परंपरा का मूल्यांकन
रामविलास शर्मा
अध्याय 7 • निबंध • गोधूलि भाग–2 • सम्पूर्ण नोट्स
पाठ परिचय
“परंपरा का मूल्यांकन” एक विचारप्रधान निबंध है। इसमें रामविलास शर्मा ने साहित्य, समाज, संस्कृति और परंपरा के संबंध पर विचार किया है।
लेखक का मुख्य विचार है कि परंपरा को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करना चाहिए कि वह पुरानी है। हमें विवेकपूर्वक यह समझना चाहिए कि अतीत से प्राप्त कौन-सी बातें वर्तमान समाज के विकास में सहायक हैं और किन बातों को बदलने की आवश्यकता है।
लेखक परिचय – रामविलास शर्मा
डॉ. रामविलास शर्मा
रामविलास शर्मा हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक, निबंधकार, विचारक और भाषावैज्ञानिक थे। हिंदी आलोचना के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
उनकी रचनाओं में साहित्य को समाज, इतिहास और संस्कृति से जोड़कर देखने की प्रवृत्ति मिलती है। उनकी भाषा तार्किक, तथ्यपूर्ण और स्पष्ट है।
उनकी प्रमुख कृतियों में निराला की साहित्य साधना, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना, प्रेमचंद और उनका युग, भाषा और समाज, महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिंदी नवजागरण आदि उल्लेखनीय हैं।
“निराला की साहित्य साधना” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
पाठ का सरल सारांश
मनुष्य और समाज का विकास शून्य से शुरू नहीं होता। प्रत्येक नई पीढ़ी को पिछली पीढ़ियों से भाषा, साहित्य, कला, विचार और सांस्कृतिक अनुभवों की एक विरासत मिलती है। इसी विरासत को व्यापक अर्थ में परंपरा कहा जा सकता है।
लेकिन परंपरा का अर्थ केवल पुराने विचारों को बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेना नहीं है। सही दृष्टिकोण यह है कि हम अतीत को समझें, उसका मूल्यांकन करें और उसमें मौजूद उपयोगी तथा प्रगतिशील तत्वों को अपनाएँ।
साहित्यिक परंपरा को समझना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कोई भी महान साहित्यकार अपने समय और समाज से पूरी तरह अलग होकर रचना नहीं करता। उसके पीछे पहले से मौजूद साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत भी काम करती है।
नई रचना और पुरानी परंपरा के बीच केवल विरोध का संबंध नहीं होता। नया साहित्य अतीत से बहुत कुछ ग्रहण करता है, लेकिन उसे अपने समय की आवश्यकताओं के अनुसार नया रूप भी देता है।
इसलिए परंपरा स्थिर और जड़ वस्तु नहीं है। समाज के बदलने के साथ उसकी समझ और उसका मूल्यांकन भी बदलता रहता है।
लेखक परंपरा के अंधानुकरण के पक्ष में नहीं हैं। वे विवेकपूर्ण दृष्टि अपनाने पर बल देते हैं। जो तत्व मानव और समाज के विकास में सहायक हों, उन्हें स्वीकार करना चाहिए।
साहित्य का काम केवल मनोरंजन करना भी नहीं है। साहित्य मनुष्य की चेतना को विकसित करता है, समाज की वास्तविकताओं को सामने लाता है और सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस प्रकार पाठ हमें सिखाता है कि अतीत का ज्ञान, वर्तमान की समझ और भविष्य की प्रगतिशील दृष्टि — तीनों के बीच संतुलन आवश्यक है।
परंपरा क्या है?
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचने वाले विचार, ज्ञान, साहित्य, कला, भाषा, रीति और सांस्कृतिक अनुभव परंपरा का हिस्सा होते हैं।
परंपरा का सही मूल्यांकन कैसे करें?
