विष के दाँत
नलिन विलोचन शर्मा
अध्याय 2 • कहानी • गोधूलि भाग–2 • सम्पूर्ण नोट्स
पाठ परिचय
“विष के दाँत” एक सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक कहानी है। इसके माध्यम से लेखक समाज में मौजूद आर्थिक और वर्गीय असमानता, बच्चों के पालन-पोषण में भेदभाव तथा संपन्न वर्ग के अहंकार को सामने लाते हैं।
कहानी के केंद्र में मदन और काशू (खोखा) हैं। दोनों बच्चों के व्यवहार और उनके परिवारों की प्रतिक्रियाओं के माध्यम से लेखक सामाजिक व्यवस्था की विडंबनाओं पर व्यंग्य करते हैं।
लेखक परिचय – नलिन विलोचन शर्मा
नलिन विलोचन शर्मा
नलिन विलोचन शर्मा हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण साहित्यकार, आलोचक, कवि और कहानीकार थे। उनका संबंध बिहार की साहित्यिक परंपरा से रहा।
उनकी रचनाओं में आधुनिक दृष्टि, प्रयोगशीलता, मनोवैज्ञानिक समझ और सामाजिक यथार्थ का प्रभाव दिखाई देता है।
हिंदी कविता में प्रयोगशील साहित्यिक प्रवृत्तियों के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
प्रमुख पात्र
मदन
गरीब परिवार का बालक और कहानी का केंद्रीय पात्र। वह स्वाभिमानी, साहसी और अन्याय का प्रतिरोध करने वाला बालक है।
काशू / खोखा
सेन साहब का पुत्र। अत्यधिक लाड़-प्यार ने उसके व्यवहार को उद्दंड बना दिया है।
सेन साहब
संपन्न वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला पात्र। अपने पुत्र की गलतियों को नजरअंदाज करता है लेकिन गरीब बच्चे के व्यवहार पर कठोर टिप्पणी करता है।
गिरधर
मदन का पिता। वह आर्थिक रूप से कमजोर है और सेन साहब के यहाँ चालक के रूप में काम करता है।
कहानी का सरल सारांश
कहानी में सेन साहब एक संपन्न व्यक्ति हैं। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी है और वे अपने सामाजिक स्तर तथा संपत्ति को लेकर गर्व का भाव रखते हैं। उनका बेटा काशू, जिसे खोखा भी कहा जाता है, अत्यधिक लाड़-प्यार में पला है।
सेन साहब अपने बेटे की शरारतों को उसकी विशेषता समझते हैं। वहीं दूसरी ओर गरीब परिवार के बच्चों के व्यवहार को लेकर उनका दृष्टिकोण काफी अलग दिखाई देता है।
गिरधर सेन साहब का चालक है और मदन उसका पुत्र है। मदन साधारण आर्थिक परिस्थिति में पलने वाला बालक है। उसके प्रति पिता का व्यवहार अनुशासनपूर्ण और कई बार कठोर रहता है।
कहानी में मदन और काशू के बीच बच्चों के खेल के दौरान विवाद होता है। Official अभ्यास के अनुसार यह झगड़ा लट्टू नचाने को लेकर होता है। बात बढ़ने पर मदन काशू का सामना करता है और उसके दो दाँत टूट जाते हैं। ये तथ्य Bihar e-LOTS के स्व-मूल्यांकन प्रश्नों में भी दिए गए हैं।
यह घटना कहानी में निर्णायक मोड़ बनती है। अब वही व्यवहार, जिसे अमीर घर के बच्चे की शरारत के रूप में स्वीकार किया जाता था, गरीब बच्चे द्वारा किए जाने पर अपराध जैसा माना जाता है।
मदन का प्रतिरोध केवल दो बच्चों की लड़ाई नहीं रह जाता। यह कहानी में उस सामाजिक मानसिकता के विरुद्ध प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया बन जाता है जिसमें शक्तिशाली और संपन्न व्यक्ति अपने लिए अलग और कमजोर व्यक्ति के लिए अलग मानदंड रखते हैं।
गिरधर अपने बेटे को सामान्यतः अनुशासन में रखने के लिए डाँटता-मारता है, लेकिन इस घटना में उसका दृष्टिकोण बदलता दिखाई देता है। उसे अपने बेटे में अन्याय के सामने खड़े होने का साहस दिखाई देता है।
इस प्रकार “विष के दाँत” समाज की वर्गीय विषमता, अमीर वर्ग के अहंकार, पक्षपातपूर्ण व्यवहार और कमजोर वर्ग में उभरते स्वाभिमान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।
शीर्षक ‘विष के दाँत’ का अर्थ
कहानी का शीर्षक प्रतीकात्मक है। यहाँ “विष” से आशय केवल शाब्दिक जहर से नहीं, बल्कि समाज में मौजूद अहंकार, वर्गीय भेदभाव, अन्याय और शोषण जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से है।
“दाँत” उस शक्ति का प्रतीक माने जा सकते हैं जिसके सहारे यह विषैली मानसिकता दूसरों को चोट पहुँचाती है।
मदन द्वारा काशू के दाँत तोड़ने की घटना को इसी व्यापक अर्थ में देखा जा सकता है। यह अन्यायपूर्ण अहंकार के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक बन जाती है।
दाँत टूटना = अन्यायपूर्ण शक्ति के विरुद्ध प्रतिरोध
कहानी के मुख्य बिंदु
01 कहानी सामाजिक वर्गभेद और मानसिकता को उजागर करती है।
02 सेन साहब संपन्न वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
03 काशू को खोखा भी कहा गया है।
04 मदन गिरधर का पुत्र है।
05 गिरधर सेन साहब का चालक है।
06 काशू अत्यधिक लाड़-प्यार के कारण उद्दंड हो गया है।
07 मदन स्वाभिमानी और साहसी बालक है।
08 मदन और काशू का विवाद लट्टू नचाने को लेकर होता है।
09 झगड़े में मदन काशू के दो दाँत तोड़ देता है।
10 कहानी अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग सामाजिक मानदंडों पर व्यंग्य करती है।
कहानी में वर्गीय अंतर्विरोध
मदन का चरित्र-चित्रण
स्वाभिमानी: मदन अपमान और अन्याय को चुपचाप स्वीकार नहीं करता।
साहसी: वह संपन्न परिवार के बच्चे से भी डरकर पीछे नहीं हटता।
सहज बालक: उसके व्यवहार में बनावटीपन नहीं है।
प्रतिरोधी: अन्याय होने पर वह उसका सामना करता है।
कहानी का केंद्रीय पात्र: कहानी का प्रमुख संघर्ष उसी के माध्यम से सामने आता है।
काशू का चरित्र-चित्रण
लाड़-प्यार में पला: परिवार उसके व्यवहार को बार-बार अनदेखा करता है।
उद्दंड: अत्यधिक छूट के कारण उसका व्यवहार अनुशासित नहीं है।
अहंकारी वातावरण का प्रभाव: उसके व्यवहार में परिवार की वर्गीय मानसिकता की छाप दिखाई देती है।
प्रतीकात्मक पात्र: वह ऐसे विशेषाधिकार प्राप्त बच्चे का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी गलतियों को परिवार सामान्य मान लेता है।
सेन साहब का चरित्र-चित्रण
संपन्न: वे आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग से आते हैं।
वर्गीय अहंकार: गरीब और अमीर बच्चों के लिए उनका दृष्टिकोण समान नहीं है।
पुत्र-मोह: अपने पुत्र की कमियों को स्वीकार करने में हिचकते हैं।
दोहरे मानदंड: जिस व्यवहार को अपने बेटे के लिए शरारत मानते हैं, वही गरीब बच्चे में उन्हें गंभीर दोष दिखाई देता है।
गिरधर का चरित्र-चित्रण
मेहनतकश: वह चालक का काम करके परिवार चलाता है।
अनुशासनप्रिय: मदन की गलतियों पर उसे कठोरता से रोकता है।
आर्थिक रूप से निर्भर: उसकी स्थिति सेन साहब के मुकाबले कमजोर है।
पिता का स्नेह: निर्णायक घटना के बाद बेटे के प्रति उसके भाव में गर्व और अपनापन दिखाई देता है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ
लघु उत्तरीय प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. ‘विष के दाँत’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: ‘विष के दाँत’ के लेखक नलिन विलोचन शर्मा हैं।
प्रश्न 2. ‘विष के दाँत’ किस विधा की रचना है?
उत्तर: ‘विष के दाँत’ कहानी विधा की रचना है।
प्रश्न 3. मदन किसका पुत्र था?
उत्तर: मदन गिरधर का पुत्र था। गिरधर सेन साहब के यहाँ चालक था।
प्रश्न 4. खोखा का दूसरा नाम क्या था?
उत्तर: खोखा का दूसरा नाम काशू था।
प्रश्न 5. काशू और मदन के बीच झगड़ा किस बात पर हुआ?
उत्तर: काशू और मदन के बीच लट्टू नचाने को लेकर झगड़ा हुआ।
प्रश्न 6. मदन ने काशू के कितने दाँत तोड़े?
उत्तर: मदन ने काशू के दो दाँत तोड़ दिए।
प्रश्न 7. ‘अखबारनवीस’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: अखबारनवीस का अर्थ पत्रकार होता है।
प्रश्न 8. कहानी किस सामाजिक समस्या को उजागर करती है?
उत्तर: कहानी अमीर-गरीब के वर्गभेद, सामाजिक असमानता, पक्षपात और दोहरे मानदंडों को उजागर करती है।
प्रश्न 9. गिरधर मदन को अपनी छाती से क्यों लगा लेता है?
उत्तर: मदन द्वारा काशू के अन्यायपूर्ण व्यवहार का साहसपूर्वक सामना करने पर गिरधर को अपने बेटे के स्वाभिमान और साहस का अनुभव होता है। इसलिए सामान्यतः उसे डाँटने वाला गिरधर इस अवसर पर उसे स्नेह से अपनी छाती से लगा लेता है।
प्रश्न 10. कहानी का नायक किसे माना जा सकता है?
उत्तर: मदन को कहानी का नायक माना जा सकता है क्योंकि मुख्य संघर्ष और कहानी का निर्णायक प्रतिरोध उसी के माध्यम से सामने आता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर
प्रश्न 1. ‘विष के दाँत’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: ‘विष के दाँत’ नलिन विलोचन शर्मा की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कहानी है। कहानी में एक ओर संपन्न सेन साहब और उनका लाड़-प्यार में पला पुत्र काशू है, तो दूसरी ओर उनका चालक गिरधर और उसका पुत्र मदन है।
सेन साहब अपने पुत्र की उद्दंडता को सामान्य बाल-सुलभ शरारत मानते हैं, जबकि गरीब बच्चों के प्रति उनका दृष्टिकोण कठोर है। मदन और काशू के बीच लट्टू नचाने को लेकर विवाद होता है। संघर्ष में मदन काशू के दो दाँत तोड़ देता है।
इस घटना के माध्यम से कहानीकार अमीर-गरीब के लिए समाज में प्रचलित दोहरे मानदंडों को सामने लाता है। मदन का प्रतिरोध गरीब और कमजोर वर्ग के स्वाभिमान का प्रतीक बन जाता है। कहानी सामाजिक विषमता और अहंकार पर तीखा व्यंग्य करती है।
प्रश्न 2. मदन का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर: मदन कहानी का केंद्रीय और प्रभावशाली बाल पात्र है। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आता है, लेकिन उसमें आत्मसम्मान की कमी नहीं है। वह साहसी और स्वाभिमानी है।
काशू से विवाद होने पर वह केवल उसकी संपन्न पारिवारिक स्थिति से डरकर पीछे नहीं हटता। उसका व्यवहार अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध का रूप ले लेता है। इसी कारण मदन कहानी में कमजोर वर्ग की उभरती चेतना और आत्मसम्मान का प्रतीक बन जाता है।
प्रश्न 3. ‘विष के दाँत’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ‘विष के दाँत’ शीर्षक कहानी के मूल संदेश से गहराई से जुड़ा है। यहाँ विष समाज में व्याप्त अहंकार, वर्गभेद, अन्याय और पक्षपात का प्रतीक है। इस विष को प्रभावशाली बनाने वाली सामाजिक शक्ति को प्रतीकात्मक रूप में ‘दाँत’ कहा जा सकता है।
मदन द्वारा काशू के दाँत तोड़ना कहानी में केवल शारीरिक घटना नहीं रह जाती। यह कमजोर वर्ग द्वारा अन्यायपूर्ण अहंकार के प्रतिरोध का प्रतीक बन जाती है। इसी कारण ‘विष के दाँत’ शीर्षक प्रभावशाली और सार्थक है।
प्रश्न 4. कहानी में अमीर और गरीब वर्ग के अंतर्विरोध को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कहानी में सेन साहब का परिवार संपन्न वर्ग तथा गिरधर का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। सेन साहब अपने पुत्र की शरारतों को सहजता से स्वीकार करते हैं, लेकिन गरीब बच्चे के व्यवहार पर कठोर निर्णय देते हैं।
इसके विपरीत मदन को बचपन से कठोर अनुशासन मिलता है। काशू और मदन के संघर्ष के माध्यम से लेखक दिखाते हैं कि सामाजिक और आर्थिक शक्ति अक्सर न्याय के मानदंडों को भी प्रभावित करती है। यही कहानी का प्रमुख वर्गीय अंतर्विरोध है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न – MCQ
1. ‘विष के दाँत’ के लेखक कौन हैं?
