Bihar Board Class 9 Maths त्रिभुज (Triangles) Complete Notes in Hindi

BSEB Class 9 Mathematics
त्रिभुज (Triangles) – Complete Notes in Hindi

त्रिभुज के प्रकार, कोण-योगफल, बाह्य कोण प्रमेय, माध्यिका, सर्वांगसमता, SAS, ASA, SSS, RHS तथा समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों का सरल अध्ययन।

विषय-सूची / Table of Contents

1. त्रिभुज का परिचय / Introduction to Triangle

तीन असंरेखीय बिंदुओं को तीन रेखाखंडों से जोड़ने पर बनी बंद आकृति को त्रिभुज कहते हैं। त्रिभुज को संकेत से दर्शाते हैं।
A B C भुजा BC

△ABC में AB, BC और CA इसकी भुजाएँ हैं तथा ∠BAC, ∠ABC और ∠ACB इसके तीन कोण हैं। A, B और C त्रिभुज के शीर्ष कहलाते हैं।

2. त्रिभुज के अंग / Parts of a Triangle

तीन शीर्ष A, B और C त्रिभुज के शीर्ष हैं।
तीन भुजाएँ AB, BC और CA त्रिभुज की भुजाएँ हैं।
तीन कोण ∠A, ∠B और ∠C त्रिभुज के अंतःकोण हैं।
किसी त्रिभुज में कुल छह प्रमुख अंग होते हैं—तीन भुजाएँ और तीन कोण।

3. भुजाओं के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण

समबाहु त्रिभुज जिस त्रिभुज की तीनों भुजाएँ बराबर हों। इसमें तीनों कोण भी बराबर और प्रत्येक कोण 60° होता है।
AB = BC = CA
समद्विबाहु त्रिभुज जिस त्रिभुज की कोई दो भुजाएँ बराबर हों। बराबर भुजाओं के सामने के कोण भी बराबर होते हैं।
AB = AC
विषमबाहु त्रिभुज जिस त्रिभुज की तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ अलग-अलग हों।
AB ≠ BC ≠ CA

4. कोणों के आधार पर त्रिभुजों का वर्गीकरण

त्रिभुज पहचान
न्यूनकोण त्रिभुज तीनों कोण 90° से छोटे होते हैं।
समकोण त्रिभुज एक कोण ठीक 90° होता है।
अधिककोण त्रिभुज एक कोण 90° से अधिक होता है।
किसी त्रिभुज में अधिकतम एक समकोण अथवा अधिकतम एक अधिककोण हो सकता है। समकोण के सामने वाली भुजा को कर्ण कहते हैं।

5. त्रिभुज के बाह्य कोण / Exterior Angles

त्रिभुज की किसी भुजा को आगे बढ़ाने पर विस्तारित भुजा और उसकी संलग्न भुजा के बीच बनने वाला कोण त्रिभुज का बाह्य कोण कहलाता है।

A B C D बाह्य कोण

6. त्रिभुज की माध्यिका / Median of a Triangle

त्रिभुज के किसी शीर्ष को उसके सामने वाली भुजा के मध्य-बिंदु से मिलाने वाला रेखाखंड त्रिभुज की माध्यिका कहलाता है।
A B C D
यदि BD = DC, तो AD एक माध्यिका है।

प्रत्येक त्रिभुज में तीन माध्यिकाएँ होती हैं और वे एक ही बिंदु पर मिलती हैं।

7. त्रिभुज का कोण-योगफल प्रमेय

प्रमेय
किसी त्रिभुज के तीनों अंतःकोणों का योग 180° होता है।
∠A + ∠B + ∠C = 180°

संक्षिप्त प्रमाण

  1. शीर्ष A से भुजा BC के समानांतर एक रेखा खींचें।
  2. एकांतर अंतःकोणों के कारण B और C के कोण, A पर बने संबंधित कोणों के बराबर होंगे।
  3. A पर एक सीधी रेखा पर बने तीनों कोणों का योग 180° होगा।
  4. अतः ∠A + ∠B + ∠C = 180°।
उदाहरण: △ABC में ∠A = 80° और ∠B = 60° है। ∠C ज्ञात करें।

