Class 10 Economics Chapter 2 राज एवं राष्ट्र की आय Notes

Class 10 Economics Chapter 2 राज एवं राष्ट्र की आय Notes
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राज एवं राष्ट्र की आय

Chapter 2 – सम्पूर्ण नोट्स

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अध्याय परिचय

किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को समझने में उसकी आय का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसी प्रकार किसी राज्य या देश की आर्थिक स्थिति और विकास को समझने के लिए उसकी आय से संबंधित आँकड़ों का अध्ययन किया जाता है।

इस अध्याय में हम राज्य की आय, राष्ट्रीय आय, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), प्रति व्यक्ति आय, राष्ट्रीय आय के विभिन्न स्रोत तथा राष्ट्रीय आय की गणना की प्रमुख विधियों को आसान भाषा में समझेंगे।

अध्याय का मुख्य उद्देश्य:
राज्य एवं राष्ट्र की आय को समझना तथा यह जानना कि किसी देश की राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय की गणना किस प्रकार की जाती है।

इस अध्याय में पढ़ेंगे

1. आय का अर्थ

किसी व्यक्ति या संस्था को उत्पादन, श्रम, व्यवसाय, संपत्ति या अन्य आर्थिक गतिविधियों के बदले प्राप्त होने वाली आर्थिक प्राप्ति को सामान्य रूप से आय कहा जाता है।

आय के कुछ उदाहरण

मजदूरी

श्रम करने के बदले प्राप्त आय।

वेतन

नौकरी या सेवा के बदले मिलने वाली आय।

किराया

भूमि या संपत्ति उपलब्ध कराने से प्राप्त आय।

ब्याज

पूँजी या धन उपलब्ध कराने पर प्राप्त आय।

लाभ

व्यवसाय या उद्यम से प्राप्त आय।

मिश्रित आय

स्वरोजगार जैसी गतिविधियों से प्राप्त आय।

2. राज्य की आय

जिस प्रकार पूरे देश की आर्थिक गतिविधियों से संबंधित आय का अध्ययन किया जाता है, उसी प्रकार किसी राज्य की सीमा के भीतर होने वाली आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन से संबंधित आय का भी अध्ययन किया जाता है।

सरल शब्दों में, किसी राज्य में एक निश्चित अवधि के दौरान होने वाले उत्पादन और उससे उत्पन्न आय को राज्य की आय से संबंधित आँकड़ों द्वारा समझा जाता है।

राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवाओं का योगदान हो सकता है।

3. राष्ट्रीय आय

एक निश्चित अवधि में देश की अर्थव्यवस्था में उत्पन्न आय को समग्र रूप में मापने की अवधारणा को राष्ट्रीय आय से जोड़ा जाता है।

राष्ट्रीय आय किसी देश की आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से अर्थव्यवस्था के आकार, उत्पादन तथा आय में होने वाले परिवर्तन को समझने में सहायता मिलती है।

ध्यान रखें:
राष्ट्रीय आय की गणना में एक ही उत्पादन के मूल्य को बार-बार जोड़ने से बचना जरूरी होता है। इसलिए अंतिम वस्तुओं और सेवाओं अथवा मूल्य-वर्धन का ध्यान रखा जाता है।

4. अंतिम वस्तु और मध्यवर्ती वस्तु

अंतिम वस्तु

वह वस्तु जो अंतिम उपयोग के लिए तैयार हो और आगे उत्पादन में कच्चे माल के रूप में उपयोग न की जानी हो, अंतिम वस्तु कहलाती है।

मध्यवर्ती वस्तु

वह वस्तु जिसका उपयोग किसी अन्य वस्तु के उत्पादन में किया जाता है, मध्यवर्ती वस्तु कहलाती है।

उदाहरण:
गेहूँ से आटा और आटे से रोटी बनाई जाती है। यदि हर चरण के पूरे मूल्य को अलग-अलग जोड़ दिया जाए, तो एक ही मूल्य का कुछ हिस्सा बार-बार गिना जा सकता है। इसे दोहरी गणना की समस्या कहा जाता है।

5. सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product – GDP) कहा जाता है।
GDP = देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य

GDP का उपयोग किसी अर्थव्यवस्था के उत्पादन के आकार और समय के साथ उसमें होने वाले परिवर्तन को समझने के लिए किया जाता है।

