अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास
Chapter 1 – सम्पूर्ण नोट्स
BSEB EXAM GUIDE
अध्याय परिचय
मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ करता है। कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन, बैंकिंग और अन्य सेवाएँ आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण हैं।
इन सभी आर्थिक गतिविधियों के संगठित रूप को समझने के लिए अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया जाता है। समय के साथ अर्थव्यवस्था में परिवर्तन होता है और उत्पादन, आय, रोजगार तथा जीवन-स्तर में सुधार की प्रक्रिया को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है।
इस अध्याय में पढ़ेंगे
1. अर्थव्यवस्था क्या है?
लोग वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करते हैं, उनसे आय प्राप्त करते हैं और उस आय का उपयोग अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करते हैं। इन गतिविधियों में व्यक्ति, परिवार, व्यवसाय, संस्थाएँ और सरकार सभी की भूमिका होती है।
2. आर्थिक क्रियाएँ
वे क्रियाएँ जिनका संबंध वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय तथा आय अर्जित करने से होता है, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं।
कुछ सामान्य उदाहरण
फसल उत्पादन और उससे संबंधित कार्य।
कच्चे माल से वस्तुओं का निर्माण।
वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय।
लोगों और वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना।
जमा, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराना।
शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार आदि सेवाएँ प्रदान करना।
3. अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र
आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में समझा जाता है।
प्राथमिक क्षेत्र
प्राकृतिक संसाधनों से सीधे जुड़ी गतिविधियाँ।
द्वितीयक क्षेत्र
कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदलने वाली गतिविधियाँ।
तृतीयक क्षेत्र
विभिन्न प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराने वाली गतिविधियाँ।
प्रकृति से प्राप्त करना = प्राथमिक क्षेत्र
वस्तु बनाना = द्वितीयक क्षेत्र
सेवा देना = तृतीयक क्षेत्र
4. प्राथमिक क्षेत्र
उदाहरण
- कृषि
- पशुपालन
- मत्स्य पालन
- वानिकी
- खनन
कृषि प्राथमिक क्षेत्र की एक प्रमुख गतिविधि है। यह खाद्यान्न के साथ-साथ कई उद्योगों के लिए कच्चा माल भी उपलब्ध कराती है।
5. द्वितीयक क्षेत्र
उदाहरण
- कपड़ा उद्योग
- चीनी उद्योग
- इस्पात उद्योग
- खाद्य प्रसंस्करण
- निर्माण कार्य
गन्ना कृषि से प्राप्त होता है, इसलिए गन्ने का उत्पादन प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधि है। गन्ने से चीनी बनाना द्वितीयक क्षेत्र की गतिविधि है।
6. तृतीयक क्षेत्र
उदाहरण
- परिवहन
- बैंकिंग
- बीमा
- शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवा
- संचार
- व्यापार
प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र को भी परिवहन, बैंकिंग, संचार और व्यापार जैसी सेवाओं की आवश्यकता होती है। इसलिए तीनों क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़े हैं।
7. तीनों क्षेत्रों में अंतर
| क्षेत्र | मुख्य कार्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राथमिक | प्राकृतिक संसाधनों से उत्पादन | कृषि, मत्स्य पालन |
| द्वितीयक | कच्चे माल से वस्तु निर्माण | उद्योग, निर्माण |
| तृतीयक | सेवाएँ प्रदान करना | बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा |
8. आर्थिक विकास
आर्थिक विकास का अर्थ केवल आय बढ़ना नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर, आधारभूत संरचना और जीवन की गुणवत्ता जैसे पहलू भी विकास को समझने में महत्वपूर्ण होते हैं।
आर्थिक विकास के कुछ प्रमुख संकेत
लोगों की वास्तविक आय में सुधार।
वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि।
उपयोगी रोजगार के अवसरों का विस्तार।
शिक्षा और कौशल तक बेहतर पहुँच।
स्वास्थ्य सेवाओं और जीवन-गुणवत्ता में सुधार।
सड़क, बिजली, संचार और अन्य सुविधाओं का विकास।
9. आर्थिक वृद्धि और आर्थिक विकास
आर्थिक वृद्धि
अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन या वास्तविक आय में समय के साथ वृद्धि को आर्थिक वृद्धि से जोड़ा जाता है।
आर्थिक विकास
आय और उत्पादन में वृद्धि के साथ जीवन-स्तर, अवसरों तथा आर्थिक-सामाजिक स्थितियों में व्यापक सुधार आर्थिक विकास की अवधारणा का हिस्सा है।
10. आर्थिक विकास की माप
विकास को समझने के लिए केवल एक संकेतक पर्याप्त नहीं होता। अलग-अलग आर्थिक और सामाजिक संकेतकों को देखा जा सकता है।
देश की आर्थिक गतिविधियों से संबंधित आय का महत्वपूर्ण माप।
कुल आय को जनसंख्या से जोड़कर औसत आय का संकेत देती है।
साक्षरता और शिक्षा तक पहुँच विकास के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएँ और जीवन की गुणवत्ता भी विकास से जुड़ी हैं।
रोजगार के अवसर लोगों के आर्थिक जीवन को प्रभावित करते हैं।
सड़क, बिजली, पानी और संचार जैसी सुविधाएँ विकास में सहायक हैं।
11. प्रति व्यक्ति आय
यदि किसी अर्थव्यवस्था की कुल आय ₹10,00,000 और जनसंख्या 100 है, तो प्रति व्यक्ति औसत आय = ₹10,000 होगी।
12. विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्था
देशों की आर्थिक-सामाजिक स्थितियों में अंतर होता है। इसलिए विकास की स्थिति को समझने के लिए आय के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और अन्य संकेतकों का भी उपयोग किया जाता है।
विकसित अर्थव्यवस्था
सामान्यतः उच्च उत्पादकता, बेहतर आधारभूत सुविधाएँ तथा अपेक्षाकृत उच्च जीवन-स्तर जैसी विशेषताएँ देखने को मिलती हैं।
विकासशील अर्थव्यवस्था
ऐसी अर्थव्यवस्था जहाँ विकास की प्रक्रिया जारी रहती है और आय, रोजगार, आधारभूत संरचना तथा सामाजिक सेवाओं में सुधार की पर्याप्त संभावना होती है।
13. आर्थिक नियोजन
आर्थिक नियोजन के प्रमुख उद्देश्य
- आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
- रोजगार के अवसरों का विस्तार करना।
- उत्पादन क्षमता बढ़ाना।
- गरीबी कम करने के प्रयास करना।
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का प्रयास करना।
- आधारभूत संरचना का विकास करना।
- उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करना।
14. योजना आयोग
स्वतंत्रता के बाद भारत में योजनाबद्ध आर्थिक विकास के लिए योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना 1950 में की गई थी।
यह देश की विकास संबंधी प्राथमिकताओं और योजनाओं से जुड़ी संस्था थी। भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
स्थापना: 1950
प्रमुख भूमिका: राष्ट्रीय आर्थिक नियोजन
बाद में: इसके स्थान पर नीति आयोग की स्थापना की गई।
15. पंचवर्षीय योजना
भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू हुई। समय के साथ योजनाओं में कृषि, उद्योग, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विभिन्न क्षेत्रों को महत्व दिया गया।
योजना आयोग – 1950
प्रथम पंचवर्षीय योजना – 1951 से 1956
16. नीति आयोग
भारत सरकार ने योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना 1 जनवरी 2015 को की।
NITI का विस्तृत नाम National Institution for Transforming India है। यह सरकार के लिए नीति संबंधी विचार और सहयोग प्रदान करने वाली संस्था है।
नीति आयोग से जुड़े मुख्य बिंदु
- स्थापना – 1 जनवरी 2015
- योजना आयोग के स्थान पर स्थापित।
- केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग पर जोर।
- दीर्घकालीन विकास संबंधी नीति और रणनीति पर कार्य।
17. अर्थव्यवस्था के विकास की सामान्य प्रक्रिया
आर्थिक विकास के साथ विभिन्न क्षेत्रों की भूमिका में परिवर्तन देखा जा सकता है। प्रारंभिक अवस्थाओं में कृषि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी गतिविधियों का महत्व अधिक हो सकता है।
औद्योगीकरण के साथ विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र का विस्तार होता है। इसके बाद बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार और अन्य सेवाओं का महत्व भी बढ़ सकता है।
18. बिहार और आर्थिक विकास
बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में कृषि के साथ उद्योग, निर्माण, व्यापार, परिवहन तथा विभिन्न सेवा गतिविधियाँ भी अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं।
आर्थिक विकास की दृष्टि से कृषि उत्पादकता, शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्योग, परिवहन, बिजली तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं में सुधार महत्वपूर्ण होता है।
19. आर्थिक विकास का महत्व
रोजगार
रोजगार के अवसरों में वृद्धि में सहायता।
आय
लोगों की आय बढ़ाने की संभावनाएँ।
शिक्षा
मानव संसाधन और कौशल विकास में सहायता।
स्वास्थ्य
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में सहायता।
आधारभूत संरचना
सड़क, बिजली और संचार का विस्तार।
जीवन-स्तर
लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की संभावना।
20. महत्वपूर्ण शब्दावली
उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था।
प्राकृतिक संसाधनों से सीधे जुड़ा आर्थिक क्षेत्र।
कच्चे माल से वस्तुओं का निर्माण करने वाला क्षेत्र।
सेवाएँ उपलब्ध कराने वाला आर्थिक क्षेत्र।
आय, उत्पादन और जीवन की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की प्रक्रिया।
कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त औसत आय।
निर्धारित विकास लक्ष्यों के लिए संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग।
भारत में विकास संबंधी नीति और रणनीतिक सहयोग से जुड़ी संस्था।
21. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
1. अर्थव्यवस्था में उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं।
2. अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्र हैं—प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक।
3. कृषि प्राथमिक क्षेत्र का उदाहरण है।
4. विनिर्माण द्वितीयक क्षेत्र की प्रमुख गतिविधि है।
5. बैंकिंग और परिवहन तृतीयक क्षेत्र के उदाहरण हैं।
6. आर्थिक विकास केवल आय की वृद्धि तक सीमित नहीं है।
7. प्रति व्यक्ति आय = कुल आय ÷ कुल जनसंख्या।
8. योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी।
9. पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में प्रारंभ हुई।
10. नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को हुई।
22. महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था क्या है?
