Class 10 Science Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन Notes in Hindi

Class 10 Science Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन Notes in Hindi

Class 10 Science Chapter 16 – प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन Management of Natural Resources

प्रकृति से प्राप्त वे सभी पदार्थ और ऊर्जा के स्रोत जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। जल, वायु, मिट्टी, वन, वन्यजीव, कोयला और पेट्रोलियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। इसलिए उनका उपयोग केवल वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर करना आवश्यक है। इसी कारण संसाधनों का संरक्षण और सतत प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1. प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)

परिभाषा: प्रकृति में उपलब्ध वे पदार्थ, जीव तथा ऊर्जा के स्रोत जिनका उपयोग मनुष्य और अन्य जीव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं, प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) कहलाते हैं।

प्रमुख प्राकृतिक संसाधन हैं:

  • वायु (Air)
  • जल (Water)
  • मिट्टी (Soil)
  • वन (Forests)
  • वन्यजीव (Wildlife)
  • खनिज (Minerals)
  • कोयला (Coal)
  • पेट्रोलियम (Petroleum)
  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
  • सूर्य का प्रकाश (Sunlight)

मानव जीवन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। इसलिए इनका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग पर्यावरण तथा मानव समाज दोनों के लिए समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है।

2. प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण

प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण Classification of Natural Resources
प्राकृतिक संसाधनों का वर्गीकरण

उपलब्धता और पुनः निर्माण की क्षमता के आधार पर प्राकृतिक संसाधनों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जा सकता है।

(A) नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources)

वे प्राकृतिक संसाधन जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा अपेक्षाकृत कम समय में पुनः प्राप्त या पुनः निर्मित हो सकते हैं, नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।

उदाहरण – सूर्य का प्रकाश, पवन ऊर्जा, जल तथा उचित प्रबंधन के अंतर्गत वन।

(B) अनवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resources)

वे संसाधन जिनके निर्माण में बहुत लंबा समय लगता है तथा जिनका भंडार सीमित होता है, अनवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।

उदाहरण – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा अनेक खनिज।

नवीकरणीय संसाधन अनवीकरणीय संसाधन
प्राकृतिक रूप से पुनः उपलब्ध हो सकते हैं। इनका भंडार सीमित होता है।
उचित उपयोग से लंबे समय तक उपलब्ध रह सकते हैं। अत्यधिक उपयोग से समाप्त हो सकते हैं।
सौर ऊर्जा, पवन, जल आदि उदाहरण हैं। कोयला और पेट्रोलियम प्रमुख उदाहरण हैं।

3. प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की आवश्यकता

मानव जनसंख्या में वृद्धि, औद्योगीकरण और जीवन-स्तर में परिवर्तन के कारण प्राकृतिक संसाधनों की माँग लगातार बढ़ी है। यदि संसाधनों का उपयोग अनियंत्रित ढंग से किया जाए तो भविष्य में उनकी कमी हो सकती है।

प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रबंधन की आवश्यकता इसलिए है ताकि:

  • संसाधनों का अत्यधिक दोहन रोका जा सके।
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहें।
  • पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
  • जैव विविधता की रक्षा की जा सके।
  • प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति कम की जा सके।
  • संसाधनों का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँच सके।
महत्वपूर्ण: प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन केवल संसाधनों को बचाना नहीं है, बल्कि उनका विवेकपूर्ण, न्यायसंगत और दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित करना भी है।

4. सतत विकास (Sustainable Development)

ऐसा विकास जिसमें वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकताओं को पूरा करे, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता न करे, सतत विकास (Sustainable Development) कहलाता है।

सतत विकास का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है।

इसके लिए आवश्यक है:

  • प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।
  • ऊर्जा और जल की बचत।
  • नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना।
  • वनों और जैव विविधता की रक्षा।
  • कचरे और प्रदूषण को कम करना।
  • पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना।

5. 3R सिद्धांत – Reduce, Reuse और Recycle

3R Reduce Reuse Recycle
3R सिद्धांत – Reduce, Reuse और Recycle

1. Reduce – कम उपयोग करना

संसाधनों तथा अनावश्यक वस्तुओं का उपयोग कम करना Reduce कहलाता है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव तथा उत्पन्न होने वाले कचरे दोनों में कमी आती है।

