Bihar Board Class 10 Maths Chapter 5 Notes – समान्तर श्रेढ़ियाँ

Bihar Board Class 10 Maths Chapter 5 Notes – समान्तर श्रेढ़ियाँ
कक्षा 10 गणित • अध्याय 5

समान्तर श्रेढ़ियाँ (Arithmetic Progressions)

परिभाषा, सार्व अंतर, nवाँ पद, अंतिम पद, गुणधर्म तथा प्रथम n पदों का योग—पुस्तक-जैसे सूत्रों और क्रमबद्ध हल सहित।

📚 विषय-सूची (Table of Contents)

1. अनुक्रम और श्रेढ़ी

अनुक्रम (Sequence): निश्चित नियम के अनुसार क्रम में लिखी संख्याओं की सूची अनुक्रम कहलाती है। इसकी संख्याएँ उसके पद कहलाती हैं।

जैसे— 1, 4, 7, 10, 13, … यहाँ पहला पद 1, दूसरा पद 4 और तीसरा पद 7 है। किसी अनुक्रम के पदों को जोड़कर बनी अभिव्यक्ति को श्रेढ़ी (Series) कहा जाता है।

2. समान्तर श्रेढ़ी की परिभाषा

परिभाषा: संख्याओं का वह अनुक्रम जिसमें प्रत्येक पद और उसके ठीक पिछले पद का अंतर सदैव समान रहता है, समान्तर श्रेढ़ी अथवा A.P. कहलाता है। यह स्थिर अंतर सार्व अंतर (Common Difference) कहलाता है।

यदि प्रथम पद a और सार्व अंतर d हो, तो A.P. का सामान्य रूप है—

a,  a+d,  a+2d,  a+3d, …
A.P.सार्व अंतरप्रकृति
1, 4, 7, 10, …d = 3बढ़ती हुई
5, 3, 1, −1, …d = −2घटती हुई
4, 4, 4, 4, …d = 0अचर
−2.5, −3, −3.5, …d = −0.5घटती हुई

3. सार्व अंतर (Common Difference)

यदि A.P. के क्रमागत पद t1, t2, t3, … हों, तो—

d = t2 − t1 = t3 − t2 = … = tn − tn−1
उदाहरण 1: जाँचें कि 7, 11, 15, 19, … A.P. है या नहीं।
क्रमागत अंतर निकालें:11−7=4,  15−11=4,  19−15=4
सभी अंतर समान हैं, अतः दिया गया अनुक्रम A.P. है।
उत्तर: सार्व अंतर d = 4

4. संकेत एवं A.P. के प्रकार

  • प्रथम पद: a अथवा t1
  • nवाँ पद: tn अथवा an
  • सार्व अंतर: d
  • प्रथम n पदों का योग: Sn
  • अंतिम पद: l

प्रकार

परिमित A.P.: जिसमें पदों की संख्या निश्चित हो; जैसे 3, 7, 11, 15, 19। अपरिमित A.P.: जिसमें पद अनंत हों; जैसे 1, 2, 3, 4, …।

5. A.P. का nवाँ पद

मान लें प्रथम पद a और सार्व अंतर d है। तब—

t1 = a = a+(1−1)d
t2 = a+d = a+(2−1)d
t3 = a+2d = a+(3−1)d
nवाँ पद: tn = a+(n−1)d
उदाहरण 2: A.P. 1, 4, 7, 10, … का 18वाँ पद ज्ञात करें।

दिया है: a=1, d=4−1=3, n=18

सूत्र:tn=a+(n−1)d
t18=1+(18−1)×3
=1+17×3=1+51=52
उत्तर: 18वाँ पद = 52
उदाहरण 3: A.P. 5, 9, 13, … का कौन-सा पद 81 है?

