Class 10 Sanskrit Chapter 13 विश्वशान्तिः Notes in Hindi | हिंदी अनुवाद, प्रश्न उत्तर और MCQ

Class 10 Sanskrit Chapter 13 विश्वशान्तिः Notes in Hindi | हिंदी अनुवाद, प्रश्न उत्तर और MCQ
BSEB EXAM GUIDE

Bihar Board Class 10 Sanskrit | पीयूषम्

पाठ 13 – विश्वशान्तिः

Class 10 Sanskrit Chapter 13 Vishwashanti Notes in Hindi

हिंदी अनुवाद | शब्दार्थ | व्याकरण | प्रश्न उत्तर | MCQ

विषय-सूची

1. पाठ परिचय 2. हिंदी सारांश 3. मूल पाठ एवं हिंदी अनुवाद 4. शब्दार्थ 5. संधि-विच्छेद 6. समास 7. प्रकृति-प्रत्यय 8. मौखिक अभ्यास 9. लिखित अभ्यास 10. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 11. 20 Objective Questions 12. Quick Revision 13. FAQs

1. विश्वशान्तिः – पाठ परिचय

विश्वशान्तिः बिहार बोर्ड कक्षा 10 की संस्कृत पुस्तक पीयूषम् का तेरहवाँ पाठ है। इसमें संसार में बढ़ती अशांति, देशों के बीच संघर्ष, शीतयुद्ध, आपसी अविश्वास और शांति स्थापित करने के उपायों का वर्णन किया गया है।

पाठ में बताया गया है कि मानवता की रक्षा और विश्वकल्याण के लिए युद्ध तथा द्वेष का त्याग करना आवश्यक है। भारत की प्राचीन परंपरा मैत्री, करुणा और अहिंसा का संदेश देती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

पाठ – विश्वशान्तिः
कक्षा – 10
पुस्तक – पीयूषम्
पाठ संख्या – 13
पृष्ठ – 104–111
मुख्य विषय – विश्व शांति और मानव कल्याण
मुख्य संदेश – द्वेष का त्याग, मैत्री, करुणा और शांति

2. विश्वशान्तिः का हिंदी सारांश

वर्तमान संसार में लगभग सभी देशों में अशांति दिखाई देती है। कहीं युद्ध चल रहा है, तो कहीं देश के भीतर संघर्ष की स्थिति है। कुछ देशों में आपसी शीतयुद्ध चल रहा है। इसके कारण पूरा संसार अशांति के समुद्र के समान दिखाई देता है।

आज संसार में अनेक विनाशकारी हथियार बनाए जा रहे हैं। ये हथियार मानवता के लिए गंभीर खतरा हैं। विभिन्न देशों के बीच स्वार्थ, ईर्ष्या, असहिष्णुता और प्रतिस्पर्धा के कारण संघर्ष उत्पन्न होता है।

पाठ के अनुसार अशांति के कारणों को दूर करने के लिए पहले उनके मूल कारणों को समझना चाहिए। स्वार्थ और ईर्ष्या का त्याग करके परस्पर सहयोग और सद्भावना को बढ़ाना आवश्यक है।

संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ विश्वशांति के लिए प्रयास करती हैं। भारत की परंपरा भी शांति और मैत्री पर आधारित रही है। महात्मा बुद्ध ने वैर को अवैर अर्थात् प्रेम और मैत्री से शांत करने का उपदेश दिया।

इस प्रकार पाठ हमें सिखाता है कि विश्वशांति के लिए सभी देशों और मनुष्यों को आपसी वैमनस्य छोड़कर करुणा, सहिष्णुता, न्याय और सहयोग अपनाना चाहिए।

मुख्य शिक्षा: हिंसा और द्वेष से स्थायी शांति नहीं मिलती। विश्व में शांति स्थापित करने के लिए परस्पर मैत्री, करुणा, न्याय और सहयोग आवश्यक हैं।