उदाहरण – आवश्यकता न होने पर बिजली बंद करना, पानी व्यर्थ न बहाना और एकल-उपयोग वाली वस्तुओं का उपयोग कम करना।

2. Reuse – पुनः उपयोग

किसी वस्तु को तुरंत फेंकने के बजाय उसे दोबारा या किसी दूसरे उद्देश्य से उपयोग करना Reuse कहलाता है।

उदाहरण – काँच की बोतलों, डिब्बों, कपड़ों और थैलों का दोबारा उपयोग।

3. Recycle – पुनर्चक्रण

उपयोग की जा चुकी सामग्री को संसाधित करके उससे नई उपयोगी वस्तुएँ बनाना Recycle कहलाता है।

कागज, काँच, धातु और कुछ प्रकार के प्लास्टिक का पुनर्चक्रण किया जा सकता है।

परीक्षा बिंदु: 3R में प्राथमिकता सामान्यतः Reduce → Reuse → Recycle के क्रम में समझी जाती है, क्योंकि सबसे पहले संसाधनों की खपत और कचरे की उत्पत्ति कम करना बेहतर है।

6. वन एवं वन्यजीव (Forests and Wildlife)

वन पारितंत्र एवं वन संरक्षण Forest Ecosystem and Conservation
वन पारितंत्र एवं वन संरक्षण

वन केवल लकड़ी प्राप्त करने का स्रोत नहीं हैं। वे एक जटिल पारितंत्र हैं जिसमें पौधे, जीव-जंतु, सूक्ष्मजीव और अजैविक घटक एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।

वनों का महत्व

  • जैव विविधता को आश्रय प्रदान करते हैं।
  • मिट्टी के कटाव को कम करने में सहायता करते हैं।
  • जल चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • वायुमंडलीय गैसों के संतुलन में योगदान करते हैं।
  • स्थानीय समुदायों को भोजन, ईंधन और अन्य वन उत्पाद देते हैं।
  • अनेक जीवों को प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं।

वन्यजीव संरक्षण

वन्य जीवों और उनके प्राकृतिक आवासों को मानवीय गतिविधियों से होने वाली हानि से बचाने तथा उनकी प्रजातियों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया वन्यजीव संरक्षण कहलाती है।

किसी प्रजाति की रक्षा केवल उस जीव को बचाने से संभव नहीं है। उसके प्राकृतिक आवास तथा उससे जुड़े पूरे पारितंत्र की रक्षा भी आवश्यक है।

7. वन के हितधारक (Stakeholders of Forests)

वे व्यक्ति, समुदाय या संस्थाएँ जिनका वन संसाधनों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित जुड़ा होता है, हितधारक (Stakeholders) कहलाते हैं।
वन के हितधारक Stakeholders of Forests
वनों से जुड़े प्रमुख हितधारक

1. स्थानीय लोग

वनों के आसपास रहने वाले लोग ईंधन, चारा, फल, औषधीय पौधों और अन्य वन उत्पादों के लिए वनों पर निर्भर हो सकते हैं।

2. वन विभाग

वन विभाग का कार्य वन क्षेत्र का प्रबंधन, संरक्षण तथा वन संसाधनों के नियंत्रित उपयोग से जुड़ा होता है।

3. उद्योग

कुछ उद्योग लकड़ी, कागज, बाँस और अन्य वन उत्पादों को कच्चे माल के रूप में उपयोग करते हैं।

4. वन्यजीव एवं प्रकृति प्रेमी

इनका प्रमुख उद्देश्य जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक पारितंत्रों का संरक्षण करना होता है।

वनों का सफल प्रबंधन तभी संभव है जब स्थानीय समुदायों सहित सभी संबंधित हितधारकों की आवश्यकताओं और संरक्षण के उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाया जाए।

8. वनों का सतत प्रबंधन

वन संसाधनों का ऐसा उपयोग जिसमें वन से आवश्यक उत्पाद भी प्राप्त हों और वन पारितंत्र की दीर्घकालिक क्षमता तथा जैव विविधता भी सुरक्षित रहे, वनों का सतत प्रबंधन कहलाता है।

