Chapter 9 – आनुवंशिकता एवं जैव विकास
Heredity and Evolution
इस अध्याय में आनुवंशिकता, विविधता, मेंडल के प्रयोग, प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षण, जीन-DNA-गुणसूत्र, मानव में लिंग निर्धारण तथा जैव विकास की प्रमुख अवधारणाओं को आसान भाषा में विस्तार से समझाया गया है।
विषय-सूची (Table of Contents)
1. आनुवंशिकता (Heredity)
संतान अपने माता-पिता से कई प्रकार के लक्षण प्राप्त करती है। जैसे आँखों का रंग, बालों की प्रकृति, कुछ शारीरिक विशेषताएँ आदि।
इन लक्षणों के संचरण में जीन (Genes) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीन DNA के विशिष्ट भाग होते हैं और गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं।
2. विविधता (Variation)
उदाहरण के लिए सभी मनुष्य एक ही प्रजाति के सदस्य हैं, लेकिन उनमें ऊँचाई, त्वचा के रंग, बालों की बनावट तथा अनेक अन्य लक्षणों में अंतर दिखाई देता है।
3. विविधता का महत्व
- विविधता जीवों को बदलते पर्यावरण के प्रति अनुकूल होने में सहायता कर सकती है।
- कुछ विविधताएँ किसी जीव के जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकती हैं।
- पीढ़ियों तक उपयोगी विविधताओं का संचय जैव विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- विविधता प्राकृतिक चयन के लिए आधार प्रदान करती है।
4. ग्रेगर जॉन मेंडल और आनुवंशिकता
ग्रेगर जॉन मेंडल (Gregor Johann Mendel) ने मटर के पौधों पर प्रयोग करके आनुवंशिकता के नियमों को समझने का आधार प्रदान किया। इसी कारण उन्हें सामान्यतः आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है।
मेंडल ने मटर का पौधा क्यों चुना?
- मटर में स्पष्ट विपरीत लक्षण पाए जाते हैं।
- इसका जीवन चक्र अपेक्षाकृत छोटा है।
- स्वपरागण आसानी से होता है।
- कृत्रिम परपरागण भी नियंत्रित किया जा सकता है।
- एक पीढ़ी में पर्याप्त संख्या में बीज प्राप्त किए जा सकते हैं।
मटर के कुछ विपरीत लक्षण
| लक्षण | एक रूप | विपरीत रूप |
|---|---|---|
| पौधे की ऊँचाई | लंबा | बौना |
| बीज का आकार | गोल | झुर्रीदार |
| बीज का रंग | पीला | हरा |
| फूल का रंग | बैंगनी | सफेद |
5. मेंडल का एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross)
उदाहरण के लिए मेंडल ने शुद्ध लंबे मटर के पौधे और शुद्ध बौने पौधे के बीच संकरण किया।
F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे दिखाई दिए। इससे स्पष्ट हुआ कि लंबा होने का लक्षण बौनेपन के लक्षण पर प्रभावी था।
इसके बाद F₁ पीढ़ी के पौधों का स्वपरागण कराया गया:
6. प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षण
प्रभावी लक्षण (Dominant Trait)
उदाहरण: मटर में लंबा पौधा। इसे T द्वारा दर्शाया जा सकता है।
अप्रभावी लक्षण (Recessive Trait)
उदाहरण: मटर में बौनापन। इसे t द्वारा दर्शाया जा सकता है।
| Genotype | स्थिति | दिखाई देने वाला लक्षण |
|---|---|---|
| TT | समयुग्मजी प्रभावी | लंबा |
| Tt | विषमयुग्मजी | लंबा |
| tt | समयुग्मजी अप्रभावी | बौना |
7. द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross)
मटर के बीज के आकार और रंग को उदाहरण के रूप में लिया जा सकता है। जैसे गोल-पीला तथा झुर्रीदार-हरा।
ऐसे संकरण में F₂ पीढ़ी में स्वतंत्र वर्गीकरण की सामान्य Mendelian स्थिति में चार प्रकार के phenotype प्राप्त होते हैं।
Phenotypic Ratio = 9 : 3 : 3 : 1
8. जीन, DNA और गुणसूत्र
DNA क्या है?
