Bihar Board Class 9 Maths Chapter 1 संख्या पद्धति Notes

BSEB Class 9 Mathematics

अध्याय 1 : संख्या पद्धति (Number System)

इस अध्याय में प्राकृतिक संख्या से लेकर वास्तविक संख्या तक की पूरी संख्या व्यवस्था, परिमेय एवं अपरिमेय संख्याएँ, दशमलव प्रसार, संख्या रेखा, हर का परिमेयकरण तथा घातांक के नियम सरल उदाहरणों के साथ समझाए गए हैं।

1. संख्या पद्धति का परिचय

गणित में संख्याओं को उनके गुणों के आधार पर अलग-अलग समूहों में रखा जाता है। इन समूहों की व्यवस्थित जानकारी को संख्या पद्धति कहते हैं। प्राकृतिक, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ मिलकर वास्तविक संख्या प्रणाली का निर्माण करती हैं।

N ⊂ W ⊂ Z ⊂ Q ⊂ R

इसका अर्थ है कि प्रत्येक प्राकृतिक संख्या पूर्ण संख्या है, प्रत्येक पूर्ण संख्या पूर्णांक है, प्रत्येक पूर्णांक परिमेय है और प्रत्येक परिमेय संख्या वास्तविक संख्या है।

2. संख्याओं के प्रमुख प्रकार

प्राकृतिक संख्याएँ (N)

गिनती में प्रयोग होने वाली संख्याएँ: 1, 2, 3, 4, 5, …

पूर्ण संख्याएँ (W)

प्राकृतिक संख्याओं में 0 जोड़ने पर: 0, 1, 2, 3, 4, …

पूर्णांक (Z)

ऋणात्मक संख्याएँ, शून्य और धनात्मक संख्याएँ: …−2, −1, 0, 1, 2…

परिमेय संख्याएँ (Q)

वे संख्याएँ जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ q ≠ 0 हो।

अपरिमेय संख्याएँ

जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता; जैसे √2, √3 और π।

वास्तविक संख्याएँ (R)

सभी परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का संयुक्त समूह।

3. परिमेय संख्या (Rational Number)

किसी संख्या को यदि p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q शून्य न हो, तो वह परिमेय संख्या कहलाती है।

परिमेय संख्या = p/q, जहाँ q ≠ 0
उदाहरण: 3/5, −7/4, 8, 0 और 1.25 सभी परिमेय संख्याएँ हैं। पूर्णांक 8 को 8/1 तथा 0 को 0/1 लिखा जा सकता है।

दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्या

दो परिमेय संख्याओं a और b के बीच एक परिमेय संख्या उनके औसत से प्राप्त की जा सकती है।

a और b के बीच संख्या = (a + b)/2
उदाहरण: 2 और 3 के बीच एक परिमेय संख्या (2 + 3)/2 = 5/2 = 2.5 है। इसी प्रक्रिया को दोहराकर उनके बीच अनंत परिमेय संख्याएँ प्राप्त की जा सकती हैं।

4. अपरिमेय संख्या (Irrational Number)

जिस वास्तविक संख्या को p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सके, वह अपरिमेय संख्या कहलाती है। इसका दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती होता है।

ध्यान रखें: √2, √3, √5 और π अपरिमेय हैं, लेकिन √4 = 2 तथा √9 = 3 परिमेय संख्याएँ हैं।

√2 की अपरिमेयता का संक्षिप्त विचार

मान लें कि √2 को सबसे सरल रूप p/q में लिखा जा सकता है। दोनों तरफ वर्ग करने पर p² = 2q² मिलता है। इससे p सम संख्या सिद्ध होती है। p = 2k रखने पर q भी सम संख्या सिद्ध होती है। तब p और q दोनों में 2 समान गुणनखंड होगा, जबकि हमने p/q को सबसे सरल रूप माना था। यह विरोधाभास है; इसलिए √2 अपरिमेय है।

5. दशमलव प्रसार

दशमलव का प्रकार उदाहरण संख्या का प्रकार
सांत दशमलव 0.25, 1.75 परिमेय
असांत आवर्ती दशमलव 0.333…, 0.272727… परिमेय
असांत अनावर्ती दशमलव 1.414213…, 3.141592… अपरिमेय

दशमलव प्रसार कब सांत होगा?

यदि परिमेय संख्या p/q अपने सरलतम रूप में हो और q के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 अथवा 5 हों, तो दशमलव प्रसार सांत होगा।

q = 2m × 5n
उदाहरण: 7/40 में 40 = 2³ × 5 है, इसलिए इसका दशमलव प्रसार सांत होगा। 7/40 = 0.175।
उदाहरण: 1/3 के हर में 3 है, इसलिए इसका दशमलव प्रसार सांत नहीं है। 1/3 = 0.333… एक आवर्ती दशमलव है।

6. वास्तविक संख्याओं को संख्या रेखा पर दिखाना

संख्या रेखा पर प्रत्येक वास्तविक संख्या का एक निश्चित बिंदु होता है। धनात्मक संख्याएँ शून्य के दाईं ओर और ऋणात्मक संख्याएँ शून्य के बाईं ओर दिखाई जाती हैं।