इसके लिए निम्न उपाय उपयोगी हैं:

  • अनियंत्रित पेड़ कटाई रोकना।
  • वृक्षारोपण और पुनर्वनीकरण को बढ़ावा देना।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण में शामिल करना।
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना।
  • वनाग्नि तथा अवैध कटाई पर नियंत्रण रखना।
  • वन उत्पादों का नियंत्रित और विवेकपूर्ण उपयोग करना।

9. चिपको आंदोलन (Chipko Movement)

चिपको आंदोलन Chipko Movement
चिपको आंदोलन – वन संरक्षण का प्रसिद्ध उदाहरण

चिपको आंदोलन वन संरक्षण से जुड़ा एक प्रसिद्ध जन आंदोलन था। इसमें स्थानीय लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों ने पेड़ों की कटाई का विरोध किया।

पेड़ों को काटे जाने से बचाने के लिए लोग पेड़ों से चिपक गए। इसी कारण इस आंदोलन को चिपको आंदोलन कहा गया।

चिपको आंदोलन का महत्व

  • वन संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी।
  • स्थानीय समुदायों की भूमिका सामने आई।
  • वनों के अंधाधुंध दोहन के प्रभाव पर ध्यान गया।
  • प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग का संदेश मिला।
याद रखें: चिपको आंदोलन यह दर्शाता है कि स्थानीय समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

10. जल एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन

जल एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है, लेकिन उपयोग योग्य मीठे जल की उपलब्धता सीमित है। इसलिए जल का संरक्षण और उचित प्रबंधन आवश्यक है।

जल का उपयोग पीने, घरेलू कार्यों, कृषि, उद्योग और विद्युत उत्पादन सहित अनेक कार्यों में किया जाता है।

जल संकट के प्रमुख कारण

  • जनसंख्या वृद्धि।
  • भूजल का अत्यधिक दोहन।
  • जल प्रदूषण।
  • जल का अनावश्यक अपव्यय।
  • वर्षा जल का पर्याप्त संचयन न होना।
  • जल स्रोतों का अनुचित प्रबंधन।

11. बाँध एवं जल संसाधन (Dams and Water Resources)

जल संसाधन एवं बांध Water Resources and Dams
बाँध द्वारा जल संग्रह, सिंचाई और विद्युत उत्पादन
नदी के प्रवाह को रोककर या नियंत्रित करके जल को संग्रहित करने के लिए बनाई गई बड़ी संरचना को बाँध (Dam) कहते हैं।

बाँधों के लाभ

  • सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराना।
  • जल विद्युत उत्पादन में सहायता।
  • कुछ क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण में सहायता।
  • घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए जल संग्रह।

बड़े बाँधों से जुड़ी समस्याएँ

बड़े बाँध कई लाभ देते हैं, लेकिन उनके निर्माण से सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

  • बड़े क्षेत्रों का जलमग्न होना।
  • वनों और प्राकृतिक आवासों की हानि।
  • स्थानीय लोगों का विस्थापन।
  • जैव विविधता पर प्रभाव।
  • पुनर्वास से जुड़ी सामाजिक समस्याएँ।
बाँधों के मूल्यांकन में केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि सामाजिक, पर्यावरणीय और दीर्घकालिक प्रभावों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

12. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)

वर्षा के जल को एकत्र करके भविष्य के उपयोग के लिए संग्रहित करने या उसे भूमि में पहुँचाकर भूजल को पुनर्भरित करने की प्रक्रिया वर्षा जल संचयन कहलाती है।
वर्षा जल संचयन Rainwater Harvesting
छत आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली

छत आधारित वर्षा जल संचयन

छत → पाइप → फिल्टर → भंडारण टैंक / Recharge Pit → भूजल

घर या भवन की छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपों की सहायता से एकत्र किया जाता है। उचित छनन के बाद इसे टैंक में संग्रहित किया जा सकता है या भूमि में पहुँचाकर भूजल स्तर को पुनर्भरित किया जा सकता है।

