Class 10 Sanskrit Chapter 14 शास्त्रकाराः Notes in Hindi | हिंदी अनुवाद, प्रश्न उत्तर और MCQ

Class 10 Sanskrit Chapter 14 शास्त्रकाराः Notes in Hindi | हिंदी अनुवाद, प्रश्न उत्तर और MCQ
BSEB EXAM GUIDE

Bihar Board Class 10 Sanskrit | पीयूषम्

पाठ 14 – शास्त्रकाराः

Class 10 Sanskrit Chapter 14 Shastrakarah Notes in Hindi

हिंदी अनुवाद | शब्दार्थ | व्याकरण | प्रश्न उत्तर | MCQ

विषय-सूची

1. पाठ परिचय 2. हिंदी सारांश 3. संस्कृत पाठ एवं हिंदी अर्थ 4. प्रमुख शास्त्रकार 5. शब्दार्थ 6. संधि-विच्छेद 7. समास एवं प्रकृति-प्रत्यय 8. मौखिक अभ्यास 9. लिखित अभ्यास 10. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 11. 20 Objective Questions 12. Quick Revision 13. FAQs

1. शास्त्रकाराः – पाठ परिचय

शास्त्रकाराः बिहार बोर्ड कक्षा 10 की संस्कृत पुस्तक पीयूषम् का चौदहवाँ पाठ है। यह पाठ शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस पाठ में भारत की महान शास्त्रीय परंपरा, शास्त्र की परिभाषा, शास्त्रों के भेद तथा प्रमुख भारतीय शास्त्रकारों के योगदान का परिचय दिया गया है।

भारत में प्राचीन काल से ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा रही है। शिक्षा, व्याकरण, दर्शन, छन्द, ज्योतिष, आयुर्वेद, रसायन तथा अन्य विषयों पर अनेक शास्त्रों की रचना हुई है।

परीक्षा के महत्वपूर्ण तथ्य

पाठ – शास्त्रकाराः
पुस्तक – पीयूषम्
कक्षा – 10
अध्याय – 14
पृष्ठ – 112–120
मुख्य विषय – भारतीय शास्त्र और शास्त्रकार
प्रस्तुति – शिक्षक-छात्र संवाद

2. शास्त्रकाराः पाठ का हिंदी सारांश

इस पाठ में शिक्षक कक्षा में प्रवेश करते हैं और विद्यार्थी आदरपूर्वक उनका अभिवादन करते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृत शास्त्रों का परिचय देने लगते हैं।

एक विद्यार्थी पूछता है कि शास्त्र किसे कहते हैं। शिक्षक बताते हैं कि जो मानव को कर्तव्य और अकर्तव्य का बोध कराता है, उसे शास्त्र कहते हैं। शास्त्र का संबंध ज्ञान, शिक्षा तथा अनुशासन से भी है।

इसके बाद शिक्षक बताते हैं कि शास्त्र अनेक प्रकार के होते हैं। कुछ शास्त्र मनुष्य को कर्तव्य और धर्म का ज्ञान देते हैं, जबकि कुछ शास्त्र विभिन्न विषयों के वैज्ञानिक तथा व्यवस्थित अध्ययन से संबंधित होते हैं।

वेदों के छह अंग हैं – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष। शिक्षक विद्यार्थियों को इनका परिचय देते हैं।

फिर शिक्षक भारतीय दर्शनशास्त्र की प्रमुख परंपराओं के प्रवर्तकों का परिचय देते हैं। सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कपिल, योग दर्शन के पतञ्जलि, न्याय दर्शन के गौतम, वैशेषिक दर्शन के कणाद, मीमांसा दर्शन के जैमिनि तथा वेदान्त दर्शन के बादरायण माने जाते हैं।

इसके बाद शिक्षक बताते हैं कि प्राचीन भारत में आयुर्वेद, रसायन, भौतिक विज्ञान, ज्योतिष, गणित, व्याकरण, छन्दशास्त्र तथा कृषि विज्ञान आदि विषयों के शास्त्र भी विकसित हुए थे।

अंत में शिक्षक कहते हैं कि प्राचीन भारत का गौरव बहुत समृद्ध था। विद्यार्थी अपने देश की महान ज्ञान-परंपरा को जानकर प्रसन्न होते हैं।