GDP का पूरा नाम:
Gross Domestic Product
हिंदी: सकल घरेलू उत्पाद

6. प्रति व्यक्ति आय

देश की कुल आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त औसत आय को प्रति व्यक्ति आय कहा जाता है।
प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या
उदाहरण:
यदि किसी देश की कुल आय ₹20,00,000 है और उसकी जनसंख्या 200 है, तो—

प्रति व्यक्ति आय = 20,00,000 ÷ 200
= ₹10,000
याद रखें: प्रति व्यक्ति आय एक औसत आय है। इससे यह आवश्यक रूप से नहीं पता चलता कि हर व्यक्ति की वास्तविक आय समान है।

7. राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में अंतर

आधार राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति आय
अर्थ देश की समग्र आय से संबंधित माप प्रति व्यक्ति औसत आय
संबंध पूरी अर्थव्यवस्था से जनसंख्या के औसत से
गणना राष्ट्रीय आय के निर्धारित लेखांकन से राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या
उपयोग अर्थव्यवस्था के आकार और आय का अध्ययन औसत आय के स्तर की तुलना

8. राष्ट्रीय आय के प्रमुख स्रोत

अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली आर्थिक गतिविधियाँ देश की आय और उत्पादन में योगदान करती हैं।

01

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी जैसी गतिविधियाँ।

02

उद्योग

विनिर्माण, खनन, बिजली तथा अन्य औद्योगिक गतिविधियाँ।

03

निर्माण

भवन, सड़क तथा अन्य निर्माण गतिविधियाँ।

04

व्यापार एवं परिवहन

व्यापार, परिवहन तथा संबंधित सेवाएँ।

05

वित्तीय सेवाएँ

बैंकिंग, बीमा और अन्य वित्तीय गतिविधियाँ।

06

अन्य सेवाएँ

शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार तथा अन्य सेवाएँ।

9. उत्पादन के साधन और उनकी आय

उत्पादन प्रक्रिया में विभिन्न साधनों का उपयोग होता है। इन साधनों को उनकी सेवाओं के बदले अलग-अलग प्रकार की आय प्राप्त होती है।

उत्पादन का साधन प्राप्त आय
भूमि लगान / किराया
श्रम मजदूरी / वेतन
पूँजी ब्याज
उद्यमिता लाभ
याद रखने का तरीका

भूमि → लगान

श्रम → मजदूरी

पूँजी → ब्याज

उद्यमी → लाभ

10. राष्ट्रीय आय की गणना की प्रमुख विधियाँ

राष्ट्रीय आय या समग्र आर्थिक गतिविधियों को मापने के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए जाते हैं। मुख्यतः तीन विधियों को समझना महत्वपूर्ण है।

1

उत्पादन विधि

उत्पादन या मूल्य-वर्धन के आधार पर।

2

आय विधि

उत्पादन के साधनों को प्राप्त आय के आधार पर।

3

व्यय विधि

अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए व्यय के आधार पर।

11. उत्पादन विधि

इस विधि में अर्थव्यवस्था के विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों द्वारा किए गए मूल्य-वर्धन को मापा जाता है।

कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य आर्थिक उत्पादन का आधार बनता है।

मूल्य-वर्धन = उत्पादन का मूल्य − मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य
सरल उदाहरण:
यदि तैयार वस्तु का मूल्य ₹1,000 है और उसके निर्माण में प्रयुक्त मध्यवर्ती सामग्री का मूल्य ₹600 है, तो मूल्य-वर्धन—

₹1,000 − ₹600 = ₹400

12. आय विधि

इस विधि में उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेने वाले उत्पादन के साधनों को प्राप्त आय को आधार बनाया जाता है।
मजदूरी / वेतन
+
किराया / लगान
+
ब्याज
+
लाभ

इनके साथ राष्ट्रीय लेखांकन के नियमों के अनुसार अन्य आवश्यक आय घटकों को समायोजित करके समग्र आय का अनुमान लगाया जाता है।

13. व्यय विधि

इस विधि में अर्थव्यवस्था में अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए व्यय को आधार बनाया जाता है।

परिवारों का उपभोग व्यय, निवेश, सरकारी व्यय तथा विदेशों के साथ वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन जैसे घटक समग्र व्यय की गणना में महत्वपूर्ण होते हैं।

सरल समझ:
उत्पादन किसी की आय बनता है और अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद पर व्यय होता है। इसी कारण उत्पादन, आय और व्यय अर्थव्यवस्था के परस्पर जुड़े पहलू हैं।

14. तीनों विधियों में अंतर

विधि किस पर ध्यान दिया जाता है?
उत्पादन विधि उत्पादन एवं मूल्य-वर्धन
आय विधि उत्पादन के साधनों से प्राप्त आय
व्यय विधि अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय

15. वित्तीय वर्ष

सरकार तथा आर्थिक लेखांकन में आय और व्यय के हिसाब के लिए निर्धारित एक वर्ष की अवधि को वित्तीय वर्ष कहा जाता है।

भारत में सरकारी वित्तीय वर्ष सामान्यतः 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

उदाहरण:
वित्तीय वर्ष 2026–27 का अर्थ है—

1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक की अवधि।

16. भारत में राष्ट्रीय आय के अनुमान का इतिहास

भारत में राष्ट्रीय आय के व्यवस्थित आधिकारिक आँकड़े उपलब्ध होने से पहले भी कुछ विद्वानों ने देश की आय का अनुमान लगाने का प्रयास किया था।

दादाभाई नौरोजी

दादाभाई नौरोजी उन शुरुआती भारतीय विचारकों में थे जिन्होंने भारत की आय और आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाने का प्रयास किया।

परीक्षा के लिए याद रखें:
भारत की राष्ट्रीय आय का प्रारंभिक अनुमान लगाने वाले प्रमुख व्यक्तियों में दादाभाई नौरोजी का नाम महत्वपूर्ण है।

17. राष्ट्रीय आय समिति

स्वतंत्रता के बाद भारत में राष्ट्रीय आय के अधिक व्यवस्थित अनुमान की आवश्यकता महसूस हुई। इसी संदर्भ में 1949 में राष्ट्रीय आय समिति (National Income Committee) गठित की गई।

गठन: 1949

अध्यक्ष: प्रो. पी. सी. महालनोबिस

उद्देश्य: भारत की राष्ट्रीय आय के व्यवस्थित अनुमान से संबंधित कार्य।

18. राष्ट्रीय आय का महत्व

✓

आर्थिक स्थिति
देश की अर्थव्यवस्था के आकार और आय को समझने में सहायता।

✓

आर्थिक परिवर्तन
समय के साथ उत्पादन और आय में परिवर्तन का अध्ययन।

✓

योजना निर्माण
विकास संबंधी नीति और योजना बनाने के लिए उपयोगी आँकड़े।

✓

क्षेत्रीय योगदान
अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों की भूमिका समझने में सहायता।

✓

तुलना
अलग-अलग वर्षों की आर्थिक स्थिति की तुलना में सहायता।

✓

प्रति व्यक्ति आय
औसत आय के स्तर का अनुमान लगाने में उपयोग।

19. प्रति व्यक्ति आय की सीमा

प्रति व्यक्ति आय किसी देश या राज्य की औसत आय बताती है, लेकिन अकेले इसके आधार पर लोगों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का पूरा चित्र नहीं मिलता।

उदाहरण:
यदि 5 व्यक्तियों की कुल आय ₹5,00,000 है, तो औसत आय ₹1,00,000 होगी। लेकिन जरूरी नहीं कि प्रत्येक व्यक्ति की आय वास्तव में ₹1,00,000 ही हो। किसी की आय अधिक और किसी की कम हो सकती है।
इसलिए विकास को समझते समय आय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आय-वितरण जैसे पहलुओं को भी देखना उपयोगी होता है।

20. राष्ट्रीय आय की गणना में कठिनाइयाँ

राष्ट्रीय आय का सही अनुमान लगाना आसान कार्य नहीं है। विशेषकर बड़ी और विविध अर्थव्यवस्था में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आ सकती हैं।

1. गैर-मौद्रिक गतिविधियाँ

कुछ उत्पादन बाजार में बेचा नहीं जाता, जिससे उसका मूल्यांकन कठिन हो सकता है।

2. असंगठित क्षेत्र

छोटे और असंगठित व्यवसायों के पूर्ण आँकड़े प्राप्त करना कठिन हो सकता है।

3. दोहरी गणना

एक ही वस्तु के मूल्य को अलग-अलग चरणों में बार-बार जोड़ने का खतरा रहता है।

4. सही आँकड़ों की कमी

सभी आर्थिक गतिविधियों के सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होते।

