Class 10 Geography Chapter 3 भूकंप एवं सुनामी Notes in Hindi

Class 10 Geography Chapter 3 भूकंप एवं सुनामी Notes in Hindi
Class 10 Geography • खंड (ख) • Chapter 3

प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन

भूकंप एवं सुनामी

सम्पूर्ण हिंदी नोट्स | BSEB EXAM GUIDE

अध्याय परिचय

भूकंप और सुनामी अत्यंत विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएँ हैं। भूकंप पृथ्वी की पर्पटी में अचानक ऊर्जा मुक्त होने से उत्पन्न कंपन है, जबकि समुद्र के भीतर होने वाला शक्तिशाली भूकंप समुद्री जल को विस्थापित करके सुनामी जैसी विशाल तरंगों को जन्म दे सकता है।

इन आपदाओं को रोकना संभव नहीं है, लेकिन वैज्ञानिक जानकारी, सुरक्षित निर्माण, पूर्व तैयारी, प्रशिक्षण और उचित आपदा प्रबंधन के द्वारा जन-धन की हानि को काफी कम किया जा सकता है।

1. भूकंप क्या है?

भूकंप: पृथ्वी की पर्पटी में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न कंपन को भूकंप कहते हैं।

पृथ्वी की पर्पटी अनेक विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है। इन प्लेटों की गतियों के कारण चट्टानों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। जब यह तनाव अचानक मुक्त होता है, तो ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है।

याद रखें: भूकंप स्वयं कुछ समय तक ही रहता है, लेकिन कमजोर भवनों, आग, भूस्खलन और अन्य द्वितीयक प्रभावों के कारण इसकी क्षति बहुत अधिक हो सकती है।

2. भूकंप के प्रमुख कारण

विवर्तनिक गतिविधियाँ

पृथ्वी की विवर्तनिक प्लेटों की गति और उनके बीच संचित तनाव का अचानक मुक्त होना अधिकांश बड़े भूकंपों का प्रमुख कारण है।

ज्वालामुखीय गतिविधि

कुछ क्षेत्रों में ज्वालामुखीय गतिविधियों के साथ भी भूकंपीय कंपन उत्पन्न हो सकते हैं।

भ्रंशों पर गति

चट्टानों में बने भ्रंशों के सहारे अचानक गति होने से भूकंप उत्पन्न हो सकता है।

मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न कंपन

कुछ विशेष परिस्थितियों में खनन, बड़े विस्फोट या बड़े जलाशयों से जुड़ी गतिविधियाँ स्थानीय भूकंपीयता को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन विश्व के अधिकांश बड़े और विनाशकारी भूकंप प्राकृतिक विवर्तनिक प्रक्रियाओं से संबंधित होते हैं।

3. भूकंप का केंद्र एवं अधिकेंद्र

भूकंप केंद्र (Focus/Hypocentre)

पृथ्वी के भीतर वह स्थान जहाँ से भूकंप के समय ऊर्जा मुक्त होकर भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है, भूकंप केंद्र कहलाता है।

अधिकेंद्र (Epicentre)

भूकंप केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को अधिकेंद्र कहते हैं।

पृथ्वी की सतह
● अधिकेंद्र (Epicentre)
│
│
│
● भूकंप केंद्र (Focus)
)))   )))   )))
भूकंपीय तरंगें केंद्र से चारों ओर फैलती हैं।
परीक्षा में अंतर याद रखें: केंद्र पृथ्वी के भीतर होता है, जबकि अधिकेंद्र पृथ्वी की सतह पर केंद्र के ठीक ऊपर स्थित होता है।

4. भूकंपीय तरंगें

भूकंप के समय मुक्त ऊर्जा तरंगों के रूप में पृथ्वी के भीतर और सतह पर फैलती है। इन्हें भूकंपीय तरंगें कहते हैं।

P-तरंगें (Primary Waves)

  • इन्हें प्राथमिक तरंगें कहा जाता है।
  • ये सबसे तेज भूकंपीय तरंगें होती हैं।
  • भूकंपमापी केंद्र पर सबसे पहले पहुँचती हैं।
  • ये ठोस, द्रव और गैस माध्यमों से गुजर सकती हैं।

