Bihar Board Class 10 Sanskrit | पीयूषम्
पाठ 13 – विश्वशान्तिः
Class 10 Sanskrit Chapter 13 Vishwashanti Notes in Hindi
हिंदी अनुवाद | शब्दार्थ | व्याकरण | प्रश्न उत्तर | MCQ
विषय-सूची
1. पाठ परिचय 2. हिंदी सारांश 3. मूल पाठ एवं हिंदी अनुवाद 4. शब्दार्थ 5. संधि-विच्छेद 6. समास 7. प्रकृति-प्रत्यय 8. मौखिक अभ्यास 9. लिखित अभ्यास 10. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 11. 20 Objective Questions 12. Quick Revision 13. FAQs1. विश्वशान्तिः – पाठ परिचय
विश्वशान्तिः बिहार बोर्ड कक्षा 10 की संस्कृत पुस्तक पीयूषम् का तेरहवाँ पाठ है। इसमें संसार में बढ़ती अशांति, देशों के बीच संघर्ष, शीतयुद्ध, आपसी अविश्वास और शांति स्थापित करने के उपायों का वर्णन किया गया है।
पाठ में बताया गया है कि मानवता की रक्षा और विश्वकल्याण के लिए युद्ध तथा द्वेष का त्याग करना आवश्यक है। भारत की प्राचीन परंपरा मैत्री, करुणा और अहिंसा का संदेश देती है।
पाठ – विश्वशान्तिः
कक्षा – 10
पुस्तक – पीयूषम्
पाठ संख्या – 13
पृष्ठ – 104–111
मुख्य विषय – विश्व शांति और मानव कल्याण
मुख्य संदेश – द्वेष का त्याग, मैत्री, करुणा और शांति
2. विश्वशान्तिः का हिंदी सारांश
वर्तमान संसार में लगभग सभी देशों में अशांति दिखाई देती है। कहीं युद्ध चल रहा है, तो कहीं देश के भीतर संघर्ष की स्थिति है। कुछ देशों में आपसी शीतयुद्ध चल रहा है। इसके कारण पूरा संसार अशांति के समुद्र के समान दिखाई देता है।
आज संसार में अनेक विनाशकारी हथियार बनाए जा रहे हैं। ये हथियार मानवता के लिए गंभीर खतरा हैं। विभिन्न देशों के बीच स्वार्थ, ईर्ष्या, असहिष्णुता और प्रतिस्पर्धा के कारण संघर्ष उत्पन्न होता है।
पाठ के अनुसार अशांति के कारणों को दूर करने के लिए पहले उनके मूल कारणों को समझना चाहिए। स्वार्थ और ईर्ष्या का त्याग करके परस्पर सहयोग और सद्भावना को बढ़ाना आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ विश्वशांति के लिए प्रयास करती हैं। भारत की परंपरा भी शांति और मैत्री पर आधारित रही है। महात्मा बुद्ध ने वैर को अवैर अर्थात् प्रेम और मैत्री से शांत करने का उपदेश दिया।
इस प्रकार पाठ हमें सिखाता है कि विश्वशांति के लिए सभी देशों और मनुष्यों को आपसी वैमनस्य छोड़कर करुणा, सहिष्णुता, न्याय और सहयोग अपनाना चाहिए।
3. मूल पाठ के प्रमुख अंश एवं हिंदी अनुवाद
अनुच्छेद 1 – संसार में अशांति
अनुच्छेद 2 – शीतयुद्ध और विनाशकारी अस्त्र
अनुच्छेद 3 – अशांति के कारण
अनुच्छेद 4 – स्वार्थ और ईर्ष्या
अनुच्छेद 5 – विश्वशांति के प्रयास
अनुच्छेद 6 – संयुक्त राष्ट्र और शांति
अनुच्छेद 7 – महात्मा बुद्ध का संदेश
अनुच्छेद 8 – भारतीय नीति का संदेश
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
अनुच्छेद 9 – शांति का महत्व
4. महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दार्थ
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| वा | अथवा |
| आश्रित्य | सहारा लेकर |
| मौद्यमानानि | आनन्दित |