3. मूल पाठ के प्रमुख अंश एवं हिंदी अनुवाद

अनुच्छेद 1 – संसार में अशांति

वर्तमाने संसारे प्रायशः सर्वेषु देशेषु उपद्रवः अशान्तिर्वा दृश्यते। क्वचिदेव शान्तं वातावरणं वर्तते। क्वचिच्च देशस्य आन्तरिकी समस्यामाश्रित्य कलहो वर्तते, तेन शत्रुरूपेण मौद्यमानानि कलहं वर्धयन्ति।
हिंदी अर्थ: वर्तमान संसार में लगभग सभी देशों में उपद्रव या अशांति दिखाई देती है। कहीं-कहीं ही शांत वातावरण है। कहीं देश की आंतरिक समस्याओं के कारण संघर्ष होता है और शत्रुता के कारण विवाद बढ़ता जाता है।

अनुच्छेद 2 – शीतयुद्ध और विनाशकारी अस्त्र

क्वचित् अनेकषु राज्येषु परस्परं शीतयुद्धं प्रचलति। वस्तुतः संसारः अशान्तिसागरस्य कूलमध्यस्थानीव दृश्यते। अशान्तिरेव मानवताविनाशाय कल्पते।
हिंदी अर्थ: कहीं अनेक देशों के बीच शीतयुद्ध चल रहा है। वास्तव में संसार अशांति के समुद्र के किनारे खड़ा दिखाई देता है। अशांति मानवता के विनाश का कारण बनती है।

अनुच्छेद 3 – अशांति के कारण

अशान्तेः कारणं तथा निवारणोपायश्च सावधानतया चिन्तनीयौ। कारणं ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते इति नीतिः। वस्तुतः द्वेषः असहिष्णुता च अशान्तेः कारणद्वयम्।
हिंदी अर्थ: अशांति के कारण और उसे दूर करने के उपायों पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए। कारण का पता चलने पर निवारण का उपाय भी मिल जाता है। वास्तव में द्वेष और असहिष्णुता अशांति के दो प्रमुख कारण हैं।

अनुच्छेद 4 – स्वार्थ और ईर्ष्या

एको देशः अपरस्य उत्कर्षं दृष्ट्वा ईर्ष्यते, तस्य देशस्य उत्कर्षविनाशाय निरन्तरं प्रयतते। द्वेषः एव असहिष्णुता जनयति।
हिंदी अर्थ: एक देश दूसरे देश की उन्नति देखकर ईर्ष्या करता है और उसकी प्रगति नष्ट करने का लगातार प्रयास करता है। द्वेष ही असहिष्णुता उत्पन्न करता है।

अनुच्छेद 5 – विश्वशांति के प्रयास

अत्र महापुरुषाः विद्वांसः चिन्तकाश्च न विरलाः सन्ति। शान्तिं कर्तव्यमिति यत् जाने-जाने, समाजे-समाजे, राज्ये-राज्ये च परामर्शा वृत्तिं जनयेयुः।
हिंदी अर्थ: संसार में महापुरुषों, विद्वानों और विचारकों की कमी नहीं है। उन्हें प्रत्येक व्यक्ति, समाज और राज्य में शांति स्थापित करने के विचारों का प्रसार करना चाहिए।

अनुच्छेद 6 – संयुक्त राष्ट्र और शांति

शुकः उपदेशेन न पर्याप्तः, प्रत्यक्षं तस्य कार्यान्वयनञ्च जीवनैर्निर्वाह्यम्। उल्लेख्यं यत् द्वितीयं विश्वयुद्धं पश्चात् च विश्वशान्तिं प्राप्तुम् संयुक्तराष्ट्रसङ्घप्रभृतयः संस्थाः सन्ति।
हिंदी अर्थ: केवल उपदेश पर्याप्त नहीं है; शांति के सिद्धांतों को जीवन में व्यवहार के रूप में लागू करना भी आवश्यक है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद विश्वशांति के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं की स्थापना हुई।

