Bihar Board Class 10 Sanskrit | पीयूषम्
पाठ 12 – कर्णस्य दानवीरता
Class 10 Sanskrit Chapter 12 Karnasya Danveerata Notes in Hindi
हिंदी अनुवाद | शब्दार्थ | व्याकरण | प्रश्न उत्तर | MCQ
विषय-सूची
1. पाठ परिचय 2. हिंदी सारांश 3. संस्कृत संवाद और हिंदी अर्थ 4. शब्दार्थ 5. संधि, प्रत्यय और समास 6. मौखिक अभ्यास 7. लिखित अभ्यास 8. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 9. 20 Objective Questions 10. Quick Revision 11. FAQs1. कर्णस्य दानवीरता – पाठ परिचय
कर्णस्य दानवीरता बिहार बोर्ड कक्षा 10 की संस्कृत पुस्तक पीयूषम् का बारहवाँ पाठ है। यह पाठ महाकवि भास के प्रसिद्ध नाटक कर्णभारम् के एक अंश पर आधारित है।
महाभारत युद्ध के प्रसंग में कर्ण अपनी महान दानशीलता का परिचय देते हैं। शक्र अर्थात् इन्द्र ब्राह्मण का वेश धारण करके उनके पास आते हैं और दान माँगते हैं।
कर्ण अनेक बहुमूल्य वस्तुएँ देने को तैयार होते हैं, लेकिन शक्र उन्हें स्वीकार नहीं करते। अंततः कर्ण अपने शरीर से जुड़े कवच और कुण्डल दान कर देते हैं।
पाठ – कर्णस्य दानवीरता
मूल नाटक – कर्णभारम्
नाटककार – महाकवि भास
मुख्य पात्र – कर्ण और शक्र (इन्द्र)
दान – कवच और कुण्डल
मुख्य शिक्षा – त्याग, दानशीलता और वचनपालन
2. कर्णस्य दानवीरता का हिंदी सारांश
महाभारत युद्ध में कर्ण पाण्डवों के विरुद्ध युद्ध कर रहे थे। कर्ण के शरीर पर जन्मजात कवच और कुण्डल थे। इनकी विशेषता थी कि इनके रहते कर्ण को मारना अत्यंत कठिन था।
अर्जुन की सहायता के उद्देश्य से इन्द्र ब्राह्मण का वेश धारण करके कर्ण के पास पहुँचे। कर्ण ने उनका स्वागत किया और इच्छानुसार दान माँगने को कहा।
शक्र ने पहले कर्ण के आशीर्वाद का उत्तर देते हुए दीर्घायु होने का आशीर्वाद देने से बचने का विचार किया। इसके बाद उन्होंने कर्ण की कीर्ति की प्रशंसा की।
कर्ण ने उन्हें हजार गायें देने की बात कही, लेकिन शक्र ने मना कर दिया। इसके बाद कर्ण ने घोड़े, हाथी, भूमि तथा अग्निष्टोम यज्ञ का फल तक देने का प्रस्ताव रखा। शक्र इनमें से कुछ भी स्वीकार नहीं करते।
कर्ण ने कहा कि वे अपना सिर भी दे सकते हैं। तब शक्र ने उनके शरीर से जुड़े कवच और कुण्डल माँगे। कर्ण ने बिना संकोच उन्हें देने का निर्णय लिया।
शक्र ने पहले मना करने का अभिनय किया, लेकिन कर्ण ने दान देने के अपने संकल्प को दृढ़ रखा। उन्होंने कवच और कुण्डल उतारकर दान कर दिए।
3. संस्कृत संवाद और सरल हिंदी अर्थ
प्रसंग 1 – शक्र का आगमन
प्रसंग 2 – कर्ण का स्वागत
प्रसंग 3 – आशीर्वाद
प्रसंग 4 – दान की महिमा
तस्मात्प्रजापालनमात्रबुद्ध्या हतेषु देहेषु गुणा धरन्ते॥
प्रसंग 5 – गायों का दान
प्रसंग 6 – घोड़े, हाथी और भूमि
प्रसंग 7 – यज्ञफल का दान
प्रसंग 8 – कर्ण का महान संकल्प
प्रसंग 9 – कवच और कुण्डल
प्रीत्या मया भगवते रुचितं यदि स्यात्॥
प्रसंग 10 – दान की अमरता
सुबद्धमूला निपतन्ति पादपाः।
जलं जलस्थानगतं च शुष्यति
हुतं च दत्तं च तथैव तिष्ठति॥
4. महत्वपूर्ण संस्कृत शब्दार्थ
| संस्कृत | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| निवर्त्य | हटाकर, लौटाकर |
| प्रीतः | प्रसन्न |
| महत्तराम् | और बड़ी |
| वक्ष्ये | कहूँगा |
| परिहृत्य | छोड़कर, हटाकर |
| इव | के समान |
| भुजङ्गः | सर्प |
| अर्थः | धन, प्रयोजन |
| प्रदास्ये | दान करूँगा |
| सालङ्कारम् | आभूषण सहित |
| वाजिनाम् | घोड़ों का |
| वारणानाम् | हाथियों का |
| कनकम् | सोना |
| अपर्याप्तम् | अपार, बहुत अधिक |
| पृथिवीम् | पृथ्वी को |
| अग्निष्टोमफलम् | अग्निष्टोम यज्ञ का फल |
| भेतव्यम् | डरना चाहिए |
| प्रसीदतु | प्रसन्न हों |
| कवचम् | कवच |
| कुण्डलाभ्याम् | दोनों कुण्डलों के साथ |
| दातव्यम् | देने योग्य |
| शल्यराज | राजा शल्य |
| क्षयम् | नाश |
| पादपाः | वृक्ष |
| शुष्यति | सूखता है |
| हुतम् | यज्ञ में अर्पित |
| दत्तम् | दिया हुआ |
5. संस्कृत व्याकरण
संधि-विच्छेद
| पद | संधि-विच्छेद |
|---|---|
| सूर्येणैव | सूर्येण + एव |
| प्रीतोऽस्मि | प्रीतः + अस्मि |
| नमस्करोमि | नमः + करोमि |
| दीर्घायुर्भविष्यति | दीर्घायुः + भविष्यति |
| तस्माद्भयं | तस्मात् + भयम् |
| एतदेव | एतत् + एव |
| सालङ्कारम् | स + अलङ्कारम् |
| नेच्छामि | न + इच्छामि |
| अन्यदपि | अन्यत् + अपि |
| कवचमेककुण्डले | कवचम् + एककुण्डले |
| गृह्णात्विति | गृह्णातु + इति |
| नास्ति | न + अस्ति |
प्रकृति-प्रत्यय
| पद | प्रकृति + प्रत्यय |
|---|---|
| उपगम्य | उप + गम् + ल्यप् |
| नमस्कृत्य | नमस् + कृ + ल्यप् |
| परिहृत्य | परि + हृ + ल्यप् |
| निवर्त्य | नि + वृत् + णिच् + ल्यप् |
| गृहीत्वा | ग्रह् + क्त्वा |
| जित्वा | जि + क्त्वा |
| कर्ण्यम् | कृ + ण्यत् (रूप की पाठ से पुष्टि करें) |
समास – उदाहरण
| समस्त पद | विग्रह | समास |
|---|---|---|
| दीर्घायुः | दीर्घम् आयुः यस्य सः | बहुव्रीहि |
| अग्निष्टोमफलम् | अग्निष्टोमस्य फलम् | षष्ठी तत्पुरुष |
| कवचकुण्डले | कवचं च कुण्डले च | द्वन्द्व |
| शल्यराजः | शल्यः एव राजा | कर्मधारय |
| जलस्थानम् | जलस्य स्थानम् | षष्ठी तत्पुरुष |
6. मौखिक अभ्यास
पुस्तक के पृष्ठ 99 में दिए गए मौखिक अभ्यास के प्रमुख पदों पर आधारित अध्ययन।
पदानां पर्यायवाचिपदानि
| पद | पर्याय |
|---|---|
| मुदा | हर्षेण |
| वारणः | गजः |
| भीतः | भयभीतः |
| पादपः | वृक्षः |
| कनकम् | सुवर्णम् |
पदानां विपरीतार्थकपदानि
| पद | विलोम |
|---|---|
| दीर्घम् | ह्रस्वम् |
| जेता | पराजितः |
| सरलम् | कठिनम् |
| यशः | अपयशः |
7. लिखित अभ्यास – प्रश्न उत्तर
यहाँ पुस्तक के पृष्ठ 99–102 में दिखाई देने वाले अभ्यासों के मुख्य प्रश्न और उनके समाधान दिए गए हैं।
अभ्यास 1 – एकपदेन उत्तराणि
क. ततः ब्राह्मणरूपेण कः प्रविशति?
उत्तरम् – शक्रः।
ख. कर्णः प्रथमं किं दातुं इच्छति स्म?
उत्तरम् – गोसहस्रम्।
ग. कानामभावात् का क्षयं गच्छति?
उत्तरम् – शिक्षा।
घ. कर्णः कस्य देहस्य राजा आसीत्?
उत्तरम् – अङ्गदेशस्य।
ङ. किं तदेव तिष्ठति?
उत्तरम् – हुतं दत्तं च।
अभ्यास 2 – लिंग और वचन
| पद | लिंग | वचन |
|---|---|---|
| शक्रः | पुल्लिंग | एकवचन |
| भिक्षाम् | स्त्रीलिंग | एकवचन |
| कवचम् | नपुंसकलिंग | एकवचन |
| कुण्डलाभ्याम् | नपुंसकलिंग | द्विवचन |
| पादपाः | पुल्लिंग | बहुवचन |
अभ्यास 3 – अव्यय पदों से रिक्तस्थान पूर्ति
क. ________ न वक्ष्ये मूढ इति मां परिभवति।
उत्तरम् – च।
ख. एवम् ________ अस्य कामः।
उत्तरम् – एव।
ग. सूर्यः ________ नित्यं ते यशः।
उत्तरम् – इव।
अभ्यास 4 – संधि-विच्छेद
क. प्रीतोऽस्मि
प्रीतः + अस्मि
ख. दीर्घायुर्भविष्यति
दीर्घायुः + भविष्यति
ग. किं + अग्निष्टोमफलम्
किमग्निष्टोमफलम्
घ. अन्यत् + अपि
अन्यदपि
ङ. न + इच्छामि
नेच्छामि
च. सः + अपि
सोऽपि
अभ्यास 5 – प्रकृति-प्रत्यय विभाग
| पद | प्रकृति + प्रत्यय |
|---|---|
| गृहीत्वा | ग्रह् + क्त्वा |
| नमस्कृत्य | नमस् + कृ + ल्यप् |
| निवर्त्य | नि + वृत् + णिच् + ल्यप् |
| परिहृत्य | परि + हृ + ल्यप् |
| जित्वा | जि + क्त्वा |
अभ्यास 6 – शब्दों का वाक्य में प्रयोग
क. कर्णः
कर्णः महान् दानवीरः आसीत्।
ख. भीतः
बालकः सिंहात् भीतः अस्ति।
ग. अमरः
दानवीरस्य यशः अमरम् अस्ति।
घ. परित्यजामि
अहं आलस्यं परित्यजामि।
ङ. वक्ष्यति
गुरुः सत्यं वक्ष्यति।
अभ्यास 7 – पुरुष और वचन
| क्रियारूप | पुरुष | वचन |
|---|---|---|
| पृच्छथः | मध्यम | द्विवचन |
| गृह्णीमः | उत्तम | बहुवचन |
| ददे | उत्तम | एकवचन |
| वक्ष्यसि | मध्यम | एकवचन |
| पश्यामः | उत्तम | बहुवचन |
अभ्यास 8 – एकवचन से बहुवचन
| एकवचन | बहुवचन |
|---|---|
| बालकः | बालकाः |
| कवचम् | कवचानि |
| पादपः | पादपाः |
| नदी | नद्यः |
| फलम् | फलानि |
अभ्यास 9 – एकवचन से बहुवचन में वाक्य परिवर्तन
क. अहं पठामि।
वयम् पठामः।
ख. सः क्रीडति।
ते क्रीडन्ति।
ग. बालकः पुस्तकं पठति।
बालकाः पुस्तकानि पठन्ति।
अभ्यास 10 – विलोम पद
| शब्द | विलोम |
|---|---|
| प्रकाशः | अन्धकारः |
| जयः | पराजयः |
| धनी | निर्धनः |
| पुण्यम् | पापम् |
| यशः | अपयशः |
अभ्यास 11 – पर्यायवाची शब्द
| शब्द | पर्याय |
|---|---|
| अर्कः | सूर्यः |
| प्रीतः | प्रसन्नः |
| अश्वः | हयः |
| संरक्षणम् | रक्षणम् |
| पृथिवी | भूमिः |
8. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
1. कर्णस्य दानवीरता पाठ किस नाटक से लिया गया है?
कर्णभारम् से।
2. कर्णभारम् के रचयिता कौन हैं?
महाकवि भास।
3. कर्ण के पास ब्राह्मण के वेश में कौन आया?
शक्र अर्थात् इन्द्र।
4. कर्ण के शरीर से कौन-सी वस्तुएँ जुड़ी थीं?
