Chapter 8 – जीव जनन कैसे करते हैं?
How Do Organisms Reproduce?
इस अध्याय में जनन का महत्व, DNA प्रतिकृति, अलैंगिक एवं लैंगिक जनन, पौधों में जनन, मानव नर एवं मादा जनन तंत्र, निषेचन, भ्रूण विकास, मासिक धर्म तथा प्रजनन स्वास्थ्य को आसान भाषा में विस्तार से समझाया गया है।
विषय-सूची (Table of Contents)
1. जनन क्या है? (What is Reproduction?)
जनन किसी एक जीव के जीवित रहने के लिए आवश्यक नहीं है, लेकिन किसी प्रजाति (species) की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
जीवों की मृत्यु होती रहती है। यदि नए जीव उत्पन्न न हों, तो किसी प्रजाति के सदस्यों की संख्या धीरे-धीरे समाप्त हो सकती है। इसलिए जनन के द्वारा नई पीढ़ी का निर्माण होता है।
2. जनन का महत्व
- यह किसी प्रजाति की निरंतरता बनाए रखता है।
- नई संतति के निर्माण से जीवों की संख्या बनी रहती है।
- आनुवंशिक सूचना एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती है।
- लैंगिक जनन के दौरान उत्पन्न विविधताएँ विकास (Evolution) में सहायक होती हैं।
- बदलते पर्यावरण में कुछ विविधताएँ जीवों के अस्तित्व के लिए लाभकारी हो सकती हैं।
3. DNA प्रतिकृति और विविधता
जीवों की कोशिकाओं में आनुवंशिक सूचना मुख्यतः DNA (Deoxyribonucleic Acid) में होती है। नई संतति बनने के समय DNA की प्रतिलिपि तैयार होती है।
DNA प्रतिकृति क्या है?
DNA द्वारा अपने समान दूसरी DNA प्रति बनाने की प्रक्रिया को DNA प्रतिकृति (DNA Copying/Replication) कहते हैं।
DNA की प्रतिकृति पूर्णतः त्रुटिरहित नहीं होती। प्रतिकृति के दौरान छोटे-छोटे परिवर्तन उत्पन्न हो सकते हैं। यही परिवर्तन संतति में विविधता उत्पन्न करते हैं।
विविधता (Variation)
विविधता किसी प्रजाति को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने में सहायता कर सकती है। सभी विविधताएँ लाभदायक नहीं होतीं, लेकिन कुछ विविधताएँ भविष्य में उपयोगी हो सकती हैं।
4. जनन के प्रकार
जीवों में मुख्य रूप से जनन के दो प्रकार पाए जाते हैं:
- अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
- लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
| आधार | अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|---|
| जनकों की संख्या | सामान्यतः एक | नर एवं मादा युग्मकों की भागीदारी |
| युग्मक | नहीं बनते | युग्मक बनते हैं |
| निषेचन | नहीं होता | निषेचन होता है |
| विविधता | अपेक्षाकृत कम | अधिक |
| उदाहरण | अमीबा, यीस्ट, हाइड्रा | मनुष्य तथा अधिकांश उच्च पौधे एवं जन्तु |
5. अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति सामान्यतः अपने जनक से बहुत अधिक समान होती है। DNA प्रतिकृति के दौरान उत्पन्न छोटी भिन्नताओं के कारण पूर्ण समानता आवश्यक नहीं है।
अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियाँ
- द्विखंडन (Binary Fission)
- बहुखंडन (Multiple Fission)
- खंडन (Fragmentation)
- पुनर्जनन (Regeneration)
- मुकुलन (Budding)
- बीजाणु निर्माण (Spore Formation)
- शाकीय जनन (Vegetative Propagation)
6. द्विखंडन (Binary Fission)
द्विखंडन में एक जनक कोशिका विभाजित होकर दो नई संतति कोशिकाएँ बनाती है।
अमीबा में द्विखंडन
- सबसे पहले अमीबा के केन्द्रक का विभाजन होता है।
- इसके बाद कोशिका द्रव्य विभाजित होता है।
- एक जनक अमीबा से दो पुत्री अमीबा बन जाते हैं।
7. बहुखंडन (Multiple Fission)
इस प्रक्रिया में पहले केन्द्रक कई बार विभाजित होकर अनेक केन्द्रक बनाता है। इसके बाद प्रत्येक केन्द्रक के चारों ओर कोशिका द्रव्य का भाग आ जाता है और अनेक नई कोशिकाएँ बनती हैं।