5. स्वरोजगार

कुछ स्थितियों में मजदूरी, लाभ और अन्य आय को अलग-अलग पहचानना कठिन होता है।

6. मूल्य परिवर्तन

कीमतों में बदलाव के कारण अलग-अलग वर्षों की तुलना सावधानी से करनी पड़ती है।

21. वर्तमान मूल्य और स्थिर मूल्य

आर्थिक उत्पादन और आय के आँकड़ों की तुलना करते समय कीमतों में बदलाव का प्रभाव महत्वपूर्ण होता है।

वर्तमान मूल्य

जब उत्पादन का मूल्य उसी समय प्रचलित कीमतों के आधार पर मापा जाता है।

स्थिर मूल्य

जब कीमतों में परिवर्तन के प्रभाव को अलग करके वास्तविक उत्पादन में बदलाव समझने का प्रयास किया जाता है।

क्यों जरूरी है?
यदि केवल वस्तुओं की कीमत बढ़ जाए, तो मौद्रिक मूल्य बढ़ सकता है, जबकि वास्तविक उत्पादन उतना न बढ़ा हो। इसलिए वास्तविक आर्थिक वृद्धि समझने में कीमतों के प्रभाव का ध्यान रखा जाता है।

22. महत्वपूर्ण शब्दावली

राष्ट्रीय आय

देश की समग्र आर्थिक आय से संबंधित माप।

GDP

देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य।

प्रति व्यक्ति आय

राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त औसत।

मूल्य-वर्धन

उत्पादन के मूल्य और मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य का अंतर।

वित्तीय वर्ष

आर्थिक लेखांकन के लिए निर्धारित एक वर्ष की अवधि।

अंतिम वस्तु

अंतिम उपयोग के लिए तैयार वस्तु।

मध्यवर्ती वस्तु

दूसरी वस्तु के उत्पादन में प्रयुक्त वस्तु।

दोहरी गणना

एक ही उत्पादन मूल्य को एक से अधिक बार जोड़ना।

23. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

1. राष्ट्रीय आय देश की आर्थिक स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

2. GDP का पूरा नाम Gross Domestic Product है।

3. GDP का हिंदी अर्थ सकल घरेलू उत्पाद है।

4. प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या।

5. राष्ट्रीय आय की गणना में दोहरी गणना से बचना आवश्यक है।

6. उत्पादन विधि में मूल्य-वर्धन का अध्ययन किया जाता है।

7. आय विधि में उत्पादन के साधनों को प्राप्त आय का अध्ययन किया जाता है।

8. व्यय विधि में अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यय का अध्ययन किया जाता है।

9. भारत का वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।

10. दादाभाई नौरोजी ने भारत की आय का प्रारंभिक अनुमान लगाने का प्रयास किया था।

11. राष्ट्रीय आय समिति का गठन 1949 में हुआ।

12. राष्ट्रीय आय समिति के अध्यक्ष प्रो. पी. सी. महालनोबिस थे।

24. महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. राष्ट्रीय आय क्या है?

उत्तर: एक निश्चित अवधि में देश की अर्थव्यवस्था में उत्पन्न समग्र आय को राष्ट्रीय आय की अवधारणा से समझा जाता है।

प्रश्न 2. GDP क्या है?

उत्तर: किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद या GDP कहते हैं।

प्रश्न 3. प्रति व्यक्ति आय क्या है?

उत्तर: राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त औसत आय को प्रति व्यक्ति आय कहते हैं।

प्रश्न 4. राष्ट्रीय आय की गणना की तीन प्रमुख विधियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: उत्पादन विधि, आय विधि और व्यय विधि।

प्रश्न 5. मूल्य-वर्धन क्या है?

उत्तर: उत्पादन के कुल मूल्य में से मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को घटाने पर प्राप्त अंतर को मूल्य-वर्धन कहते हैं।

प्रश्न 6. भारत का वित्तीय वर्ष कब से कब तक होता है?

उत्तर: भारत का सरकारी वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से अगले वर्ष 31 मार्च तक होता है।

प्रश्न 7. राष्ट्रीय आय समिति का गठन कब हुआ?

उत्तर: राष्ट्रीय आय समिति का गठन 1949 में हुआ।

प्रश्न 8. राष्ट्रीय आय समिति के अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर: प्रो. पी. सी. महालनोबिस राष्ट्रीय आय समिति के अध्यक्ष थे।

प्रश्न 9. भारत की राष्ट्रीय आय का प्रारंभिक अनुमान किसने लगाया?