∠C = 180° − (80° + 60°)
∠C = 40°

8. बाह्य कोण प्रमेय / Exterior Angle Theorem

प्रमेय
त्रिभुज का एक बाह्य कोण उसके दोनों अंतःअभिमुख कोणों के योग के बराबर होता है।
बाह्य कोण = दोनों अंतःअभिमुख कोणों का योग
∠ACD = ∠A + ∠B

उपप्रमेय

त्रिभुज का प्रत्येक बाह्य कोण उसके किसी भी एक अंतःअभिमुख कोण से बड़ा होता है।

उदाहरण: यदि दो अंतःअभिमुख कोण 55° और 65° हैं, तो बाह्य कोण:

55° + 65° = 120°

9. आकृतियों की सर्वांगसमता / Congruence of Figures

समान आकार और समान माप वाली दो ज्यामितीय आकृतियाँ सर्वांगसम आकृतियाँ कहलाती हैं।

यदि एक आकृति को बिना मोड़े या उसका आकार बदले दूसरी आकृति पर रखने से वह उसे पूरी तरह ढक देती है, तो दोनों आकृतियाँ सर्वांगसम हैं।

सर्वांगसमता का संकेत: ≅
सर्वांगसम आकृतियों की स्थिति और दिशा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन उनका आकार एवं माप समान रहता है।

10. रेखाखंडों एवं कोणों की सर्वांगसमता

सर्वांगसम रेखाखंड दो रेखाखंड सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी लंबाइयाँ समान हों।
AB ≅ CD ⇔ AB = CD
सर्वांगसम कोण दो कोण सर्वांगसम होते हैं यदि उनके माप बराबर हों।
∠ABC ≅ ∠DEF
सर्वांगसम वृत्त समान त्रिज्या वाले दो वृत्त सर्वांगसम होते हैं।

11. संगत भुजाएँ एवं संगत कोण

दो त्रिभुजों को एक-दूसरे पर रखने पर जो शीर्ष, भुजाएँ और कोण परस्पर मिलते हैं, उन्हें उनके संगत भाग कहते हैं।

△ABC △DEF का संगत भाग
AD
BE
CF
ABDE
BCEF
ACDF
सर्वांगसमता लिखते समय शीर्षों का क्रम सही रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि A ↔ D, B ↔ E और C ↔ F है, तो सही रूप △ABC ≅ △DEF होगा।

12. त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं CPCT

दो त्रिभुज तब सर्वांगसम होते हैं जब उनकी संगत भुजाएँ तथा संगत कोण बराबर हों।

△ABC ≅ △DEF

तब निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होते हैं:

  • AB = DE, BC = EF और AC = DF
  • ∠A = ∠D, ∠B = ∠E और ∠C = ∠F
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं। इसे CPCT — Corresponding Parts of Congruent Triangles कहते हैं।

13–16. त्रिभुजों की सर्वांगसमता के नियम

SAS

यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दूसरे त्रिभुज की संगत दो भुजाओं और उनके बीच के कोण के बराबर हों।

भुजा–कोण–भुजा
ASA

यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनके बीच की भुजा दूसरे त्रिभुज के संगत दो कोणों और उनके बीच की भुजा के बराबर हों।

कोण–भुजा–कोण
SSS

यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की तीनों संगत भुजाओं के बराबर हों।

भुजा–भुजा–भुजा
RHS

दो समकोण त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि उनके कर्ण और एक संगत भुजा बराबर हों।

समकोण–कर्ण–भुजा
केवल तीनों कोण बराबर होने की स्थिति, अर्थात AAA, सर्वांगसमता के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे केवल त्रिभुजों की समरूपता निश्चित होती है।

17. समद्विबाहु त्रिभुज के गुण

प्रमेय 1
समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं।
यदि AB = AC, तो ∠B = ∠C
प्रमेय 2: विलोम
यदि किसी त्रिभुज के दो कोण बराबर हों, तो उनके सामने की भुजाएँ भी बराबर होती हैं।
यदि ∠B = ∠C, तो AB = AC