S-तरंगें (Secondary Waves)

  • इन्हें द्वितीयक तरंगें कहा जाता है।
  • इनकी गति P-तरंगों से कम होती है।
  • ये केवल ठोस माध्यम से गुजरती हैं।
  • द्रव माध्यम से नहीं गुजरतीं।

सतही तरंगें (Surface Waves)

  • ये पृथ्वी की सतह के साथ फैलती हैं।
  • इनका प्रभाव सतह पर अधिक महसूस किया जा सकता है।
  • विनाशकारी कंपन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
तरंग मुख्य विशेषता
P-तरंग सबसे तेज, ठोस-द्रव-गैस से गुजर सकती है
S-तरंग P से धीमी, केवल ठोस माध्यम से गुजरती है
सतही तरंग पृथ्वी की सतह पर फैलती है

5. भूकंप का मापन

सिस्मोग्राफ / भूकंपमापी

भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड करने वाले उपकरण को सिस्मोग्राफ (Seismograph) या भूकंपमापी कहा जाता है।

इसके द्वारा दर्ज किए गए भूकंपीय संकेतों का अध्ययन करके वैज्ञानिक भूकंप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं।

परिमाण (Magnitude)

परिमाण भूकंप के स्रोत पर मुक्त ऊर्जा के आकार को दर्शाता है। आधुनिक भूकंप विज्ञान में बड़े भूकंपों के लिए प्रायः मोमेंट मैग्नीट्यूड स्केल (Mw) का उपयोग किया जाता है।

तीव्रता (Intensity)

तीव्रता किसी विशेष स्थान पर महसूस किए गए कंपन और वहाँ हुए प्रभाव या क्षति को दर्शाती है। इसे संशोधित मर्काली तीव्रता पैमाने जैसी प्रणालियों से व्यक्त किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण: परिमाण और तीव्रता एक ही चीज नहीं हैं। एक भूकंप का परिमाण निश्चित होता है, जबकि अलग-अलग स्थानों पर उसकी तीव्रता अलग हो सकती है।

6. भूकंप के प्रमुख प्रभाव

भवनों की क्षति →
कमजोर भवन गिर सकते हैं।
जनहानि →
लोग घायल हो सकते हैं या मृत्यु हो सकती है।
सड़क-पुल →
परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
आग →
गैस या बिजली व्यवस्था क्षतिग्रस्त होने से आग लग सकती है।
भूस्खलन →
पर्वतीय क्षेत्रों में ढाल अस्थिर हो सकती है।
सुनामी →
समुद्रतलीय भूकंप कुछ परिस्थितियों में सुनामी उत्पन्न कर सकता है।

आर्थिक प्रभाव

  • भवनों और आधारभूत संरचनाओं का नुकसान
  • उद्योग और व्यापार प्रभावित
  • पुनर्निर्माण पर अधिक खर्च
  • रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित

7. भारत एवं बिहार में भूकंप

भारत के विभिन्न भागों में भूकंप का जोखिम समान नहीं है। हिमालय और उसके आसपास के क्षेत्र उच्च भूकंपीय सक्रियता वाले क्षेत्रों में आते हैं।

बिहार के विभिन्न भाग भी भूकंपीय जोखिम के अंतर्गत आते हैं। इसलिए सुरक्षित भवन निर्माण और भूकंप के समय सही व्यवहार की जानकारी महत्वपूर्ण है।

1934 का बिहार-नेपाल भूकंप

15 जनवरी 1934 को बिहार और नेपाल के विस्तृत क्षेत्र में एक अत्यंत विनाशकारी भूकंप आया था। इससे बिहार के अनेक नगरों और गाँवों में भारी क्षति हुई थी।

VVI: बिहार के संदर्भ में 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उदाहरण है।

8. भूकंप आपदा प्रबंधन

भूकंप को आने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन सुरक्षित निर्माण और सही तैयारी द्वारा इससे होने वाली क्षति कम की जा सकती है।

