Class 10 History Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद Notes in Hindi

Class 10 History Chapter 2 समाजवाद एवं साम्यवाद Notes in Hindi
Class 10 History • Chapter 2

समाजवाद एवं साम्यवाद

Socialism and Communism – विस्तृत हिंदी नोट्स

1. समाजवाद एवं साम्यवाद का परिचय

18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में औद्योगिक क्रांति के कारण आर्थिक और सामाजिक जीवन में बड़े परिवर्तन हुए। बड़े-बड़े कारखानों का विकास हुआ और उत्पादन बढ़ा, लेकिन इसके साथ पूँजीपतियों और मजदूरों के बीच आर्थिक असमानता भी बढ़ी।

मजदूरों की खराब स्थिति, कम मजदूरी, लंबे कार्य-घंटे तथा आर्थिक असमानता ने ऐसी विचारधाराओं को जन्म दिया जो अधिक समान और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना पर बल देती थीं। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में समाजवादी विचारों का विकास हुआ।

समाजवाद (Socialism): ऐसी सामाजिक-आर्थिक विचारधारा जिसमें आर्थिक असमानता कम करने, उत्पादन के प्रमुख साधनों पर सामाजिक या सार्वजनिक नियंत्रण तथा समाज के व्यापक हित पर बल दिया जाता है।
साम्यवाद (Communism): मार्क्सवादी विचार में एक ऐसी वर्गविहीन सामाजिक व्यवस्था का लक्ष्य जिसमें उत्पादन के साधनों पर निजी पूँजीवादी स्वामित्व समाप्त हो और सामाजिक-आर्थिक वर्गों का अंत हो।
पूँजीवाद (Capitalism): ऐसी आर्थिक व्यवस्था जिसमें उत्पादन के साधनों पर मुख्यतः निजी स्वामित्व होता है तथा उत्पादन और निवेश में निजी पूँजी की प्रमुख भूमिका होती है।

2. औद्योगिक क्रांति और मजदूर वर्ग

औद्योगिक क्रांति और मजदूर वर्ग
औद्योगिक क्रांति और मजदूर वर्ग

औद्योगिक क्रांति सबसे पहले इंग्लैंड में विकसित हुई और बाद में यूरोप के अन्य भागों में फैली। मशीनों और कारखानों के विकास से उत्पादन की पद्धति में व्यापक बदलाव आया।

औद्योगिक क्रांति के सामाजिक प्रभाव

  • बड़े कारखानों की स्थापना हुई।
  • ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शहरों की ओर गए।
  • नए औद्योगिक नगरों का विकास हुआ।
  • पूँजीपति और औद्योगिक मजदूर दो महत्वपूर्ण सामाजिक वर्ग बनकर उभरे।
  • बहुत से मजदूरों को कम मजदूरी पर लंबे समय तक काम करना पड़ता था।
  • महिलाएँ और बच्चे भी कारखानों में काम करते थे।
  • श्रमिकों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी।
महत्वपूर्ण: औद्योगिक समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता और श्रमिकों की समस्याएँ समाजवादी विचारों के प्रसार का एक प्रमुख कारण बनीं।

3. समाजवादी विचारधारा का विकास

19वीं शताब्दी में अनेक यूरोपीय विचारकों ने पूँजीवादी व्यवस्था की असमानताओं की आलोचना की और समाज को अधिक समान बनाने के अलग-अलग उपाय प्रस्तुत किए।

प्रारंभिक समाजवादी विचारक

सेंट साइमन: उनका विचार था कि समाज और अर्थव्यवस्था का संचालन इस प्रकार होना चाहिए कि समाज के उत्पादक वर्गों का कल्याण हो।

चार्ल्स फूरिये: उन्होंने सहयोग पर आधारित छोटे समुदायों की कल्पना की।

रॉबर्ट ओवेन: उन्होंने मजदूरों की कार्य और जीवन स्थितियों में सुधार के लिए प्रयोग किए और सहकारी व्यवस्था पर बल दिया।

इन प्रारंभिक समाजवादियों के बाद कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने समाजवाद को वर्ग-संघर्ष और ऐतिहासिक परिवर्तन के सिद्धांत से जोड़ा।

4. कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स

कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स
समाजवादी विचारधारा – कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स

कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स आधुनिक समाजवादी और साम्यवादी विचारधारा के विकास में अत्यंत प्रभावशाली विचारक थे। उन्होंने पूँजीवादी समाज का विश्लेषण वर्ग-संबंधों के आधार पर किया।

मार्क्स के प्रमुख विचार

  • इतिहास में विभिन्न सामाजिक वर्गों के हितों के बीच संघर्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • औद्योगिक पूँजीवाद में समाज मुख्यतः पूँजीपति और मजदूर वर्ग के बीच विभाजित दिखाई देता है।
  • पूँजीपति उत्पादन के साधनों के स्वामी होते हैं।
  • मजदूर अपनी श्रम-शक्ति बेचकर जीवनयापन करते हैं।
  • मार्क्स के अनुसार पूँजीवादी व्यवस्था के अंतर्विरोध अंततः व्यापक सामाजिक परिवर्तन को जन्म दे सकते हैं।
बुर्जुआ वर्ग (Bourgeoisie): मार्क्सवादी शब्दावली में वह पूँजीपति वर्ग जिसके पास उत्पादन के प्रमुख साधनों का स्वामित्व होता है।
सर्वहारा वर्ग (Proletariat): मजदूर वर्ग जो मुख्यतः अपनी श्रम-शक्ति बेचकर जीविका कमाता है।

कम्युनिस्ट घोषणापत्र

कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने 1848 में कम्युनिस्ट घोषणापत्र (Communist Manifesto) प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने पूँजीवाद, वर्ग-संघर्ष और साम्यवादी आंदोलन से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए।

दास कैपिटल

मार्क्स की प्रसिद्ध कृति Das Kapital में पूँजीवादी उत्पादन व्यवस्था का विस्तृत आर्थिक विश्लेषण किया गया।

5. रूसी क्रांति से पहले रूस की स्थिति

20वीं शताब्दी के आरंभ में रूस एक विशाल साम्राज्य था। वहाँ जार की निरंकुश सत्ता थी। रूस में औद्योगीकरण हो रहा था, लेकिन बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर थी।

सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति

  • किसानों की संख्या बहुत अधिक थी।
  • भूमि से जुड़ी समस्याएँ व्यापक थीं।
  • औद्योगिक केंद्रों में मजदूरों की संख्या बढ़ रही थी।
  • काम की कठिन परिस्थितियों के कारण मजदूरों में असंतोष था।
  • राजनीतिक स्वतंत्रता सीमित थी।
  • जार की निरंकुश शासन व्यवस्था के विरुद्ध विरोध बढ़ रहा था।

बोल्शेविक और मेन्शेविक

रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी में मतभेद के बाद दो प्रमुख गुट सामने आए—बोल्शेविक और मेन्शेविक। व्लादिमीर लेनिन बोल्शेविकों के प्रमुख नेता बने।

6. रूस की 1905 की क्रांति

रूस की 1905 की क्रांति
रूस की 1905 की क्रांति

1905 में रूस में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक असंतोष ने क्रांतिकारी आंदोलन का रूप लिया। इसकी एक महत्वपूर्ण घटना खूनी रविवार (Bloody Sunday) थी।

जनवरी 1905 में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी अपनी माँगों के साथ सेंट पीटर्सबर्ग में जार के विंटर पैलेस की ओर बढ़े। सैनिकों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने से अनेक लोग मारे गए या घायल हुए। इस घटना से शासन के प्रति असंतोष और बढ़ गया।

1905 की क्रांति के परिणाम

  • देश में हड़तालें और विरोध प्रदर्शन बढ़े।
  • मजदूर संगठनों और सोवियतों की भूमिका बढ़ी।
  • जार निकोलस द्वितीय को कुछ राजनीतिक सुधारों की घोषणा करनी पड़ी।
  • ड्यूमा नामक प्रतिनिधि संस्था की स्थापना की गई।
  • फिर भी जार की सत्ता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।

7. प्रथम विश्व युद्ध और रूस

1914 में रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल हुआ। युद्ध ने रूस की पहले से मौजूद आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को और गंभीर बना दिया।

  • युद्ध में भारी सैनिक क्षति हुई।
  • खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं की कमी बढ़ी।
  • महँगाई बढ़ी।
  • परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा।
  • सेना और जनता में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ा।