मुख्य शिक्षा: भारतीय ज्ञान-परंपरा अत्यंत समृद्ध है। शास्त्रों का अध्ययन मनुष्य को ज्ञान, अनुशासन और उचित आचरण की प्रेरणा देता है।

3. संस्कृत संवाद एवं सरल हिंदी अनुवाद

प्रसंग 1 – शिक्षक का आगमन

शिक्षकः कक्षायां प्रविशति, छात्राः सादरमुत्थाय तस्याभिवादनं कुर्वन्ति।
हिंदी अर्थ: शिक्षक कक्षा में प्रवेश करते हैं। विद्यार्थी आदरपूर्वक खड़े होकर उनका अभिवादन करते हैं।

प्रसंग 2 – शास्त्रों का परिचय

शिक्षकः – उपविशतु सर्वे। अद्य युष्माकं परिचयः संस्कृतशास्त्रैः भविष्यति।
हिंदी अर्थ: शिक्षक कहते हैं – सभी बैठ जाएँ। आज तुम लोगों को संस्कृत शास्त्रों का परिचय दिया जाएगा।

प्रसंग 3 – शास्त्र की परिभाषा

युवराजः – गुरुदेव! शास्त्रं किं भवति?
हिंदी अर्थ: युवराज पूछता है – गुरुदेव! शास्त्र क्या होता है?
शास्त्रं नाम ज्ञानस्य शासकमस्ति। मानवानां कर्तव्याकर्तव्यविषयान् तत् शिक्षयति।
हिंदी अर्थ: शास्त्र ज्ञान का मार्गदर्शन करने वाला होता है। यह मनुष्यों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसकी शिक्षा देता है।

प्रसंग 4 – शास्त्र का लक्षण

प्रवृत्तिर्वा निवृत्तिर्वा नित्येन कृतेन वा।
पुंसां येनोपदिश्येत तच्छास्त्रमभिधीयते।
भावार्थ: जिस ग्रंथ के द्वारा मनुष्य को किसी कार्य में प्रवृत्त होने अथवा उससे निवृत्त होने का निर्देश मिलता है, उसे शास्त्र कहा जाता है।

प्रसंग 5 – शास्त्रों के प्रकार

कृतकं शास्त्रं ऋषयः अन्ये विद्वांसः वा रचितवन्तः। सर्वप्रथमं षड् वेदाङ्गानि शास्त्राणि सन्ति। तानि – शिक्षा, कल्पः, व्याकरणम्, निरुक्तम्, छन्दः, ज्योतिषम् चेति।
हिंदी अर्थ: ऋषियों और विद्वानों ने अनेक शास्त्रों की रचना की है। सबसे पहले वेदों के छह अंग शास्त्र माने जाते हैं – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष।

प्रसंग 6 – छह वेदाङ्ग

शिक्षा उच्चारणप्रक्रियां बोधयति। पाणिनीयशिक्षा तस्याः प्रसिद्धो ग्रन्थः। कल्पः कर्मकाण्डग्रन्थः। सूत्रात्मकः बौधायन-भारद्वाज-गौतम-वसिष्ठादयः ऋषयः अस्य शास्त्रस्य रचयितारः।
हिंदी अर्थ: शिक्षा शास्त्र उच्चारण की विधि बताता है। पाणिनीयशिक्षा इसका प्रसिद्ध ग्रंथ है। कल्पशास्त्र कर्मकाण्ड से संबंधित है। बौधायन, भारद्वाज, गौतम और वसिष्ठ आदि ऋषियों ने इससे संबंधित ग्रंथों की रचना की।
व्याकरणं तु पाणिनिकृतं प्रसिद्धम्। निरुक्तस्य कार्यं वेदार्थबोधनं तस्य रचयिता यास्कः। छन्दः पिङ्गलरचिते सूत्रग्रन्थे प्राचुर्यम्। ज्योतिषं लगधर्षेर्वेदाङ्गज्योतिषग्रन्थेन प्रवर्तते।
हिंदी अर्थ: पाणिनि द्वारा रचित व्याकरण प्रसिद्ध है। निरुक्त वेदों के शब्दों का अर्थ समझाता है और इसके प्रमुख रचयिता यास्क हैं। छन्दशास्त्र में पिङ्गल का योगदान महत्वपूर्ण है। वेदाङ्ग ज्योतिष की परंपरा लगध ऋषि से संबंधित है।