| कलहम् | झगड़ा, विवाद |
| वर्धयन्ति | बढ़ाते हैं |
| शीतयुद्धम् | शीतयुद्ध |
| कूलम् | किनारा |
| विश्वध्वंसकानि | नष्ट करने वाले |
| निवारणम् | दूर करना |
| असहिष्णुता | दूसरे की उन्नति न सहना |
| विरलाः | बहुत कम |
| प्रत्युत | बल्कि |
| शमयितुम् | शांत करने के लिए |
| प्रभृतयः | इत्यादि |
| पुराकाले | प्राचीन काल में |
| करुणया | दया से |
| लघुचेतसाम् | छोटी सोच वालों का |
| निजः | अपना |
| वसुधा | पृथ्वी |
| निरन्तरम् | लगातार |
| अध्यासीनः | विराजमान |
| परोपकारः | दूसरों की भलाई |
| उत्कर्षः | उन्नति |
| स्वार्थः | अपना हित |
| द्वेषः | ईर्ष्या, शत्रुता |
| नीतिः | नीति |
| शान्तिः | शांति |
5. संधि-विच्छेद
पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 106–107 में दिए गए प्रमुख संधि-विच्छेद:
| संधियुक्त पद | संधि-विच्छेद |
|---|---|
| अशान्तिर्वा | अशान्तिः + वा |
| क्वचिदेव | क्वचित् + एव |
| अशान्तिश्च | अशान्तिः + च |
| विश्वविध्वंसकान्यस्त्राणि | विश्वविध्वंसकानि + अस्त्राणि |
| बहून्याविष्कृतानि | बहूनि + आविष्कृतानि |
| तैरेव | तैः + एव |
| निवारणोपायश्च | निवारण + उपायः + च |
| उपायोऽपि | उपायः + अपि |
| स्वार्थश्च | स्व + अर्थः + च |
| विश्वस्मिन्नपि | विश्वस्मिन् + अपि |
| परोपकारम् | पर + उपकारम् |
| कार्यान्वयनञ्च | कार्यान्वयनम् + च |
| जीवनैर्निर्वाह्यम् | जीवनैः + निर्वाह्यम् |
| बलञ्च | बलम् + च |
| भवतीति | भवति + इति |
| वेति | वा + इति |
| वसुधैव | वसुधा + एव |
| अद्यापि | अद्य + अपि |
6. समास – समास विग्रह
| समस्त पद | समास-विग्रह | समास |
|---|---|---|
| अशान्तिः | न शान्तिः | नञ् समास |
| महापुरुषः | महान् चासौ पुरुषः | कर्मधारय |
| शत्रुरूपाणि | शत्रोः रूपाणि | षष्ठी तत्पुरुष |
| अशान्तिसागरः | अशान्तेः सागरः | षष्ठी तत्पुरुष |
| शीतयुद्धम् | शीतं च तत् युद्धम् | कर्मधारय |
| स्वार्थोपदेशः | स्वार्थस्य उपदेशः | षष्ठी तत्पुरुष |
| परोपकारः | परस्य उपकारः | षष्ठी तत्पुरुष |
| विश्वशान्तिः | विश्वस्य शान्तिः | षष्ठी तत्पुरुष |
| असम्भवम् | न सम्भवम् | नञ् समास |
| स्वार्थप्रेरितः | स्वार्थेन प्रेरितः | तृतीया तत्पुरुष |
| सूर्योदयः | सूर्यस्य उदयः | षष्ठी तत्पुरुष |
| परपीडनम् | परस्य पीडनम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| मानवताविनाशाय | मानवतायाः विनाशाय | षष्ठी तत्पुरुष |
7. प्रकृति-प्रत्यय विभाग
| पद | प्रकृति + प्रत्यय |
|---|---|
| आश्रित्य | आ + श्रि + ल्यप् |
| दृष्ट्वा | दृश् + क्त्वा |
| उत्कृष्य | उत् + कृष् + ल्यप् |
| उक्तम् | वच् + क्त |
| शमयितुम् | शम् + णिच् + तुमुन् |
| शमनम् | शम् + ल्युट् |
| नीतिः | नी + क्तिन् |
| शान्तिः | शम् + क्तिन् |
| उत्कर्षः | उत् + कृष् + घञ् |
| भयम् | भी + अच् |
| प्रेरितः | प्र + ईर् + क्त |
| भारः | भृ + घञ् |
8. मौखिक अभ्यास – पृष्ठ 108–109
प्रश्न 1 – एकपदेन उत्तरं वदत
(क) शत्रुरूपाणि किं वर्धयन्ति?
