Class 10 Political Science Chapter 5 लोकतंत्र की चुनौतियाँ Notes in Hindi

Class 10 Political Science Chapter 5 लोकतंत्र की चुनौतियाँ Notes in Hindi
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लोकतंत्र की चुनौतियाँ

Chapter 5 – सम्पूर्ण हिंदी नोट्स

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अध्याय परिचय

लोकतंत्र एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें जनता की भागीदारी, प्रतिनिधित्व, अधिकार और जवाबदेही को महत्व दिया जाता है। लेकिन केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित हो जाने से सभी समस्याएँ अपने-आप समाप्त नहीं हो जातीं।

लोकतंत्र को बेहतर बनाने के लिए उसकी कमियों और चुनौतियों को पहचानना और उनमें सुधार करना आवश्यक होता है। इस अध्याय में हम लोकतंत्र के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों तथा लोकतांत्रिक सुधारों को समझेंगे।

मुख्य बात: लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इसमें सरकार, राजनीतिक संस्थाओं और नागरिकों—सभी की भूमिका होती है।

इस अध्याय में पढ़ेंगे

1. लोकतांत्रिक चुनौती क्या है?

लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने आने वाली ऐसी समस्या, जिसका समाधान लोकतंत्र को अधिक प्रभावी, समावेशी और मजबूत बना सकता है, लोकतांत्रिक चुनौती कहलाती है।

हर देश में लोकतंत्र की चुनौतियाँ एक जैसी नहीं होतीं। किसी देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करना बड़ी चुनौती हो सकती है, जबकि किसी दूसरे देश में पहले से स्थापित लोकतंत्र को अधिक प्रभावी और सहभागी बनाना चुनौती हो सकती है।

समस्या की पहचान ↓ लोकतांत्रिक समाधान ↓ संस्थागत एवं सामाजिक सुधार ↓ बेहतर लोकतंत्र

2. लोकतंत्र की चुनौतियों के प्रमुख प्रकार

लोकतंत्र की चुनौतियों को समझने के लिए उन्हें व्यापक रूप से तीन प्रकारों में देखा जा सकता है।

01 आधारभूत चुनौती

लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने और उसे सुरक्षित करने से संबंधित चुनौती।

02 विस्तार की चुनौती

लोकतांत्रिक सिद्धांतों और अधिकारों को अधिक लोगों और संस्थाओं तक पहुँचाने की चुनौती।

03 लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती

लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक भागीदारी को अधिक प्रभावी बनाने की चुनौती।

3. आधारभूत चुनौती

जहाँ लोकतांत्रिक शासन स्थापित नहीं है या लोकतांत्रिक व्यवस्था अस्थिर है, वहाँ लोकतंत्र स्थापित करने और उसे सुरक्षित रखने से जुड़ी समस्याओं को आधारभूत चुनौती कहा जा सकता है।

इसमें मुख्य रूप से शामिल हो सकते हैं:

  • लोकतांत्रिक शासन की स्थापना।
  • नागरिकों को राजनीतिक अधिकार उपलब्ध कराना।
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था विकसित करना।
  • कानून के अनुसार शासन स्थापित करना।
  • लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्थिर बनाना।
आसान भाषा में: जहाँ लोकतंत्र ही ठीक से स्थापित नहीं है, वहाँ सबसे पहली चुनौती लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव तैयार करना है।

4. लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती

लोकतंत्र स्थापित हो जाने के बाद अगली चुनौती उसके लाभ और सिद्धांतों को समाज के सभी वर्गों और शासन के विभिन्न स्तरों तक पहुँचाना है।

लोकतांत्रिक अधिकारों, अवसरों और भागीदारी को अधिक नागरिकों, सामाजिक समूहों और संस्थाओं तक पहुँचाने की प्रक्रिया लोकतंत्र के विस्तार से जुड़ी है।

विस्तार की चुनौती के उदाहरण

  • सभी नागरिकों को प्रभावी राजनीतिक भागीदारी का अवसर देना।
  • स्थानीय शासन को प्रभावी बनाना।
  • कमजोर और वंचित वर्गों की भागीदारी बढ़ाना।
  • महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाना।
  • नागरिक अधिकारों की वास्तविक पहुँच सुनिश्चित करना।
अधिकार + प्रतिनिधित्व + भागीदारी ↓ लोकतंत्र का विस्तार

5. लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती

लोकतंत्र को केवल चुनाव तक सीमित न रखकर उसे शासन और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अधिक प्रभावी बनाना लोकतंत्र को गहरा करने से जुड़ा है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक जवाबदेह बनाना, नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और निर्णय प्रक्रिया पर कुछ सीमित समूहों के अत्यधिक प्रभाव को कम करने की दिशा में किए जाने वाले प्रयास लोकतंत्र को गहरा करने से जुड़े हैं।

इसके प्रमुख पक्ष

जवाबदेही

सरकार और संस्थाएँ जनता के प्रति अधिक जवाबदेह हों।

पारदर्शिता

शासन की प्रक्रियाओं और निर्णयों की जानकारी उपलब्ध हो।

जनभागीदारी

नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भाग लें।

समान अवसर

अलग-अलग सामाजिक समूहों को भागीदारी के उचित अवसर मिलें।

6. सामाजिक एवं आर्थिक असमानता

लोकतंत्र राजनीतिक समानता को महत्व देता है, लेकिन समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ बनी रह सकती हैं।

आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और संसाधनों तक पहुँच में बड़ा अंतर होने पर सभी नागरिक लोकतांत्रिक अवसरों का समान रूप से उपयोग नहीं कर पाते।

असमानता से जुड़ी प्रमुख समस्याएँ

  • गरीबी
  • बेरोजगारी
  • शिक्षा में असमान अवसर
  • स्वास्थ्य सुविधाओं तक असमान पहुँच
  • सामाजिक भेदभाव
  • आर्थिक संसाधनों का असमान वितरण
याद रखें: राजनीतिक समानता के साथ सामाजिक और आर्थिक अवसरों में सुधार की माँग लोकतंत्र के सामने महत्वपूर्ण चुनौती बनी रह सकती है।

7. सामाजिक विभाजन की चुनौती

समाज में भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्र, समुदाय और आर्थिक स्थिति के आधार पर विभिन्न पहचान और हित मौजूद हो सकते हैं।

जब इन भिन्नताओं का उपयोग तनाव, भेदभाव या बहिष्कार बढ़ाने के लिए होता है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

लोकतांत्रिक समाधान

  • सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान।
  • भेदभाव के विरुद्ध कानूनों का प्रभावी पालन।
  • विभिन्न समूहों को उचित प्रतिनिधित्व।
  • संवाद और शांतिपूर्ण समाधान।
  • संवैधानिक मूल्यों का सम्मान।

8. भ्रष्टाचार और पारदर्शिता

सार्वजनिक पद या अधिकार का अनुचित निजी लाभ के लिए उपयोग शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नागरिकों के विश्वास को कमजोर कर सकता है।

इसलिए पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी संस्थागत निगरानी लोकतांत्रिक शासन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

समस्या

सार्वजनिक संसाधनों या अधिकार का अनुचित उपयोग।

सुधार की दिशा

पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का प्रभावी पालन।

पारदर्शिता + जवाबदेही + नागरिक निगरानी ↓ बेहतर शासन

9. राजनीतिक दलों से जुड़ी चुनौतियाँ

प्रतिनिधि लोकतंत्र में राजनीतिक दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली का लोकतंत्र की गुणवत्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र

  • आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना।
  • निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना।
  • सदस्यों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • जनता के प्रति जवाबदेही बनाए रखना।
  • नीतिगत मुद्दों पर सार्थक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।

10. लोकतांत्रिक सुधार क्या है?

लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमियों को दूर करके उसे अधिक प्रभावी, जवाबदेह, सहभागी और समावेशी बनाने के लिए किए गए परिवर्तन लोकतांत्रिक सुधार कहलाते हैं।

लोकतांत्रिक सुधार केवल नए कानून बनाने तक सीमित नहीं होते। संस्थाओं की कार्यप्रणाली, नागरिक भागीदारी और राजनीतिक व्यवहार में सुधार भी महत्वपूर्ण है।

सुधार के प्रमुख माध्यम

कानूनी सुधार

आवश्यक कानून और नियम बनाना तथा उनका निष्पक्ष पालन करना।

संस्थागत सुधार

लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना।

राजनीतिक सुधार

राजनीतिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सहभागिता बढ़ाना।

सामाजिक सुधार

समानता, शिक्षा और नागरिक जागरूकता को बढ़ावा देना।

11. क्या केवल कानून से लोकतंत्र सुधर सकता है?

कानून लोकतांत्रिक सुधार का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है, लेकिन केवल कानून बना देना हर समस्या का पूरा समाधान नहीं होता।

कानून के साथ उसका प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत जवाबदेही, राजनीतिक इच्छाशक्ति और नागरिक जागरूकता भी महत्वपूर्ण होती है।

परीक्षा बिंदु: लोकतांत्रिक सुधार के लिए कानून आवश्यक हो सकता है, लेकिन उसके साथ सक्रिय नागरिक भागीदारी और संस्थाओं का प्रभावी काम करना भी जरूरी है।

12. लोकतंत्र को मजबूत करने में नागरिकों की भूमिका

लोकतंत्र की गुणवत्ता केवल सरकार या राजनीतिक दलों पर निर्भर नहीं करती। नागरिकों की सक्रिय और जिम्मेदार भागीदारी भी महत्वपूर्ण होती है।

01

मतदान करना
चुनावों में सोच-समझकर भाग लेना।

02

जानकारी प्राप्त करना
सार्वजनिक मुद्दों और नीतियों के बारे में जागरूक रहना।

03

प्रश्न पूछना
सरकार और प्रतिनिधियों से जवाबदेही की माँग करना।

04

शांतिपूर्ण भागीदारी
लोकतांत्रिक और संवैधानिक माध्यमों से अपनी बात रखना।

05

अधिकारों का सम्मान
अपने साथ-साथ दूसरे नागरिकों के अधिकारों का भी सम्मान करना।

06

सामाजिक जिम्मेदारी
समानता, सद्भाव और सार्वजनिक हित को महत्व देना।

13. लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका

लोकतंत्र को मजबूत बनाने में विभिन्न संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अपनी-अपनी भूमिका होती है।

विधायिका

कानून निर्माण, चर्चा और कार्यपालिका की जवाबदेही में भूमिका।

कार्यपालिका

कानून और सार्वजनिक नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी।

न्यायपालिका

कानून की व्याख्या और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अधिकारों की रक्षा में भूमिका।

चुनावी संस्थाएँ

लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया को संचालित करने में भूमिका।

स्थानीय शासन

स्थानीय स्तर पर नागरिक भागीदारी और शासन को बढ़ावा देना।

नागरिक समाज

सार्वजनिक मुद्दों पर जागरूकता, चर्चा और भागीदारी को बढ़ावा देना।

14. बेहतर लोकतंत्र की विशेषताएँ

एक बेहतर लोकतांत्रिक व्यवस्था से अपेक्षा की जाती है कि वह केवल नियमित चुनाव ही न कराए, बल्कि नागरिकों के अधिकार, भागीदारी और जवाबदेही को भी महत्व दे।

✓

स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव
नागरिकों को वास्तविक राजनीतिक विकल्प मिले।

✓

जवाबदेही
सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी हो।

✓

पारदर्शिता
शासन की प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध हो।

✓

समानता
सभी नागरिकों को समान राजनीतिक सम्मान मिले।

✓

अधिकार
नागरिक स्वतंत्रताओं और अधिकारों का सम्मान हो।

✓

भागीदारी
नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रहें।

15. लोकतंत्र की चुनौतियाँ – एक नजर में

चुनौती सुधार की दिशा
लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोरी संस्थाओं को स्वतंत्र, प्रभावी और जवाबदेह बनाना
सामाजिक असमानता समान अवसर और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना
आर्थिक असमानता शिक्षा, रोजगार और आवश्यक सेवाओं तक बेहतर पहुँच
भ्रष्टाचार पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी निगरानी
कम जनभागीदारी नागरिक जागरूकता और सहभागिता बढ़ाना
राजनीतिक प्रक्रियाओं में कम पारदर्शिता सूचना और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत करना
सामाजिक विभाजन संवाद, समानता और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देना