DNA (Deoxyribonucleic Acid) वह आनुवंशिक पदार्थ है जिसमें जीव के निर्माण और कार्य से संबंधित आनुवंशिक सूचना संग्रहीत रहती है।
जीन (Gene)
गुणसूत्र (Chromosome)
गुणसूत्र कोशिका के केन्द्रक में पाए जाने वाले DNA और प्रोटीन से बने संगठित ढाँचे हैं। जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं।
9. लक्षणों की अभिव्यक्ति कैसे होती है?
जीन कोशिकाओं में बनने वाले प्रोटीनों को प्रभावित कर सकते हैं। ये प्रोटीन शरीर की संरचना और जैव-रासायनिक क्रियाओं में भाग लेते हैं, जिससे विभिन्न लक्षण प्रकट होते हैं।
उदाहरण के लिए पौधे की ऊँचाई वृद्धि से संबंधित जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं से प्रभावित हो सकती है। जीन इन प्रक्रियाओं में बनने वाले प्रोटीन या एंजाइम को प्रभावित कर सकते हैं।
Genotype और Phenotype
Genotype: किसी लक्षण के लिए जीव की आनुवंशिक संरचना या allele combination को genotype कहते हैं। उदाहरण – TT, Tt, tt।
Phenotype: दिखाई देने वाली विशेषता को phenotype कहते हैं। उदाहरण – लंबा या बौना पौधा।
10. मानव में लिंग निर्धारण (Sex Determination)
मनुष्य में सामान्य शरीर कोशिकाओं में 23 जोड़े अर्थात 46 गुणसूत्र होते हैं। इनमें एक जोड़ा लैंगिक गुणसूत्रों का होता है।
- महिला: XX
- पुरुष: XY
अंडाणु में हमेशा X गुणसूत्र होता है, जबकि शुक्राणु X या Y गुणसूत्र वाला हो सकता है।
11. वंशागत एवं अर्जित लक्षण
वंशागत लक्षण (Inherited Traits)
अर्जित लक्षण (Acquired Traits)
| वंशागत लक्षण | अर्जित लक्षण |
|---|---|
| आनुवंशिक सामग्री से संबंधित। | जीवनकाल में विकसित होते हैं। |
| अगली पीढ़ी में पहुँच सकते हैं। | सामान्यतः संतति में आनुवंशिक रूप से नहीं पहुँचते। |
| वंशागति में महत्वपूर्ण। | वंशानुगत विकास का प्रत्यक्ष आधार नहीं बनते। |
12. जैव विकास (Evolution)
विविधता जैव विकास के लिए मूल सामग्री प्रदान करती है। यदि कोई वंशागत विविधता विशेष वातावरण में जीवित रहने या प्रजनन में लाभ देती है, तो वह आबादी में समय के साथ अधिक सामान्य हो सकती है।
प्राकृतिक चयन (Natural Selection)
जब पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण कुछ वंशागत लक्षण वाले जीव दूसरों की तुलना में अधिक सफलतापूर्वक जीवित रहते और प्रजनन करते हैं, तो उपयोगी लक्षणों की आवृत्ति पीढ़ियों में बढ़ सकती है। इसे प्राकृतिक चयन से समझाया जाता है।
13. प्रजातिकरण (Speciation)
प्रजातिकरण में सहायक कारक
- आनुवंशिक विविधता
- प्राकृतिक चयन
- आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift)
- भौगोलिक पृथक्करण
- अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियाँ
- लंबे समय तक आबादियों के बीच प्रजनन का सीमित होना
14. समजात अंग (Homologous Organs)
मनुष्य का हाथ, व्हेल का अग्रपाद/फ्लिपर तथा चमगादड़ का अग्रपाद इसके उदाहरण के रूप में समझे जा सकते हैं। इनका उपयोग अलग-अलग कार्यों के लिए होता है, लेकिन आधारभूत अस्थि-योजना में समानताएँ मिलती हैं।