कवच और कुण्डल।
5. कर्ण ने सबसे पहले कौन-सा दान प्रस्तावित किया?
आभूषणों से सजी एक हजार गायें।
6. शक्र ने गायों का दान क्यों नहीं लिया?
क्योंकि उनका उद्देश्य कर्ण के कवच और कुण्डल प्राप्त करना था।
7. कर्ण ने गायों के बाद किन वस्तुओं का प्रस्ताव रखा?
घोड़े, हाथी, सोना, पृथ्वी और यज्ञफल।
8. शक्र ने कर्ण से अंततः क्या माँगा?
कवच और कुण्डल।
9. कर्ण को दानवीर क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने अपने प्राणों की रक्षा करने वाले कवच और कुण्डल भी दान कर दिए।
10. इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
दानशीलता, त्याग और वचनपालन महान गुण हैं।
9. Important Objective Questions – 20 MCQ
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1. कर्णस्य दानवीरता किस कक्षा का पाठ है?
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C. 10
2. यह पाठ किस पुस्तक में है?
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A. पीयूषम्
3. पाठ का मूल नाटक कौन-सा है?
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B. कर्णभारम्
4. कर्णभारम् के रचयिता कौन हैं?
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B. भास
5. शक्र किस देवता का नाम है?
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B. इन्द्र
6. शक्र किस वेश में आए?
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B. ब्राह्मण
7. कर्ण ने पहले कितनी गायें देने का प्रस्ताव रखा?
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C. एक हजार
8. ‘गोसहस्रम्’ का अर्थ क्या है?
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A. हजार गायें
9. ‘वाजिनाम्’ का अर्थ क्या है?
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B. घोड़ों का
10. ‘वारणानाम्’ का अर्थ क्या है?
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A. हाथियों का
11. ‘कनकम्’ का अर्थ क्या है?
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B. सोना
12. ‘पृथिवीम्’ का अर्थ क्या है?
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B. पृथ्वी को
13. शक्र ने अंततः क्या प्राप्त किया?
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B. कवच और कुण्डल
14. ‘प्रसीदतु’ का अर्थ क्या है?
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A. प्रसन्न हों
15. ‘प्रीतः’ का अर्थ क्या है?
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B. प्रसन्न
16. ‘नास्ति’ का संधि-विच्छेद क्या है?
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A. न + अस्ति
17. ‘जित्वा’ में कौन-सा प्रत्यय है?
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B. क्त्वा
18. ‘दीर्घायुः’ किस समास का उदाहरण है?
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B. बहुव्रीहि
19. कर्ण के शरीर से क्या जुड़ा था?
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B. कवच और कुण्डल
20. इस पाठ की मुख्य शिक्षा क्या है?
View Answer
B. दानशीलता और त्याग
10. Quick Revision
| विषय | उत्तर |
|---|---|
| पाठ | 12 – कर्णस्य दानवीरता |
| कक्षा | 10 |
| पुस्तक | पीयूषम् |
| मूल नाटक | कर्णभारम् |
| रचयिता | भास |
| मुख्य पात्र | कर्ण और शक्र |
| शक्र कौन थे? | इन्द्र |
| शक्र का वेश | ब्राह्मण |
| पहला दान प्रस्ताव | एक हजार गायें |
| अंतिम दान | कवच और कुण्डल |
| मुख्य शिक्षा | त्याग और दानशीलता |
11. Frequently Asked Questions
कर्णस्य दानवीरता किस कक्षा का पाठ है?
बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत का बारहवाँ पाठ।
कर्णस्य दानवीरता किस नाटक से लिया गया है?
महाकवि भास के कर्णभारम् नाटक से।
कर्ण के पास ब्राह्मण बनकर कौन आया था?
इन्द्र अर्थात् शक्र।
कर्ण ने शक्र को क्या दान दिया?
अपने शरीर से जुड़े कवच और कुण्डल।
कर्ण को दानवीर क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना अत्यंत मूल्यवान कवच और कुण्डल दान कर दिए।
कर्णस्य दानवीरता पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
दान, त्याग, धर्मपालन और वचन की दृढ़ता।
12. पाठ्यपुस्तक संदर्भ
पुस्तक: पीयूषम्
कक्षा: 10
अध्याय: 12 – कर्णस्य दानवीरता
पृष्ठ: 93–103
मूल नाटक: कर्णभारम्
रचयिता: महाकवि भास
यह सामग्री पाठ समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए तैयार की गई है।
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