प्रसंग 7 – दर्शनशास्त्र

सांख्यदर्शनस्य प्रवर्तकः कपिलः। योगदर्शनस्य पतञ्जलिः। एवं गौतमेन न्यायदर्शनं रचितं कणादेन च वैशेषिकदर्शनम्। जैमिनिना मीमांसादर्शनं, बादरायणेन च वेदान्तदर्शनं प्रणीतम्।
हिंदी अर्थ: सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कपिल हैं। योग दर्शन के पतञ्जलि हैं। गौतम ने न्याय दर्शन तथा कणाद ने वैशेषिक दर्शन की परंपरा को विकसित किया। जैमिनि ने मीमांसा और बादरायण ने वेदान्त दर्शन का प्रतिपादन किया।

प्रसंग 8 – अन्य वैज्ञानिक शास्त्र

प्राचीनभारते विज्ञानस्य विभिन्नशाखानां शास्त्राणि प्रावर्तन्त। आयुर्वेदशास्त्रे चरकसंहिता, सुश्रुतसंहिता चेति शास्त्रकारनाम्नैव प्रसिद्धे स्तः।
हिंदी अर्थ: प्राचीन भारत में विज्ञान की विभिन्न शाखाओं के शास्त्र विकसित हुए। आयुर्वेद में चरकसंहिता और सुश्रुतसंहिता प्रसिद्ध ग्रंथ हैं।
तथैव रसायनविज्ञानम्, भौतिकविज्ञानञ्च अन्तरर्भूतं स्तः। ज्योतिषशास्त्रेऽपि खगोलविज्ञानं गणितम् इत्यादीनि शास्त्राणि सन्ति।
हिंदी अर्थ: इसी प्रकार रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान के ग्रंथ भी उपलब्ध थे। ज्योतिषशास्त्र में खगोल विज्ञान और गणित आदि विषय शामिल थे।

प्रसंग 9 – भारतीय ज्ञान-परंपरा का गौरव

गुरुदेव! अहो बहुशास्त्रम्। प्राचीनस्य भारतस्य गौरवं सर्वथा समृद्धम्।
हिंदी अर्थ: गुरुदेव! कितने अधिक शास्त्र हैं! प्राचीन भारत का गौरव वास्तव में बहुत समृद्ध था।
ऊपर संवाद के प्रमुख अंश अध्ययन के लिए प्रस्तुत हैं। मूल पाठ का शब्दशः अध्ययन पीयूषम् के पृष्ठ 112–113 से करें।

4. प्रमुख शास्त्रकार एवं उनके शास्त्र

शास्त्रकारशास्त्र / योगदान
कपिलसांख्य दर्शन
पतञ्जलियोग दर्शन
गौतमन्याय दर्शन
कणादवैशेषिक दर्शन
जैमिनिमीमांसा दर्शन
बादरायणवेदान्त दर्शन
पाणिनिव्याकरण, अष्टाध्यायी
यास्कनिरुक्त
पिङ्गलछन्दशास्त्र
लगधवेदाङ्ग ज्योतिष
चरकचरकसंहिता, आयुर्वेद
सुश्रुतसुश्रुतसंहिता, आयुर्वेद

छह वेदाङ्ग

वेदाङ्गमुख्य विषय
शिक्षावर्णों का शुद्ध उच्चारण
कल्पयज्ञ, संस्कार और कर्मकाण्ड
व्याकरणशब्दरचना और भाषा के नियम
निरुक्तवैदिक शब्दों का अर्थ
छन्दछन्द और मात्राओं के नियम
ज्योतिषकालगणना और ज्योतिषीय अध्ययन

5. महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दार्थ

संस्कृत शब्दहिंदी अर्थ
सादरम्आदर सहित
अभिवादनम्नमस्कार
उपविशतुबैठ जाएँ
शास्त्रम्ज्ञान का मार्गदर्शन करने वाला ग्रंथ
कर्तव्यम्करने योग्य कार्य
अकर्तव्यम्न करने योग्य कार्य
बोधयतिसमझाता है
प्रवृत्तिःकार्य में लगना
निवृत्तिःकार्य से हटना
प्रणीतम्रचित, प्रतिपादित
वेदाङ्गानिवेदों के अंग
उच्चारणम्उच्चारण
प्रसिद्धःविख्यात
कर्मकाण्डःधार्मिक अनुष्ठान संबंधी विधियाँ
रचयितारचना करने वाला
निरुक्तम्वैदिक शब्दार्थ संबंधी शास्त्र
छन्दःछन्दशास्त्र
प्रवर्तकःआरंभकर्ता
शाखाःविभाग
प्राचीनम्पुराना
समृद्धम्संपन्न
गौरवम्महिमा
विज्ञानम्विशेष ज्ञान
अल्पाकम
संख्यागिनती

6. संधि-विच्छेद

संधियुक्त पदसंधि-विच्छेद
सादरमुत्थायसादरम् + उत्थाय
तस्याभिवादनम्तस्य + अभिवादनम्
वेदाङ्गानिवेद + अङ्गानि
कर्तव्याकर्तव्यविषयान्कर्तव्य + अकर्तव्य + विषयान्
शास्त्रमेवशास्त्रम् + एव
तथापितथा + अपि
न्यायदर्शनम्न्याय + दर्शनम्
वेदान्तदर्शनम्वेदान्त + दर्शनम्
ज्योतिषशास्त्रेऽपिज्योतिषशास्त्रे + अपि
कृषिविज्ञानञ्चकृषिविज्ञानम् + च
अल्पा संख्याअल्पा + संख्या

7. समास एवं प्रकृति-प्रत्यय

समास-विग्रह

समस्त पदसमास-विग्रहसमास
ज्योतिषशास्त्रम्ज्योतिषस्य शास्त्रम्षष्ठी तत्पुरुष
न्यायदर्शनम्न्यायस्य दर्शनम्षष्ठी तत्पुरुष
पाणिनीकृतम्पाणिनिना कृतम्तृतीया तत्पुरुष
वेदाङ्गानिवेदस्य अङ्गानिषष्ठी तत्पुरुष
प्रश्नोत्तरशैलीप्रश्नः च उत्तरं च – तयोः शैलीद्वन्द्वगर्भ तत्पुरुष
कर्मकाण्डःकर्मणां काण्डःषष्ठी तत्पुरुष
संस्कृतशास्त्रम्संस्कृतस्य शास्त्रम्षष्ठी तत्पुरुष

प्रकृति-प्रत्यय – महत्वपूर्ण उदाहरण

पदप्रकृति + प्रत्यय
उत्थायउद् + स्था + ल्यप्
अभिवाद्यअभि + वद् + ल्यप्
रचितम्रच् + क्त
ज्ञातम्ज्ञा + क्त
कर्तव्यम्कृ + तव्यत्
प्रवर्तकःप्र + वृत् + णिच् + ण्वुल्

8. मौखिक अभ्यास – पृष्ठ 117–118

प्रश्न 1 – एकपदेन उत्तरं दत्त

(क) कक्षायां कः प्रविशति?

उत्तरम् – शिक्षकः।

(ख) के सादरमुत्थाय तस्याभिवादनं कुर्वन्ति?

उत्तरम् – छात्राः।

(ग) वेदस्य कति अङ्गानि भवन्ति?

उत्तरम् – षट्।

(घ) शिक्षा कां बोधयति?

उत्तरम् – उच्चारणप्रक्रियाम्।

(ङ) पाणिनिना कृतं किं प्रसिद्धम्?

उत्तरम् – व्याकरणम्।

प्रश्न 2 – संधि-विच्छेदं कुरुत

पदउत्तर
उच्चारणम्उत् + चारणम्
वेदाङ्गानिवेद + अङ्गानि
व्युत्पत्तिःवि + उत्पत्तिः
निरुक्तम्निः + उक्तम्
प्रश्नोत्तरम्प्रश्न + उत्तरम्

प्रश्न 3 – समास-विग्रह

पदविग्रह
ज्योतिषशास्त्रम्ज्योतिषस्य शास्त्रम्
न्यायदर्शनम्न्यायस्य दर्शनम्
पाणिनीकृतम्पाणिनिना कृतम्
पिङ्गलरचितेपिङ्गलेन रचिते

प्रश्न 4 – प्रकृति-प्रत्यय विभाग

पदउत्तर
आश्चर्यम्आ + चर् + यत् (व्युत्पत्ति की पुष्टि आवश्यक)
विज्ञानम्वि + ज्ञा + ल्युट्
रचितम्रच् + क्त
ज्ञातम्ज्ञा + क्त
प्रवर्तकःप्र + वृत् + णिच् + ण्वुल्

प्रश्न 5 – विपरीतार्थक पद

शब्दविलोम
उत्थायउपविश्य
शासकम्शासितम्
कर्तव्यम्अकर्तव्यम्
अस्तिनास्ति
उच्चैःनीचैः
चरःअचरः
गमनम्आगमनम्

9. लिखित अभ्यास – पृष्ठ 118–119

प्रश्न 1 – संस्कृतभाषया उत्तराणि लिखत

(क) संस्कृतशास्त्रैः सह केषां परिचयो भविष्यति?

उत्तरम् – संस्कृतशास्त्रैः सह छात्राणां परिचयो भविष्यति।

(ख) शास्त्रस्य लक्षणं गुरुणा किं प्रोक्तम्?

उत्तरम् – शास्त्रं मानवेभ्यः कर्तव्यम् अकर्तव्यं च बोधयति।

(ग) धर्मशास्त्रे शास्त्रस्य किं लक्षणं प्रोक्तम्?

उत्तरम् – प्रवृत्तिर्वा निवृत्तिर्वा नित्येन कृतेन वा। पुंसां येनोपदिश्येत तच्छास्त्रमभिधीयते।

(घ) वेदरूपं शास्त्रं किं भवति?

उत्तरम् – वेदरूपं शास्त्रम् अपौरुषेयं भवति।

(ङ) ऋष्यादिभिः प्रणीतं किं भवति?

उत्तरम् – ऋष्यादिभिः प्रणीतं शास्त्रं कृतकं भवति।

(च) कति वेदाङ्गानि सन्ति?

उत्तरम् – षड् वेदाङ्गानि सन्ति।

(छ) वेदाङ्गानां नामानि लिखत।

उत्तरम् – शिक्षा, कल्पः, व्याकरणम्, निरुक्तम्, छन्दः, ज्योतिषम् च।

(ज) केन कृतं व्याकरणं प्रसिद्धम्?

उत्तरम् – पाणिनिना कृतं व्याकरणं प्रसिद्धम्।

(झ) कपिलः कस्य दर्शनस्य प्रवर्तकः आसीत्?

उत्तरम् – कपिलः सांख्यदर्शनस्य प्रवर्तकः आसीत्।

प्रश्न 2 – रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्ननिर्माण

(क) भारतवर्षे शास्त्राणां महती परम्परा श्रूयते।

प्रश्नः – कुत्र शास्त्राणां महती परम्परा श्रूयते?

(ख) अद्य युष्माकं परिचयः संस्कृतशास्त्रैः भविष्यति।

प्रश्नः – केषां परिचयः संस्कृतशास्त्रैः भविष्यति?

(ग) शास्त्रं मानवेभ्यः कर्तव्यम् अकर्तव्यं च बोधयति।

प्रश्नः – किं मानवेभ्यः कर्तव्यम् अकर्तव्यं च बोधयति?

(घ) शास्त्रं नित्यं भवति वेदरूपम्।

प्रश्नः – कीदृशं शास्त्रं नित्यं भवति?

(ङ) ऋष्यादिप्रणीतम् कृतकं भवति।

प्रश्नः – कीदृशं शास्त्रं कृतकं भवति?

(च) जैमिनिना मीमांसादर्शनं प्रणीतम्।

प्रश्नः – केन मीमांसादर्शनं प्रणीतम्?

(छ) सर्वेषां शास्त्रविषयकाः व्याख्यातारः स्वतन्त्रग्रन्थकाराश्च वर्तन्ते।

प्रश्नः – केषां शास्त्रविषयकाः व्याख्यातारः स्वतन्त्रग्रन्थकाराश्च वर्तन्ते?

प्रश्न 3 – क्रियापदानां वाक्येषु प्रयोगः

भवति

विद्या मनुष्यस्य भूषणं भवति।

प्रणीतम्

जैमिनिना मीमांसादर्शनं प्रणीतम्।

प्रवर्तकः

कपिलः सांख्यदर्शनस्य प्रवर्तकः अस्ति।

वर्तन्ते

भारते अनेकानि शास्त्राणि वर्तन्ते।

वदति

शिक्षकः सत्यं वदति।

कथयामि

अहं शास्त्रस्य महत्त्वं कथयामि।

अस्ति

संस्कृतं प्राचीनं ज्ञानभाषारूपम् अस्ति।

प्रश्न 4 – रिक्तस्थान पूर्ति

दिए गए शब्द – प्रविशति, महती, सादरमुत्थाय, युष्माकम्, मानवेभ्यः, तत्रैव, नास्ति।

(क) भारतवर्षे शास्त्राणां ________ परम्परा श्रूयते।

उत्तरम् – महती।

(ख) शिक्षकः कक्षायां ________।

उत्तरम् – प्रविशति।

(ग) छात्राः ________ तस्याभिवादनं कुर्वन्ति।

उत्तरम् – सादरमुत्थाय।

(घ) अद्य ________ परिचयः संस्कृतशास्त्रैः भविष्यति।

उत्तरम् – युष्माकम्।

(ङ) शास्त्रं ________ कर्तव्यम् अकर्तव्यं च बोधयति।

उत्तरम् – मानवेभ्यः।

(च) ________ रसायनविज्ञानं भौतिकविज्ञानञ्च अन्तर्भूतं स्तः।

उत्तरम् – तत्रैव।

(छ) वस्तुतो ________ शास्त्रकाराणाम् अल्पा संख्या।

उत्तरम् – नास्ति।

प्रश्न 5 – रेखांकित पदों के वचन लिखें

पदवचन
सर्वेबहुवचन
युष्माकम्बहुवचन
कृतकंएकवचन
तस्याःएकवचन
व्याख्यातारःबहुवचन
शास्त्राणिबहुवचन
प्राचीनभारतेएकवचन

10. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

1. शास्त्र किसे कहते हैं?

जो मनुष्य को कर्तव्य और अकर्तव्य का ज्ञान कराता है, उसे शास्त्र कहते हैं।

2. शास्त्रकाराः पाठ किस रूप में लिखा गया है?

शिक्षक और विद्यार्थियों के संवाद के रूप में।

3. वेदों के कितने अंग हैं?

छह।

4. छह वेदाङ्गों के नाम क्या हैं?

शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष।

5. सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

कपिल।

6. योग दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

पतञ्जलि।

7. न्याय दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

गौतम।

8. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

कणाद।

9. मीमांसा दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

जैमिनि।

10. वेदान्त दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

बादरायण।

11. पाणिनि किस शास्त्र से संबंधित हैं?

व्याकरण।

12. यास्क किस शास्त्र से संबंधित हैं?

निरुक्त।

13. पिङ्गल किस शास्त्र से संबंधित हैं?

छन्दशास्त्र।

14. चरक और सुश्रुत किस शास्त्र से संबंधित हैं?

आयुर्वेद।

15. इस पाठ की मुख्य शिक्षा क्या है?

भारतीय शास्त्रों और ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को जानना और उसका सम्मान करना।

11. Important Objective Questions – 20 MCQ

सही उत्तर देखने के लिए View Answer पर क्लिक करें।

1. शास्त्रकाराः किस कक्षा का पाठ है?

A. 8
B. 9
C. 10
D. 12
View Answer

C. 10

2. शास्त्रकाराः किस पुस्तक में है?

A. पीयूषम्
B. पञ्चतन्त्रम्
C. हितोपदेश
D. अमरकोश
View Answer

A. पीयूषम्

3. शास्त्रकाराः पाठ की संख्या क्या है?

A. 11
B. 12
C. 13
D. 14
View Answer

D. 14

4. शास्त्र मनुष्य को किसका बोध कराता है?

A. केवल धन
B. कर्तव्य और अकर्तव्य
C. केवल युद्ध
D. केवल व्यापार
View Answer

B. कर्तव्य और अकर्तव्य

5. वेदों के कितने अंग हैं?

A. चार
B. पाँच
C. छह
D. आठ
View Answer

C. छह

6. शिक्षा वेदाङ्ग किस विषय से संबंधित है?

A. उच्चारण
B. युद्ध
C. व्यापार
D. राजनीति
View Answer

A. उच्चारण

7. व्याकरणशास्त्र के प्रसिद्ध आचार्य कौन हैं?

A. कपिल
B. पाणिनि
C. कणाद
D. जैमिनि
View Answer

B. पाणिनि

8. निरुक्तशास्त्र के प्रसिद्ध रचयिता कौन हैं?

A. यास्क
B. पतञ्जलि
C. गौतम
D. चरक
View Answer

A. यास्क

9. छन्दशास्त्र से किसका नाम जुड़ा है?

A. सुश्रुत
B. पिङ्गल
C. जैमिनि
D. कणाद
View Answer

B. पिङ्गल

10. सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

A. कपिल
B. गौतम
C. कणाद
D. बादरायण
View Answer

A. कपिल

11. योग दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

A. जैमिनि
B. पतञ्जलि
C. यास्क
D. पिङ्गल
View Answer

B. पतञ्जलि

12. न्याय दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

A. गौतम
B. कणाद
C. कपिल
D. पाणिनि
View Answer

A. गौतम

13. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

A. गौतम
B. कणाद
C. जैमिनि
D. पतञ्जलि
View Answer

B. कणाद

14. मीमांसा दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

A. कपिल
B. जैमिनि
C. गौतम
D. पिङ्गल
View Answer

B. जैमिनि

15. वेदान्त दर्शन के प्रवर्तक कौन हैं?

A. बादरायण
B. कणाद
C. यास्क
D. चरक
View Answer

A. बादरायण

16. चरकसंहिता किस शास्त्र का ग्रंथ है?

A. न्याय
B. आयुर्वेद
C. व्याकरण
D. छन्द
View Answer

B. आयुर्वेद

17. ‘वेदाङ्गानि’ का संधि-विच्छेद क्या है?

A. वेद + अङ्गानि
B. वेदा + ङ्गानि
C. वेदः + अङ्गानि
D. वेद + इङ्गानि
View Answer

A. वेद + अङ्गानि

18. ‘न्यायदर्शनम्’ में कौन-सा समास है?

A. द्वन्द्व
B. षष्ठी तत्पुरुष
C. द्विगु
D. अव्ययीभाव
View Answer

B. षष्ठी तत्पुरुष

19. ‘कर्तव्यम्’ का अर्थ क्या है?

A. न करने योग्य
B. करने योग्य
C. भूलने योग्य
D. छिपाने योग्य
View Answer

B. करने योग्य

20. शास्त्रकाराः पाठ का मुख्य विषय क्या है?

A. युद्धकथा
B. भारतीय शास्त्र और शास्त्रकार
C. वन्यजीवन
D. समुद्र यात्रा
View Answer

B. भारतीय शास्त्र और शास्त्रकार

12. Quick Revision – एक नजर में

विषयउत्तर
पाठ14 – शास्त्रकाराः
कक्षा10
पुस्तकपीयूषम्
पृष्ठ112–120
शास्त्र का कार्यकर्तव्य-अकर्तव्य का ज्ञान
वेदाङ्गछह
सांख्यकपिल
योगपतञ्जलि
न्यायगौतम
वैशेषिककणाद
मीमांसाजैमिनि
वेदान्तबादरायण
व्याकरणपाणिनि
निरुक्तयास्क
छन्दपिङ्गल
आयुर्वेदचरक, सुश्रुत

13. Frequently Asked Questions

शास्त्रकाराः किस कक्षा का पाठ है?

बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत का चौदहवाँ पाठ।

शास्त्रकाराः किस पुस्तक में है?

पीयूषम् पुस्तक में।

शास्त्र किसे कहते हैं?

जो मनुष्य को कर्तव्य और अकर्तव्य का बोध कराता है, उसे शास्त्र कहते हैं।

छह वेदाङ्ग कौन-कौन से हैं?

शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष।

छह प्रमुख दर्शनों के प्रवर्तक कौन हैं?

सांख्य – कपिल, योग – पतञ्जलि, न्याय – गौतम, वैशेषिक – कणाद, मीमांसा – जैमिनि और वेदान्त – बादरायण।

पाणिनि किस शास्त्र से संबंधित हैं?

व्याकरणशास्त्र से।

चरक और सुश्रुत किस विषय से संबंधित हैं?

आयुर्वेद से।

14. पाठ्यपुस्तक संदर्भ

पुस्तक: पीयूषम्

कक्षा: 10

अध्याय: 14 – शास्त्रकाराः

पृष्ठ: 112–120

मुख्य विषय: भारतीय शास्त्र, वेदाङ्ग, दर्शनशास्त्र और शास्त्रकार

Bihar Board Class 10 Books

कक्षा 10 की संस्कृत सहित सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकें पढ़ने और उपलब्ध PDF डाउनलोड करने के लिए हमारी Books Library देखें।

Bihar Board Class 10 Books देखें →
BSEB EXAM GUIDE

Class 10 Sanskrit Chapter 14 – शास्त्रकाराः

Hindi Translation | Word Meaning | Grammar | Question Answer | MCQ

www.bsebexamguide.com