वर्षा जल संचयन के लाभ

  • भूजल पुनर्भरण में सहायता।
  • स्थानीय जल उपलब्धता बढ़ सकती है।
  • भूजल पर निर्भरता कम हो सकती है।
  • वर्षा जल का उपयोगी संरक्षण होता है।
  • जल संकट वाले क्षेत्रों में उपयोगी है।
स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वर्षा जल संचयन की तकनीक अलग-अलग हो सकती है। पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियाँ भी स्थानीय जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

13. कोयला एवं पेट्रोलियम (Coal and Petroleum)

कोयला एवं पेट्रोलियम Coal and Petroleum
कोयला एवं पेट्रोलियम – सीमित जीवाश्म ईंधन

कोयला और पेट्रोलियम महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन हैं। इनका निर्माण प्राचीन जीवों के अवशेषों से भूगर्भीय परिस्थितियों में लाखों वर्षों में हुआ है।

जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels): प्राचीन जीवों के अवशेषों से बहुत लंबे समय में बने ईंधन, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं।

कोयला

कोयला ऊर्जा उत्पादन तथा अनेक औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है। यह एक सीमित अनवीकरणीय संसाधन है।

पेट्रोलियम

पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल तथा अनेक अन्य उपयोगी पदार्थ प्राप्त किए जाते हैं। परिवहन तथा उद्योग में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

इनका संरक्षण क्यों आवश्यक है?

  • इनका भंडार सीमित है।
  • इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं।
  • इनके दहन से वायु प्रदूषक उत्पन्न हो सकते हैं।
  • जीवाश्म ईंधनों के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है।
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है।

14. कोयला और पेट्रोलियम का संरक्षण

इन संसाधनों को बचाने के लिए हम निम्न उपाय अपना सकते हैं:

  • अनावश्यक वाहन उपयोग कम करना।
  • जहाँ संभव हो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना।
  • ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग करना।
  • बिजली की अनावश्यक खपत रोकना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना।
  • ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
ध्यान दें: अनवीकरणीय संसाधनों का संरक्षण केवल उनके समाप्त होने के खतरे के कारण नहीं, बल्कि उनके उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए भी आवश्यक है।

15. प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन

प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन Sustainable Management of Natural Resources
प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन
प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा योजनाबद्ध और विवेकपूर्ण उपयोग जिससे वर्तमान आवश्यकताएँ पूरी हों, पर्यावरणीय संतुलन बना रहे तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन उपलब्ध रहें, प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन कहलाता है।

सतत प्रबंधन के मुख्य उद्देश्य

  • संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण।
  • संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।
  • पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना।
  • जैव विविधता की रक्षा करना।
  • प्रदूषण को कम करना।
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के हितों में संतुलन रखना।

16. संसाधन प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भूमिका

स्थानीय समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के निकट रहते हैं और अक्सर उनकी आजीविका भी इन्हीं संसाधनों पर निर्भर करती है। इसलिए संरक्षण योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।

स्थानीय ज्ञान का उपयोग करके वन, जल और अन्य संसाधनों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों का सफल संरक्षण केवल सरकारी नियमों से संभव नहीं है। स्थानीय समुदाय, सरकार, वैज्ञानिक, उद्योग और सामान्य नागरिक – सभी की भागीदारी आवश्यक है।

17. वन संरक्षण और वृक्षारोपण में अंतर

वन संरक्षण वृक्षारोपण
मौजूदा प्राकृतिक वन और उसके पारितंत्र की रक्षा करना। किसी क्षेत्र में नए पेड़ लगाना।
इसमें जैव विविधता और प्राकृतिक आवास की रक्षा शामिल है। मुख्य उद्देश्य पेड़ों की संख्या बढ़ाना हो सकता है।
पूरे वन पारितंत्र पर ध्यान दिया जाता है। मुख्यतः पौधारोपण पर ध्यान दिया जाता है।

18. नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों में अंतर

आधार नवीकरणीय अनवीकरणीय
पुनः उपलब्धता प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनः उपलब्ध हो सकते हैं। मानवीय समयमान पर शीघ्र पुनः उपलब्ध नहीं होते।
भंडार उचित प्रबंधन पर लंबे समय तक उपयोग संभव। भंडार सीमित होता है।
उदाहरण सौर, पवन, जल कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस

19. परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए।
  • सतत विकास में वर्तमान और भविष्य दोनों पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है।
  • 3R का अर्थ Reduce, Reuse और Recycle है।
  • वन जैव विविधता के महत्वपूर्ण भंडार हैं।
  • वन प्रबंधन में स्थानीय समुदाय महत्वपूर्ण हितधारक हैं।
  • चिपको आंदोलन वन संरक्षण से संबंधित था।
  • बड़े बाँध लाभ के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न कर सकते हैं।
  • वर्षा जल संचयन भूजल पुनर्भरण में सहायक हो सकता है।
  • कोयला और पेट्रोलियम अनवीकरणीय जीवाश्म ईंधन हैं।
  • कोयला और पेट्रोलियम बनने में लाखों वर्ष लगते हैं।
  • संसाधनों का सतत प्रबंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।

20. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. प्राकृतिक संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: प्रकृति में उपलब्ध वे पदार्थ और ऊर्जा स्रोत जिनका उपयोग जीव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं।

प्रश्न 2. सतत विकास क्या है?

उत्तर: ऐसा विकास जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ पूरी की जाएँ, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता न किया जाए, सतत विकास कहलाता है।

प्रश्न 3. 3R से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: 3R का अर्थ Reduce, Reuse और Recycle है। इसका उद्देश्य संसाधनों की खपत और कचरे की मात्रा कम करना है।

प्रश्न 4. Reduce क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: Reduce के द्वारा संसाधनों का अनावश्यक उपयोग कम होता है तथा कचरे की उत्पत्ति भी कम होती है। इसलिए यह संसाधन संरक्षण का प्रभावी उपाय है।

प्रश्न 5. वन के प्रमुख हितधारक कौन हैं?

उत्तर: स्थानीय लोग, वन विभाग, वन उत्पादों पर निर्भर उद्योग तथा वन्यजीव एवं प्रकृति संरक्षण में रुचि रखने वाले समूह प्रमुख हितधारक हैं।

प्रश्न 6. चिपको आंदोलन क्या था?

उत्तर: चिपको आंदोलन वन संरक्षण से जुड़ा जन आंदोलन था जिसमें स्थानीय लोग पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उनसे चिपक गए थे।

प्रश्न 7. बाँधों के दो लाभ लिखिए।

उत्तर: बाँध सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने तथा जल विद्युत उत्पादन में सहायक होते हैं। वे जल संग्रह में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 8. बड़े बाँधों की दो समस्याएँ लिखिए।

उत्तर: बड़े बाँधों से भूमि और वन क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं तथा स्थानीय लोगों का विस्थापन हो सकता है। प्राकृतिक आवास और जैव विविधता भी प्रभावित हो सकती है।

प्रश्न 9. वर्षा जल संचयन क्या है?

उत्तर: वर्षा के जल को संग्रहित करके भविष्य में उपयोग करने या उसे भूमि में पहुँचाकर भूजल को पुनर्भरित करने की प्रक्रिया वर्षा जल संचयन कहलाती है।

प्रश्न 10. वर्षा जल संचयन के क्या लाभ हैं?

उत्तर: इससे वर्षा जल का संरक्षण होता है, भूजल पुनर्भरण में सहायता मिलती है और स्थानीय जल स्रोतों पर दबाव कम किया जा सकता है।

प्रश्न 11. कोयला और पेट्रोलियम को जीवाश्म ईंधन क्यों कहते हैं?

उत्तर: क्योंकि इनका निर्माण प्राचीन जीवों के अवशेषों से भूगर्भीय परिस्थितियों में लाखों वर्षों की प्रक्रिया से हुआ है।

प्रश्न 12. कोयला और पेट्रोलियम का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर: इनके भंडार सीमित हैं और इनके निर्माण में लाखों वर्ष लगते हैं। साथ ही इनके दहन से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

प्रश्न 13. नवीकरणीय संसाधन क्या हैं?