A. अमरकांत
B. नलिन विलोचन शर्मा
C. रामविलास शर्मा
D. गुणाकर मुले
2. ‘विष के दाँत’ किस विधा की रचना है?
A. निबंध
B. भाषण
C. कहानी
D. संस्मरण
3. ‘विष के दाँत’ कैसी कहानी मानी जाती है?
A. पौराणिक
B. मनोवैज्ञानिक
C. धार्मिक
D. ऐतिहासिक
4. मदन किसका पुत्र था?
A. सेन साहब
B. गिरधर
C. काशू
D. मुखर्जी साहब
5. खोखा का दूसरा नाम क्या था?
A. मदन
B. गिरधर
C. काशू
D. आलो
6. मदन और काशू के बीच किस खेल को लेकर झगड़ा हुआ?
A. फुटबॉल
B. गुल्ली-डंडा
C. लट्टू नचाने को लेकर
D. चोर-सिपाही
7. मदन ने काशू के कितने दाँत तोड़े?
A. एक
B. दो
C. चार
D. छह
8. ‘अखबारनवीस’ का अर्थ है —
A. संपादक
B. पत्रकार
C. अखबार बेचने वाला
D. मुद्रक
9. ‘विष के दाँत’ का नायक कौन है?
A. सेन साहब
B. गिरधर
C. काशू
D. मदन
10. नलिन विलोचन शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
A. लखनऊ
B. पटना
C. वाराणसी
D. मध्यप्रदेश
11. कहानी मुख्य रूप से किस सामाजिक समस्या पर प्रहार करती है?
A. भाषा विवाद
B. वर्गीय विषमता
C. कृषि समस्या
D. धार्मिक यात्रा
12. मदन किस गुण का प्रतीक बनकर सामने आता है?
A. भय
B. आलस्य
C. स्वाभिमान और प्रतिरोध
D. लोभ
13. काशू किस प्रकार के पालन-पोषण का उदाहरण है?
A. कठोर अनुशासन
B. अत्यधिक लाड़-प्यार
C. पूर्ण उपेक्षा
D. गुरुकुल शिक्षा
14. गिरधर का पेशा क्या था?
A. शिक्षक
B. पत्रकार
C. चालक
D. चित्रकार
15. कहानी में ‘विष’ किसका प्रतीक माना जा सकता है?
A. वर्षा
B. सामाजिक अहंकार और अन्याय
C. शिक्षा
D. खेल
एक नजर में पूरा अध्याय
लेखक
नलिन विलोचन शर्मा
विधा
कहानी
नायक
मदन
खोखा
काशू
मदन के पिता
गिरधर
मुख्य संघर्ष
मदन बनाम काशू
मुख्य समस्या
वर्गीय विषमता
मुख्य संदेश
अन्याय के विरुद्ध स्वाभिमान
परीक्षा के लिए याद रखें
इस कहानी में मदन और काशू की लड़ाई को केवल बच्चों का झगड़ा समझकर उत्तर न लिखें। इसके पीछे लेखक ने अमीर-गरीब का वर्गभेद, दोहरे सामाजिक मानदंड, अत्यधिक लाड़-प्यार और गरीब वर्ग के स्वाभिमान को दिखाया है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में मदन, काशू, सेन साहब और गिरधर की भूमिका को कहानी के सामाजिक संदेश से जोड़कर लिखना उत्तर को बेहतर बनाता है।