15. समरूप अंग (Analogous Organs)
पक्षी का पंख और कीट का पंख उड़ने का कार्य करते हैं, लेकिन उनकी आंतरिक संरचना और विकासीय उत्पत्ति अलग है।
| समजात अंग | समरूप अंग |
|---|---|
| आधारभूत संरचना/उत्पत्ति में समानता। | आधारभूत संरचना/उत्पत्ति अलग। |
| कार्य अलग हो सकते हैं। | कार्य समान या बहुत समान। |
| साझा पूर्वज संबंध समझने में उपयोगी। | समान पर्यावरणीय आवश्यकताओं के कारण समान कार्य विकसित हो सकते हैं। |
16. जीवाश्म (Fossils)
जीवाश्म चट्टानों में संरक्षित हो सकते हैं और पृथ्वी पर पूर्व में पाए जाने वाले जीवों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
जीवाश्मों का महत्व
- प्राचीन जीवों की संरचना के बारे में जानकारी देते हैं।
- विभिन्न समयों में पाए जाने वाले जीवों की तुलना संभव बनाते हैं।
- विकासीय इतिहास को समझने में सहायता करते हैं।
- विलुप्त जीवों के अस्तित्व का प्रमाण प्रदान करते हैं।
सामान्यतः तलछटी चट्टानों की गहरी परतें पुरानी और ऊपर की परतें अपेक्षाकृत नई हो सकती हैं, हालांकि वास्तविक भूवैज्ञानिक परिस्थितियाँ इससे अधिक जटिल हो सकती हैं।
17. जैव विकास के प्रमुख प्रमाण
जीवों के विकासीय संबंधों को समझने के लिए वैज्ञानिक अनेक प्रकार के प्रमाणों का अध्ययन करते हैं।
1. जीवाश्म प्रमाण
अलग-अलग भूवैज्ञानिक समय के जीवाश्म पृथ्वी पर जीवों में हुए परिवर्तनों के ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध कराते हैं।
2. तुलनात्मक शरीर रचना
विभिन्न जीवों के अंगों की संरचना की तुलना से उनके विकासीय संबंधों के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
3. समजात संरचनाएँ
अलग कार्य करने वाली लेकिन आधारभूत संरचना में समानता रखने वाली संरचनाएँ साझा पूर्वज की ओर संकेत कर सकती हैं।
4. समरूप संरचनाएँ
अलग उत्पत्ति वाली संरचनाएँ समान पर्यावरणीय दबाव में समान कार्य के लिए विकसित हो सकती हैं।
5. भ्रूणीय एवं आणविक प्रमाण
विभिन्न जीवों के विकास की प्रारंभिक अवस्थाओं तथा DNA/प्रोटीन अनुक्रमों की तुलना से भी विकासीय संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
18. आनुवंशिकता और विकास का संबंध
आनुवंशिकता यह समझाती है कि लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कैसे पहुँचते हैं, जबकि विविधता यह बताती है कि संतति पूर्णतः समान क्यों नहीं होती।
यदि विविधताएँ वंशागत हैं, तो वे अगली पीढ़ियों में पहुँच सकती हैं। लंबी अवधि में प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन और अन्य विकासीय प्रक्रियाओं के कारण आबादियों में परिवर्तन जमा हो सकते हैं।
19. मुख्य बिंदु – परीक्षा के लिए
- आनुवंशिकता माता-पिता से संतति में लक्षणों का संचरण है।
- जीन DNA का विशिष्ट भाग है।
- जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं।
- मेंडल ने मटर के पौधों पर आनुवंशिकता के प्रसिद्ध प्रयोग किए।
- एकसंकर संकरण में एक जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया जाता है।