दिया है: a=5, d=4 तथा tn=81

81=5+(n−1)4
81−5=4(n−1)
76=4(n−1) ⇒ n−1=19 ⇒ n=20
उत्तर: 81 इस A.P. का 20वाँ पद है।

6. अंत से पद ज्ञात करना

यदि अंतिम पद l हो, तो अंत से पद क्रमशः l, l−d, l−2d, … होंगे। इसलिए—

अंत से nवाँ पद = l−(n−1)d
उदाहरण 4: A.P. 4, 9, 14, …, 254 का अंत से 10वाँ पद ज्ञात करें।

दिया है: l=254, d=9−4=5, n=10

अंत से t10=l−(10−1)d
=254−9×5
=254−45=209
उत्तर: अंत से 10वाँ पद = 209

7. महत्वपूर्ण परिणाम

परिणाम 1: यदि किसी अनुक्रम का nवाँ पद tn=pn+q हो, जहाँ p और q अचर हैं, तो वह अनुक्रम A.P. है और उसका सार्व अंतर p है।
उदाहरण 5: tₙ=7n−3 से बने अनुक्रम की जाँच करें।
t1=7(1)−3=4
t2=7(2)−3=11
t3=7(3)−3=18
11−4=7 और 18−11=7
अतः 4, 11, 18, … एक A.P. है तथा d=7।

8. A.P. के गुण

  1. प्रत्येक पद में समान संख्या k जोड़ने या घटाने पर नई श्रेढ़ी भी A.P. होती है और उसका सार्व अंतर d ही रहता है।
  2. दो A.P. के संगत पद जोड़ने/घटाने पर प्राप्त अनुक्रम A.P. होता है, जिसका सार्व अंतर क्रमशः d1+d2 या d1−d2 होता है।
  3. प्रत्येक पद को अशून्य संख्या k से गुणा करने पर सार्व अंतर kd होता है; k से भाग देने पर सार्व अंतर d/k होता है।
उदाहरण 6: 2, 5, 8, … के प्रत्येक पद में 4 जोड़ें।
नई श्रेढ़ी: 6, 9, 12, …
9−6=3 तथा 12−9=3
नई श्रेढ़ी भी A.P. है और d=3 अपरिवर्तित है।

9. A.P. में संख्याएँ मानने की सुविधाजनक विधि

पदों की संख्यासुविधाजनक रूप
3a−d, a, a+d
4a−3d, a−d, a+d, a+3d
5a−2d, a−d, a, a+d, a+2d
उदाहरण 7: A.P. में तीन संख्याओं का योग 21 और पहली व तीसरी का अंतर 8 है। संख्याएँ ज्ञात करें।

तीन संख्याएँ a−d, a, a+d मानें।

(a−d)+a+(a+d)=21 ⇒ 3a=21 ⇒ a=7
(a+d)−(a−d)=8 ⇒ 2d=8 ⇒ d=4
a−d=3,  a=7,  a+d=11
उत्तर: संख्याएँ 3, 7 और 11 हैं।

10. A.P. के प्रथम n पदों का योग

मान लें A.P. का प्रथम पद a, सार्व अंतर d और अंतिम पद l है। पदों को सीधे तथा उलटे क्रम में लिखकर जोड़ने पर—

Sn=a+(a+d)+(a+2d)+…+l
Sn=l+(l−d)+(l−2d)+…+a
2Sn=n(a+l)
Sn=n2(a+l)Sn=n2[2a+(n−1)d]
उदाहरण 8: 1 से 100 तक प्राकृतिक संख्याओं का योग ज्ञात करें।

दिया है: a=1, l=100, n=100

S100=1002(1+100)
=50×101=5050
उत्तर: 5050
उदाहरण 9: A.P. 3, 7, 11, … के प्रथम 20 पदों का योग ज्ञात करें।

दिया है: a=3, d=4, n=20

S20=202[2(3)+(20−1)4]
=10[6+76]
=10×82=820
उत्तर: प्रथम 20 पदों का योग = 820

11. Sₙ और tₙ का संबंध

tn=Sn−Sn−1,   जहाँ S0=0
उदाहरण 10: यदि Sₙ=5n²+3n, तो nवाँ पद ज्ञात करें और बताइए कि पद A.P. में हैं या नहीं।
Sn−1=5(n−1)2+3(n−1)
tn=Sn−Sn−1
=5n2+3n−[5(n−1)2+3(n−1)]
=5n2+3n−[5n2−10n+5+3n−3]
=5n2+3n−5n2+7n−2=10n−2
t1=8, t2=18, t3=28; अतः d=10
उत्तर: tₙ=10n−2; पद 8,18,28,… A.P. में हैं।
उदाहरण 11: यदि tₙ=5+6n, तो प्रथम n पदों का योग ज्ञात करें।
t1=5+6(1)=11 और tn=5+6n
Sn=n2(t1+tn)
=n2[11+5+6n]
=n2(16+6n)=8n+3n2
उत्तर: Sₙ=3n²+8n