उदाहरण: प्लाज्मोडियम (Plasmodium)।
8. खंडन (Fragmentation)
उदाहरण: स्पाइरोगाइरा (Spirogyra)। अनुकूल परिस्थितियों में स्पाइरोगाइरा के तंतु छोटे खंडों में टूट सकते हैं और प्रत्येक खंड नया तंतु बनाता है।
9. पुनर्जनन (Regeneration)
कुछ जीवों में शरीर के कटे हुए भागों से पूरा नया जीव विकसित होने की क्षमता होती है। इसे पुनर्जनन कहते हैं।
उदाहरण: प्लेनेरिया और हाइड्रा में पुनर्जनन क्षमता पाई जाती है।
पुनर्जनन के दौरान विशेष कोशिकाएँ तेजी से विभाजित होती हैं। इसके बाद वे विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में बदलकर ऊतक और अंग बनाती हैं।
10. मुकुलन (Budding)
हाइड्रा में मुकुलन
हाइड्रा के शरीर की कोशिकाओं में बार-बार विभाजन होने से एक छोटा मुकुल बनता है। मुकुल धीरे-धीरे बढ़ता है, उसमें मुख एवं स्पर्शक विकसित होते हैं और परिपक्व होने पर वह जनक से अलग हो जाता है।
यीस्ट में मुकुलन
यीस्ट की कोशिका पर एक छोटा उभार बनता है। केन्द्रक विभाजित होता है और एक केन्द्रक मुकुल में चला जाता है। मुकुल बढ़कर नई यीस्ट कोशिका बनाता है।
11. बीजाणु निर्माण (Spore Formation)
राइजोपस (Rhizopus) जैसे कवकों में जनन के लिए सूक्ष्म बीजाणु (Spores) बनते हैं।
बीजाणु विशेष गोल संरचनाओं में बनते हैं जिन्हें बीजाणुधानी (Sporangium) कहते हैं।
- बीजाणुधानी के अंदर बड़ी संख्या में बीजाणु बनते हैं।
- परिपक्व होने पर बीजाणुधानी फट जाती है।
- बीजाणु हवा के द्वारा फैल जाते हैं।
- अनुकूल नमी, ताप और पोषक पदार्थ मिलने पर बीजाणु अंकुरित होते हैं।
- इनसे नया कवक विकसित हो जाता है।
12. पौधों में शाकीय जनन (Vegetative Propagation)
प्राकृतिक शाकीय जनन के उदाहरण
- आलू: तना कंद (Tuber)
- अदरक: भूमिगत तना/राइजोम (Rhizome)
- प्याज: बल्ब (Bulb)
- ब्रायोफिलम: पत्ती की किनारियों पर कलिकाएँ
- स्ट्रॉबेरी: रनर (Runner)
कृत्रिम शाकीय प्रवर्धन
कृषि एवं बागवानी में पौधों को तेजी से बढ़ाने के लिए तना कलम, लेयरिंग, ग्राफ्टिंग तथा ऊतक संवर्धन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
शाकीय जनन के लाभ
- कम समय में बड़ी संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
- नए पौधों में उपयोगी गुणों को बनाए रखा जा सकता है।
- बीज न बनाने वाले पौधों को भी उगाया जा सकता है।
- कई पौधे बीज से उगाए पौधों की तुलना में जल्दी फूल और फल दे सकते हैं।
13. लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
लैंगिक जनन में सामान्यतः दो प्रकार के युग्मक भाग लेते हैं। नर युग्मक और मादा युग्मक के संलयन को निषेचन (Fertilisation) कहते हैं।
लैंगिक जनन का महत्व
- इससे आनुवंशिक विविधता बढ़ती है।
- दो जनकों की आनुवंशिक सामग्री संतति में मिलती है।
- विविधताएँ विकास की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।
14. पुष्पीय पौधों में लैंगिक जनन
फूल आवृतबीजी पौधों का प्रमुख लैंगिक जनन अंग है। फूल में नर और मादा जनन संरचनाएँ उपस्थित हो सकती हैं।
फूल के प्रमुख भाग
- बाह्यदल (Sepal): कली की सुरक्षा करता है।
- दल/पंखुड़ी (Petal): रंग और गंध द्वारा परागणकर्ताओं को आकर्षित कर सकती है।
- पुंकेसर (Stamen): फूल का नर जनन अंग।
- स्त्रीकेसर/अंडप (Pistil/Carpel): फूल का मादा जनन अंग।
पुंकेसर के भाग
- परागकोष (Anther) – इसमें परागकण बनते हैं।
- तंतु (Filament) – परागकोष को सहारा देता है।
स्त्रीकेसर के भाग
- वर्तिकाग्र (Stigma) – परागकण ग्रहण करता है।
- वर्तिका (Style) – वर्तिकाग्र को अंडाशय से जोड़ती है।
- अंडाशय (Ovary) – इसमें बीजांड होते हैं।
- बीजांड (Ovule) – निषेचन के बाद बीज बनने में भाग लेता है।