उत्तर: वे संसाधन जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा अपेक्षाकृत कम समय में पुनः उपलब्ध हो सकते हैं, नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।

प्रश्न 14. अनवीकरणीय संसाधन क्या हैं?

उत्तर: वे संसाधन जिनका भंडार सीमित होता है तथा जिनके पुनर्निर्माण में बहुत लंबा समय लगता है, अनवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।

प्रश्न 15. प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का क्या अर्थ है?

उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा विवेकपूर्ण और योजनाबद्ध उपयोग जिससे वर्तमान आवश्यकताएँ पूरी हों, पर्यावरणीय संतुलन बना रहे तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन उपलब्ध रहें, सतत संसाधन प्रबंधन कहलाता है।

21. दीर्घ उत्तरीय महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न: प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की आवश्यकता समझाइए।

उत्तर: प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन और विकास का आधार हैं। लेकिन अनेक संसाधन सीमित हैं और उनका अत्यधिक दोहन पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसलिए संसाधनों का प्रबंधन आवश्यक है ताकि उनका विवेकपूर्ण उपयोग हो, प्रदूषण कम हो, जैव विविधता सुरक्षित रहे और भविष्य की पीढ़ियों को भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकें। संसाधन प्रबंधन में पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक सभी पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।

प्रश्न: वनों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?

उत्तर: वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों का जीवन वन संसाधनों से निकटता से जुड़ा होता है। उन्हें स्थानीय पर्यावरण, पौधों और संसाधनों के उपयोग का व्यावहारिक ज्ञान होता है। यदि स्थानीय लोगों को संरक्षण और प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए तो वन संसाधनों का उपयोग अधिक संतुलित और दीर्घकालिक तरीके से किया जा सकता है। चिपको आंदोलन स्थानीय भागीदारी की महत्ता का एक प्रसिद्ध उदाहरण है।

प्रश्न: जल संरक्षण में वर्षा जल संचयन की भूमिका समझाइए।

उत्तर: वर्षा जल संचयन में वर्षा के पानी को व्यर्थ बहने देने के बजाय एकत्र किया जाता है। इसे टैंक में संग्रहित किया जा सकता है या जमीन में पहुँचाकर भूजल को पुनर्भरित किया जा सकता है। इससे भूजल पर दबाव कम करने, स्थानीय जल उपलब्धता बढ़ाने और जल संकट कम करने में सहायता मिल सकती है।

22. Quick Revision

  • Natural Resources: प्रकृति से प्राप्त उपयोगी संसाधन।
  • Renewable Resources: प्राकृतिक रूप से पुनः उपलब्ध होने वाले संसाधन।
  • Non-Renewable Resources: सीमित और बहुत धीरे बनने वाले संसाधन।
  • Sustainable Development: वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं की क्षमता सुरक्षित रखना।
  • 3R: Reduce → Reuse → Recycle.
  • Forest: जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण पारितंत्र।
  • Stakeholders: वन संसाधनों से हित रखने वाले व्यक्ति या समूह।
  • Chipko Movement: वन संरक्षण से संबंधित जन आंदोलन।
  • Dam: नदी के जल को संग्रहित और नियंत्रित करने वाली संरचना।
  • Rainwater Harvesting: वर्षा जल का संग्रह और भूजल पुनर्भरण।
  • Coal & Petroleum: अनवीकरणीय जीवाश्म ईंधन।
  • Sustainable Management: संसाधनों का दीर्घकालिक, विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग।

23. One-Line Final Revision

1. प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन का आधार हैं।

2. संसाधनों का अनियंत्रित दोहन भविष्य के लिए हानिकारक है।

3. 3R संसाधन संरक्षण का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

4. वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

5. चिपको आंदोलन वन संरक्षण से संबंधित है।

6. वर्षा जल संचयन जल संरक्षण का प्रभावी तरीका है।

7. बड़े बाँधों के लाभ के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव भी होते हैं।

8. कोयला और पेट्रोलियम सीमित जीवाश्म ईंधन हैं।

9. संसाधनों का संरक्षण वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए आवश्यक है।

10. सतत प्रबंधन का लक्ष्य विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बनाना है।