इन परिस्थितियों ने 1917 की क्रांतियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया।

8. फरवरी क्रांति 1917

फरवरी क्रांति 1917
रूस की फरवरी क्रांति – 1917

1917 में पेट्रोग्राड में भोजन की कमी, महँगाई और युद्ध से परेशान लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए। मजदूरों की हड़तालों में तेजी आई और सैनिकों के एक हिस्से ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ देना शुरू कर दिया।

स्थिति बिगड़ने पर जार निकोलस द्वितीय ने सिंहासन त्याग दिया। इसके साथ रूस में सदियों पुरानी जारशाही का अंत हो गया।

फरवरी क्रांति के बाद

  • जारशाही समाप्त हुई।
  • एक अस्थायी सरकार (Provisional Government) बनी।
  • मजदूरों और सैनिकों के सोवियत भी प्रभावशाली बने रहे।
  • अस्थायी सरकार ने रूस को प्रथम विश्व युद्ध से तुरंत बाहर नहीं निकाला।
  • भूमि और भोजन जैसी समस्याएँ बनी रहीं।
ध्यान दें: उस समय रूस जूलियन कैलेंडर का उपयोग करता था। इसी कारण इसे परंपरागत रूप से “फरवरी क्रांति” कहा जाता है, जबकि आधुनिक ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार प्रमुख घटनाएँ मार्च में हुई थीं।

9. अक्टूबर/बोल्शेविक क्रांति 1917

अक्टूबर बोल्शेविक क्रांति 1917 और लेनिन
अक्टूबर क्रांति 1917 और लेनिन

फरवरी क्रांति के बाद बनी अस्थायी सरकार युद्ध, भूमि और खाद्यान्न जैसी प्रमुख समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं कर सकी। इस परिस्थिति में बोल्शेविकों का प्रभाव बढ़ा।

लेनिन ने युद्ध समाप्त करने, किसानों को भूमि देने तथा सत्ता सोवियतों को देने जैसे नारों पर बल दिया।

अक्टूबर क्रांति

अक्टूबर 1917 में बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राड में प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण स्थापित किया और अस्थायी सरकार को सत्ता से हटा दिया।

इस क्रांति के बाद बोल्शेविकों के नेतृत्व में नई सरकार स्थापित हुई और लेनिन इसके सबसे प्रमुख नेताओं में रहे।

परीक्षा के लिए: फरवरी क्रांति ने जारशाही का अंत किया, जबकि अक्टूबर क्रांति ने बोल्शेविकों को सत्ता में पहुँचाया।

10. रूसी क्रांति के बाद प्रमुख परिवर्तन

रूसी क्रांति के बाद प्रमुख परिवर्तन
रूसी क्रांति के बाद प्रमुख परिवर्तन

बोल्शेविक सरकार ने सत्ता प्राप्त करने के बाद रूस की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन आरंभ किए।

भूमि संबंधी परिवर्तन

जमींदारों की बड़ी संपत्तियों को समाप्त करने और भूमि पर पुराने विशेषाधिकारों को तोड़ने की दिशा में कदम उठाए गए। भूमि संबंधी प्रश्न रूसी किसानों की सबसे महत्वपूर्ण माँगों में से एक था।

शांति संबंधी नीति

नई सरकार प्रथम विश्व युद्ध से बाहर निकलना चाहती थी। 1918 में रूस ने जर्मनी तथा केंद्रीय शक्तियों के साथ ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि की और युद्ध से अलग हो गया।

उद्योगों पर नियंत्रण

बैंकों और बड़े उद्योगों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ाया गया। निजी पूँजीवादी स्वामित्व को सीमित करते हुए अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका व्यापक हुई।

सामाजिक क्षेत्र

नई व्यवस्था ने शिक्षा के विस्तार, सामाजिक सुधारों और पुराने अभिजात विशेषाधिकारों को समाप्त करने की दिशा में भी कदम उठाए।

11. रूसी गृहयुद्ध और सोवियत संघ का निर्माण

रूसी गृहयुद्ध और सोवियत संघ का निर्माण
रूसी गृहयुद्ध और सोवियत संघ का निर्माण

बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस में नई सरकार के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। यह संघर्ष व्यापक रूसी गृहयुद्ध में बदल गया।