एकलिंगी और द्विलिंगी फूल
जिस फूल में केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर होता है उसे एकलिंगी फूल कहते हैं। जिस फूल में पुंकेसर और स्त्रीकेसर दोनों होते हैं उसे द्विलिंगी फूल कहते हैं।
15. परागण (Pollination)
परागण के प्रकार
1. स्वपरागण (Self Pollination): जब परागकण उसी फूल अथवा उसी पौधे के फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचता है।
2. परपरागण (Cross Pollination): जब एक पौधे के फूल का परागकण उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र तक पहुँचता है।
परागण के कारक
वायु, जल तथा विभिन्न जन्तु विशेषकर कीट परागकणों के स्थानांतरण में सहायता कर सकते हैं।
16. पौधों में निषेचन
परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद अंकुरित होता है और उससे परागनली (Pollen Tube) निकलती है।
- परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचता है।
- परागकण अंकुरित होकर परागनली बनाता है।
- परागनली वर्तिका से होकर अंडाशय की ओर बढ़ती है।
- नर युग्मक परागनली के माध्यम से बीजांड तक पहुँचता है।
- नर और मादा युग्मक का संलयन होता है।
- इस संलयन को निषेचन कहते हैं।
- निषेचन के बाद युग्मनज बनता है।
निषेचन के बाद परिवर्तन
| संरचना | निषेचन के बाद |
|---|---|
| युग्मनज | भ्रूण में विकसित होता है |
| बीजांड | बीज में विकसित होता है |
| अंडाशय | फल में विकसित होता है |
17. मानव में लैंगिक जनन
मनुष्य में लैंगिक जनन होता है। नर जनन तंत्र शुक्राणु उत्पन्न करता है और मादा जनन तंत्र अंडाणु उत्पन्न करता है।
मनुष्य में निषेचन सामान्यतः मादा जनन तंत्र की अंडवाहिनी/फैलोपियन ट्यूब में होता है।
18. यौवनावस्था (Puberty)
बाल्यावस्था से वयस्क अवस्था की ओर बढ़ते समय शरीर में अनेक शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। जिस अवस्था में जनन अंग परिपक्व होने लगते हैं, उसे यौवनावस्था कहते हैं।
लड़कों में सामान्य परिवर्तन
- वृषण शुक्राणुओं का निर्माण प्रारंभ करते हैं।
- चेहरे पर दाढ़ी-मूँछ आने लगती है।
- आवाज में परिवर्तन होता है।
- शरीर के कुछ भागों पर बाल बढ़ते हैं।
- कंधे अपेक्षाकृत चौड़े हो सकते हैं।
लड़कियों में सामान्य परिवर्तन
- अंडाशय में अंडाणु परिपक्व होने लगते हैं।
- मासिक चक्र प्रारंभ होता है।
- स्तनों का विकास होता है।
- शरीर के कुछ भागों पर बाल बढ़ते हैं।
- शरीर की आकृति में परिवर्तन होता है।
ये परिवर्तन हार्मोनों के नियंत्रण में होते हैं।
19. मानव नर जनन तंत्र (Male Reproductive System)
नर जनन तंत्र का मुख्य कार्य शुक्राणुओं का निर्माण, उनका पोषण और उनके स्थानांतरण में सहायता करना है।
वृषण (Testes)
वृषण नर के प्राथमिक जनन अंग हैं। इनमें शुक्राणु बनते हैं और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव होता है।
वृषण शरीर की उदर गुहा के बाहर अंडकोश (Scrotum) में स्थित होते हैं। यह व्यवस्था शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक अपेक्षाकृत कम तापमान बनाए रखने में सहायक है।
शुक्रवाहिनी (Vas Deferens)
यह शुक्राणुओं को वृषण क्षेत्र से आगे ले जाने वाली नलिका है।
वीर्य पुटिका एवं प्रोस्टेट ग्रंथि
इन ग्रंथियों से निकलने वाले स्राव शुक्राणुओं के साथ मिलकर द्रव माध्यम प्रदान करते हैं। यह माध्यम शुक्राणुओं के परिवहन और पोषण में सहायता करता है।
मूत्रमार्ग (Urethra)
यह वह मार्ग है जिसके द्वारा वीर्य शरीर से बाहर निकल सकता है।
20. मानव मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)
मादा जनन तंत्र के प्रमुख भाग हैं—अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि।