उत्तर: भारत की राष्ट्रीय आय का प्रारंभिक अनुमान लगाने वाले प्रमुख व्यक्तियों में दादाभाई नौरोजी का नाम लिया जाता है।

प्रश्न 10. दोहरी गणना से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: एक ही उत्पादन के मूल्य को उत्पादन के अलग-अलग चरणों में एक से अधिक बार जोड़ देना दोहरी गणना कहलाता है।

25. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. राष्ट्रीय आय का महत्व बताइए।

उत्तर:

राष्ट्रीय आय से किसी देश की आर्थिक स्थिति और अर्थव्यवस्था के आकार को समझने में सहायता मिलती है। इससे अलग-अलग वर्षों में उत्पादन और आय में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया जा सकता है।

राष्ट्रीय आय के आँकड़े विकास संबंधी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में भी उपयोगी होते हैं। इनके माध्यम से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के योगदान का अध्ययन किया जा सकता है।

प्रश्न 2. राष्ट्रीय आय की गणना की प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

राष्ट्रीय आय की गणना को समझने के लिए मुख्यतः उत्पादन, आय और व्यय विधि का अध्ययन किया जाता है।

उत्पादन विधि: इसमें विभिन्न क्षेत्रों द्वारा किए गए मूल्य-वर्धन को मापा जाता है।

आय विधि: इसमें उत्पादन के साधनों को प्राप्त मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ जैसी आय को आधार बनाया जाता है।

व्यय विधि: इसमें अंतिम वस्तुओं और सेवाओं पर किए गए व्यय को आधार बनाया जाता है।

प्रश्न 3. प्रति व्यक्ति आय क्या है? इसका महत्व बताइए।

उत्तर:

राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्रति व्यक्ति आय प्राप्त होती है। यह किसी देश में प्रति व्यक्ति औसत आय का संकेत देती है।

इसका उपयोग अलग-अलग समय या अर्थव्यवस्थाओं के औसत आय स्तर को समझने में किया जा सकता है। लेकिन यह आय के वास्तविक वितरण को नहीं बताती, इसलिए विकास का अध्ययन करते समय अन्य संकेतकों को भी देखना चाहिए।

प्रश्न 4. राष्ट्रीय आय की गणना में आने वाली कठिनाइयों का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

राष्ट्रीय आय की गणना में असंगठित क्षेत्र के आँकड़ों की कमी, गैर-मौद्रिक गतिविधियाँ, दोहरी गणना, स्वरोजगार की मिश्रित आय और अपूर्ण आर्थिक रिकॉर्ड जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं।

इसके अतिरिक्त कीमतों में बदलाव के कारण अलग-अलग वर्षों के आँकड़ों की तुलना करते समय भी सावधानी आवश्यक होती है।

प्रश्न 5. GDP और राष्ट्रीय आय से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:

GDP किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।

राष्ट्रीय आय देश की समग्र आर्थिक आय से संबंधित अवधारणा है। दोनों आर्थिक गतिविधियों और अर्थव्यवस्था की स्थिति को समझने के महत्वपूर्ण माप हैं, लेकिन राष्ट्रीय लेखांकन में इनके तकनीकी अर्थ अलग-अलग होते हैं।

26. Quick Revision

01

GDP: Gross Domestic Product

02

GDP: सकल घरेलू उत्पाद

03

प्रति व्यक्ति आय: राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या

04

उत्पादन विधि: मूल्य-वर्धन के आधार पर

05

आय विधि: उत्पादन के साधनों की आय के आधार पर

06

व्यय विधि: अंतिम व्यय के आधार पर

07

वित्तीय वर्ष: 1 अप्रैल से 31 मार्च

08

राष्ट्रीय आय समिति: 1949

09

समिति के अध्यक्ष: पी. सी. महालनोबिस

10

प्रारंभिक अनुमान: दादाभाई नौरोजी

परीक्षा के लिए जरूर तैयार करें

राष्ट्रीय आय की परिभाषा, GDP, प्रति व्यक्ति आय का सूत्र, उत्पादन-आय-व्यय विधि, मूल्य-वर्धन, दोहरी गणना, वित्तीय वर्ष, दादाभाई नौरोजी तथा राष्ट्रीय आय समिति को अच्छी तरह तैयार करें।

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