समान्तर श्रेढ़ियाँ (Arithmetic Progressions)
परिभाषा, सार्व अंतर, nवाँ पद, अंतिम पद, गुणधर्म तथा प्रथम n पदों का योग—पुस्तक-जैसे सूत्रों और क्रमबद्ध हल सहित।
📚 विषय-सूची (Table of Contents)
1. अनुक्रम और श्रेढ़ी
जैसे— 1, 4, 7, 10, 13, … यहाँ पहला पद 1, दूसरा पद 4 और तीसरा पद 7 है। किसी अनुक्रम के पदों को जोड़कर बनी अभिव्यक्ति को श्रेढ़ी (Series) कहा जाता है।
2. समान्तर श्रेढ़ी की परिभाषा
यदि प्रथम पद a और सार्व अंतर d हो, तो A.P. का सामान्य रूप है—
| A.P. | सार्व अंतर | प्रकृति |
|---|---|---|
| 1, 4, 7, 10, … | d = 3 | बढ़ती हुई |
| 5, 3, 1, −1, … | d = −2 | घटती हुई |
| 4, 4, 4, 4, … | d = 0 | अचर |
| −2.5, −3, −3.5, … | d = −0.5 | घटती हुई |
3. सार्व अंतर (Common Difference)
यदि A.P. के क्रमागत पद t1, t2, t3, … हों, तो—
4. संकेत एवं A.P. के प्रकार
- प्रथम पद: a अथवा t1
- nवाँ पद: tn अथवा an
- सार्व अंतर: d
- प्रथम n पदों का योग: Sn
- अंतिम पद: l
प्रकार
परिमित A.P.: जिसमें पदों की संख्या निश्चित हो; जैसे 3, 7, 11, 15, 19। अपरिमित A.P.: जिसमें पद अनंत हों; जैसे 1, 2, 3, 4, …।
5. A.P. का nवाँ पद
मान लें प्रथम पद a और सार्व अंतर d है। तब—
दिया है: a=1, d=4−1=3, n=18
दिया है: a=5, d=4 तथा tn=81
6. अंत से पद ज्ञात करना
यदि अंतिम पद l हो, तो अंत से पद क्रमशः l, l−d, l−2d, … होंगे। इसलिए—
दिया है: l=254, d=9−4=5, n=10
7. महत्वपूर्ण परिणाम
8. A.P. के गुण
- प्रत्येक पद में समान संख्या k जोड़ने या घटाने पर नई श्रेढ़ी भी A.P. होती है और उसका सार्व अंतर d ही रहता है।
- दो A.P. के संगत पद जोड़ने/घटाने पर प्राप्त अनुक्रम A.P. होता है, जिसका सार्व अंतर क्रमशः d1+d2 या d1−d2 होता है।
- प्रत्येक पद को अशून्य संख्या k से गुणा करने पर सार्व अंतर kd होता है; k से भाग देने पर सार्व अंतर d/k होता है।
9. A.P. में संख्याएँ मानने की सुविधाजनक विधि
| पदों की संख्या | सुविधाजनक रूप |
|---|---|
| 3 | a−d, a, a+d |
| 4 | a−3d, a−d, a+d, a+3d |
| 5 | a−2d, a−d, a, a+d, a+2d |
तीन संख्याएँ a−d, a, a+d मानें।
10. A.P. के प्रथम n पदों का योग
मान लें A.P. का प्रथम पद a, सार्व अंतर d और अंतिम पद l है। पदों को सीधे तथा उलटे क्रम में लिखकर जोड़ने पर—
दिया है: a=1, l=100, n=100
दिया है: a=3, d=4, n=20
11. Sₙ और tₙ का संबंध
12. व्यावहारिक एवं शब्द-समस्याएँ
दिया है: a=10000, d=500, n=12
दिया है: a=5, d=5, n=30
13. त्वरित पुनरावृत्ति
14. अभ्यास प्रश्न
- जाँचें कि 12, 8, 4, 0, … A.P. है या नहीं और d ज्ञात करें।
- A.P. 7, 12, 17, … का 25वाँ पद ज्ञात करें।
- A.P. 3, 8, 13, … का कौन-सा पद 78 है?
- 4 और 28 के बीच तीन संख्याएँ डालें ताकि पूरी श्रेढ़ी A.P. बने।
- A.P. 2, 5, 8, … के प्रथम 40 पदों का योग ज्ञात करें।
- यदि Sₙ=2n²+5n हो, तो tₙ और सार्व अंतर ज्ञात करें।
उत्तर देखें
1. हाँ, d=−4; 2. 127; 3. 16वाँ पद; 4. 10,16,22; 5. 2420; 6. tₙ=4n+3, d=4.
15. महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर
A.P. की पहचान कैसे करें?
प्रत्येक पद में से ठीक पिछला पद घटाएँ। यदि सभी अंतर समान हों, तो अनुक्रम A.P. है।
क्या सार्व अंतर ऋणात्मक या शून्य हो सकता है?
हाँ। बढ़ती A.P. में d धनात्मक, घटती A.P. में ऋणात्मक और अचर A.P. में शून्य होता है।
nवाँ पद और प्रथम n पदों का योग अलग कैसे हैं?
tₙ केवल nवें स्थान की संख्या बताता है, जबकि Sₙ पहले पद से nवें पद तक सभी पदों का कुल योग है।
योग का कौन-सा सूत्र कब लगाएँ?
जब अंतिम पद l ज्ञात हो, तब Sₙ=n(a+l)/2 सुविधाजनक है। जब a, d और n ज्ञात हों, तब Sₙ=n[2a+(n−1)d]/2 लगाएँ।
Sₙ से nवाँ पद कैसे निकालें?
tₙ=Sₙ−Sₙ₋₁ का प्रयोग करें और Sₙ₋₁ में n के स्थान पर n−1 रखें।