भूकंप से पहले

  • भवनों का निर्माण भूकंपरोधी मानकों के अनुसार करें।
  • भारी अलमारियों और वस्तुओं को सुरक्षित तरीके से लगाएँ।
  • परिवार की आपातकालीन योजना बनाएँ।
  • प्राथमिक उपचार सामग्री तैयार रखें।
  • सुरक्षित स्थानों की पहचान करें।
  • मॉक ड्रिल का अभ्यास करें।

भूकंप के दौरान

DROP – COVER – HOLD ON

नीचे झुकें → मजबूत मेज के नीचे/पास सिर और गर्दन बचाएँ → मजबूती से पकड़कर रहें।

  • घबराकर सीढ़ियों या निकास की ओर न दौड़ें।
  • खिड़कियों और काँच से दूर रहें।
  • लिफ्ट का उपयोग न करें।
  • बाहर हों तो इमारतों और बिजली के तारों से दूर खुले स्थान में जाएँ।

भूकंप के बाद

  • घायल लोगों की सहायता करें।
  • क्षतिग्रस्त भवन में बिना अनुमति प्रवेश न करें।
  • गैस और बिजली की संभावित क्षति से सावधान रहें।
  • आफ्टरशॉक के लिए तैयार रहें।
  • सरकारी निर्देशों का पालन करें।

9. सुनामी क्या है?

सुनामी: समुद्र या महासागर के जल का अचानक बड़े पैमाने पर विस्थापन होने से उत्पन्न लंबी समुद्री तरंगों की श्रृंखला को सुनामी कहा जाता है।

सुनामी सामान्य समुद्री लहर नहीं होती। गहरे समुद्र में इसकी तरंगें तेजी से यात्रा कर सकती हैं। तट के पास पानी की गहराई कम होने पर तरंगों की ऊँचाई बढ़ सकती है और वे तटीय क्षेत्रों में गंभीर विनाश कर सकती हैं।

10. सुनामी के कारण

समुद्रतलीय भूकंप

समुद्र तल का अचानक ऊर्ध्वाधर विस्थापन करने वाला शक्तिशाली भूकंप सुनामी का प्रमुख कारण हो सकता है।

ज्वालामुखीय विस्फोट

समुद्र के भीतर या निकट होने वाली कुछ शक्तिशाली ज्वालामुखीय घटनाएँ भी सुनामी उत्पन्न कर सकती हैं।

समुद्री भूस्खलन

समुद्र के भीतर बड़े भूस्खलन से जलराशि का अचानक विस्थापन होने पर सुनामी जैसी तरंगें उत्पन्न हो सकती हैं।

हर समुद्रतलीय भूकंप सुनामी उत्पन्न नहीं करता। इसके लिए समुद्र के जल का पर्याप्त मात्रा में अचानक विस्थापन होना आवश्यक होता है।

11. 2004 की हिंद महासागर सुनामी

26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा के निकट समुद्र के नीचे एक अत्यंत शक्तिशाली भूकंप आया। इसके कारण हिंद महासागर में विशाल सुनामी तरंगें उत्पन्न हुईं।

इस आपदा ने हिंद महासागर के आसपास स्थित कई देशों के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया। भारत के भी कई तटीय क्षेत्रों तथा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह को गंभीर क्षति हुई।

परीक्षा के लिए याद रखें: 26 दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी आधुनिक इतिहास की सबसे विनाशकारी सुनामी आपदाओं में से एक थी।

12. सुनामी के प्राकृतिक चेतावनी संकेत

तटीय क्षेत्र में कुछ स्थितियाँ सुनामी के संभावित खतरे का प्राकृतिक संकेत हो सकती हैं।

  • तटीय क्षेत्र में बहुत तेज या लंबे समय तक भूकंप महसूस होना।
  • समुद्र के जलस्तर में अचानक असामान्य परिवर्तन।
  • समुद्र से असामान्य तेज गर्जना जैसी आवाज सुनाई देना।
यदि तटीय क्षेत्र में मजबूत भूकंप महसूस हो या सुनामी का प्राकृतिक संकेत दिखाई दे, तो आधिकारिक चेतावनी की प्रतीक्षा में समय न गँवाकर स्थानीय निर्देशों के अनुसार तुरंत ऊँचे या सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए।

13. सुनामी से बचाव एवं प्रबंधन

सुनामी से पहले

  • सुनामी संभावित क्षेत्र की जानकारी रखें।
  • निकासी मार्ग पहचानें।
  • ऊँचे सुरक्षित स्थान की जानकारी रखें।
  • चेतावनी प्रणाली पर ध्यान दें।

सुनामी के समय

  • तुरंत तट से दूर जाएँ।
  • ऊँचे स्थान की ओर जाएँ।
  • समुद्र देखने के लिए तट पर न जाएँ।
  • प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

सुनामी के बाद

  • तुरंत तट पर वापस न जाएँ।
  • एक से अधिक लहरें आ सकती हैं।
  • आधिकारिक All Clear का इंतजार करें।
  • क्षतिग्रस्त क्षेत्रों से सावधान रहें।

14. भूकंप और सुनामी में अंतर

भूकंप सुनामी
पृथ्वी में अचानक ऊर्जा मुक्त होने से कंपन। समुद्री जल के बड़े विस्थापन से उत्पन्न तरंगों की श्रृंखला।
स्थल और समुद्र दोनों क्षेत्रों में हो सकता है। मुख्य रूप से समुद्री एवं तटीय क्षेत्रों से संबंधित।
भवन, सड़क आदि को नुकसान पहुँचा सकता है। तटीय क्षेत्रों में जलप्लावन और विनाश कर सकती है।
कई कारणों से उत्पन्न हो सकता है। समुद्रतलीय भूकंप इसका प्रमुख कारण है।

15. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

भूकंप → पृथ्वी की सतह का कंपन
केंद्र → पृथ्वी के भीतर भूकंप उत्पत्ति का स्थान
अधिकेंद्र → केंद्र के ठीक ऊपर सतह का स्थान
P-तरंग → सबसे तेज भूकंपीय तरंग
S-तरंग → केवल ठोस माध्यम से गुजरती है
सिस्मोग्राफ → भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड करता है
1934 → बिहार-नेपाल का विनाशकारी भूकंप
सुनामी → विशाल समुद्री तरंगों की श्रृंखला
26 दिसंबर 2004 → हिंद महासागर की विनाशकारी सुनामी
सुरक्षा → Drop, Cover, Hold On

16. अति लघु एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. भूकंप किसे कहते हैं?

उत्तर: पृथ्वी की पर्पटी में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न कंपन को भूकंप कहते हैं।

प्रश्न 2. भूकंप केंद्र क्या है?

उत्तर: पृथ्वी के भीतर वह स्थान जहाँ से भूकंपीय ऊर्जा मुक्त होती है, भूकंप केंद्र कहलाता है।

प्रश्न 3. अधिकेंद्र क्या है?

उत्तर: भूकंप केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित स्थान को अधिकेंद्र कहते हैं।

प्रश्न 4. भूकंपीय तरंगें क्या हैं?

उत्तर: भूकंप के समय मुक्त ऊर्जा जिन तरंगों के रूप में फैलती है, उन्हें भूकंपीय तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 5. P-तरंग की एक विशेषता लिखिए।

उत्तर: P-तरंग सबसे तेज भूकंपीय तरंग है और ठोस, द्रव तथा गैस माध्यम से गुजर सकती है।

प्रश्न 6. S-तरंग की एक विशेषता लिखिए।

उत्तर: S-तरंग केवल ठोस माध्यम से गुजरती है।

प्रश्न 7. सिस्मोग्राफ क्या है?

उत्तर: भूकंपीय तरंगों को रिकॉर्ड करने वाला उपकरण सिस्मोग्राफ कहलाता है।

प्रश्न 8. सुनामी क्या है?

उत्तर: समुद्री जल के अचानक बड़े विस्थापन से उत्पन्न लंबी समुद्री तरंगों की श्रृंखला को सुनामी कहते हैं।

प्रश्न 9. सुनामी का प्रमुख कारण क्या है?

उत्तर: समुद्र तल का बड़ा विस्थापन करने वाला शक्तिशाली समुद्रतलीय भूकंप सुनामी का प्रमुख कारण है।

प्रश्न 10. 2004 की सुनामी कब आई थी?

उत्तर: 26 दिसंबर 2004 को।

प्रश्न 11. भूकंप के समय लिफ्ट का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

उत्तर: बिजली बंद होने या भवन क्षतिग्रस्त होने पर लिफ्ट फँस सकती है, इसलिए इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 12. सुनामी चेतावनी मिलने पर क्या करना चाहिए?

उत्तर: तटीय क्षेत्र से तुरंत दूर होकर ऊँचे एवं सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए और आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए।

17. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. भूकंप क्या है? इसके प्रमुख कारण बताइए।

उत्तर:

पृथ्वी की पर्पटी में ऊर्जा के अचानक मुक्त होने से उत्पन्न कंपन को भूकंप कहते हैं। अधिकांश बड़े भूकंप विवर्तनिक प्लेटों की गति तथा भ्रंशों के सहारे चट्टानों के अचानक खिसकने से उत्पन्न होते हैं।

कुछ भूकंपीय गतिविधियाँ ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं से भी संबंधित हो सकती हैं।

प्रश्न 2. भूकंप के प्रमुख प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

भूकंप से भवन गिर सकते हैं तथा जान-माल की भारी क्षति हो सकती है। सड़क, पुल, बिजली, संचार और जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

भूकंप के कारण आग, भूस्खलन तथा कुछ समुद्रतलीय परिस्थितियों में सुनामी जैसी द्वितीयक आपदाएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रश्न 3. भूकंप के समय सुरक्षा के उपाय बताइए।

उत्तर:

भूकंप के समय घबराना नहीं चाहिए। घर के अंदर होने पर Drop, Cover and Hold On का पालन करना चाहिए। खिड़कियों और भारी वस्तुओं से दूर रहना चाहिए।

लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए। खुले स्थान में होने पर भवनों, पेड़ों, खंभों और बिजली के तारों से दूर रहना चाहिए।

प्रश्न 4. सुनामी के कारण एवं प्रभाव बताइए।

उत्तर:

सुनामी का प्रमुख कारण समुद्र तल का अचानक बड़ा विस्थापन है, जो प्रायः शक्तिशाली समुद्रतलीय भूकंप के कारण होता है। कुछ ज्वालामुखीय विस्फोट और समुद्री भूस्खलन भी सुनामी उत्पन्न कर सकते हैं।

सुनामी तटीय क्षेत्रों में तेज जलप्रवाह, जलप्लावन, भवनों की क्षति, जनहानि और आधारभूत संरचना के विनाश का कारण बन सकती है।

प्रश्न 5. सुनामी से बचाव के उपाय बताइए।

उत्तर:

सुनामी संभावित तटीय क्षेत्रों में चेतावनी प्रणाली और सुरक्षित निकासी मार्गों की जानकारी आवश्यक है। तेज भूकंप महसूस होने या प्राकृतिक चेतावनी संकेत मिलने पर तट से तुरंत दूर जाना चाहिए।

ऊँचे सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए और आधिकारिक रूप से सुरक्षित घोषित किए जाने तक तट पर वापस नहीं लौटना चाहिए।

18. Quick Revision

भूकंप → पृथ्वी की सतह पर कंपन

मुख्य कारण → विवर्तनिक गतिविधियाँ

केंद्र → पृथ्वी के भीतर उत्पत्ति स्थान

अधिकेंद्र → केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह

P-तरंग → सबसे तेज

S-तरंग → केवल ठोस से गुजरती है

सिस्मोग्राफ → भूकंपीय तरंग रिकॉर्ड करता है

1934 → बिहार-नेपाल भूकंप

सुनामी → समुद्री जल के बड़े विस्थापन से उत्पन्न तरंगें

2004 सुनामी → 26 दिसंबर 2004

भूकंप सुरक्षा → Drop, Cover, Hold On

सुनामी सुरक्षा → तट से दूर एवं ऊँचे स्थान पर जाएँ

परीक्षा के लिए जरूर याद करें

भूकंप की परिभाषा, केंद्र और अधिकेंद्र का अंतर, P एवं S तरंगें, सिस्मोग्राफ, 1934 बिहार-नेपाल भूकंप, भूकंप से बचाव, सुनामी की परिभाषा, कारण, 2004 की सुनामी और सुनामी से सुरक्षा विशेष रूप से तैयार करें।

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