अनुच्छेद 7 – महात्मा बुद्ध का संदेश

भगवान् बुद्धः पुराकाले एव वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवं प्रोक्तवान्। अवैरेण करुणया मैत्रीभावेन च वैरस्य शान्तिः भवतीति सर्वं मन्यन्ते।
हिंदी अर्थ: भगवान बुद्ध ने प्राचीन समय में ही बताया था कि शत्रुता से शत्रुता का अंत नहीं होता। वैर को समाप्त करने के लिए प्रेम, करुणा और मैत्रीभाव आवश्यक हैं।

अनुच्छेद 8 – भारतीय नीति का संदेश

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
हिंदी अर्थ: यह अपना है और वह पराया है, ऐसा विचार संकीर्ण मन वाले लोग करते हैं। उदार चरित्र वाले व्यक्तियों के लिए पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है।

अनुच्छेद 9 – शांति का महत्व

परपीडनम् आत्मनाशाय जायते, परोपकारश्च शान्तिकारणं भवति।
हिंदी अर्थ: दूसरों को पीड़ा देना स्वयं के विनाश का कारण बनता है, जबकि परोपकार शांति का कारण बनता है।
पाठ-अध्ययन नोट: ऊपर संस्कृत के प्रमुख अंश अध्ययन के लिए व्यवस्थित किए गए हैं। पूर्ण मूल पाठ का शब्दशः अध्ययन करने के लिए पीयूषम् के पृष्ठ 104–105 भी पढ़ें।

4. महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दार्थ

संस्कृत शब्दहिंदी अर्थ
वाअथवा
आश्रित्यसहारा लेकर
मौद्यमानानिआनन्दित
कलहम्झगड़ा, विवाद
वर्धयन्तिबढ़ाते हैं
शीतयुद्धम्शीतयुद्ध
कूलम्किनारा
विश्वध्वंसकानिनष्ट करने वाले
निवारणम्दूर करना
असहिष्णुतादूसरे की उन्नति न सहना
विरलाःबहुत कम
प्रत्युतबल्कि
शमयितुम्शांत करने के लिए
प्रभृतयःइत्यादि
पुराकालेप्राचीन काल में
करुणयादया से
लघुचेतसाम्छोटी सोच वालों का
निजःअपना
वसुधापृथ्वी
निरन्तरम्लगातार
अध्यासीनःविराजमान
परोपकारःदूसरों की भलाई
उत्कर्षःउन्नति
स्वार्थःअपना हित
द्वेषःईर्ष्या, शत्रुता
नीतिःनीति
शान्तिःशांति

5. संधि-विच्छेद

पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 106–107 में दिए गए प्रमुख संधि-विच्छेद:

संधियुक्त पदसंधि-विच्छेद
अशान्तिर्वाअशान्तिः + वा
क्वचिदेवक्वचित् + एव
अशान्तिश्चअशान्तिः + च
विश्वविध्वंसकान्यस्त्राणिविश्वविध्वंसकानि + अस्त्राणि
बहून्याविष्कृतानिबहूनि + आविष्कृतानि
तैरेवतैः + एव
निवारणोपायश्चनिवारण + उपायः + च
उपायोऽपिउपायः + अपि
स्वार्थश्चस्व + अर्थः + च
विश्वस्मिन्नपिविश्वस्मिन् + अपि
परोपकारम्पर + उपकारम्
कार्यान्वयनञ्चकार्यान्वयनम् + च
जीवनैर्निर्वाह्यम्जीवनैः + निर्वाह्यम्
बलञ्चबलम् + च
भवतीतिभवति + इति
वेतिवा + इति
वसुधैववसुधा + एव
अद्यापिअद्य + अपि