- F₂ monohybrid phenotypic ratio सामान्य Mendelian उदाहरण में 3:1 होता है।
- द्विसंकर संकरण में दो जोड़ी लक्षणों का अध्ययन होता है।
- सामान्य Mendelian dihybrid F₂ phenotypic ratio 9:3:3:1 होता है।
- मानव महिला में XX और पुरुष में XY लैंगिक गुणसूत्र होते हैं।
- अंडाणु X गुणसूत्र देता है; शुक्राणु X या Y दे सकता है।
- अर्जित लक्षण सामान्यतः उसी रूप में आनुवंशिक रूप से अगली पीढ़ी में नहीं जाते।
- वंशागत विविधता जैव विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- जीवाश्म प्राचीन जीवों के बारे में प्रमाण प्रदान करते हैं।
- समजात अंगों में आधारभूत संरचनात्मक समानता होती है।
- समरूप अंगों का कार्य समान लेकिन मूल संरचना अलग हो सकती है।
20. याद रखने वाले महत्वपूर्ण Points
- Heredity = लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचरण।
- Variation = एक ही प्रजाति के जीवों में अंतर।
- Gene = DNA का कार्यात्मक आनुवंशिक खंड।
- Dominant = विषमयुग्मजी अवस्था में भी दिखाई देने वाला लक्षण।
- Recessive = प्रभावी allele की उपस्थिति में छिपने वाला लक्षण।
- Monohybrid = एक जोड़ी विपरीत लक्षण।
- Dihybrid = दो जोड़ी विपरीत लक्षण।
- TT = Homozygous dominant.
- Tt = Heterozygous.
- tt = Homozygous recessive.
- Female = XX
- Male = XY
- Homologous = मूल संरचना समान, कार्य अलग हो सकते हैं।
- Analogous = कार्य समान, मूल संरचना अलग।
- Fossils = प्राचीन जीवन के संरक्षित अवशेष/चिह्न।
21. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions & Answers)
उत्तर: माता-पिता से संतानों में आनुवंशिक लक्षणों के संचरण को आनुवंशिकता कहते हैं।
उत्तर: एक ही प्रजाति के अलग-अलग जीवों के बीच पाए जाने वाले अंतर विविधता कहलाते हैं।
उत्तर: ग्रेगर जॉन मेंडल को।
उत्तर: मटर के पौधे का।
उत्तर: वह लक्षण जो विषमयुग्मजी अवस्था में भी phenotype में दिखाई देता है, प्रभावी लक्षण कहलाता है।
उत्तर: वह लक्षण जो प्रभावी allele की उपस्थिति में प्रकट नहीं होता और सामान्यतः समयुग्मजी अवस्था में दिखाई देता है, अप्रभावी लक्षण कहलाता है।
उत्तर: ऐसा संकरण जिसमें एक जोड़ी विपरीत लक्षणों की वंशागति का अध्ययन किया जाता है, एकसंकर संकरण कहलाता है।
उत्तर: सामान्य पूर्ण प्रभुत्व वाले Mendelian उदाहरण में 3:1।
उत्तर: ऐसा संकरण जिसमें दो जोड़ी विपरीत लक्षणों का एक साथ अध्ययन किया जाता है, द्विसंकर संकरण कहलाता है।
उत्तर: DNA का वह कार्यात्मक भाग जो आनुवंशिक सूचना से संबंधित होता है, जीन कहलाता है।
उत्तर: महिला में XX तथा पुरुष में XY।
उत्तर: निषेचन करने वाले शुक्राणु के X या Y गुणसूत्र लाने से। अंडाणु X गुणसूत्र ही देता है।
उत्तर: जीवनकाल में पर्यावरण, अभ्यास या अन्य प्रभावों के कारण विकसित विशेषताएँ अर्जित लक्षण कहलाती हैं।
उत्तर: वे अंग जिनकी आधारभूत संरचना और विकासीय उत्पत्ति समान हो लेकिन कार्य अलग हो सकते हों, समजात अंग कहलाते हैं।
उत्तर: वे अंग जिनका कार्य समान लेकिन आधारभूत संरचना और विकासीय उत्पत्ति अलग हो, समरूप अंग कहलाते हैं।
