नौबतखाने में इबादत Class 10 Hindi Notes

नौबतखाने में इबादत Class 10 Hindi Notes
Bihar Board • Class 10 • Hindi • गद्यखंड

नौबतखाने में इबादत

यतीन्द्र मिश्र

अध्याय 11 • व्यक्तिचित्र • गोधूलि भाग–2 • सम्पूर्ण नोट्स

BSEB EXAM GUIDE

पाठ परिचय

पाठनौबतखाने में इबादत
लेखकयतीन्द्र मिश्र
विधाव्यक्तिचित्र
केंद्रीय व्यक्तित्वउस्ताद बिस्मिल्ला खाँ

“नौबतखाने में इबादत” प्रसिद्ध शहनाईवादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व और संगीत-साधना पर आधारित व्यक्तिचित्र है।

लेखक ने बिस्मिल्ला खाँ के जीवन के माध्यम से संगीत के प्रति उनकी निष्ठा, सरलता, धार्मिक-सांस्कृतिक उदारता तथा बनारस और गंगा से उनके गहरे लगाव को प्रस्तुत किया है।

लेखक परिचय – यतीन्द्र मिश्र

यतीन्द्र मिश्र

यतीन्द्र मिश्र का जन्म 1977 ई. में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ।

उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा और साहित्य में एम.ए. किया। साहित्य के साथ-साथ संगीत, सिनेमा, नृत्य और चित्रकला में भी उनकी विशेष रुचि है।

वे मूलतः कवि हैं, लेकिन कला और संगीत से जुड़े विषयों पर उन्होंने महत्वपूर्ण लेखन और संपादन भी किया है।

उनके काव्य-संग्रहों में यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ और ड्योढ़ी पर आलाप उल्लेखनीय हैं।

याद रखें: यतीन्द्र मिश्र साहित्य के साथ संगीत और अन्य कलाओं के गंभीर अध्येता हैं। इसलिए बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व और संगीत-साधना का चित्रण अत्यंत संवेदनशील ढंग से हुआ है।

व्यक्तिचित्र क्या है?

जिस गद्य रचना में किसी विशिष्ट व्यक्ति के जीवन, स्वभाव, व्यक्तित्व, रुचियों, संघर्ष, उपलब्धियों और विशेषताओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया जाता है, उसे व्यक्तिचित्र कहते हैं।

जीवन + व्यक्तित्व + विशेषताएँ + अनुभव = व्यक्तिचित्र

उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ – परिचय

महान शहनाईवादक

बिस्मिल्ला खाँ ने शहनाई को भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुँचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

संगीत-साधक

उनके लिए संगीत केवल पेशा नहीं था। वे संगीत को साधना और ईश्वर की आराधना के रूप में देखते थे।

सरल व्यक्तित्व

विश्वव्यापी प्रसिद्धि के बावजूद उनका जीवन सरल और सहज रहा।

बनारस से प्रेम

बनारस, गंगा और वहाँ का सांस्कृतिक वातावरण उनके जीवन और संगीत से गहराई से जुड़ा था।

पाठ का सरल सारांश

“नौबतखाने में इबादत” में यतीन्द्र मिश्र ने भारत के महान शहनाईवादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और संगीत-साधना का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया है।

बिस्मिल्ला खाँ का जीवन बचपन से ही संगीत से जुड़ गया था। शहनाई उनके लिए केवल एक वाद्ययंत्र नहीं थी, बल्कि उनके जीवन, साधना और आत्मा की अभिव्यक्ति थी।

उन्होंने निरंतर अभ्यास और समर्पण के द्वारा शहनाई को उस ऊँचाई तक पहुँचाया जहाँ वह बड़े शास्त्रीय संगीत मंचों पर सम्मानपूर्वक सुनी जाने लगी।

उनकी संगीत-साधना में बनारस का विशेष स्थान था। वहाँ के मंदिर, गंगा के घाट और सांस्कृतिक वातावरण से उन्हें गहरा लगाव था। उनके संगीत में इस वातावरण की छाप अनुभव की जा सकती थी।

उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता धार्मिक उदारता थी। वे संगीत को संकीर्ण धार्मिक सीमाओं से ऊपर मानते थे। उनके लिए सच्ची साधना ही इबादत थी।

विश्वभर में प्रसिद्ध होने और बड़े-बड़े सम्मान मिलने के बाद भी उनके जीवन में अहंकार नहीं आया। वे सरलता और सहजता से जीवन जीते रहे।

उनका मन बनारस और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा था। भौतिक सुख-सुविधाओं की तुलना में अपनी मिट्टी, गंगा और संगीत उनके लिए अधिक मूल्यवान थे।

इस प्रकार यह पाठ केवल एक महान कलाकार की उपलब्धियों का वर्णन नहीं, बल्कि यह बताता है कि सच्ची कला साधना, विनम्रता, समर्पण और सांस्कृतिक समन्वय से महान बनती है।

शीर्षक का अर्थ – नौबतखाने में इबादत

नौबतखाना वह स्थान है जहाँ परंपरागत रूप से वाद्ययंत्र बजाए जाते थे।

इबादत का अर्थ आराधना या उपासना है।

बिस्मिल्ला खाँ के लिए शहनाई बजाना साधारण संगीत-प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक प्रकार की आराधना थी। इसी भाव को शीर्षक “नौबतखाने में इबादत” व्यक्त करता है।

बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई

प्रारंभिक संगीत संस्कार
→
निरंतर रियाज़
→
शहनाई-साधना
→
राष्ट्रीय मंच
→
विश्वव्यापी प्रतिष्ठा

बिस्मिल्ला खाँ ने अपनी साधना से शहनाई को लोक और मांगलिक अवसरों की सीमा से आगे बढ़ाकर शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुँचाया।

बिस्मिल्ला खाँ और बनारस

गंगा

गंगा के प्रति उनका गहरा भावनात्मक लगाव था।

घाट

बनारस के घाट उनकी स्मृतियों और संगीत-साधना से जुड़े थे।

मंदिर

मंदिरों और धार्मिक वातावरण ने उनकी संगीत-साधना को प्रभावित किया।

बनारस

यह नगर उनके लिए केवल निवास-स्थान नहीं बल्कि आत्मीय पहचान था।

संगीत ही इबादत

बिस्मिल्ला खाँ के जीवन में धर्म और संगीत के बीच कोई टकराव नहीं था। उनके लिए संगीत स्वयं ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम था।

एक मुस्लिम कलाकार का मंदिरों और गंगा से आत्मीय संबंध भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की सुंदर मिसाल प्रस्तुत करता है।

उनकी साधना यह संदेश देती है कि कला मनुष्य को जोड़ती है, विभाजित नहीं करती।

संगीत + साधना + श्रद्धा + समर्पण = बिस्मिल्ला खाँ की इबादत

बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ

01महान कलाकार —  उन्होंने शहनाई को नई प्रतिष्ठा दिलाई।

02कठोर साधक —  संगीत के लिए निरंतर रियाज़ किया।

03सरल स्वभाव —  प्रसिद्धि के बावजूद सहज बने रहे।

04विनम्र —  उपलब्धियों ने उनमें अहंकार पैदा नहीं किया।

05धार्मिक उदारता —  उनकी साधना संकीर्ण धार्मिक सीमाओं से ऊपर थी।

06बनारस-प्रेमी —  गंगा और बनारस से गहरा लगाव था।

07परंपरा से जुड़े —  भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रति गहरी निष्ठा थी।

08कला के प्रति समर्पित —  संगीत उनके लिए जीवन और इबादत दोनों था।

पाठ के मुख्य बिंदु

01 पाठ के लेखक यतीन्द्र मिश्र हैं।

02 इसकी विधा व्यक्तिचित्र है।

03 पाठ का केंद्रीय व्यक्तित्व उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ हैं।