अंडाशय (Ovary)
अंडाशय मादा के प्राथमिक जनन अंग हैं। इनमें अंडाणु परिपक्व होते हैं तथा एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन बनते हैं।
अंडवाहिनी / फैलोपियन ट्यूब (Oviduct/Fallopian Tube)
अंडाशय से मुक्त अंडाणु अंडवाहिनी में प्रवेश करता है। मनुष्य में सामान्यतः निषेचन अंडवाहिनी में होता है।
गर्भाशय (Uterus)
यह पेशीय अंग है जिसमें निषेचित अंडाणु के आरोपण के बाद भ्रूण का विकास होता है। इसकी भीतरी परत को एंडोमेट्रियम कहते हैं।
गर्भाशय ग्रीवा (Cervix)
गर्भाशय का संकरा निचला भाग गर्भाशय ग्रीवा कहलाता है।
योनि (Vagina)
यह गर्भाशय ग्रीवा से बाहर की ओर जाने वाली पेशीय नली है और मादा जनन मार्ग का भाग है।
21. अंडोत्सर्ग और मासिक चक्र
अंडोत्सर्ग (Ovulation)
परिपक्व अंडाणु का अंडाशय से बाहर निकलना अंडोत्सर्ग कहलाता है।
गर्भाशय की आंतरिक परत संभावित गर्भावस्था के लिए मोटी और रक्तवाहिनियों से समृद्ध होती जाती है।
यदि निषेचन न हो
यदि अंडाणु का निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की मोटी हुई आंतरिक परत की आवश्यकता नहीं रहती। यह परत टूटकर रक्त एवं ऊतकों के साथ शरीर से बाहर निकलती है। इसे मासिक धर्म (Menstruation) कहते हैं।
मासिक चक्र की अवधि व्यक्तियों में अलग हो सकती है; इसे हर व्यक्ति के लिए ठीक समान दिनों का मानना सही नहीं है।
22. मानव में निषेचन (Fertilisation in Humans)
मानव में निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी में होता है। अनेक शुक्राणुओं में से सामान्यतः एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलयित होता है।
युग्मनज लगातार समसूत्री विभाजनों द्वारा अनेक कोशिकाओं में विभाजित होने लगता है और गर्भाशय की ओर बढ़ता है।
23. भ्रूण विकास एवं आरोपण
निषेचन के बाद बना युग्मनज विभाजित होकर कोशिकाओं का समूह बनाता है। आगे चलकर यह भ्रूणीय अवस्था में विकसित होता है।
आरोपण (Implantation)
अपरा (Placenta)
गर्भावस्था के दौरान माता और विकासशील भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान के लिए एक विशेष संरचना बनती है जिसे अपरा या प्लेसेंटा कहते हैं।
- माता के रक्त से भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषक पदार्थ प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
- भ्रूण से बने कार्बन डाइऑक्साइड एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में सहायता मिलती है।
- माता और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान के लिए बड़ा सतही क्षेत्र उपलब्ध होता है।
भ्रूण और गर्भस्थ शिशु
प्रारंभिक विकासशील अवस्था को भ्रूण (Embryo) कहा जाता है। विकास के साथ जब शरीर के प्रमुख अंग पहचाने जाने योग्य होने लगते हैं, तब विकसित अवस्था को गर्भस्थ शिशु (Foetus) कहा जाता है।
24. प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health)
प्रजनन स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोग का अभाव नहीं, बल्कि जनन से संबंधित शारीरिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सही जानकारी और जिम्मेदार व्यवहार से भी है।
गर्भनिरोध की आवश्यकता
अनचाहे गर्भ से बचने तथा बच्चों के जन्म के बीच उचित अंतर रखने के लिए गर्भनिरोध के विभिन्न साधनों का उपयोग किया जाता है।
गर्भनिरोध की प्रमुख विधियाँ
| विधि | उदाहरण/कार्य |
|---|---|
| अवरोधक विधि | कंडोम आदि शुक्राणुओं को अंडाणु तक पहुँचने से रोकने में सहायता करते हैं। |
| हार्मोनल विधि | चिकित्सकीय सलाह के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियाँ आदि। |