उत्तर: प्राचीन जीवों के संरक्षित अवशेष, छाप या उनके जीवन के चिह्न जीवाश्म कहलाते हैं।
उत्तर: जीवाश्म प्राचीन जीवों और पृथ्वी पर जीवन के विकासीय इतिहास के बारे में प्रमाण प्रदान करते हैं।
उत्तर: आबादियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी होने वाले वंशागत परिवर्तनों और उनके दीर्घकालीन संचय को जैव विकास कहा जाता है।
उत्तर: पूर्वज आबादी से नई स्वतंत्र प्रजातियों के बनने की विकासीय प्रक्रिया को प्रजातिकरण कहते हैं।
उत्तर: वंशागत विविधताएँ प्राकृतिक चयन और अन्य विकासीय प्रक्रियाओं के लिए आधार प्रदान करती हैं, जिससे पीढ़ियों में आबादी बदल सकती है।
22. Quick Revision – एक नजर में पूरा Chapter
- आनुवंशिकता: माता-पिता से संतति में लक्षणों का संचरण।
- विविधता: एक ही प्रजाति के जीवों में अंतर।
- मेंडल: मटर के पौधों पर आनुवंशिकता के प्रसिद्ध प्रयोग।
- एकसंकर संकरण: एक जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन।
- F₂ Monohybrid Ratio: Phenotype 3:1; Genotype 1:2:1।
- द्विसंकर संकरण: दो जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन।
- F₂ Dihybrid Phenotypic Ratio: 9:3:3:1।
- जीन: DNA का आनुवंशिक सूचना से संबंधित कार्यात्मक खंड।
- गुणसूत्र: DNA और प्रोटीन से बनी संरचनाएँ जिन पर जीन स्थित होते हैं।
- महिला: XX।
- पुरुष: XY।
- वंशागत लक्षण: आनुवंशिक रूप से संतति में पहुँच सकते हैं।
- अर्जित लक्षण: जीवनकाल में विकसित होते हैं और सामान्यतः उसी रूप में विरासत में नहीं जाते।
- जैव विकास: पीढ़ियों में आबादी के वंशागत परिवर्तन।
- प्रजातिकरण: नई प्रजातियों का निर्माण।
- समजात अंग: आधारभूत संरचना समान, कार्य अलग हो सकते हैं।
- समरूप अंग: कार्य समान, मूल संरचना अलग।
- जीवाश्म: प्राचीन जीवन के संरक्षित अवशेष या चिह्न।
23. अध्याय का सारांश
आनुवंशिकता के द्वारा जीवों के लक्षण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचते हैं। इस प्रक्रिया में जीन, DNA और गुणसूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। DNA की प्रतिकृति और लैंगिक जनन के कारण संततियों में विविधताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
मेंडल के मटर के पौधों पर किए गए प्रयोगों ने प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों की वंशागति को समझने में महत्वपूर्ण आधार दिया। एकसंकर संकरण में एक जोड़ी तथा द्विसंकर संकरण में दो जोड़ी विपरीत लक्षणों का अध्ययन किया जाता है।
मानव में महिला के लैंगिक गुणसूत्र XX और पुरुष के XY होते हैं। अंडाणु X गुणसूत्र देता है, जबकि शुक्राणु X या Y गुणसूत्र दे सकता है।
पीढ़ियों में वंशागत विविधताओं का संचय, प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन और पृथक्करण जैसी प्रक्रियाएँ जैव विकास एवं प्रजातिकरण में योगदान कर सकती हैं। जीवाश्म, समजात संरचनाएँ तथा अन्य तुलनात्मक प्रमाण जीवों के विकासीय संबंधों को समझने में सहायता करते हैं।