√2 का निरूपण

  1. संख्या रेखा पर O से A तक 1 इकाई लें।
  2. A पर 1 इकाई का लंब खींचकर बिंदु B बनाएँ।
  3. पाइथागोरस प्रमेय से OB = √(1² + 1²) = √2 होगा।
  4. O केंद्र और OB त्रिज्या से चाप काटकर √2 का बिंदु प्राप्त करें।

7. वास्तविक संख्याओं पर संक्रियाएँ

वास्तविक संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और उचित स्थिति में भाग किया जा सकता है। परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के संबंध में निम्न बातें उपयोगी हैं:

  • परिमेय + परिमेय = परिमेय
  • परिमेय × परिमेय = परिमेय
  • परिमेय + अपरिमेय = अपरिमेय
  • शून्य से भिन्न परिमेय × अपरिमेय = अपरिमेय
  • दो अपरिमेय संख्याओं का योग हमेशा अपरिमेय हो, यह आवश्यक नहीं है।
  • दो अपरिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा अपरिमेय हो, यह भी आवश्यक नहीं है।
√2 + (−√2) = 0 और √2 × √2 = 2। यहाँ दोनों परिणाम परिमेय हैं।

8. वर्गमूल वाले व्यंजकों का सरलीकरण

√a × √b = √ab
√a / √b = √(a/b), जहाँ b > 0
उदाहरण: √12 = √(4 × 3) = 2√3
उदाहरण: √18 + √8 = 3√2 + 2√2 = 5√2

9. हर का परिमेयकरण (Rationalisation)

किसी भिन्न के हर में उपस्थित अपरिमेय संख्या को हटाने की प्रक्रिया हर का परिमेयकरण कहलाती है।

उदाहरण:
1/√2 = (1/√2) × (√2/√2) = √2/2

यदि हर a + √b के रूप में हो, तो उसके संयुग्मी a − √b से अंश और हर दोनों को गुणा किया जाता है।

(a + b)(a − b) = a² − b²
उदाहरण:
1/(3 + √2) = (3 − √2)/[(3 + √2)(3 − √2)] = (3 − √2)/7

10. घातांक के नियम (Laws of Exponents)

धनात्मक वास्तविक संख्याओं और उचित घातों के लिए:

  • am × an = am+n
  • am ÷ an = am−n, जहाँ a ≠ 0
  • (am)n = amn
  • (ab)m = ambm
  • a0 = 1, जहाँ a ≠ 0
  • a−m = 1/am
  • a1/n = ⁿ√a
  • am/n = ⁿ√(am)
उदाहरण: 2³ × 2⁴ = 2⁷ = 128
उदाहरण: 272/3 = (∛27)² = 3² = 9

11. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • 0 परिमेय संख्या है, क्योंकि 0 = 0/1।
  • प्रत्येक पूर्णांक परिमेय संख्या है।
  • प्रत्येक वास्तविक संख्या या तो परिमेय होगी या अपरिमेय।
  • दो अलग वास्तविक संख्याओं के बीच अनंत वास्तविक संख्याएँ होती हैं।
  • सांत तथा असांत आवर्ती दशमलव परिमेय होते हैं।
  • असांत और अनावर्ती दशमलव अपरिमेय होता है।
  • ऋणात्मक संख्या का वास्तविक वर्गमूल परिभाषित नहीं होता।
  • हर का परिमेयकरण करते समय संयुग्मी व्यंजक का सही प्रयोग करें।

12. महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न

  1. परिमेय और अपरिमेय संख्या में अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
  2. सिद्ध कीजिए कि √2 एक अपरिमेय संख्या है।
  3. 2 और 3 के बीच पाँच परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
  4. बताइए कि 13/125 का दशमलव प्रसार सांत होगा या नहीं।
  5. 0.272727… को p/q के रूप में व्यक्त कीजिए।
  6. √12 + √27 को सरल कीजिए।
  7. 1/(2 + √3) के हर का परिमेयकरण कीजिए।
  8. 642/3 का मान ज्ञात कीजिए।

13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या प्रत्येक प्राकृतिक संख्या पूर्ण संख्या होती है?

हाँ। प्राकृतिक संख्याएँ पूर्ण संख्याओं के समूह का भाग हैं।

क्या प्रत्येक वास्तविक संख्या परिमेय होती है?

नहीं। वास्तविक संख्याओं में परिमेय और अपरिमेय दोनों शामिल हैं।

क्या π एक परिमेय संख्या है?

नहीं। π का दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती है, इसलिए यह अपरिमेय है।

परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार कैसा होता है?

यह या तो सांत होता है अथवा असांत लेकिन आवर्ती होता है।

14. Quick Revision

वास्तविक संख्या = परिमेय संख्या + अपरिमेय संख्या
  • परिमेय संख्या को p/q के रूप में लिखा जा सकता है।
  • अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती होता है।
  • हर में केवल 2 और 5 के गुणनखंड होने पर दशमलव सांत होता है।
  • संख्या रेखा का प्रत्येक बिंदु एक वास्तविक संख्या दर्शाता है।
  • संयुग्मी व्यंजक की सहायता से हर का परिमेयकरण किया जाता है।