| IUCD | गर्भाशय के भीतर लगाया जाने वाला गर्भनिरोधक उपकरण, जैसे Copper-T। |
| शल्य विधि | पुरुष में नसबंदी (Vasectomy) तथा महिला में नलिका बंधन (Tubectomy)। |
यौन संचारित संक्रमण (STIs)
कुछ संक्रमण यौन संपर्क द्वारा फैल सकते हैं। उदाहरण के रूप में गोनोरिया, सिफिलिस और HIV संक्रमण का उल्लेख किया जाता है। सही जानकारी, सुरक्षित व्यवहार और आवश्यकता होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह महत्वपूर्ण है।
25. महत्वपूर्ण अंतर
द्विखंडन और बहुखंडन में अंतर
| द्विखंडन | बहुखंडन |
|---|---|
| एक जनक से दो संतति कोशिकाएँ बनती हैं। | एक जनक से अनेक संतति कोशिकाएँ बनती हैं। |
| उदाहरण – अमीबा | उदाहरण – प्लाज्मोडियम |
परागण और निषेचन में अंतर
| परागण | निषेचन |
|---|---|
| परागकण का परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचना। | नर एवं मादा युग्मकों का संलयन। |
| निषेचन से पहले होता है। | परागण के बाद हो सकता है। |
| वायु, जल या जन्तुओं की सहायता हो सकती है। | युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है। |
अलैंगिक और लैंगिक जनन में अंतर
| अलैंगिक जनन | लैंगिक जनन |
|---|---|
| सामान्यतः एक जनक। | नर एवं मादा युग्मकों की भागीदारी। |
| युग्मक संलयन नहीं होता। | युग्मक संलयन होता है। |
| संतति में अपेक्षाकृत कम विविधता। | संतति में अधिक आनुवंशिक विविधता। |
| प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल। | प्रक्रिया अधिक जटिल। |
26. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
- जनन प्रजाति की निरंतरता के लिए आवश्यक है।
- DNA प्रतिकृति के दौरान छोटी भिन्नताएँ विविधता उत्पन्न कर सकती हैं।
- अमीबा में द्विखंडन पाया जाता है।
- प्लाज्मोडियम में बहुखंडन पाया जाता है।
- हाइड्रा एवं यीस्ट में मुकुलन देखा जाता है।
- राइजोपस बीजाणुओं द्वारा जनन करता है।
- ब्रायोफिलम में पत्ती द्वारा शाकीय जनन हो सकता है।
- फूल आवृतबीजी पौधों का जनन अंग है।
- पुंकेसर फूल का नर जनन अंग है।
- स्त्रीकेसर फूल का मादा जनन अंग है।
- परागकोष में परागकण बनते हैं।
- अंडाशय में बीजांड पाए जाते हैं।
- परागकण का वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण है।
- युग्मकों का संलयन निषेचन कहलाता है।
- निषेचन के बाद बीजांड बीज और अंडाशय फल में विकसित होता है।
- वृषण में शुक्राणु बनते हैं।
- अंडाशय में अंडाणु परिपक्व होते हैं।
- मनुष्य में निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी में होता है।
- निषेचन से युग्मनज बनता है।
- भ्रूण गर्भाशय की आंतरिक परत में आरोपित होता है।
- प्लेसेंटा माता और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करता है।
27. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions & Answers)
उत्तर: वह जैविक प्रक्रिया जिसके द्वारा जीव अपने समान नई संतति उत्पन्न करते हैं, जनन कहलाती है।
उत्तर: जनन किसी प्रजाति की निरंतरता बनाए रखता है और आनुवंशिक सूचना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है।
उत्तर: विविधता बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में किसी प्रजाति के कुछ सदस्यों के जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकती है और विकास में योगदान देती है।
उत्तर: वह अलैंगिक जनन जिसमें एक जनक कोशिका विभाजित होकर दो संतति कोशिकाएँ बनाती है, द्विखंडन कहलाता है।
उत्तर: प्लाज्मोडियम।
उत्तर: जनक के शरीर पर बने छोटे मुकुल के बढ़कर नई संतति बनाने की प्रक्रिया मुकुलन कहलाती है। हाइड्रा और यीस्ट इसके उदाहरण हैं।