लाल सेना और श्वेत सेना

लाल सेना (Red Army) बोल्शेविक सरकार की प्रमुख सैन्य शक्ति थी। इसके संगठन में लियोन ट्रॉट्स्की ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्वेत सेना (White Army) में बोल्शेविक-विरोधी विभिन्न समूह शामिल थे। कुछ विदेशी शक्तियों ने भी बोल्शेविक विरोधी शक्तियों का समर्थन किया।

अंततः बोल्शेविकों ने गृहयुद्ध में अपना नियंत्रण मजबूत कर लिया।

सोवियत संघ की स्थापना

1922 में रूस तथा अन्य सोवियत गणराज्यों को मिलाकर Union of Soviet Socialist Republics (USSR) अर्थात सोवियत समाजवादी गणराज्यों का संघ स्थापित किया गया।

USSR की स्थापना – 1922
रूसी क्रांति के बाद यह विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना बनी।

12. समाजवाद एवं साम्यवाद – प्रमुख अवधारणाएँ

समाजवाद एवं साम्यवाद प्रमुख अवधारणाएँ तुलनात्मक चित्र
समाजवाद एवं साम्यवाद – प्रमुख अवधारणाएँ

समाजवाद और साम्यवाद आपस में संबंधित विचारधाराएँ हैं, लेकिन इन शब्दों का प्रयोग विभिन्न ऐतिहासिक आंदोलनों और विचारकों ने अलग-अलग अर्थों और व्यवस्थाओं के लिए भी किया है।

आधार समाजवाद साम्यवाद
मुख्य उद्देश्य आर्थिक असमानता कम करना और सामाजिक कल्याण बढ़ाना मार्क्सवादी सिद्धांत में अंततः वर्गविहीन समाज की स्थापना
उत्पादन के साधन विभिन्न समाजवादी मॉडलों में सार्वजनिक, सहकारी या मिश्रित स्वामित्व हो सकता है मार्क्सवादी साम्यवाद में उत्पादन के साधनों पर निजी पूँजीवादी स्वामित्व के अंत की परिकल्पना
समानता आर्थिक और सामाजिक समानता पर बल वर्गीय विभाजन के अंत पर विशेष बल
ऐतिहासिक स्वरूप इसके कई अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक रूप विकसित हुए 20वीं शताब्दी में कई राजनीतिक आंदोलनों और राज्यों ने स्वयं को साम्यवादी या मार्क्सवादी-लेनिनवादी कहा
ध्यान रखें: समाजवाद और साम्यवाद की वास्तविक ऐतिहासिक व्यवस्थाएँ और इनके सैद्धांतिक आदर्श हमेशा एक समान नहीं रहे हैं।

13. रूसी क्रांति का महत्व और प्रभाव

  • रूस में जारशाही शासन का अंत हुआ।
  • बोल्शेविकों के नेतृत्व में एक नई राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हुई।
  • भूमि, उद्योग और अर्थव्यवस्था से संबंधित व्यापक परिवर्तन हुए।
  • विश्व स्तर पर समाजवादी और साम्यवादी आंदोलनों को नया प्रभाव मिला।
  • श्रमिक और किसान आंदोलनों पर रूसी क्रांति का प्रभाव पड़ा।
  • 1922 में सोवियत संघ का निर्माण हुआ।
  • 20वीं शताब्दी की अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर सोवियत संघ का गहरा प्रभाव पड़ा।

14. महत्वपूर्ण तिथियाँ

वर्ष घटना
1848 मार्क्स और एंगेल्स का कम्युनिस्ट घोषणापत्र प्रकाशित
1905 रूस की पहली बड़ी क्रांतिकारी लहर और खूनी रविवार
1914 प्रथम विश्व युद्ध आरंभ; रूस युद्ध में शामिल
1917 फरवरी क्रांति और जारशाही का अंत
1917 अक्टूबर/बोल्शेविक क्रांति
1918 ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि
1918–1920 रूसी गृहयुद्ध का मुख्य चरण
1922 सोवियत संघ (USSR) की स्थापना
1924 लेनिन की मृत्यु

महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

व्यक्ति महत्व
कार्ल मार्क्स मार्क्सवादी समाजवाद/साम्यवाद के प्रमुख सिद्धांतकार
फ्रेडरिक एंगेल्स मार्क्स के सहयोगी और समाजवादी विचारक
व्लादिमीर लेनिन बोल्शेविक नेता और अक्टूबर क्रांति के प्रमुख नेता
जार निकोलस द्वितीय रूस का अंतिम जार
लियोन ट्रॉट्स्की बोल्शेविक नेता; लाल सेना के संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका

15. महत्वपूर्ण शब्दावली

जार: रूस के सम्राट के लिए प्रयुक्त उपाधि।
सोवियत: रूसी क्रांति के समय मजदूरों, सैनिकों और अन्य समूहों की प्रतिनिधि परिषदें।
बोल्शेविक: रूसी समाजवादी आंदोलन का वह गुट जिसका नेतृत्व लेनिन ने किया और जिसने अक्टूबर 1917 में सत्ता प्राप्त की।
मेन्शेविक: रूसी सोशल डेमोक्रेटिक आंदोलन का दूसरा प्रमुख गुट, जिसकी रणनीति और संगठन संबंधी विचार बोल्शेविकों से अलग थे।
सर्वहारा: मार्क्सवादी शब्दावली में मजदूर वर्ग।
बुर्जुआ: मार्क्सवादी संदर्भ में उत्पादन के साधनों का स्वामी पूँजीपति वर्ग।
ड्यूमा: जारकालीन रूस की प्रतिनिधि/विधायी संस्था।

16. परीक्षा के लिए VVI Points

  • कम्युनिस्ट घोषणापत्र – 1848
  • लेखक – कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स
  • खूनी रविवार – 1905
  • रूस का अंतिम जार – निकोलस द्वितीय
  • फरवरी क्रांति – 1917
  • अक्टूबर/बोल्शेविक क्रांति – 1917
  • बोल्शेविकों के प्रमुख नेता – लेनिन
  • रूस प्रथम विश्व युद्ध से अलग हुआ – 1918
  • सोवियत संघ की स्थापना – 1922
  • USSR – Union of Soviet Socialist Republics

17. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. समाजवाद से क्या समझते हैं?
उत्तर: समाजवाद ऐसी सामाजिक-आर्थिक विचारधारा है जो आर्थिक असमानता को कम करने, सामाजिक कल्याण बढ़ाने तथा उत्पादन के प्रमुख साधनों पर सामाजिक या सार्वजनिक नियंत्रण पर बल देती है।
प्रश्न 2. कार्ल मार्क्स कौन थे?
उत्तर: कार्ल मार्क्स 19वीं शताब्दी के जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री और समाजवादी विचारक थे। उन्होंने पूँजीवादी व्यवस्था और वर्ग-संघर्ष का विश्लेषण किया तथा फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ कम्युनिस्ट घोषणापत्र लिखा।
प्रश्न 3. कम्युनिस्ट घोषणापत्र कब और किसने लिखा?
उत्तर: कम्युनिस्ट घोषणापत्र 1848 में कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा प्रकाशित किया गया।
प्रश्न 4. खूनी रविवार क्या था?
उत्तर: जनवरी 1905 में सेंट पीटर्सबर्ग में अपनी माँगों को लेकर आगे बढ़ रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सैनिकों ने गोली चलाई। यह घटना खूनी रविवार के नाम से प्रसिद्ध हुई और 1905 की क्रांति का महत्वपूर्ण कारण बनी।
प्रश्न 5. फरवरी क्रांति का प्रमुख परिणाम क्या था?
उत्तर: फरवरी क्रांति के परिणामस्वरूप जार निकोलस द्वितीय ने सिंहासन छोड़ दिया और रूस में जारशाही शासन का अंत हो गया।
प्रश्न 6. बोल्शेविकों के प्रमुख नेता कौन थे?
उत्तर: व्लादिमीर लेनिन बोल्शेविकों के प्रमुख नेता थे।
प्रश्न 7. अक्टूबर क्रांति क्या थी?
उत्तर: 1917 में बोल्शेविकों ने लेनिन के नेतृत्व में पेट्रोग्राड के महत्वपूर्ण सरकारी केंद्रों पर नियंत्रण स्थापित कर अस्थायी सरकार को सत्ता से हटा दिया। इसे अक्टूबर या बोल्शेविक क्रांति कहा जाता है।
प्रश्न 8. लाल सेना क्या थी?
उत्तर: रूसी गृहयुद्ध के दौरान बोल्शेविक सरकार की सैन्य शक्ति को लाल सेना कहा गया। इसके संगठन में लियोन ट्रॉट्स्की की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
प्रश्न 9. सोवियत संघ की स्थापना कब हुई?
उत्तर: सोवियत संघ (USSR) की स्थापना 1922 में हुई।
प्रश्न 10. रूसी क्रांति का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: रूसी क्रांति ने विश्व भर में समाजवादी और साम्यवादी आंदोलनों को प्रभावित किया। श्रमिक और किसान आंदोलनों को नई प्रेरणा मिली और सोवियत संघ 20वीं शताब्दी की अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बना।