अतीत को जानें
सबसे पहले अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का ज्ञान होना चाहिए।
अंधानुकरण न करें
सिर्फ पुराना होने के कारण किसी विचार को सही नहीं मानना चाहिए।
विवेक से जाँचें
देखें कि कौन-सी परंपरा वर्तमान समाज के लिए उपयोगी है।
प्रगतिशील तत्व अपनाएँ
मानव और समाज के विकास में सहायक तत्वों को आगे बढ़ाएँ।
अनुपयोगी तत्व छोड़ें
जो बातें विकास में बाधा बनती हैं, उनका आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
नया निर्माण करें
अतीत के अनुभव और वर्तमान की जरूरत से भविष्य की दिशा तैयार करें।
परंपरा और आधुनिकता
साहित्य और समाज का संबंध
साहित्य समाज से जन्म लेता है
साहित्यकार अपने समय, समाज, संघर्ष और अनुभवों से प्रभावित होता है।
साहित्य समाज को प्रभावित करता है
रचनाएँ मनुष्य के विचारों और सामाजिक चेतना को बदलने की क्षमता रखती हैं।
साहित्य परंपरा से जुड़ता है
नई रचनाएँ पुरानी साहित्यिक विरासत से सीखती हैं और उसका नया विकास करती हैं।
साहित्य परिवर्तन का माध्यम है
प्रगतिशील साहित्य सामाजिक समस्याओं को सामने लाकर परिवर्तन की चेतना पैदा कर सकता है।
पाठ के मुख्य बिंदु
01 परंपरा का ज्ञान समाज और साहित्य के विकास के लिए आवश्यक है।
02 परंपरा का अर्थ पुराने विचारों का अंधानुकरण नहीं है।
03 अतीत की विरासत का विवेकपूर्ण मूल्यांकन करना चाहिए।
04 उपयोगी और प्रगतिशील तत्वों को आगे बढ़ाना चाहिए।
05 साहित्य का विकास पूर्व साहित्यिक परंपरा से जुड़ा होता है।
06 नया साहित्य पुरानी परंपरा को नए रूप में विकसित कर सकता है।
07 साहित्य और समाज का गहरा संबंध है।
08 सामाजिक परिवर्तन के साथ साहित्य में भी परिवर्तन आता है।
09 महान साहित्य मानव अनुभव की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को सुरक्षित रखता है।
10 सही मूल्यांकन के लिए इतिहास और वर्तमान दोनों की समझ आवश्यक है।
परंपरा के प्रति दो गलत दृष्टिकोण
अंध-स्वीकार
पुरानी हर चीज को केवल इसलिए अच्छा मान लेना क्योंकि वह हमारी परंपरा है। यह दृष्टि विवेकपूर्ण नहीं है।
पूर्ण अस्वीकार
पुरानी हर चीज को बेकार मानकर छोड़ देना भी उचित नहीं है। इससे अतीत के महत्वपूर्ण अनुभव और उपलब्धियाँ नष्ट हो सकती हैं।
पाठ का मुख्य संदेश
परंपरा को न तो आँख बंद करके स्वीकार करना चाहिए और न ही केवल पुराना कहकर अस्वीकार करना चाहिए।
अतीत की श्रेष्ठ उपलब्धियों को समझकर उन्हें वर्तमान जीवन और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करना ही सही दृष्टिकोण है।
साहित्य, संस्कृति और समाज निरंतर बदलते हैं। इसलिए परंपरा का मूल्यांकन भी विवेक, इतिहास-बोध और सामाजिक विकास की दृष्टि से होना चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. ‘परंपरा का मूल्यांकन’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: ‘परंपरा का मूल्यांकन’ के लेखक रामविलास शर्मा हैं।
प्रश्न 2. ‘परंपरा का मूल्यांकन’ किस विधा की रचना है?
उत्तर: यह निबंध विधा की रचना है।
प्रश्न 3. परंपरा से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक प्राप्त साहित्यिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विरासत को व्यापक अर्थ में परंपरा कहा जाता है।
प्रश्न 4. परंपरा का ज्ञान क्यों आवश्यक है?
उत्तर: परंपरा का ज्ञान हमें अतीत की उपलब्धियों और अनुभवों को समझने तथा वर्तमान और भविष्य के विकास की सही दिशा तय करने में सहायता देता है।
प्रश्न 5. क्या लेखक परंपरा के अंधानुकरण का समर्थन करते हैं?
उत्तर: नहीं। लेखक परंपरा के विवेकपूर्ण और आलोचनात्मक मूल्यांकन पर बल देते हैं।
प्रश्न 6. साहित्य और समाज का क्या संबंध है?