16. महत्वपूर्ण शब्दावली

लोकतांत्रिक चुनौती

ऐसी समस्या जिसका समाधान लोकतंत्र को बेहतर और मजबूत बना सकता है।

आधारभूत चुनौती

लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित और सुरक्षित करने की चुनौती।

विस्तार की चुनौती

लोकतांत्रिक अधिकारों और भागीदारी को अधिक लोगों तक पहुँचाने की चुनौती।

गहराई की चुनौती

लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक भागीदारी को अधिक प्रभावी बनाने की चुनौती।

लोकतांत्रिक सुधार

लोकतंत्र की कमियों को दूर करने के लिए किए जाने वाले परिवर्तन।

पारदर्शिता

शासन की प्रक्रिया और निर्णयों की जानकारी नागरिकों के लिए उपलब्ध होना।

जवाबदेही

सरकार और संस्थाओं का अपने कार्यों के लिए उत्तर देना।

जनभागीदारी

लोकतांत्रिक और सार्वजनिक प्रक्रियाओं में नागरिकों की सहभागिता।

17. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

1. लोकतंत्र को बेहतर बनाना एक निरंतर प्रक्रिया है।

2. लोकतंत्र की चुनौतियाँ अलग-अलग देशों में अलग हो सकती हैं।

3. आधारभूत चुनौती लोकतंत्र स्थापित करने से संबंधित है।

4. विस्तार की चुनौती लोकतांत्रिक अधिकारों और भागीदारी को अधिक लोगों तक पहुँचाने से संबंधित है।

5. लोकतंत्र को गहरा करने का अर्थ संस्थाओं और जनभागीदारी को अधिक प्रभावी बनाना है।

6. सामाजिक और आर्थिक असमानता लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रभावित कर सकती है।

7. पारदर्शिता और जवाबदेही बेहतर शासन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

8. केवल कानून बना देना हर लोकतांत्रिक समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है।

9. सक्रिय नागरिक लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

10. लोकतांत्रिक सुधार में सरकार, संस्थाओं और नागरिकों की भागीदारी आवश्यक है।

18. महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. लोकतांत्रिक चुनौती क्या है?

उत्तर: ऐसी समस्या जिसका समाधान लोकतंत्र को अधिक प्रभावी और मजबूत बना सकता है, लोकतांत्रिक चुनौती कहलाती है।

प्रश्न 2. लोकतंत्र की तीन प्रमुख चुनौतियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: आधारभूत चुनौती, लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती और लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती तीन प्रमुख प्रकार हैं।

प्रश्न 3. आधारभूत चुनौती क्या है?

उत्तर: लोकतांत्रिक शासन स्थापित करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत आधार देने से संबंधित चुनौती आधारभूत चुनौती कहलाती है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती क्या है?

उत्तर: लोकतांत्रिक अधिकारों और भागीदारी को समाज के अधिक लोगों और शासन के विभिन्न स्तरों तक पहुँचाने की चुनौती विस्तार की चुनौती है।

प्रश्न 5. लोकतंत्र को गहरा करने का क्या अर्थ है?

उत्तर: लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाना तथा नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को गहरा करना है।

प्रश्न 6. लोकतांत्रिक सुधार क्या है?

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमियों को दूर कर उसे अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सहभागी बनाने के प्रयास लोकतांत्रिक सुधार कहलाते हैं।

प्रश्न 7. क्या केवल कानून बनाकर लोकतंत्र सुधारा जा सकता है?

उत्तर: केवल कानून पर्याप्त नहीं होता। प्रभावी क्रियान्वयन, जवाबदेह संस्थाएँ और सक्रिय नागरिक भागीदारी भी आवश्यक होती है।

प्रश्न 8. पारदर्शिता क्या है?