उत्तर: उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग से संबंधित आर्थिक गतिविधियों की व्यवस्था को अर्थव्यवस्था कहा जाता है।
प्रश्न 2. अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर: प्राथमिक क्षेत्र, द्वितीयक क्षेत्र और तृतीयक क्षेत्र।
प्रश्न 3. प्राथमिक क्षेत्र क्या है?
उत्तर: प्राकृतिक संसाधनों से सीधे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों वाले क्षेत्र को प्राथमिक क्षेत्र कहते हैं।
प्रश्न 4. द्वितीयक क्षेत्र क्या है?
उत्तर: कच्चे माल को बदलकर नई वस्तुओं का निर्माण करने वाले क्षेत्र को द्वितीयक क्षेत्र कहते हैं।
प्रश्न 5. तृतीयक क्षेत्र क्या है?
उत्तर: विभिन्न प्रकार की सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले क्षेत्र को तृतीयक या सेवा क्षेत्र कहते हैं।
प्रश्न 6. आर्थिक विकास क्या है?
उत्तर: आय और उत्पादन में वृद्धि के साथ जीवन-स्तर और आर्थिक अवसरों में व्यापक सुधार की प्रक्रिया को आर्थिक विकास कहा जाता है।
प्रश्न 7. प्रति व्यक्ति आय कैसे निकाली जाती है?
उत्तर: कुल आय को कुल जनसंख्या से भाग देकर प्रति व्यक्ति आय निकाली जाती है।
प्रश्न 8. आर्थिक नियोजन क्या है?
उत्तर: निर्धारित आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग आर्थिक नियोजन कहलाता है।
प्रश्न 9. योजना आयोग की स्थापना कब हुई?
उत्तर: योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी।
प्रश्न 10. नीति आयोग की स्थापना कब हुई?
उत्तर: नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को हुई।
23. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अर्थव्यवस्था को आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र में बाँटा जाता है।
प्राथमिक क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से सीधे जुड़ा होता है। कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन इसके उदाहरण हैं।
द्वितीयक क्षेत्र में कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदला जाता है। उद्योग और निर्माण इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
तृतीयक क्षेत्र विभिन्न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करता है। बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 2. आर्थिक विकास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आर्थिक विकास एक व्यापक प्रक्रिया है। इसमें अर्थव्यवस्था की आय और उत्पादन में वृद्धि के साथ लोगों के जीवन-स्तर तथा आर्थिक अवसरों में सुधार शामिल होता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत संरचना और जीवन की गुणवत्ता जैसे पहलू भी आर्थिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न 3. आर्थिक विकास की माप के प्रमुख आधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक विकास को समझने के लिए राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं जैसे संकेतकों को देखा जा सकता है।
केवल आय में वृद्धि को पूर्ण विकास नहीं माना जा सकता। लोगों के जीवन की गुणवत्ता और अवसरों में सुधार भी महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. आर्थिक नियोजन का क्या महत्व है?
उत्तर:
आर्थिक नियोजन उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग करने में सहायता करता है। इसके माध्यम से विकास की प्राथमिकताएँ और लक्ष्य निर्धारित किए जा सकते हैं।
रोजगार, उत्पादन, आधारभूत संरचना, गरीबी में कमी और क्षेत्रीय विकास जैसे उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में नियोजन महत्वपूर्ण हो सकता है।
प्रश्न 5. योजना आयोग और नीति आयोग के बारे में लिखिए।
उत्तर:
योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी। यह भारत में योजनाबद्ध आर्थिक विकास और पंचवर्षीय योजनाओं की प्रक्रिया से जुड़ी प्रमुख संस्था थी।
1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना हुई। नीति आयोग केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग तथा विकास संबंधी नीति और रणनीतिक विचारों पर कार्य करता है।
24. Quick Revision
अर्थव्यवस्था – आर्थिक गतिविधियों की संगठित व्यवस्था।
प्राथमिक क्षेत्र – कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन।
द्वितीयक क्षेत्र – उद्योग एवं निर्माण।
तृतीयक क्षेत्र – विभिन्न सेवाएँ।
आर्थिक विकास – आय, उत्पादन और जीवन-स्तर में व्यापक सुधार।
प्रति व्यक्ति आय – कुल आय ÷ कुल जनसंख्या।
योजना आयोग – स्थापना 1950।
प्रथम पंचवर्षीय योजना – 1951–1956।
नीति आयोग – स्थापना 1 जनवरी 2015।
NITI – National Institution for Transforming India.
परीक्षा के लिए जरूर तैयार करें
अर्थव्यवस्था की परिभाषा, प्राथमिक-द्वितीयक-तृतीयक क्षेत्र, आर्थिक विकास, आर्थिक वृद्धि और विकास में अंतर, प्रति व्यक्ति आय, आर्थिक नियोजन, योजना आयोग, पंचवर्षीय योजना और नीति आयोग को अच्छी तरह तैयार करें।