6. समास – समास विग्रह

समस्त पदसमास-विग्रहसमास
अशान्तिःन शान्तिःनञ् समास
महापुरुषःमहान् चासौ पुरुषःकर्मधारय
शत्रुरूपाणिशत्रोः रूपाणिषष्ठी तत्पुरुष
अशान्तिसागरःअशान्तेः सागरःषष्ठी तत्पुरुष
शीतयुद्धम्शीतं च तत् युद्धम्कर्मधारय
स्वार्थोपदेशःस्वार्थस्य उपदेशःषष्ठी तत्पुरुष
परोपकारःपरस्य उपकारःषष्ठी तत्पुरुष
विश्वशान्तिःविश्वस्य शान्तिःषष्ठी तत्पुरुष
असम्भवम्न सम्भवम्नञ् समास
स्वार्थप्रेरितःस्वार्थेन प्रेरितःतृतीया तत्पुरुष
सूर्योदयःसूर्यस्य उदयःषष्ठी तत्पुरुष
परपीडनम्परस्य पीडनम्षष्ठी तत्पुरुष
मानवताविनाशायमानवतायाः विनाशायषष्ठी तत्पुरुष

7. प्रकृति-प्रत्यय विभाग

पदप्रकृति + प्रत्यय
आश्रित्यआ + श्रि + ल्यप्
दृष्ट्वादृश् + क्त्वा
उत्कृष्यउत् + कृष् + ल्यप्
उक्तम्वच् + क्त
शमयितुम्शम् + णिच् + तुमुन्
शमनम्शम् + ल्युट्
नीतिःनी + क्तिन्
शान्तिःशम् + क्तिन्
उत्कर्षःउत् + कृष् + घञ्
भयम्भी + अच्
प्रेरितःप्र + ईर् + क्त
भारःभृ + घञ्

8. मौखिक अभ्यास – पृष्ठ 108–109

प्रश्न 1 – एकपदेन उत्तरं वदत

(क) शत्रुरूपाणि किं वर्धयन्ति?

उत्तरम् – कलहम्।

(ख) अनेकेषु राज्येषु परस्परं किं प्रचलति?

उत्तरम् – शीतयुद्धम्।

(ग) सर्वं किं त्यजेयुः?

उत्तरम् – स्वार्थम्।

(घ) वैरेण कस्य शमनम् असम्भवम्?

उत्तरम् – वैरस्य।

(ङ) क्रियाविना किं भारः?

उत्तरम् – ज्ञानम्।

प्रश्न 2 – प्रकृति-प्रत्यय विभाग

पदप्रकृति-प्रत्यय
नीतिःनी + क्तिन्
उक्तम्वच् + क्त
दृष्ट्वादृश् + क्त्वा
शमनम्शम् + ल्युट्
आश्रित्यआ + श्रि + ल्यप्

9. लिखित अभ्यास – पृष्ठ 109–111

प्रश्न 1 – संस्कृतभाषायाम् उत्तराणि लिखत

(क) अशान्तिसागरस्य कूलमध्यस्थानीव कः दृश्यते?

उत्तरम् – संसारः अशान्तिसागरस्य कूलमध्यस्थानीव दृश्यते।

(ख) अद्य विश्वध्वंसकानि कानि आविष्कृतानि सन्ति?

उत्तरम् – अद्य विश्वध्वंसकानि बहूनि अस्त्राणि आविष्कृतानि सन्ति।

(ग) अशान्तेः कारणद्वयं किम् अस्ति?

उत्तरम् – द्वेषः असहिष्णुता च अशान्तेः कारणद्वयम् अस्ति।

(घ) असहिष्णुतां कः जनयति?

उत्तरम् – द्वेषः असहिष्णुतां जनयति।

(ङ) कः बलपूर्वकं निवारणीयः?

उत्तरम् – द्वेषः बलपूर्वकं निवारणीयः।

प्रश्न 2 – शब्दानां संस्कृते प्रयोगं कुरुत

अयम्

अयं छात्रः पठति।

अशान्तिः

युद्धेन अशान्तिः वर्धते।

मैत्री

मैत्री शान्तेः कारणं भवति।

उत्कर्षम्

सर्वे देशस्य उत्कर्षम् इच्छन्ति।

प्रेरकः

शिक्षकः छात्राणां प्रेरकः अस्ति।

परोपकारः

परोपकारः महान् गुणः अस्ति।

प्रश्न 3 – संधि-विच्छेदं कुरुत

पदविच्छेद
परोपकारःपर + उपकारः
निवारणोपायश्चनिवारण + उपायः + च
विश्वस्मिन्नपिविश्वस्मिन् + अपि
उक्तञ्चउक्तम् + च
भवतीतिभवति + इति
वसुधैववसुधा + एव
जीवनैर्निर्वाह्यम्जीवनैः + निर्वाह्यम्

प्रश्न 4 – रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्ननिर्माण

(क) कारणं ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते।

प्रश्नः – कस्मिन् ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते?

(ख) सर्वेषु देशेषु अशान्तिः दृश्यते।

प्रश्नः – कुत्र अशान्तिः दृश्यते?

(ग) स्वार्थः वैरं प्रवर्धयति।

प्रश्नः – कः वैरं प्रवर्धयति?

(घ) राजनीतिज्ञाः अत्र विशेषेण प्रेरकाः।

प्रश्नः – के अत्र विशेषेण प्रेरकाः?

(ङ) सामान्याः जनाः न तथा विश्वस्मिन्नपि बलेन प्रेरिताः जायन्ते।

प्रश्नः – के न तथा विश्वस्मिन्नपि बलेन प्रेरिताः जायन्ते?

प्रश्न 5 – प्रकृति-प्रत्यय विभाग

पदउत्तर
उक्तम्वच् + क्त
नीतिःनी + क्तिन्
भारःभृ + घञ्
शमनम्शम् + ल्युट्
शान्तिःशम् + क्तिन्
आश्रित्यआ + श्रि + ल्यप्

प्रश्न 6 – समास-विग्रह

समस्त पदविग्रह
अशान्तेःन शान्तेः
बलेनयह असमस्त पद है
महापुरुषाःमहान्तः पुरुषाः
वैरस्ययह असमस्त पद है
द्वेषीयह असमस्त पद है
अपरस्ययह असमस्त पद है
संकटकालेसंकटस्य काले

प्रश्न 7 – एकवचन से बहुवचन में परिवर्तन

(क) विद्वान् कथयति।

विद्वांसः कथयन्ति।

(ख) जनः जानाति।

जनाः जानन्ति।

(ग) भारतीयः नीतिकारः उद्बोधयति।

भारतीयाः नीतिकाराः उद्बोधयन्ति।

(घ) देशः प्रेरयति।

देशाः प्रेरयन्ति।

(ङ) सः उत्कर्षं मन्यते।

ते उत्कर्षं मन्यन्ते।

(च) त्वं कुत्र गच्छसि?

यूयं कुत्र गच्छथ?

प्रश्न 8 – विपरीतार्थक शब्द

शब्दविलोम
स्वार्थःपरमार्थः
बलम्निर्बलम्
सामान्यःविशेषः
उत्कर्षःअपकर्षः
द्वेषःमैत्री
शीतम्उष्णम्
विश्वध्वंसम्विश्वकल्याणम्

प्रश्न 9 – रिक्तस्थान पूर्ति

दिए गए पद – क्वचिदेव, वैरस्य, विरलाः, सावधानतया, पर्याप्तः।

(क) अशान्तेः कारणं तथा निवारणोपायश्च ________ चिन्तनीयौ।

उत्तरम् – सावधानतया।

(ख) अवैरेण करुणया मैत्रीभावेन च ________ शान्तिः भवति।

उत्तरम् – वैरस्य।

(ग) अत्र महापुरुषाः ________ सन्ति।

उत्तरम् – विरलाः।

(घ) शुष्कः उपदेशः न ________।

उत्तरम् – पर्याप्तः।

(ङ) ________ शान्तं वातावरणं वर्तते।

उत्तरम् – क्वचिदेव।

योग्यता विस्तार

पाठ्यपुस्तक में विश्वशांति और मानव कल्याण पर विचार करने के लिए कहा गया है। विद्यार्थी निम्नलिखित विषयों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिख सकते हैं:

विश्वशांति: विश्वशांति का अर्थ संसार के देशों और लोगों के बीच हिंसा, युद्ध तथा शत्रुता का अभाव और सहयोगपूर्ण जीवन है।

धर्म और शांति: सत्य, अहिंसा, करुणा, क्षमा और मैत्री जैसे मानवीय गुण शांति स्थापित करने में सहायक हैं।

10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. विश्वशान्तिः पाठ का मुख्य विषय क्या है?

विश्व में अशांति के कारण और शांति स्थापित करने के उपाय।

2. अशांति के दो मुख्य कारण कौन-से हैं?

द्वेष और असहिष्णुता।

3. शीतयुद्ध का क्या अर्थ है?

देशों के बीच प्रत्यक्ष युद्ध के बिना राजनीतिक और सामरिक तनाव की स्थिति।

4. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद कौन-सी अंतरराष्ट्रीय संस्था स्थापित हुई?

संयुक्त राष्ट्र।

5. महात्मा बुद्ध ने वैर समाप्त करने का क्या उपाय बताया?

अवैर, करुणा और मैत्रीभाव।

6. वसुधैव कुटुम्बकम् का अर्थ क्या है?

पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

7. एक देश दूसरे देश की उन्नति से ईर्ष्या क्यों करता है?

स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा और असहिष्णुता के कारण।

8. विश्वशांति के लिए किन गुणों की आवश्यकता है?

मैत्री, सहिष्णुता, करुणा, परोपकार और सहयोग।

9. पाठ में उपदेश के साथ किस बात पर बल दिया गया है?

उपदेशों को व्यवहार में लागू करने पर।

10. विश्वशांति का अंतिम उद्देश्य क्या है?

मानवता की रक्षा और सभी का कल्याण।

11. Important Objective Questions – 20 MCQ

सही उत्तर देखने के लिए View Answer पर क्लिक करें।

1. विश्वशान्तिः किस कक्षा का पाठ है?

A. 8
B. 9
C. 10
D. 12
View Answer

C. 10

2. विश्वशान्तिः किस पुस्तक का पाठ है?

A. पीयूषम्
B. अमरकोश
C. पञ्चतन्त्रम्
D. हितोपदेश
View Answer

A. पीयूषम्

3. विश्वशान्तिः पाठ की संख्या क्या है?

A. 10
B. 11
C. 12
D. 13
View Answer

D. 13

4. वर्तमान संसार में क्या दिखाई देता है?

A. केवल शांति
B. अशांति
C. केवल सुख
D. केवल उत्सव
View Answer

B. अशांति

5. ‘शीतयुद्धम्’ का अर्थ क्या है?

A. जलयुद्ध
B. शीतयुद्ध
C. धार्मिक उत्सव
D. पर्वतारोहण
View Answer

B. शीतयुद्ध

6. अशांति का मुख्य कारण क्या है?

A. करुणा
B. मैत्री
C. द्वेष
D. परोपकार
View Answer

C. द्वेष

7. असहिष्णुता का अर्थ क्या है?

A. सहयोग करना
B. दूसरे की उन्नति न सहना
C. दान करना
D. मित्रता करना
View Answer

B. दूसरे की उन्नति न सहना

8. ‘कलहम्’ का अर्थ क्या है?

A. शांति
B. विवाद
C. प्रेम
D. ज्ञान
View Answer

B. विवाद

9. ‘कूलम्’ का अर्थ क्या है?

A. पर्वत
B. किनारा
C. जंगल
D. आकाश
View Answer

B. किनारा

10. ‘निवारणम्’ का अर्थ क्या है?

A. बढ़ाना
B. दूर करना
C. बुलाना
D. जीतना
View Answer

B. दूर करना

11. विश्वशांति के लिए कौन-सी संस्था प्रयास करती है?