प्रमाण का आधार

शीर्ष A से आधार BC पर कोण समद्विभाजक AD खींचने पर △ABD और △ACD को SAS अथवा ASA नियम से सर्वांगसम सिद्ध किया जा सकता है। इसके बाद शेष संगत भागों की बराबरी CPCT से प्राप्त होती है।

18. शीर्षलंब, माध्यिका और कोण समद्विभाजक

विशेष रेखा अर्थ
शीर्षलंब शीर्ष से सामने वाली भुजा पर खींचा गया लंब।
माध्यिका शीर्ष को सामने वाली भुजा के मध्य-बिंदु से मिलाने वाला रेखाखंड।
कोण समद्विभाजक किसी कोण को दो बराबर भागों में बाँटने वाली किरण या रेखाखंड।
सामान्य त्रिभुज में शीर्षलंब, माध्यिका और कोण समद्विभाजक अलग-अलग हो सकते हैं। समद्विबाहु त्रिभुज में शीर्ष से आधार पर खींची गई विशेष रेखा कई स्थितियों में इन तीनों का कार्य करती है।

19. महत्वपूर्ण हल उदाहरण / Solved Examples

उदाहरण 1: त्रिभुज के दो कोण 45° और 75° हैं। तीसरा कोण ज्ञात करें।

तीसरा कोण = 180° − (45° + 75°)
उत्तर: 60°

उदाहरण 2: किसी त्रिभुज का बाह्य कोण 125° तथा एक अंतःअभिमुख कोण 55° है। दूसरा अंतःअभिमुख कोण ज्ञात करें।

दूसरा कोण = 125° − 55°
उत्तर: 70°

उदाहरण 3: △ABC और △DEF में AB = DE, BC = EF और ∠B = ∠E है। कौन-सा सर्वांगसमता नियम लागू होगा?

उत्तर: SAS नियम।

उदाहरण 4: दो समकोण त्रिभुजों के कर्ण 10 cm तथा एक-एक संगत भुजा 8 cm है। क्या वे सर्वांगसम हैं?

उत्तर: हाँ, RHS नियम से दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं।

20. अभ्यास प्रश्न / Practice Questions

  1. त्रिभुज की परिभाषा लिखिए और उसके छह अंगों के नाम बताइए।
  2. भुजाओं के आधार पर त्रिभुज कितने प्रकार के होते हैं?
  3. न्यूनकोण, समकोण और अधिककोण त्रिभुज को परिभाषित कीजिए।
  4. त्रिभुज के कोण-योगफल प्रमेय का कथन लिखिए।
  5. त्रिभुज के बाह्य कोण प्रमेय को लिखिए।
  6. माध्यिका और शीर्षलंब में अंतर बताइए।
  7. सर्वांगसम आकृतियाँ किसे कहते हैं?
  8. संगत भुजाओं और संगत कोणों का क्या अर्थ है?
  9. CPCT का पूरा नाम और अर्थ लिखिए।
  10. SAS, ASA, SSS और RHS नियमों के कथन लिखिए।
  11. समद्विबाहु त्रिभुज के दो प्रमुख गुण लिखिए।
  12. क्या AAA सर्वांगसमता का नियम है? कारण दीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न / FAQs

त्रिभुज के तीनों कोणों का योग कितना होता है?

प्रत्येक त्रिभुज के तीनों अंतःकोणों का योग 180° होता है।

समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण कितना होता है?

समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण 60° होता है।

CPCT का अर्थ क्या है?

सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं।

क्या SSA सर्वांगसमता का सामान्य नियम है?

नहीं, SSA की जानकारी सामान्यतः त्रिभुज की सर्वांगसमता निश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं होती।

RHS नियम किन त्रिभुजों पर लागू होता है?

RHS नियम केवल समकोण त्रिभुजों पर लागू होता है।

त्वरित पुनरावृत्ति / Quick Revision

  • त्रिभुज में तीन भुजाएँ, तीन शीर्ष और तीन कोण होते हैं।
  • त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
  • बाह्य कोण दो अंतःअभिमुख कोणों के योग के बराबर होता है।
  • सर्वांगसमता के मुख्य नियम SAS, ASA, SSS और RHS हैं।
  • सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं—CPCT।
  • समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं।