निर्माण उद्योग
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Bihar Board Class 10 Geography | BSEB EXAM GUIDE
📘 अध्याय परिचय
निर्माण उद्योग किसी देश के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। कृषि तथा खनिजों से प्राप्त कच्चे माल को मशीनों और श्रम की सहायता से अधिक उपयोगी एवं मूल्यवान वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया विनिर्माण कहलाती है।
सूती वस्त्र, चीनी, लोहा-इस्पात, सीमेंट, कागज, मशीन तथा अन्य वस्तुओं का उत्पादन निर्माण उद्योगों द्वारा किया जाता है। उद्योग रोजगार, व्यापार, परिवहन तथा नगरीकरण के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अध्याय में पढ़ेंगे
1. निर्माण उद्योग क्या है?
जिस आर्थिक गतिविधि में कच्चे पदार्थों का रूप बदलकर उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है, वह निर्माण या विनिर्माण उद्योग कहलाता है।
कच्चा माल → तैयार माल
| कच्चा माल | तैयार वस्तु |
|---|---|
| कपास | सूती वस्त्र |
| गन्ना | चीनी |
| लौह अयस्क | लोहा एवं इस्पात |
| चूना पत्थर | सीमेंट |
| लकड़ी / बाँस | कागज |
2. निर्माण उद्योग का महत्व
किसी देश की अर्थव्यवस्था में निर्माण उद्योगों का विशेष महत्व होता है। ये प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल का मूल्य बढ़ाते हैं।
- कृषि के आधुनिकीकरण में सहायता करते हैं।
- बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराते हैं।
- कच्चे माल का मूल्य बढ़ाते हैं।
- राष्ट्रीय आय बढ़ाने में योगदान करते हैं।
- व्यापार एवं परिवहन के विकास को बढ़ावा देते हैं।
- नगरीकरण को गति देते हैं।
- देश को विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हैं।
- निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा प्राप्त करने में योगदान करते हैं।
3. उद्योगों का वर्गीकरण
(क) कच्चे माल के आधार पर
कृषि आधारित उद्योग
जिन उद्योगों को कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है।
उदाहरण: सूती वस्त्र, चीनी, जूट, खाद्य प्रसंस्करण।
खनिज आधारित उद्योग
जिन उद्योगों में खनिज कच्चे माल के रूप में उपयोग होते हैं।
उदाहरण: लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम।
(ख) आकार के आधार पर
लघु उद्योग
कम पूँजी, कम श्रमिक और अपेक्षाकृत छोटे स्तर पर उत्पादन करने वाले उद्योग।
वृहद उद्योग
अधिक पूँजी, आधुनिक मशीनों और बड़ी संख्या में श्रमिकों वाले उद्योग।
(ग) स्वामित्व के आधार पर
- निजी क्षेत्र: व्यक्ति या निजी कंपनी के स्वामित्व वाला उद्योग।
- सार्वजनिक क्षेत्र: सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाला उद्योग।
- संयुक्त क्षेत्र: सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की भागीदारी वाला उद्योग।
- सहकारी क्षेत्र: उत्पादकों या सदस्यों द्वारा मिलकर संचालित उद्योग।
(घ) तैयार वस्तु के आधार पर
आधारभूत उद्योग
ऐसे उद्योग जिनका उत्पादन अन्य उद्योगों के लिए आधार या कच्चा माल बनता है।
उदाहरण: लोहा एवं इस्पात उद्योग।
उपभोक्ता उद्योग
ऐसे उद्योग जो सीधे उपभोक्ताओं के उपयोग की वस्तुएँ तैयार करते हैं।
उदाहरण: वस्त्र, साबुन, खाद्य पदार्थ आदि।
4. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक
उद्योग कहीं भी स्थापित नहीं किए जाते। उद्योगों की स्थापना के लिए अनेक भौगोलिक और आर्थिक कारकों पर विचार किया जाता है।
कच्चा माल
भारी या शीघ्र खराब होने वाले कच्चे माल वाले उद्योग स्रोत के निकट लगाए जा सकते हैं।
ऊर्जा
मशीनों और उत्पादन प्रक्रिया को चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा आवश्यक है।
श्रम
कुशल एवं अकुशल श्रमिकों की उपलब्धता उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है।
पूँजी
उद्योग स्थापित करने और चलाने के लिए पर्याप्त निवेश आवश्यक होता है।
परिवहन
कच्चा माल लाने और तैयार माल बाजार तक पहुँचाने के लिए परिवहन आवश्यक है।
बाजार
तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
जल
कई उद्योगों में उत्पादन, सफाई और शीतलन के लिए जल की आवश्यकता होती है।
सरकारी नीति
सरकारी सुविधाएँ, आधारभूत संरचना और नीतियाँ औद्योगिक विकास को प्रभावित करती हैं।
5. कृषि आधारित उद्योग
जिन उद्योगों को अपना प्रमुख कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है उन्हें कृषि आधारित उद्योग कहा जाता है।
सूती वस्त्र उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग भारत के प्रमुख कृषि आधारित उद्योगों में से एक है। इसका मुख्य कच्चा माल कपास है।
अवस्थिति के प्रमुख कारक
- कपास की उपलब्धता
- आर्द्र जलवायु
- श्रम
- बाजार
- परिवहन
- पूँजी
सूती वस्त्र उद्योग का विकास महाराष्ट्र, गुजरात तथा देश के अनेक अन्य भागों में हुआ है।
जूट उद्योग
जूट एक प्राकृतिक रेशा है। इससे बोरे, रस्सियाँ, चटाइयाँ तथा पैकिंग सामग्री आदि तैयार की जाती हैं।
जूट उद्योग का प्रमुख संकेंद्रण पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के आसपास के क्षेत्र में रहा है।
इस क्षेत्र में उद्योग के विकास के कारण
- जूट उत्पादक क्षेत्रों की निकटता
- पर्याप्त जल
- श्रम की उपलब्धता
- परिवहन सुविधा
- बंदरगाह की सुविधा
- बाजार की उपलब्धता
चीनी उद्योग
चीनी उद्योग का प्रमुख कच्चा माल गन्ना है। गन्ना खेत से काटने के बाद जल्दी प्रसंस्करण की मांग करता है, इसलिए चीनी मिलों की अवस्थिति गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के निकट लाभकारी होती है।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक आदि राज्यों में चीनी उद्योग का विकास हुआ है।
6. खनिज आधारित उद्योग
जिन उद्योगों में खनिजों का उपयोग प्रमुख कच्चे माल के रूप में किया जाता है, वे खनिज आधारित उद्योग कहलाते हैं।
लोहा एवं इस्पात उद्योग
लोहा एवं इस्पात उद्योग आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण उद्योग है। इस्पात का उपयोग मशीन, रेलवे, वाहन, भवन, पुल और अनेक उद्योगों में होता है।
आवश्यक कच्चे पदार्थ एवं सुविधाएँ
- लौह अयस्क
- कोयला
- चूना पत्थर
- ऊर्जा
- जल
- परिवहन
- श्रम
- बाजार
भारत के कुछ प्रमुख लौह-इस्पात केंद्र
- जमशेदपुर
- बोकारो
- भिलाई
- राउरकेला
- दुर्गापुर
- बर्नपुर
- विशाखापत्तनम
एल्युमिनियम उद्योग
एल्युमिनियम का प्रमुख कच्चा माल बॉक्साइट है। एल्युमिनियम हल्का, मजबूत और विद्युत का अच्छा चालक है।
इसका उपयोग विमान, वाहन, विद्युत उपकरण, तार, बर्तन और अनेक औद्योगिक वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है।
सीमेंट उद्योग
सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर प्रमुख कच्चा माल है। सीमेंट भवन, सड़क, पुल, बाँध और अन्य निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक है।
प्रमुख कच्चे पदार्थ
- चूना पत्थर
- सिलिका
- एल्यूमिना
- जिप्सम
7. अन्य महत्वपूर्ण निर्माण उद्योग
रासायनिक उद्योग
रासायनिक उद्योग अनेक प्रकार के औद्योगिक एवं उपभोक्ता उत्पाद तैयार करता है। उर्वरक, रंग, दवाएँ, प्लास्टिक और अन्य रसायन इसके उदाहरण हैं।
मोटर वाहन उद्योग
इस उद्योग में कार, ट्रक, बस, दोपहिया वाहन तथा विभिन्न मोटर वाहन उपकरणों का निर्माण किया जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक उद्योग
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, संचार उपकरण, कंप्यूटर तथा अन्य आधुनिक उपकरणों का निर्माण इस क्षेत्र से संबंधित है।
कागज उद्योग
कागज उद्योग में बाँस, लकड़ी, घास तथा पुनर्चक्रित कागज जैसे कच्चे पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
8. औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के कारण
जब किसी क्षेत्र में अनेक उद्योग एक साथ विकसित हो जाते हैं तो वहाँ औद्योगिक क्षेत्र या औद्योगिक समूह का विकास होता है।
औद्योगिक समूह बनने के प्रमुख कारण
- कच्चे माल की उपलब्धता
- ऊर्जा की उपलब्धता
- अच्छा परिवहन नेटवर्क
- बड़ा बाजार
- कुशल श्रम
- बैंकिंग एवं वित्तीय सुविधाएँ
- संचार व्यवस्था
- सरकारी सहायता
9. उद्योग और पर्यावरण प्रदूषण
उद्योग आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन यदि औद्योगिक अपशिष्टों का उचित प्रबंधन न किया जाए तो पर्यावरण प्रदूषण उत्पन्न हो सकता है।
औद्योगिक प्रदूषण के प्रमुख प्रकार
वायु प्रदूषण
कारखानों से निकलने वाला धुआँ, धूल तथा विभिन्न गैसें वायु को प्रदूषित कर सकती हैं।
जल प्रदूषण
बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल स्रोतों में छोड़े जाने से जल प्रदूषण होता है।
भूमि प्रदूषण
ठोस औद्योगिक कचरे और रसायनों के अनुचित निपटान से भूमि प्रभावित हो सकती है।
ध्वनि प्रदूषण
मशीनों, जनरेटर तथा अन्य औद्योगिक गतिविधियों से अत्यधिक शोर उत्पन्न हो सकता है।
10. औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय
- अपशिष्ट जल को उपचारित करने के बाद ही बाहर छोड़ना चाहिए।
- कारखानों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।
- जल का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण करना चाहिए।
- ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना चाहिए।
- स्वच्छ एवं ऊर्जा-कुशल तकनीक अपनानी चाहिए।
- कारखानों के आसपास हरित पट्टी विकसित करनी चाहिए।
- ध्वनि प्रदूषण कम करने के उपाय अपनाने चाहिए।
- पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए।
11. महत्वपूर्ण अंतर
कृषि आधारित एवं खनिज आधारित उद्योग
| कृषि आधारित उद्योग | खनिज आधारित उद्योग |
|---|---|
| कच्चा माल कृषि से मिलता है। | कच्चा माल खनिजों से मिलता है। |
| सूती वस्त्र, चीनी, जूट आदि। | लोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम आदि। |
लघु एवं वृहद उद्योग
| लघु उद्योग | वृहद उद्योग |
|---|---|
| कम पूँजी की आवश्यकता। | अधिक पूँजी की आवश्यकता। |
| छोटे स्तर पर उत्पादन। | बड़े स्तर पर उत्पादन। |
| श्रम एवं मशीनों की संख्या अपेक्षाकृत कम। | बड़े पैमाने पर श्रम और मशीनों का उपयोग। |
12. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
13. अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. विनिर्माण किसे कहते हैं?
उत्तर: कच्चे माल को मशीन, श्रम और तकनीक की सहायता से अधिक उपयोगी और मूल्यवान तैयार वस्तु में बदलने की प्रक्रिया विनिर्माण कहलाती है।
प्रश्न 2. कृषि आधारित उद्योग क्या है?
उत्तर: जिस उद्योग को कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है, उसे कृषि आधारित उद्योग कहते हैं।
प्रश्न 3. दो कृषि आधारित उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर: सूती वस्त्र उद्योग और चीनी उद्योग।
प्रश्न 4. दो खनिज आधारित उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर: लोहा-इस्पात उद्योग और सीमेंट उद्योग।
प्रश्न 5. लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि इसके उत्पादों का उपयोग अनेक अन्य उद्योगों में मशीन, उपकरण और कच्चे माल के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 6. एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क कौन-सा है?
उत्तर: बॉक्साइट।
प्रश्न 7. सीमेंट उद्योग का प्रमुख कच्चा माल क्या है?
उत्तर: चूना पत्थर।
प्रश्न 8. चीनी उद्योग का मुख्य कच्चा माल क्या है?
उत्तर: गन्ना।
प्रश्न 9. जूट उद्योग का प्रमुख क्षेत्र कौन-सा है?
उत्तर: पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के आसपास का क्षेत्र।
प्रश्न 10. उद्योगों की अवस्थिति के चार प्रमुख कारक लिखिए।
उत्तर: कच्चा माल, ऊर्जा, परिवहन और बाजार।
प्रश्न 11. औद्योगिक प्रदूषण के चार प्रकार कौन-से हैं?
उत्तर: वायु, जल, भूमि और ध्वनि प्रदूषण।
प्रश्न 12. सूती वस्त्र उद्योग का मुख्य कच्चा माल क्या है?
उत्तर: कपास।
14. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. निर्माण उद्योग का महत्व बताइए।
उत्तर:
निर्माण उद्योग किसी देश के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। यह कृषि एवं खनिजों से प्राप्त कच्चे माल को अधिक मूल्यवान तैयार वस्तुओं में बदलता है।
उद्योग रोजगार उपलब्ध कराते हैं, राष्ट्रीय आय में योगदान करते हैं, कृषि के आधुनिकीकरण में सहायता करते हैं तथा व्यापार और परिवहन को बढ़ावा देते हैं। औद्योगिक विकास से विभिन्न वस्तुओं का घरेलू उत्पादन बढ़ता है और निर्यात के अवसर भी विकसित होते हैं।
प्रश्न 2. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उद्योगों की अवस्थिति कच्चे माल, ऊर्जा, श्रम, पूँजी, जल, परिवहन, बाजार तथा सरकारी नीति जैसे कारकों से प्रभावित होती है।
उद्योगों को कच्चा माल और ऊर्जा नियमित रूप से चाहिए। तैयार वस्तुओं को बाजार तक पहुँचाने के लिए अच्छी परिवहन व्यवस्था आवश्यक है। कुशल श्रमिक, पर्याप्त पूँजी और बाजार की उपलब्धता भी औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है।
प्रश्न 3. लोहा एवं इस्पात उद्योग का महत्व बताइए।
उत्तर:
लोहा एवं इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग कहा जाता है क्योंकि इसके उत्पाद अनेक अन्य उद्योगों के लिए आवश्यक होते हैं।
इस्पात का उपयोग मशीन, रेलवे, वाहन, भवन, पुल, कृषि उपकरण तथा भारी इंजीनियरिंग उद्योगों में किया जाता है। इसलिए लोहा-इस्पात उद्योग देश के औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है।
प्रश्न 4. औद्योगिक प्रदूषण के प्रमुख प्रकार बताइए।
उत्तर:
उद्योगों से मुख्य रूप से वायु, जल, भूमि और ध्वनि प्रदूषण हो सकता है। कारखानों का धुआँ वायु को प्रभावित करता है। बिना उपचारित अपशिष्ट जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकता है।
ठोस औद्योगिक कचरा भूमि को प्रभावित करता है जबकि भारी मशीनों और उपकरणों से ध्वनि प्रदूषण हो सकता है। इसलिए उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण तकनीक अपनाना आवश्यक है।
प्रश्न 5. औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर:
औद्योगिक अपशिष्ट जल को उपचारित करके ही बाहर छोड़ना चाहिए। जल का पुनर्चक्रण करना चाहिए तथा कारखानों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए जाने चाहिए।
ठोस कचरे का वैज्ञानिक निपटान, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, ऊर्जा दक्ष तकनीक, हरित पट्टी का विकास और पर्यावरणीय नियमों का पालन करके औद्योगिक प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
15. Quick Revision
विनिर्माण → कच्चे माल को तैयार वस्तु में बदलना
कपास → सूती वस्त्र
गन्ना → चीनी
जूट → बोरे एवं पैकिंग सामग्री
लौह अयस्क → लोहा-इस्पात
बॉक्साइट → एल्युमिनियम
चूना पत्थर → सीमेंट
लोहा-इस्पात → आधारभूत उद्योग
चीनी → कृषि आधारित उद्योग
सीमेंट → खनिज आधारित उद्योग
जमशेदपुर एवं बोकारो → प्रमुख इस्पात केंद्र
हुगली क्षेत्र → जूट उद्योग
प्रमुख औद्योगिक प्रदूषण → वायु, जल, भूमि, ध्वनि
🎯 परीक्षा के लिए जरूर याद करें
उद्योगों का वर्गीकरण, उद्योगों की अवस्थिति के कारक, सूती वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, जूट उद्योग, लोहा-इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग और औद्योगिक प्रदूषण से प्रश्न बनने की संभावना रहती है। इनके मुख्य बिंदुओं को जरूर याद करें।