A. संयुक्त राष्ट्र
B. केवल ग्रामसभा
C. केवल विद्यालय
D. केवल व्यापार संघ
View Answer

A. संयुक्त राष्ट्र

12. भगवान बुद्ध ने वैर को किससे शांत करने की शिक्षा दी?

A. क्रोध से
B. युद्ध से
C. करुणा और मैत्री से
D. ईर्ष्या से
View Answer

C. करुणा और मैत्री से

13. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का अर्थ क्या है?

A. केवल अपना देश महान है
B. पृथ्वी एक परिवार है
C. धन ही सब कुछ है
D. युद्ध आवश्यक है
View Answer

B. पृथ्वी एक परिवार है

14. ‘अयं निजः परो वेति’ किस विचार का विरोध करता है?

A. उदारता
B. संकीर्ण अपना-पराया भाव
C. शांति
D. सहयोग
View Answer

B. संकीर्ण अपना-पराया भाव

15. ‘अशान्तिर्वा’ का संधि-विच्छेद क्या है?

A. अशान्तिः + वा
B. अशान्ति + रवा
C. अशान्ति + वः
D. अशान्तिः + एव
View Answer

A. अशान्तिः + वा

16. ‘वसुधैव’ का संधि-विच्छेद क्या है?

A. वसुधा + एव
B. वसु + धैव
C. वसुधा + इव
D. वसुध + एव
View Answer

A. वसुधा + एव

17. ‘विश्वशान्तिः’ में कौन-सा समास है?

A. द्वन्द्व
B. षष्ठी तत्पुरुष
C. द्विगु
D. अव्ययीभाव
View Answer

B. षष्ठी तत्पुरुष

18. ‘दृष्ट्वा’ में कौन-सा प्रत्यय है?

A. तुमुन्
B. क्त्वा
C. ल्युट्
D. तव्यत्
View Answer

B. क्त्वा

19. ‘शान्तिः’ शब्द किस धातु से बना है?

A. गम्
B. शम्
C. पठ्
D. भू
View Answer

B. शम्

20. विश्वशान्तिः पाठ की मुख्य शिक्षा क्या है?

A. युद्ध और संघर्ष
B. स्वार्थ और ईर्ष्या
C. मैत्री, करुणा और शांति
D. हिंसा और द्वेष
View Answer

C. मैत्री, करुणा और शांति

12. Quick Revision – एक नजर में

विषयउत्तर
पाठविश्वशान्तिः
अध्याय13
कक्षा10
पुस्तकपीयूषम्
पृष्ठ104–111
मुख्य समस्याविश्व में अशांति
मुख्य कारणद्वेष और असहिष्णुता
अंतरराष्ट्रीय संस्थासंयुक्त राष्ट्र
बुद्ध का संदेशवैर का अंत अवैर से
भारतीय आदर्शवसुधैव कुटुम्बकम्
शांति के साधनमैत्री, करुणा, सहयोग

13. Frequently Asked Questions

विश्वशान्तिः किस कक्षा का पाठ है?

बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत का तेरहवाँ पाठ है।

विश्वशान्तिः पाठ किस पुस्तक में है?

पीयूषम् पुस्तक में।

विश्व में अशांति के मुख्य कारण क्या हैं?

द्वेष, असहिष्णुता, स्वार्थ और आपसी संघर्ष।

विश्वशांति स्थापित करने के क्या उपाय हैं?

मैत्री, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता और परस्पर सहयोग।

वसुधैव कुटुम्बकम् का अर्थ क्या है?

सम्पूर्ण पृथ्वी एक परिवार है।

महात्मा बुद्ध का शांति संबंधी संदेश क्या है?

शत्रुता का अंत शत्रुता से नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मैत्री से होता है।

14. पाठ्यपुस्तक संदर्भ

पुस्तक: पीयूषम्

कक्षा: 10

अध्याय: 13 – विश्वशान्तिः

पृष्ठ: 104–111

विषय: विश्वशांति, युद्ध, अशांति, मैत्री और मानवकल्याण

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