04 बिस्मिल्ला खाँ महान शहनाईवादक थे।

05 उन्होंने शहनाई को प्रतिष्ठित संगीत मंचों तक पहुँचाया।

06 संगीत उनके लिए साधना और इबादत था।

07 बनारस और गंगा से उनका गहरा लगाव था।

08 उनका जीवन सरल और विनम्र था।

09 उनका व्यक्तित्व भारतीय सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाता है।

10 पाठ कला के प्रति समर्पण और निरंतर साधना की प्रेरणा देता है।

शीर्षक की सार्थकता

इस पाठ का केंद्र बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई और उनकी संगीत-साधना है। उनके लिए संगीत बजाना केवल कला-प्रदर्शन नहीं बल्कि आराधना था।

“नौबतखाना” संगीत की परंपरा से जुड़ता है और “इबादत” उनकी साधना तथा श्रद्धा को व्यक्त करता है। इसलिए “नौबतखाने में इबादत” शीर्षक पाठ के मूल भाव को प्रभावी ढंग से व्यक्त करता है और पूर्णतः सार्थक है।

पाठ का मुख्य संदेश

महान कलाकार बनने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। निरंतर अभ्यास, समर्पण और विनम्रता भी आवश्यक है।

सच्ची कला धर्म, जाति और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर मनुष्यों को जोड़ती है।

अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और कला के प्रति सच्ची निष्ठा व्यक्ति को महान बना सकती है।

महत्वपूर्ण शब्दार्थ

नौबतखानावाद्य बजाने का विशेष स्थान
इबादतआराधना या उपासना
रियाज़संगीत का नियमित अभ्यास
शहनाईएक प्रसिद्ध भारतीय वाद्ययंत्र
साधनालगातार अभ्यास और समर्पण
फकीरीसादगी और सांसारिक मोह से दूरी
मंगलध्वनिशुभ अवसर पर बजने वाली ध्वनि
आराधनाश्रद्धापूर्वक उपासना
समन्वयअलग तत्वों का सुंदर मेल
विरासतपीढ़ियों से मिली सांस्कृतिक धरोहर

लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. ‘नौबतखाने में इबादत’ के लेखक कौन हैं?

उत्तर: इसके लेखक यतीन्द्र मिश्र हैं।

प्रश्न 2. ‘नौबतखाने में इबादत’ किस विधा की रचना है?

उत्तर: यह व्यक्तिचित्र विधा की रचना है।

प्रश्न 3. इस पाठ का केंद्रीय व्यक्तित्व कौन है?

उत्तर: इस पाठ का केंद्रीय व्यक्तित्व महान शहनाईवादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ हैं।

प्रश्न 4. बिस्मिल्ला खाँ किस वाद्ययंत्र के लिए प्रसिद्ध थे?

उत्तर: वे शहनाई वादन के लिए विश्वप्रसिद्ध थे।

प्रश्न 5. बिस्मिल्ला खाँ के लिए संगीत का क्या अर्थ था?

उत्तर: उनके लिए संगीत केवल पेशा नहीं, बल्कि साधना और ईश्वर की इबादत था।

प्रश्न 6. बिस्मिल्ला खाँ का बनारस से कैसा संबंध था?

उत्तर: उनका बनारस, गंगा, घाटों और वहाँ की सांस्कृतिक परंपरा से अत्यंत गहरा भावनात्मक संबंध था।

प्रश्न 7. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: वे अत्यंत सरल और विनम्र थे तथा संगीत के प्रति पूर्णतः समर्पित थे।

प्रश्न 8. शहनाई को प्रतिष्ठा दिलाने में बिस्मिल्ला खाँ की क्या भूमिका थी?

उत्तर: उन्होंने अपनी कठिन संगीत-साधना से शहनाई को बड़े शास्त्रीय संगीत मंचों पर प्रतिष्ठित किया।

प्रश्न 9. पाठ में भारतीय सांस्कृतिक समन्वय कैसे दिखाई देता है?

उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ मुस्लिम होते हुए भी मंदिर, गंगा और बनारस की सांस्कृतिक परंपरा से गहराई से जुड़े थे। उनका संगीत धार्मिक सीमाओं से ऊपर था।

प्रश्न 10. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: यह पाठ हमें कला के प्रति समर्पण, निरंतर अभ्यास, विनम्रता और सांस्कृतिक सद्भाव की शिक्षा देता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ का सारांश लिखिए।

उत्तर: ‘नौबतखाने में इबादत’ यतीन्द्र मिश्र द्वारा लिखा गया व्यक्तिचित्र है। इसमें महान शहनाईवादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन, व्यक्तित्व और संगीत-साधना का संवेदनशील चित्रण किया गया है।

बिस्मिल्ला खाँ ने निरंतर अभ्यास और समर्पण के द्वारा शहनाई को भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशेष प्रतिष्ठा दिलाई। संगीत उनके लिए सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आराधना था।

उनका बनारस और गंगा से गहरा भावनात्मक संबंध था। विश्वव्यापी प्रसिद्धि मिलने के बाद भी वे सरल और विनम्र बने रहे। उनका जीवन धार्मिक-सांस्कृतिक समन्वय का भी सुंदर उदाहरण है।

पाठ हमें बताता है कि महान कला के पीछे कठोर साधना, अपनी जड़ों से प्रेम, विनम्रता और पूर्ण समर्पण आवश्यक है।

प्रश्न 2. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ महान संगीतकार होने के साथ सरल, विनम्र और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े व्यक्ति थे।

वे संगीत को साधना मानते थे और जीवनभर शहनाई के प्रति समर्पित रहे। प्रसिद्धि और सम्मान के बावजूद उनके व्यवहार में अहंकार नहीं आया।

बनारस और गंगा के प्रति उनका गहरा प्रेम था। धार्मिक दृष्टि से भी उनका व्यक्तित्व उदार था। इस प्रकार उनमें कला-साधना, सादगी, विनम्रता और सांस्कृतिक समन्वय का अद्भुत मेल था।

प्रश्न 3. बिस्मिल्ला खाँ और बनारस के संबंध को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बनारस बिस्मिल्ला खाँ के लिए केवल रहने का स्थान नहीं था। वह उनके जीवन, स्मृति और संगीत-साधना का अभिन्न हिस्सा था।

गंगा, घाट, मंदिर और बनारस का सांस्कृतिक वातावरण उनके मन में गहराई से बसा हुआ था। उनका संगीत भी इसी वातावरण में विकसित हुआ। इसलिए वे भौतिक सुविधाओं से अधिक बनारस और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को महत्व देते थे।

प्रश्न 4. ‘नौबतखाने में इबादत’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: “नौबतखाना” वाद्य-संगीत की परंपरा का संकेत करता है, जबकि “इबादत” का अर्थ उपासना है।

बिस्मिल्ला खाँ के लिए शहनाई बजाना केवल कला-प्रदर्शन नहीं था। वे संगीत को ईश्वर की आराधना की तरह साधते थे। इसलिए यह शीर्षक उनके संगीत-जीवन और पाठ के केंद्रीय भाव दोनों को व्यक्त करता है। अतः शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।

प्रश्न 5. बिस्मिल्ला खाँ भारतीय सांस्कृतिक समन्वय के प्रतीक कैसे हैं?

उत्तर: बिस्मिल्ला खाँ का जीवन भारतीय संस्कृति की मिली-जुली परंपरा का सुंदर उदाहरण है। वे मुस्लिम थे, लेकिन गंगा, मंदिरों और बनारस की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से अत्यंत आत्मीय रूप से जुड़े थे।

उनके लिए संगीत धार्मिक भेदभाव से ऊपर था। संगीत ही उनकी इबादत थी। इस प्रकार उनका जीवन प्रेम, सद्भाव और सांस्कृतिक समन्वय का संदेश देता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न – MCQ

1. ‘नौबतखाने में इबादत’ के लेखक कौन हैं?

A. यतीन्द्र मिश्र
B. अमरकांत
C. अशोक वाजपेयी
D. विनोद कुमार शुक्ल

उत्तर: A. यतीन्द्र मिश्र

2. यह पाठ किस विधा की रचना है?

A. कहानी
B. व्यक्तिचित्र
C. भाषण
D. साक्षात्कार

उत्तर: B. व्यक्तिचित्र

3. पाठ का केंद्रीय व्यक्तित्व कौन है?

A. बिरजू महाराज
B. बिस्मिल्ला खाँ
C. प्रेमचंद
D. दिनकर

उत्तर: B. बिस्मिल्ला खाँ

4. बिस्मिल्ला खाँ किस वाद्ययंत्र से जुड़े थे?

A. तबला
B. सितार
C. शहनाई
D. बाँसुरी

उत्तर: C. शहनाई

5. यतीन्द्र मिश्र का जन्म कब हुआ?

A. 1977
B. 1967
C. 1987
D. 1957

उत्तर: A. 1977

6. यतीन्द्र मिश्र का जन्म कहाँ हुआ?

A. अयोध्या
B. पटना
C. दिल्ली
D. जयपुर

उत्तर: A. अयोध्या

7. बिस्मिल्ला खाँ का विशेष लगाव किस नगर से था?

A. बनारस
B. मुंबई
C. भोपाल
D. जयपुर

उत्तर: A. बनारस

8. बिस्मिल्ला खाँ के लिए संगीत क्या था?

A. केवल व्यवसाय
B. इबादत और साधना
C. मनोरंजन मात्र
D. खेल

उत्तर: B. इबादत और साधना

9. बिस्मिल्ला खाँ का गहरा लगाव किस नदी से था?

A. यमुना
B. गंगा
C. नर्मदा
D. गोदावरी

उत्तर: B. गंगा

10. बिस्मिल्ला खाँ ने किस वाद्य को विशेष प्रतिष्ठा दिलाई?

A. शहनाई
B. वीणा
C. तबला
D. हारमोनियम

उत्तर: A. शहनाई

11. ‘नौबतखाने में इबादत’ गद्यखंड का कौन-सा अध्याय है?

A. 9
B. 10
C. 11
D. 12

उत्तर: C. 11

12. ‘इबादत’ का अर्थ क्या है?

A. उपासना
B. व्यापार
C. यात्रा
D. प्रतियोगिता

उत्तर: A. उपासना

13. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता क्या थी?

A. सादगी
B. अहंकार
C. क्रोध
D. लालच

उत्तर: A. सादगी

14. पाठ मुख्यतः किस विषय को प्रस्तुत करता है?

A. संगीत-साधना
B. राजनीति
C. विज्ञान
D. व्यापार

उत्तर: A. संगीत-साधना

15. इस अध्याय के बाद कौन-सा गद्य पाठ है?

A. शिक्षा और संस्कृति
B. मछली
C. बहादुर
D. आविन्यों

उत्तर: A. शिक्षा और संस्कृति

एक नजर में पूरा अध्याय

01

लेखक
यतीन्द्र मिश्र

02

विधा
व्यक्तिचित्र

03

केंद्रीय व्यक्तित्व
बिस्मिल्ला खाँ

04

वाद्य
शहनाई

05

प्रिय नगर
बनारस

06

विशेष लगाव
गंगा

07

मुख्य गुण
सादगी व साधना

08

मुख्य संदेश
संगीत ही इबादत

परीक्षा के लिए याद रखें

इस अध्याय की विधा व्यक्तिचित्र है। उत्तर लिखते समय बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई-साधना, बनारस और गंगा से लगाव, सादगी तथा सांस्कृतिक समन्वय का उल्लेख जरूर करें।

शीर्षक की सार्थकता, बिस्मिल्ला खाँ का चरित्र-चित्रण और संगीत को इबादत मानने का भाव विशेष रूप से तैयार रखें।