उत्तर: साहित्य समाज से प्रभावित होता है और अपने विचारों तथा रचनात्मक चेतना के माध्यम से समाज को भी प्रभावित करता है।
प्रश्न 7. नई रचना का परंपरा से क्या संबंध है?
उत्तर: नई रचना पूर्व साहित्यिक अनुभवों से सीखती है, लेकिन उन्हें अपने समय की आवश्यकताओं के अनुसार नए रूप में विकसित करती है।
प्रश्न 8. परंपरा के मूल्यांकन में विवेक का क्या महत्व है?
उत्तर: विवेक हमें परंपरा के उपयोगी और अनुपयोगी तत्वों में अंतर करने में सहायता करता है।
प्रश्न 9. रामविलास शर्मा को किस पुस्तक पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
उत्तर: उन्हें ‘निराला की साहित्य साधना’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ।
प्रश्न 10. पाठ का केंद्रीय संदेश क्या है?
उत्तर: पाठ का केंद्रीय संदेश है कि अतीत की विरासत को विवेकपूर्ण ढंग से समझकर उसके प्रगतिशील तत्वों को वर्तमान और भविष्य के विकास में उपयोग करना चाहिए।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. ‘परंपरा का मूल्यांकन’ निबंध का सारांश लिखिए।
उत्तर: रामविलास शर्मा इस निबंध में परंपरा, साहित्य और समाज के संबंध को समझाते हैं। प्रत्येक नई पीढ़ी को पिछली पीढ़ियों से साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत प्राप्त होती है। लेकिन इस विरासत को बिना विचार किए स्वीकार करना उचित नहीं है।
परंपरा का सही मूल्यांकन करने के लिए अतीत का ज्ञान और वर्तमान समाज की समझ आवश्यक है। परंपरा के उन तत्वों को ग्रहण करना चाहिए जो मानव और समाज के विकास में सहायक हों।
साहित्य भी सामाजिक विकास से जुड़ा है। नया साहित्य पुरानी साहित्यिक परंपरा से सीखते हुए अपने समय की आवश्यकताओं के अनुसार नया रूप ग्रहण करता है। इस प्रकार निबंध अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच विवेकपूर्ण संबंध स्थापित करने की शिक्षा देता है।
प्रश्न 2. परंपरा का ज्ञान किन लोगों के लिए सबसे अधिक आवश्यक है?
उत्तर: परंपरा का ज्ञान उन लोगों के लिए विशेष रूप से आवश्यक है जो समाज, साहित्य और संस्कृति में नया निर्माण करना चाहते हैं। बिना अतीत को समझे नए विकास की दिशा को पूरी तरह समझना कठिन हो जाता है।
लेकिन परंपरा का ज्ञान केवल पुराने विचारों की नकल करने के लिए नहीं होना चाहिए। उसका उद्देश्य पूर्व अनुभवों से सीखना, उपयोगी तत्वों को पहचानना और वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार उन्हें आगे विकसित करना है।
प्रश्न 3. परंपरा और आधुनिकता के संबंध को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: परंपरा अतीत से प्राप्त अनुभव और सांस्कृतिक विरासत है, जबकि आधुनिकता वर्तमान समय की आवश्यकताओं और नई दृष्टि से जुड़ी होती है। दोनों को पूर्णतः विरोधी मानना उचित नहीं है।
सच्ची आधुनिकता अतीत की उपयोगी उपलब्धियों को समझती है और उन्हें नए समय के अनुरूप विकसित करती है। इसलिए स्वस्थ विकास के लिए परंपरा का ज्ञान और आधुनिक विवेक दोनों आवश्यक हैं।
प्रश्न 4. साहित्य के विकास में परंपरा की क्या भूमिका है?
उत्तर: कोई भी साहित्यिक रचना पूरी तरह शून्य से पैदा नहीं होती। लेखक के सामने भाषा, शैली, विचार और साहित्य की पहले से विकसित विरासत मौजूद रहती है। वह उससे सीखता है और अपने समय के अनुभवों के अनुसार उसे नया रूप देता है।
इस प्रकार साहित्यिक परंपरा नई रचनाओं को आधार देती है, जबकि नई रचनाएँ उस परंपरा का विकास और पुनर्मूल्यांकन करती हैं। इसी प्रक्रिया से साहित्य आगे बढ़ता है।
प्रश्न 5. लेखक परंपरा के विवेकपूर्ण मूल्यांकन पर क्यों बल देते हैं?
उत्तर: हर पुरानी मान्यता वर्तमान समय के लिए उपयोगी हो, यह आवश्यक नहीं है। इसी प्रकार हर पुरानी उपलब्धि को केवल पुरानी होने के कारण त्याग देना भी उचित नहीं है।
इसलिए लेखक विवेकपूर्ण मूल्यांकन पर बल देते हैं। इससे हम परंपरा में मौजूद मानवतावादी और प्रगतिशील तत्वों को ग्रहण कर सकते हैं तथा विकास में बाधक तत्वों से मुक्त हो सकते हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न – MCQ
1. ‘परंपरा का मूल्यांकन’ के लेखक कौन हैं?
A. अमरकांत
B. रामविलास शर्मा
C. गुणाकर मुले
D. अशोक वाजपेयी
2. ‘परंपरा का मूल्यांकन’ किस विधा की रचना है?
A. कहानी
B. निबंध
C. कविता
D. नाटक
3. यह गद्यखंड का कौन-सा अध्याय है?
A. छठा
B. सातवाँ
C. आठवाँ
D. नौवाँ
4. रामविलास शर्मा मुख्य रूप से किस रूप में प्रसिद्ध हैं?
A. आलोचक
B. चित्रकार
C. वैज्ञानिक
D. संगीतकार
5. परंपरा के प्रति सही दृष्टिकोण क्या है?
A. अंधानुकरण
B. पूर्ण अस्वीकार
C. विवेकपूर्ण मूल्यांकन
D. उपेक्षा
6. परंपरा किससे संबंधित है?
A. केवल वर्तमान से
B. सांस्कृतिक विरासत से
C. केवल भविष्य से
D. केवल विज्ञान से
7. साहित्य किससे जुड़ा हुआ है?
A. समाज से
B. केवल मनोरंजन से
C. केवल लेखक से
D. किसी से नहीं
8. ‘निराला की साहित्य साधना’ किसकी रचना है?
A. रामविलास शर्मा
B. अमरकांत
C. बिरजू महाराज
D. दिनकर
9. परंपरा के मूल्यांकन के लिए क्या आवश्यक है?
A. विवेक
B. अंधविश्वास
C. भय
D. आलस्य
10. नई रचना किससे सीख सकती है?
A. साहित्यिक परंपरा से
B. किसी से नहीं
C. केवल बाजार से
D. केवल तकनीक से
11. साहित्य समाज में क्या विकसित कर सकता है?
A. चेतना
B. अज्ञान
C. निष्क्रियता
D. केवल मनोरंजन
12. लेखक किस प्रकार की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात करते हैं?
A. उपयोगी और प्रगतिशील
B. हर पुरानी बात
C. केवल रूढ़ियाँ
D. किसी को नहीं
13. परंपरा और आधुनिकता का उचित संबंध क्या है?
A. पूर्ण विरोध
B. विवेकपूर्ण समन्वय
C. कोई संबंध नहीं
D. केवल परंपरा
14. रामविलास शर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस कृति के लिए मिला?
A. निराला की साहित्य साधना
B. बहादुर
C. नागरी लिपि
D. मछली
15. अध्याय 7 के बाद कौन-सा गद्य अध्याय है?
A. बहादुर
B. जित-जित मैं निरखत हूँ
C. मछली
D. नागरी लिपि
एक नजर में पूरा अध्याय
लेखक
रामविलास शर्मा
विधा
निबंध
मुख्य विषय
परंपरा का मूल्यांकन
सही दृष्टि
विवेकपूर्ण मूल्यांकन
परंपरा
अतीत की विरासत
मुख्य संबंध
साहित्य और समाज
लक्ष्य
सामाजिक विकास
संदेश
अतीत से सीखकर आगे बढ़ना
परीक्षा के लिए याद रखें
उत्तर में यह जरूर लिखें कि लेखक परंपरा के अंधानुकरण के समर्थक नहीं हैं। वे उसका विवेकपूर्ण मूल्यांकन करने की बात करते हैं।
दीर्घ उत्तर में परंपरा, साहित्य, समाज, इतिहास-बोध, प्रगतिशील तत्व और आधुनिकता को जोड़कर लिखना उपयोगी रहेगा।