उत्तरम् – कलहम्।
(ख) अनेकेषु राज्येषु परस्परं किं प्रचलति?
उत्तरम् – शीतयुद्धम्।
(ग) सर्वं किं त्यजेयुः?
उत्तरम् – स्वार्थम्।
(घ) वैरेण कस्य शमनम् असम्भवम्?
उत्तरम् – वैरस्य।
(ङ) क्रियाविना किं भारः?
उत्तरम् – ज्ञानम्।
प्रश्न 2 – प्रकृति-प्रत्यय विभाग
| पद | प्रकृति-प्रत्यय |
|---|---|
| नीतिः | नी + क्तिन् |
| उक्तम् | वच् + क्त |
| दृष्ट्वा | दृश् + क्त्वा |
| शमनम् | शम् + ल्युट् |
| आश्रित्य | आ + श्रि + ल्यप् |
9. लिखित अभ्यास – पृष्ठ 109–111
प्रश्न 1 – संस्कृतभाषायाम् उत्तराणि लिखत
(क) अशान्तिसागरस्य कूलमध्यस्थानीव कः दृश्यते?
उत्तरम् – संसारः अशान्तिसागरस्य कूलमध्यस्थानीव दृश्यते।
(ख) अद्य विश्वध्वंसकानि कानि आविष्कृतानि सन्ति?
उत्तरम् – अद्य विश्वध्वंसकानि बहूनि अस्त्राणि आविष्कृतानि सन्ति।
(ग) अशान्तेः कारणद्वयं किम् अस्ति?
उत्तरम् – द्वेषः असहिष्णुता च अशान्तेः कारणद्वयम् अस्ति।
(घ) असहिष्णुतां कः जनयति?
उत्तरम् – द्वेषः असहिष्णुतां जनयति।
(ङ) कः बलपूर्वकं निवारणीयः?
उत्तरम् – द्वेषः बलपूर्वकं निवारणीयः।
प्रश्न 2 – शब्दानां संस्कृते प्रयोगं कुरुत
अयम्
अयं छात्रः पठति।
अशान्तिः
युद्धेन अशान्तिः वर्धते।
मैत्री
मैत्री शान्तेः कारणं भवति।
उत्कर्षम्
सर्वे देशस्य उत्कर्षम् इच्छन्ति।
प्रेरकः
शिक्षकः छात्राणां प्रेरकः अस्ति।
परोपकारः
परोपकारः महान् गुणः अस्ति।
प्रश्न 3 – संधि-विच्छेदं कुरुत
| पद | विच्छेद |
|---|---|
| परोपकारः | पर + उपकारः |
| निवारणोपायश्च | निवारण + उपायः + च |
| विश्वस्मिन्नपि | विश्वस्मिन् + अपि |
| उक्तञ्च | उक्तम् + च |
| भवतीति | भवति + इति |
| वसुधैव | वसुधा + एव |
| जीवनैर्निर्वाह्यम् | जीवनैः + निर्वाह्यम् |
प्रश्न 4 – रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्ननिर्माण
(क) कारणं ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते।
प्रश्नः – कस्मिन् ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते?
(ख) सर्वेषु देशेषु अशान्तिः दृश्यते।
प्रश्नः – कुत्र अशान्तिः दृश्यते?
(ग) स्वार्थः वैरं प्रवर्धयति।
प्रश्नः – कः वैरं प्रवर्धयति?
(घ) राजनीतिज्ञाः अत्र विशेषेण प्रेरकाः।
प्रश्नः – के अत्र विशेषेण प्रेरकाः?
(ङ) सामान्याः जनाः न तथा विश्वस्मिन्नपि बलेन प्रेरिताः जायन्ते।
प्रश्नः – के न तथा विश्वस्मिन्नपि बलेन प्रेरिताः जायन्ते?