12. व्यावहारिक एवं शब्द-समस्याएँ

उदाहरण 12: किसी कर्मचारी का प्रथम वर्ष का वेतन ₹10,000 है और प्रत्येक वर्ष ₹500 बढ़ता है। 12वें वर्ष का वेतन ज्ञात करें।

दिया है: a=10000, d=500, n=12

t12=a+(12−1)d
=10000+11×500
=10000+5500=15500
उत्तर: 12वें वर्ष का वेतन ₹15,500 होगा।
उदाहरण 13: प्रिया पहले दिन ₹5, दूसरे दिन ₹10, तीसरे दिन ₹15 जमा करती है। 30 दिनों में कुल राशि ज्ञात करें।

दिया है: a=5, d=5, n=30

S30=302[2×5+(30−1)5]
=15[10+145]
=15×155=2325
उत्तर: 30 दिनों में कुल जमा राशि ₹2,325 होगी।

13. त्वरित पुनरावृत्ति

सार्व अंतर
d=tn−tn−1
nवाँ पद
tn=a+(n−1)d
अंत से nवाँ पद
l−(n−1)d
योग का प्रथम सूत्र
Sn=n2(a+l)
योग का द्वितीय सूत्र
Sn=n2[2a+(n−1)d]
योग से पद
tn=Sn−Sn−1
सामान्य भूल: tₙ के सूत्र में (n−1)d आता है, nd नहीं। इसी प्रकार Sₙ−Sₙ₋₁ निकालते समय पूरे Sₙ₋₁ पर कोष्ठक लगाएँ।

14. अभ्यास प्रश्न

  1. जाँचें कि 12, 8, 4, 0, … A.P. है या नहीं और d ज्ञात करें।
  2. A.P. 7, 12, 17, … का 25वाँ पद ज्ञात करें।
  3. A.P. 3, 8, 13, … का कौन-सा पद 78 है?
  4. 4 और 28 के बीच तीन संख्याएँ डालें ताकि पूरी श्रेढ़ी A.P. बने।
  5. A.P. 2, 5, 8, … के प्रथम 40 पदों का योग ज्ञात करें।
  6. यदि Sₙ=2n²+5n हो, तो tₙ और सार्व अंतर ज्ञात करें।
उत्तर देखें

1. हाँ, d=−4; 2. 127; 3. 16वाँ पद; 4. 10,16,22; 5. 2420; 6. tₙ=4n+3, d=4.

15. महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर

A.P. की पहचान कैसे करें?

प्रत्येक पद में से ठीक पिछला पद घटाएँ। यदि सभी अंतर समान हों, तो अनुक्रम A.P. है।

क्या सार्व अंतर ऋणात्मक या शून्य हो सकता है?

हाँ। बढ़ती A.P. में d धनात्मक, घटती A.P. में ऋणात्मक और अचर A.P. में शून्य होता है।

nवाँ पद और प्रथम n पदों का योग अलग कैसे हैं?

tₙ केवल nवें स्थान की संख्या बताता है, जबकि Sₙ पहले पद से nवें पद तक सभी पदों का कुल योग है।

योग का कौन-सा सूत्र कब लगाएँ?

जब अंतिम पद l ज्ञात हो, तब Sₙ=n(a+l)/2 सुविधाजनक है। जब a, d और n ज्ञात हों, तब Sₙ=n[2a+(n−1)d]/2 लगाएँ।

Sₙ से nवाँ पद कैसे निकालें?

tₙ=Sₙ−Sₙ₋₁ का प्रयोग करें और Sₙ₋₁ में n के स्थान पर n−1 रखें।