उत्तर: शासन के निर्णयों और प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी नागरिकों के लिए उपलब्ध होने को पारदर्शिता कहा जाता है।

प्रश्न 9. नागरिक लोकतंत्र को कैसे मजबूत कर सकते हैं?

उत्तर: मतदान, जागरूकता, सार्वजनिक चर्चा, संवैधानिक भागीदारी और सरकार से जवाबदेही की माँग के माध्यम से नागरिक लोकतंत्र को मजबूत कर सकते हैं।

प्रश्न 10. जनभागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: जनभागीदारी से नागरिक लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़े रहते हैं और शासन की जवाबदेही बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।

19. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

लोकतंत्र की चुनौतियों को व्यापक रूप से आधारभूत चुनौती, विस्तार की चुनौती और लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती के रूप में समझा जा सकता है।

आधारभूत चुनौती लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने से संबंधित है। विस्तार की चुनौती लोकतांत्रिक अधिकारों और भागीदारी को अधिक नागरिकों और संस्थाओं तक पहुँचाने से संबंधित है।

लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक जवाबदेह बनाना तथा नागरिकों की भागीदारी को प्रभावी बनाना है।

प्रश्न 2. लोकतांत्रिक सुधार से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:

लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमियों को दूर कर उसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी, जवाबदेह और सहभागी बनाने के लिए किए गए परिवर्तन लोकतांत्रिक सुधार कहलाते हैं।

इन सुधारों में कानूनों में परिवर्तन, संस्थाओं को मजबूत करना, राजनीतिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना शामिल हो सकता है।

प्रश्न 3. लोकतंत्र को मजबूत करने में नागरिकों की भूमिका समझाइए।

उत्तर:

लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं होती। नागरिकों को सार्वजनिक मुद्दों की जानकारी रखनी चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।

वे प्रतिनिधियों से प्रश्न पूछ सकते हैं, सार्वजनिक चर्चा में भाग ले सकते हैं और शांतिपूर्ण संवैधानिक माध्यमों से अपनी माँगें रख सकते हैं। अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना भी जिम्मेदार नागरिकता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र के विस्तार और लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती में अंतर बताइए।

उत्तर:

लोकतंत्र के विस्तार का संबंध लोकतांत्रिक अधिकारों और भागीदारी को समाज के अधिक नागरिकों, समूहों और शासन के विभिन्न स्तरों तक पहुँचाने से है।

इसके विपरीत लोकतंत्र को गहरा करने का संबंध पहले से मौजूद लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सहभागी बनाने से है।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक सुधार के लिए केवल कानून पर्याप्त क्यों नहीं है?

उत्तर:

कानून लोकतांत्रिक सुधार का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन केवल कानून बना देने से व्यवहार में परिवर्तन सुनिश्चित नहीं होता।

कानून का निष्पक्ष क्रियान्वयन, प्रभावी संस्थाएँ, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक होती है। इसीलिए लोकतांत्रिक सुधार को व्यापक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है।

20. Quick Revision

01

आधारभूत चुनौती – लोकतंत्र स्थापित और सुरक्षित करना।

02

विस्तार की चुनौती – लोकतांत्रिक अधिकार और भागीदारी बढ़ाना।

03

गहराई की चुनौती – संस्थाओं को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाना।

04

लोकतांत्रिक सुधार – लोकतंत्र की कमियों को दूर करने के प्रयास।

05

पारदर्शिता – शासन की जानकारी नागरिकों के लिए उपलब्ध होना।

06

जवाबदेही – सरकार का अपने कार्यों के लिए उत्तर देना।

07

जनभागीदारी – नागरिकों की सक्रिय लोकतांत्रिक सहभागिता।

08

मजबूत लोकतंत्र – अधिकार + समानता + भागीदारी + जवाबदेही।

परीक्षा के लिए जरूर तैयार करें

लोकतांत्रिक चुनौती की परिभाषा, आधारभूत चुनौती, विस्तार की चुनौती, लोकतंत्र को गहरा करने की चुनौती, लोकतांत्रिक सुधार, सामाजिक एवं आर्थिक असमानता, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा लोकतंत्र को मजबूत करने में नागरिकों की भूमिका अच्छी तरह तैयार करें।

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