्कार

आविष्कार संबंधित व्यक्ति महत्व
फ्लाइंग शटल जॉन के बुनाई की गति बढ़ी
स्पिनिंग जेनी जेम्स हरग्रीव्स एक साथ कई धागे कातना संभव हुआ
वाटर फ्रेम रिचर्ड आर्कराइट जल शक्ति से सूत उत्पादन में वृद्धि
स्पिनिंग म्यूल सैमुअल क्रॉम्पटन बेहतर और महीन सूत उत्पादन
पावर लूम एडमंड कार्टराइट मशीन से बुनाई तेज हुई

7. भाप इंजन का महत्व

औद्योगीकरण में भाप की शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जेम्स वाट ने भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधार किए।

इसके बाद भाप इंजन का उपयोग उद्योगों में बढ़ने लगा।

मशीनों को चलाने के लिए केवल जल स्रोतों पर निर्भरता कम हुई।

भाप की शक्ति का उपयोग रेल और जहाजों में भी हुआ।

समझिए:
भाप इंजन ने केवल कारखानों को नहीं बदला।
इसने उत्पादन + परिवहन + व्यापार तीनों को प्रभावित किया।

8. कारखाना प्रणाली का विकास

मशीनें बड़ी और महँगी होती गईं।

इसलिए उत्पादन को एक ही स्थान पर संगठित करना सुविधाजनक हो गया।

इससे बड़े कारखानों का विकास हुआ।

कारखाने में मशीन, कच्चा माल और मजदूर एक ही स्थान पर होते थे।

मजदूर निश्चित समय तक काम करते थे और उन्हें मजदूरी दी जाती थी।

कारखाना प्रणाली:
ऐसी उत्पादन व्यवस्था जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर मशीनों की सहायता से एक निश्चित स्थान पर वस्तुओं का उत्पादन करते हैं।

कारखाना व्यवस्था की विशेषताएँ

  • मशीनों का अधिक प्रयोग
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन
  • मजदूरी पर काम करने वाले श्रमिक
  • निश्चित कार्य समय
  • पूँजीपति या मालिक द्वारा उत्पादन का नियंत्रण

9. मजदूर वर्ग और उसकी स्थिति

कारखानों के विकास के साथ मजदूरों की माँग बढ़ी।

गाँवों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर गए।

शुरुआती औद्योगिक दौर में अनेक मजदूरों की कार्य परिस्थितियाँ कठिन थीं।

काम के घंटे लंबे हो सकते थे।

मजदूरी कम थी और रोजगार हमेशा स्थायी नहीं होता था।

कारखानों में सुरक्षा के साधन भी सीमित थे।

औद्योगिक शहरों में रहने की स्थिति भी कई मजदूर परिवारों के लिए खराब थी।

मुख्य परिवर्तन:
औद्योगीकरण ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए, लेकिन शुरुआती औद्योगिक मजदूरों को कठिन कार्य एवं जीवन परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा।

10. महिला और बाल मजदूर

औद्योगिक क्रांति के शुरुआती समय में महिलाओं और बच्चों को भी कारखानों में काम पर लगाया जाता था।

उन्हें प्रायः पुरुष मजदूरों की तुलना में कम मजदूरी दी जाती थी।

बच्चों से भी लंबे समय तक काम कराया जाता था।

समय के साथ इन परिस्थितियों की आलोचना बढ़ी।

श्रमिक आंदोलनों और कानूनी सुधारों के कारण काम के घंटे तथा बाल श्रम जैसी समस्याओं पर नियंत्रण के प्रयास किए गए।

11. औद्योगीकरण और नगरीकरण

जहाँ कारखाने स्थापित हुए, वहाँ रोजगार के अवसर बढ़े।

लोग गाँवों से शहरों की ओर जाने लगे।

इससे औद्योगिक नगर तेजी से बढ़े।

नगरीकरण:
शहरों की जनसंख्या और उनके आर्थिक-सामाजिक महत्व में वृद्धि की प्रक्रिया को नगरीकरण कहते हैं।

लेकिन तेजी से बढ़ते शहरों में आवास, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुईं।

12. औपनिवेशिक भारत की अर्थव्यवस्था

भारत लंबे समय से हस्तशिल्प और वस्त्र उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था।

भारतीय सूती और रेशमी कपड़ों की दुनिया के अनेक बाजारों में माँग थी।

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विस्तार के साथ भारत की व्यापारिक और औद्योगिक संरचना में बड़े बदलाव आए।

ब्रिटेन में औद्योगीकरण के बाद मशीन से बने कपड़ों का उत्पादन तेजी से बढ़ा।

ब्रिटिश निर्मित वस्त्र बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में आने लगे।

इससे भारतीय कारीगरों और बुनकरों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।

13. भारतीय हस्तशिल्प और बुनकरों पर प्रभाव

भारत के हस्तनिर्मित वस्त्र अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध थे।

लेकिन ब्रिटिश औद्योगिक वस्तुओं के विस्तार से भारतीय बुनकरों की स्थिति बदलने लगी।

मशीन से बने ब्रिटिश कपड़े बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में बिकने लगे।

भारतीय हस्तनिर्मित कपड़ों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो गई।

कई कारीगरों की आय कम हुई और उनकी पारंपरिक आजीविका प्रभावित हुई।

सरल क्रम:
ब्रिटेन में मशीन से उत्पादन बढ़ा

सस्ता/बड़े पैमाने पर बना कपड़ा भारत आया

भारतीय हस्तशिल्प को प्रतिस्पर्धा मिली

अनेक कारीगरों की आजीविका प्रभावित हुई

हालाँकि भारतीय हस्तशिल्प पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

विशेष प्रकार के कपड़ों और स्थानीय बाजारों में हाथ से बने उत्पादों की माँग बनी रही।

14. भारत में आधुनिक उद्योगों की शुरुआत

19वीं शताब्दी के मध्य से भारत में आधुनिक उद्योगों का विकास तेज होने लगा।

सूती वस्त्र उद्योग

1854 में बंबई में पहली सफल आधुनिक सूती कपड़ा मिलों में से एक स्थापित हुई।

इसके बाद बंबई और पश्चिमी भारत में सूती वस्त्र उद्योग का विस्तार हुआ।

जूट उद्योग

बंगाल में जूट उद्योग का विकास हुआ।

हुगली नदी के आसपास कई जूट मिलें स्थापित हुईं।

कलकत्ता बंदरगाह के निकट होने के कारण निर्यात में सुविधा मिली।

कोयला उद्योग

रेलवे और उद्योगों के विस्तार के साथ कोयले की माँग बढ़ी।

पूर्वी भारत में कोयला खनन का विस्तार हुआ।

लोहा और इस्पात उद्योग

20वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में आधुनिक लौह एवं इस्पात उद्योग का विकास महत्वपूर्ण चरण में पहुँचा।

टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना 1907 में हुई।

जमशेदपुर बाद में भारत का प्रमुख लौह-इस्पात औद्योगिक केंद्र बना।

15. भारतीय उद्यमियों की भूमिका

भारत में आधुनिक उद्योगों के विकास में भारतीय व्यापारियों और उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कुछ भारतीय व्यापारी पहले विदेशी व्यापार से जुड़े हुए थे।

बाद में उन्होंने उद्योगों में अपनी पूँजी लगानी शुरू की।

जमशेदजी टाटा

जमशेदजी टाटा भारत के प्रमुख औद्योगिक अग्रदूतों में से थे।

टाटा समूह ने वस्त्र सहित आधुनिक उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी औद्योगिक दृष्टि ने आगे चलकर भारत के लौह एवं इस्पात उद्योग के विकास में भी आधार तैयार किया।

अन्य भारतीय व्यापारी

बंबई, कलकत्ता और अन्य व्यापारिक केंद्रों के भारतीय व्यापारियों ने भी आधुनिक उद्योगों में निवेश किया।

इससे धीरे-धीरे भारतीय औद्योगिक पूँजीपति वर्ग विकसित हुआ।

16. स्वदेशी आंदोलन और भारतीय उद्योग

1905 के बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी आंदोलन तेज हुआ।

स्वदेशी आंदोलन में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार पर जोर दिया गया।

लोगों को भारत में बनी वस्तुएँ खरीदने के लिए प्रेरित किया गया।

इससे भारतीय वस्तुओं की माँग को प्रोत्साहन मिला।

राष्ट्रीय आंदोलन और आर्थिक राष्ट्रवाद के बीच संबंध मजबूत हुआ।

स्वदेशी:
अपने देश में बनी वस्तुओं को अपनाना और देशी उद्योगों को प्रोत्साहित करना।

17. प्रथम विश्व युद्ध और भारतीय उद्योग

प्रथम विश्व युद्ध 1914 में शुरू हुआ।

युद्ध के कारण ब्रिटेन का औद्योगिक उत्पादन बड़ी मात्रा में युद्ध संबंधी जरूरतों में लग गया।

भारत में ब्रिटिश वस्तुओं की आपूर्ति कई क्षेत्रों में प्रभावित हुई।

इससे भारतीय उद्योगों को घरेलू बाजार में अधिक अवसर मिले।

युद्ध संबंधी आवश्यकताओं के कारण भी भारतीय कारखानों से कई प्रकार की वस्तुओं की माँग बढ़ी।

कुछ उद्योगों में उत्पादन और रोजगार का विस्तार हुआ।

याद रखें:
प्रथम विश्व युद्ध ने भारतीय उद्योगों के लिए कुछ नए अवसर पैदा किए क्योंकि ब्रिटेन से आने वाली वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई और युद्धकालीन माँग बढ़ी।

18. मशीनों के बाद भी कुटीर उद्योग क्यों बने रहे?

मशीनों और कारखानों के आने के बाद भी हाथ से होने वाला उत्पादन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

इसके कई कारण थे।

1. मशीनें हर वस्तु नहीं बना सकती थीं

विशेष डिजाइन और महीन काम के लिए कुशल कारीगरों की जरूरत बनी रही।

2. स्थानीय माँग

अलग-अलग क्षेत्रों में विशेष प्रकार के कपड़े और वस्तुओं की माँग थी।

3. कम पूँजी

छोटे उत्पादक कम पूँजी में काम कर सकते थे।

4. पारिवारिक श्रम

कुटीर उद्योगों में परिवार के सदस्य मिलकर उत्पादन करते थे।

5. विशेष गुणवत्ता

हाथ से बनी वस्तुओं की विशेषता और डिजाइन के कारण कुछ ग्राहकों में उनकी माँग बनी रही।

19. मजदूरों की भर्ती और रोजगार

उद्योगों के विस्तार के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत थी।

कई मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में आए।

मजदूरों को काम की जानकारी अक्सर रिश्तेदारों, परिचितों और मध्यस्थों से मिलती थी।

भारत के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की भर्ती में जॉबर जैसे मध्यस्थ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

जॉबर:
कारखानों के लिए मजदूरों की भर्ती कराने वाला मध्यस्थ, जो कई बार मजदूरों को काम दिलाने और उनसे संपर्क बनाए रखने का कार्य करता था।

मजदूरों का शहर से संबंध बढ़ा, लेकिन अनेक मजदूर अपने गाँव से भी जुड़े रहे।

20. बाजार और विज्ञापन

बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के बाद वस्तुओं को बेचना भी जरूरी था।

इसलिए उत्पादकों ने ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीके अपनाए।

विज्ञापन का उपयोग बढ़ा।

वस्तुओं पर आकर्षक लेबल लगाए जाने लगे।

भारतीय बाजार में कई उत्पादों को लोकप्रिय बनाने के लिए भारतीय देवी-देवताओं, ऐतिहासिक व्यक्तियों और परिचित प्रतीकों की छवियों का भी उपयोग किया गया।

इससे ग्राहक वस्तु को अधिक परिचित और विश्वसनीय समझ सके।

समझिए:
उत्पादन बढ़ा → बाजार की जरूरत बढ़ी → प्रतिस्पर्धा बढ़ी → विज्ञापन का महत्व बढ़ा।

21. औद्योगीकरण का समाज और आजीविका पर प्रभाव

सकारात्मक परिवर्तन

  • बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हुआ।
  • नई वस्तुएँ बाजार में उपलब्ध हुईं।
  • परिवहन का विकास हुआ।
  • नए उद्योग और रोजगार विकसित हुए।
  • व्यापार का विस्तार हुआ।
  • औद्योगिक शहरों का विकास हुआ।