उत्तर: राइजोपस जैसे कवकों में।
उत्तर: पौधे के जड़, तना या पत्ती जैसे शाकीय भागों से नए पौधे के निर्माण को शाकीय जनन कहते हैं।
उत्तर: परागकण का परागकोष से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण परागण कहलाता है।
उत्तर: नर और मादा युग्मकों के संलयन को निषेचन कहते हैं।
उत्तर: पुंकेसर (Stamen)।
उत्तर: स्त्रीकेसर/अंडप (Pistil/Carpel)।
उत्तर: बीजांड सामान्यतः बीज में तथा अंडाशय फल में विकसित होता है।
उत्तर: वृषण शुक्राणुओं का निर्माण करते हैं और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करते हैं।
उत्तर: सामान्यतः अंडवाहिनी या फैलोपियन ट्यूब में।
उत्तर: विकासशील भ्रूणीय संरचना का गर्भाशय की आंतरिक परत में स्थापित होना आरोपण कहलाता है।
उत्तर: प्लेसेंटा माता और विकासशील भ्रूण के बीच पोषक पदार्थों, ऑक्सीजन तथा अपशिष्ट पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करता है।
उत्तर: निषेचन न होने पर गर्भाशय की मोटी हुई आंतरिक परत टूटकर रक्त एवं ऊतकों के साथ बाहर निकलती है। इसे मासिक धर्म कहते हैं।
उत्तर: इससे आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है, जो बदलती परिस्थितियों में प्रजाति के अस्तित्व और विकास में महत्वपूर्ण हो सकती है।
उत्तर: द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन और बीजाणु निर्माण। इसके अतिरिक्त खंडन, पुनर्जनन और शाकीय जनन भी प्रमुख विधियाँ हैं।
28. Quick Revision – एक नजर में पूरा अध्याय
- जनन: नई संतति उत्पन्न करने की जैविक प्रक्रिया।
- जनन के प्रकार: अलैंगिक और लैंगिक।
- द्विखंडन: अमीबा।
- बहुखंडन: प्लाज्मोडियम।
- खंडन: स्पाइरोगाइरा।
- पुनर्जनन: प्लेनेरिया/हाइड्रा में उच्च पुनर्जनन क्षमता।
- मुकुलन: हाइड्रा और यीस्ट।
- बीजाणु निर्माण: राइजोपस।
- शाकीय जनन: जड़, तना या पत्ती से नया पौधा।
- फूल: आवृतबीजी पौधों का लैंगिक जनन अंग।
- पुंकेसर: नर जनन अंग।
- स्त्रीकेसर: मादा जनन अंग।
- परागण: परागकण का वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण।
- निषेचन: नर और मादा युग्मकों का संलयन।
- युग्मनज: निषेचन से बनने वाली पहली कोशिका।
- वृषण: शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन का निर्माण।
- अंडाशय: अंडाणुओं के परिपक्व होने का प्रमुख अंग तथा मादा हार्मोन का स्रोत।
- मानव में निषेचन: सामान्यतः अंडवाहिनी में।
- आरोपण: विकासशील भ्रूणीय संरचना का गर्भाशय की परत में स्थापित होना।
- प्लेसेंटा: माता और भ्रूण के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायक।
- मासिक धर्म: निषेचन न होने पर गर्भाशय की परत का टूटकर बाहर निकलना।
- विविधता: जीवों में पाए जाने वाले अंतर; विकास के लिए महत्वपूर्ण।
29. अध्याय का सारांश
जीव अपनी प्रजाति को बनाए रखने के लिए जनन करते हैं। अलैंगिक जनन में सामान्यतः एक जनक भाग लेता है और इसमें द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन, बीजाणु निर्माण, खंडन, पुनर्जनन और शाकीय जनन जैसी विधियाँ शामिल हैं।
लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मकों का संलयन होता है। पुष्पीय पौधों में परागण के बाद परागनली बनती है और नर युग्मक बीजांड तक पहुँचकर निषेचन में भाग लेता है। निषेचन के बाद बीजांड बीज और अंडाशय फल में विकसित होता है।
मनुष्य में नर जनन तंत्र शुक्राणु तथा मादा जनन तंत्र अंडाणु उत्पन्न करता है। निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी में होता है। निषेचन से युग्मनज बनता है, जो विभाजित होते हुए गर्भाशय तक पहुँचता है और गर्भाशय की आंतरिक परत में आरोपित होकर आगे विकसित होता है।