प्रश्न 5 – प्रकृति-प्रत्यय विभाग
| पद | उत्तर |
|---|---|
| उक्तम् | वच् + क्त |
| नीतिः | नी + क्तिन् |
| भारः | भृ + घञ् |
| शमनम् | शम् + ल्युट् |
| शान्तिः | शम् + क्तिन् |
| आश्रित्य | आ + श्रि + ल्यप् |
प्रश्न 6 – समास-विग्रह
| समस्त पद | विग्रह |
|---|---|
| अशान्तेः | न शान्तेः |
| बलेन | यह असमस्त पद है |
| महापुरुषाः | महान्तः पुरुषाः |
| वैरस्य | यह असमस्त पद है |
| द्वेषी | यह असमस्त पद है |
| अपरस्य | यह असमस्त पद है |
| संकटकाले | संकटस्य काले |
प्रश्न 7 – एकवचन से बहुवचन में परिवर्तन
(क) विद्वान् कथयति।
विद्वांसः कथयन्ति।
(ख) जनः जानाति।
जनाः जानन्ति।
(ग) भारतीयः नीतिकारः उद्बोधयति।
भारतीयाः नीतिकाराः उद्बोधयन्ति।
(घ) देशः प्रेरयति।
देशाः प्रेरयन्ति।
(ङ) सः उत्कर्षं मन्यते।
ते उत्कर्षं मन्यन्ते।
(च) त्वं कुत्र गच्छसि?
यूयं कुत्र गच्छथ?
प्रश्न 8 – विपरीतार्थक शब्द
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| स्वार्थः | परमार्थः |
| बलम् | निर्बलम् |
| सामान्यः | विशेषः |
| उत्कर्षः | अपकर्षः |
| द्वेषः | मैत्री |
| शीतम् | उष्णम् |
| विश्वध्वंसम् | विश्वकल्याणम् |
प्रश्न 9 – रिक्तस्थान पूर्ति
दिए गए पद – क्वचिदेव, वैरस्य, विरलाः, सावधानतया, पर्याप्तः।
(क) अशान्तेः कारणं तथा निवारणोपायश्च ________ चिन्तनीयौ।
उत्तरम् – सावधानतया।
(ख) अवैरेण करुणया मैत्रीभावेन च ________ शान्तिः भवति।
उत्तरम् – वैरस्य।
(ग) अत्र महापुरुषाः ________ सन्ति।
उत्तरम् – विरलाः।
(घ) शुष्कः उपदेशः न ________।
उत्तरम् – पर्याप्तः।
(ङ) ________ शान्तं वातावरणं वर्तते।
उत्तरम् – क्वचिदेव।
योग्यता विस्तार
पाठ्यपुस्तक में विश्वशांति और मानव कल्याण पर विचार करने के लिए कहा गया है। विद्यार्थी निम्नलिखित विषयों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिख सकते हैं:
विश्वशांति: विश्वशांति का अर्थ संसार के देशों और लोगों के बीच हिंसा, युद्ध तथा शत्रुता का अभाव और सहयोगपूर्ण जीवन है।
धर्म और शांति: सत्य, अहिंसा, करुणा, क्षमा और मैत्री जैसे मानवीय गुण शांति स्थापित करने में सहायक हैं।
10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
1. विश्वशान्तिः पाठ का मुख्य विषय क्या है?
विश्व में अशांति के कारण और शांति स्थापित करने के उपाय।
2. अशांति के दो मुख्य कारण कौन-से हैं?
द्वेष और असहिष्णुता।
3. शीतयुद्ध का क्या अर्थ है?
देशों के बीच प्रत्यक्ष युद्ध के बिना राजनीतिक और सामरिक तनाव की स्थिति।
4. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कौन-सी अंतरराष्ट्रीय संस्था स्थापित हुई?
संयुक्त राष्ट्र।
5. महात्मा बुद्ध ने वैर समाप्त करने का क्या उपाय बताया?
अवैर, करुणा और मैत्रीभाव।
6. वसुधैव कुटुम्बकम् का अर्थ क्या है?
पूरी पृथ्वी एक परिवार है।
7. एक देश दूसरे देश की उन्नति से ईर्ष्या क्यों करता है?
स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और असहिष्णुता के कारण।
8. विश्वशांति के लिए किन गुणों की आवश्यकता है?
मैत्री, सहिष्णुता, करुणा, परोपकार और सहयोग।
9. पाठ में उपदेश के साथ किस बात पर बल दिया गया है?
उपदेशों को व्यवहार में लागू करने पर।
10. विश्वशांति का अंतिम उद्देश्य क्या है?
मानवता की रक्षा और सभी का कल्याण।
11. Important Objective Questions – 20 MCQ
सही उत्तर देखने के लिए View Answer पर क्लिक करें।
1. विश्वशान्तिः किस कक्षा का पाठ है?
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C. 10
2. विश्वशान्तिः किस पुस्तक का पाठ है?
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A. पीयूषम्
3. विश्वशान्तिः पाठ की संख्या क्या है?
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D. 13
4. वर्तमान संसार में क्या दिखाई देता है?
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B. अशांति
5. ‘शीतयुद्धम्’ का अर्थ क्या है?
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B. शीतयुद्ध
6. अशांति का मुख्य कारण क्या है?
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C. द्वेष
7. असहिष्णुता का अर्थ क्या है?
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B. दूसरे की उन्नति न सहना
8. ‘कलहम्’ का अर्थ क्या है?
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B. विवाद
9. ‘कूलम्’ का अर्थ क्या है?
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B. किनारा
10. ‘निवारणम्’ का अर्थ क्या है?
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B. दूर करना
11. विश्वशांति के लिए कौन-सी संस्था प्रयास करती है?
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A. संयुक्त राष्ट्र
12. भगवान बुद्ध ने वैर को किससे शांत करने की शिक्षा दी?
View Answer
C. करुणा और मैत्री से
13. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का अर्थ क्या है?
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B. पृथ्वी एक परिवार है
14. ‘अयं निजः परो वेति’ किस विचार का विरोध करता है?
View Answer
B. संकीर्ण अपना-पराया भाव
15. ‘अशान्तिर्वा’ का संधि-विच्छेद क्या है?
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A. अशान्तिः + वा
16. ‘वसुधैव’ का संधि-विच्छेद क्या है?
View Answer
A. वसुधा + एव
17. ‘विश्वशान्तिः’ में कौन-सा समास है?
View Answer
B. षष्ठी तत्पुरुष
18. ‘दृष्ट्वा’ में कौन-सा प्रत्यय है?
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B. क्त्वा
19. ‘शान्तिः’ शब्द किस धातु से बना है?
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B. शम्
20. विश्वशान्तिः पाठ की मुख्य शिक्षा क्या है?
View Answer
C. मैत्री, करुणा और शांति
12. Quick Revision – एक नजर में
| विषय | उत्तर |
|---|---|
| पाठ | विश्वशान्तिः |
| अध्याय | 13 |
| कक्षा | 10 |
| पुस्तक | पीयूषम् |
| पृष्ठ | 104–111 |
| मुख्य समस्या | विश्व में अशांति |
| मुख्य कारण | द्वेष और असहिष्णुता |
| अंतरराष्ट्रीय संस्था | संयुक्त राष्ट्र |
| बुद्ध का संदेश | वैर का अंत अवैर से |
| भारतीय आदर्श | वसुधैव कुटुम्बकम् |
| शांति के साधन | मैत्री, करुणा, सहयोग |
13. Frequently Asked Questions
विश्वशान्तिः किस कक्षा का पाठ है?
बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत का तेरहवाँ पाठ है।
विश्वशान्तिः पाठ किस पुस्तक में है?
पीयूषम् पुस्तक में।
विश्व में अशांति के मुख्य कारण क्या हैं?
द्वेष, असहिष्णुता, स्वार्थ और आपसी संघर्ष।
विश्वशांति स्थापित करने के क्या उपाय हैं?
मैत्री, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता और परस्पर सहयोग।
वसुधैव कुटुम्बकम् का अर्थ क्या है?
सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है।
महात्मा बुद्ध का शांति संबंधी संदेश क्या है?
शत्रुता का अंत शत्रुता से नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मैत्री से होता है।
14. पाठ्यपुस्तक संदर्भ
पुस्तक: पीयूषम्
कक्षा: 10
अध्याय: 13 – विश्वशान्तिः
पृष्ठ: 104–111
विषय: विश्वशांति, युद्ध, अशांति, मैत्री और मानवकल्याण
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