समस्याएँ

  • कई पारंपरिक कारीगरों की आजीविका प्रभावित हुई।
  • मजदूरों को शुरुआती दौर में कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा।
  • शहरों में भीड़ और आवास की समस्या बढ़ी।
  • महिलाओं और बच्चों से भी कठिन श्रम कराया जाता था।
  • पूँजीपति और मजदूर वर्ग के बीच आर्थिक असमानता स्पष्ट हुई।
निष्कर्ष:
औद्योगीकरण ने उत्पादन और रोजगार के नए अवसर पैदा किए, लेकिन इसके साथ श्रमिक शोषण, पारंपरिक आजीविका पर दबाव और शहरी समस्याएँ भी सामने आईं।

22. महत्वपूर्ण तिथियाँ

वर्ष घटना
18वीं शताब्दी ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति का विकास तेज हुआ
1733 जॉन के का फ्लाइंग शटल
1760 के दशक स्पिनिंग जेनी का विकास
18वीं शताब्दी का उत्तरार्ध जेम्स वाट द्वारा भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधार
1854 बंबई में पहली सफल आधुनिक सूती मिलों में से एक की स्थापना
19वीं शताब्दी का मध्य बंगाल में आधुनिक जूट उद्योग का विकास
1905 स्वदेशी आंदोलन का विस्तार
1907 टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना
1914–1918 प्रथम विश्व युद्ध; भारतीय उद्योगों की माँग में वृद्धि

महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

व्यक्ति योगदान
जॉन के फ्लाइंग शटल से संबंधित
जेम्स हरग्रीव्स स्पिनिंग जेनी का विकास
रिचर्ड आर्कराइट वाटर फ्रेम से संबंधित
सैमुअल क्रॉम्पटन स्पिनिंग म्यूल से संबंधित
एडमंड कार्टराइट पावर लूम से संबंधित
जेम्स वाट भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधार
जमशेदजी टाटा भारत के आधुनिक औद्योगिक विकास के प्रमुख अग्रदूत

23. महत्वपूर्ण शब्दावली

औद्योगीकरण:
मशीनों और कारखानों पर आधारित बड़े पैमाने के उत्पादन के विस्तार की प्रक्रिया।
आजीविका:
जीवन-यापन के लिए आय प्राप्त करने का साधन।
पूँजी:
उत्पादन या व्यापार में निवेश किए जाने वाले धन और संसाधन।
कुटीर उद्योग:
घर या छोटे स्तर पर कम पूँजी और पारिवारिक श्रम की सहायता से चलने वाला उद्योग।
कारखाना प्रणाली:
एक स्थान पर मशीनों और मजदूरों की सहायता से बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की व्यवस्था।
नगरीकरण:
शहरी आबादी तथा शहरों के आर्थिक-सामाजिक महत्व में वृद्धि।
स्वदेशी:
अपने देश में बनी वस्तुओं को अपनाने और देशी उद्योगों को प्रोत्साहित करने की भावना।
जॉबर:
औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए मजदूरों की भर्ती कराने वाला मध्यस्थ।

24. परीक्षा के लिए VVI Points

  • औद्योगिक क्रांति का प्रारंभिक प्रमुख केंद्र – ब्रिटेन
  • औद्योगीकरण में सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती उद्योग – वस्त्र उद्योग
  • स्पिनिंग जेनी – जेम्स हरग्रीव्स
  • भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधार – जेम्स वाट
  • भारत का प्रमुख प्रारंभिक आधुनिक सूती उद्योग केंद्र – बंबई
  • जूट उद्योग का प्रमुख क्षेत्र – बंगाल/हुगली क्षेत्र
  • TISCO की स्थापना – 1907
  • स्वदेशी आंदोलन का महत्वपूर्ण वर्ष – 1905
  • प्रथम विश्व युद्ध – 1914–1918
  • कारखानों के लिए मजदूर भर्ती करने वाला मध्यस्थ – जॉबर

25. महत्वपूर्ण लघु प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. औद्योगीकरण क्या है?
उत्तर: मशीनों और कारखानों की सहायता से बड़े पैमाने पर उत्पादन के विस्तार की प्रक्रिया को औद्योगीकरण कहते हैं।
प्रश्न 2. आजीविका का क्या अर्थ है?
उत्तर: जिस काम या साधन से व्यक्ति जीवन-यापन के लिए आय प्राप्त करता है, उसे आजीविका कहते हैं।
प्रश्न 3. औद्योगिक क्रांति सबसे पहले कहाँ विकसित हुई?
उत्तर: औद्योगिक क्रांति का प्रारंभिक और प्रमुख विकास ब्रिटेन में हुआ।
प्रश्न 4. स्पिनिंग जेनी का विकास किसने किया?
उत्तर: स्पिनिंग जेनी का विकास जेम्स हरग्रीव्स ने किया।
प्रश्न 5. भाप इंजन का औद्योगीकरण में क्या महत्व था?
उत्तर: भाप इंजन ने मशीनों को अधिक प्रभावी ढंग से चलाना संभव बनाया। इसका उपयोग उद्योग, रेलवे और जहाजों में हुआ, जिससे उत्पादन और परिवहन दोनों का विस्तार हुआ।
प्रश्न 6. कारखाना प्रणाली क्या है?
उत्तर: वह उत्पादन व्यवस्था जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर एक निश्चित स्थान पर मशीनों की सहायता से वस्तुओं का उत्पादन करते हैं, कारखाना प्रणाली कहलाती है।
प्रश्न 7. भारतीय कारीगरों की आजीविका क्यों प्रभावित हुई?
उत्तर: ब्रिटेन में मशीन से बने कपड़े बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में आने लगे। इससे भारतीय हस्तनिर्मित वस्तुओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिली और अनेक कारीगरों की आय प्रभावित हुई।
प्रश्न 8. भारत में सूती वस्त्र उद्योग का प्रमुख प्रारंभिक केंद्र कौन था?
उत्तर: बंबई भारत में आधुनिक सूती वस्त्र उद्योग का प्रमुख प्रारंभिक केंद्र था।
प्रश्न 9. TISCO की स्थापना कब हुई?
उत्तर: टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना 1907 में हुई।
प्रश्न 10. स्वदेशी आंदोलन से भारतीय उद्योगों को कैसे लाभ हुआ?
उत्तर: स्वदेशी आंदोलन ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया। इससे देशी वस्तुओं की माँग को प्रोत्साहन मिला।
प्रश्न 11. प्रथम विश्व युद्ध से भारतीय उद्योगों को क्या अवसर मिला?
उत्तर: युद्ध के दौरान ब्रिटेन से वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई और युद्ध संबंधी वस्तुओं की माँग बढ़ी। इससे भारतीय उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिला।
प्रश्न 12. जॉबर कौन था?
उत्तर: जॉबर वह मध्यस्थ था जो कारखानों के लिए मजदूरों की भर्ती कराने में सहायता करता था।
प्रश्न 13. मशीनों के बाद भी कुटीर उद्योग क्यों बने रहे?
उत्तर: स्थानीय माँग, विशेष डिजाइन, कम पूँजी, पारिवारिक श्रम और हाथ से बनी वस्तुओं की विशेष गुणवत्ता के कारण कुटीर उद्योग बने रहे।
प्रश्न 14. नगरीकरण क्या है?
उत्तर: शहरों की जनसंख्या और उनके आर्थिक-सामाजिक महत्व में वृद्धि की प्रक्रिया को नगरीकरण कहते हैं।

26. दीर्घ उत्तरीय महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. औद्योगिक क्रांति के कारण और प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

औद्योगिक क्रांति के विकास के पीछे पूँजी, कच्चे माल, कोयला और लोहा, बड़े बाजार, तकनीकी आविष्कार तथा परिवहन सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

नई मशीनों के प्रयोग से उत्पादन तेजी से बढ़ा।

कारखाना प्रणाली का विकास हुआ।

गाँवों से लोग रोजगार की तलाश में औद्योगिक शहरों की ओर जाने लगे।

इससे नगरीकरण बढ़ा और नया मजदूर वर्ग विकसित हुआ।

दूसरी ओर शुरुआती दौर में मजदूरों को लंबे कार्य समय, कम मजदूरी और खराब जीवन परिस्थितियों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

इस प्रकार औद्योगिक क्रांति ने अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को गहराई से बदल दिया।

प्रश्न 2. औद्योगीकरण का भारतीय कुटीर उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

भारत लंबे समय से सूती और रेशमी वस्त्र तथा अन्य हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध था।

ब्रिटेन में औद्योगीकरण के बाद मशीन से बने कपड़ों का उत्पादन तेजी से बढ़ा।

ब्रिटिश निर्मित कपड़े बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में आने लगे।

भारतीय बुनकरों और कारीगरों के लिए इन वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया।

कई कारीगरों की आय और पारंपरिक आजीविका प्रभावित हुई।

फिर भी कुटीर उद्योग पूरी तरह समाप्त नहीं हुए क्योंकि विशेष डिजाइन, स्थानीय बाजार और हाथ से बने उत्पादों की माँग बनी रही।

प्रश्न 3. भारत में आधुनिक उद्योगों के विकास का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

19वीं शताब्दी के मध्य से भारत में आधुनिक उद्योगों का विकास तेज हुआ।

बंबई सूती वस्त्र उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र बना।

बंगाल के हुगली क्षेत्र में जूट उद्योग का विस्तार हुआ।

रेलवे और उद्योगों के विकास से कोयले की माँग बढ़ी।

1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना हुई और लौह-इस्पात उद्योग के विकास को गति मिली।

भारतीय व्यापारियों और उद्यमियों ने भी उद्योगों में पूँजी निवेश किया।

स्वदेशी आंदोलन और प्रथम विश्व युद्ध जैसी परिस्थितियों ने भी भारतीय उद्योगों के विकास को नए अवसर प्रदान किए।

प्रश्न 4. औद्योगीकरण ने मजदूरों के जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया?

उत्तर:

औद्योगीकरण से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।

गाँवों से लोग काम की तलाश में शहरों की ओर गए।

लेकिन शुरुआती कारखानों में काम की परिस्थितियाँ कठिन थीं।

काम के घंटे लंबे और मजदूरी कम हो सकती थी।

महिलाओं और बच्चों को भी कम मजदूरी पर काम कराया जाता था।

तेजी से बढ़ते औद्योगिक शहरों में आवास और स्वच्छता जैसी समस्याएँ भी थीं।

बाद में श्रमिक आंदोलनों और कानूनों के माध्यम से इन परिस्थितियों में सुधार के प्रयास हुए।

27. Quick Revision – पूरा Chapter एक नजर में

औद्योगीकरण का आसान क्रम

घरेलू उत्पादन

नई मशीनों का विकास

भाप शक्ति का उपयोग

कारखाना प्रणाली

बड़े पैमाने पर उत्पादन

मजदूर वर्ग का विस्तार

औद्योगिक शहरों का विकास

भारत में बदलाव का क्रम

प्रसिद्ध भारतीय हस्तशिल्प

ब्रिटेन में मशीन आधारित उत्पादन

ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं का भारतीय बाजार में विस्तार

भारतीय कारीगरों पर दबाव

भारत में आधुनिक मिलों का विकास

स्वदेशी से देशी उद्योगों को प्रोत्साहन

प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय उद्योगों को नए अवसर

10 बातें जरूर याद रखें

  1. औद्योगीकरण का अर्थ मशीन और कारखाना आधारित उत्पादन का विस्तार है।
  2. औद्योगिक क्रांति का प्रारंभिक प्रमुख केंद्र ब्रिटेन था।
  3. वस्त्र उद्योग औद्योगिक क्रांति के शुरुआती प्रमुख उद्योगों में था।
  4. जेम्स वाट भाप इंजन में महत्वपूर्ण सुधारों से जुड़े थे।
  5. कारखानों के विकास से मजदूर वर्ग बढ़ा।
  6. औद्योगीकरण के साथ नगरीकरण भी बढ़ा।
  7. ब्रिटिश मशीन निर्मित वस्तुओं से भारतीय हस्तशिल्प को प्रतिस्पर्धा मिली।
  8. बंबई सूती वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र बना।
  9. 1907 में TISCO की स्थापना हुई।
  10. स्वदेशी आंदोलन और प्रथम विश्व युद्ध ने भारतीय उद्योगों को नए अवसर दिए।