18. दीर्घ उत्तरीय महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. रूसी क्रांति के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: रूसी क्रांति के पीछे कई राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक कारण थे। जार का शासन निरंकुश था और जनता को सीमित राजनीतिक अधिकार प्राप्त थे। किसानों में भूमि संबंधी असंतोष था। औद्योगिक मजदूरों को कठिन परिस्थितियों और कम मजदूरी का सामना करना पड़ता था। 1905 की घटनाओं ने जारशाही के प्रति अविश्वास बढ़ाया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस को भारी सैन्य क्षति हुई तथा भोजन की कमी, महँगाई और आर्थिक संकट बढ़ गया। इन परिस्थितियों ने 1917 की क्रांतियों की पृष्ठभूमि तैयार की।

प्रश्न 2. फरवरी और अक्टूबर क्रांति में अंतर स्पष्ट कीजिए।

फरवरी क्रांति अक्टूबर क्रांति
जारशाही के विरुद्ध व्यापक जन-असंतोष से विकसित हुई। बोल्शेविकों ने अस्थायी सरकार के विरुद्ध सत्ता परिवर्तन किया।
जार निकोलस द्वितीय का शासन समाप्त हुआ। अस्थायी सरकार को सत्ता से हटाया गया।
अस्थायी सरकार की स्थापना हुई। बोल्शेविक सत्ता स्थापित हुई।
जारशाही का अंत इसका प्रमुख परिणाम था। लेनिन और बोल्शेविक नेतृत्व का उदय इसका प्रमुख परिणाम था।

प्रश्न 3. रूसी क्रांति के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: रूसी क्रांति ने रूस की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को बदल दिया। जारशाही का अंत हुआ और बोल्शेविक सत्ता स्थापित हुई। भूमि और उद्योगों से संबंधित बड़े परिवर्तन किए गए। रूस प्रथम विश्व युद्ध से अलग हुआ। गृहयुद्ध के बाद बोल्शेविकों ने अपना नियंत्रण मजबूत किया और 1922 में सोवियत संघ की स्थापना हुई। इसके साथ ही समाजवादी और साम्यवादी विचारधाराओं का विश्वव्यापी प्रभाव बढ़ा।

19. Quick Revision

एक नजर में पूरा अध्याय

औद्योगिक क्रांति मजदूर वर्ग का विस्तार और सामाजिक-आर्थिक असमानताओं पर बहस।
1848 मार्क्स और एंगेल्स का कम्युनिस्ट घोषणापत्र।
1905 खूनी रविवार और रूस में व्यापक क्रांतिकारी आंदोलन।
1914 रूस प्रथम विश्व युद्ध में शामिल।
फरवरी 1917 जारशाही का अंत और अस्थायी सरकार की स्थापना।
अक्टूबर 1917 बोल्शेविक क्रांति और बोल्शेविक सत्ता की स्थापना।
1918 ब्रेस्ट-लिटोव्स्क संधि; रूस प्रथम विश्व युद्ध से अलग।
गृहयुद्ध लाल सेना और बोल्शेविक विरोधी शक्तियों के बीच संघर्ष।
1922 USSR अर्थात सोवियत संघ की स्थापना।

याद रखने योग्य नाम

कार्ल मार्क्स • फ्रेडरिक एंगेल्स • व्लादिमीर लेनिन • जार निकोलस द्वितीय • लियोन ट्रॉट्स्की