Class 10 History Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण Notes in Hindi

Class 10 History Chapter 7 व्यापार और भूमंडलीकरण Notes in Hindi
Class 10 History • Chapter 7

व्यापार और भूमंडलीकरण

सम्पूर्ण एवं आसान हिंदी नोट्स

1. व्यापार क्या है?

मनुष्य अपनी सभी आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन स्वयं नहीं कर सकता।

इसलिए लोग वस्तुओं और सेवाओं का आपस में आदान-प्रदान करते हैं।

इसी प्रक्रिया से व्यापार का विकास हुआ।

व्यापार:
वस्तुओं और सेवाओं के क्रय-विक्रय या आदान-प्रदान की प्रक्रिया को व्यापार कहते हैं।

व्यापार के प्रमुख प्रकार

आंतरिक व्यापार: एक ही देश की सीमाओं के अंदर होने वाला व्यापार।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार: दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाला व्यापार।

2. भूमंडलीकरण क्या है?

आज दुनिया के अलग-अलग देश एक-दूसरे से व्यापार, पूँजी, तकनीक, सूचना और सेवाओं के माध्यम से जुड़े हुए हैं।

किसी एक देश में बनी वस्तु दूसरे देश में बेची जा सकती है।

एक देश की कंपनी दूसरे देश में निवेश कर सकती है।

लोग रोजगार के लिए एक देश से दूसरे देश जा सकते हैं।

भूमंडलीकरण:
दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं, बाजारों और समाजों के आपस में अधिक निकटता से जुड़ने की प्रक्रिया को भूमंडलीकरण कहते हैं।
आसान भाषा में:
देश + व्यापार + पूँजी + लोग + तकनीक + सूचना

आपस में बढ़ता संपर्क

भूमंडलीकरण

भूमंडलीकरण केवल आधुनिक समय की घटना नहीं है।

दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क बहुत पुराने समय से मौजूद रहे हैं।

3. प्राचीन काल में विश्व व्यापार

प्राचीन समय से ही व्यापारी लंबी दूरी की यात्राएँ करते थे।

वे एक क्षेत्र की वस्तुओं को दूसरे क्षेत्र तक पहुँचाते थे।

व्यापार के साथ केवल वस्तुएँ ही नहीं जाती थीं।

विचार, धर्म, भाषा, संस्कृति, तकनीक और भोजन की आदतें भी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पहुँचती थीं।

इस प्रकार प्राचीन व्यापार ने दुनिया के विभिन्न समाजों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य बात:
विश्व बाजार बनने से बहुत पहले ही एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच व्यापारिक संपर्क मौजूद थे।

4. रेशम मार्ग – प्राचीन विश्व को जोड़ने वाला रास्ता

प्राचीन काल के सबसे प्रसिद्ध व्यापारिक मार्गों में रेशम मार्ग का विशेष स्थान था।

रेशम मार्ग कोई एक सड़क नहीं थी।

यह स्थल और समुद्री रास्तों का एक विशाल नेटवर्क था।

यह एशिया के विभिन्न भागों को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से जोड़ता था।

चीन का रेशम इन मार्गों से पश्चिमी देशों तक पहुँचता था।

भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से मसाले, कपड़े और अन्य वस्तुएँ भी व्यापार में शामिल थीं।

रेशम मार्ग:
प्राचीन व्यापारिक मार्गों का वह नेटवर्क जिसके माध्यम से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों के बीच वस्तुओं और विचारों का आदान-प्रदान होता था।

रेशम मार्ग का महत्व

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिला।
  • धर्म और विचारों का प्रसार हुआ।
  • संस्कृतियों का संपर्क बढ़ा।
  • नई वस्तुएँ विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचीं।

5. भोजन भी दुनिया को जोड़ता है

विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के संपर्क का प्रभाव भोजन पर भी पड़ा।

आज जिन खाद्य पदार्थों को हम सामान्य मानते हैं, उनमें से कई कभी दूसरे महाद्वीपों से आए थे।

आलू, टमाटर और मक्का जैसे खाद्य पदार्थ अमेरिका से दुनिया के अन्य क्षेत्रों में पहुँचे।

इन खाद्य पदार्थों ने कई देशों के लोगों के भोजन और कृषि को बदल दिया।

समझिए:
व्यापार केवल कपड़ा, सोना या मसालों का व्यापार नहीं था।
इसके माध्यम से भोजन, संस्कृति और जीवन शैली भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँची।

6. समुद्री मार्गों की खोज और विश्व व्यापार

15वीं और 16वीं शताब्दी में यूरोपीय नाविकों ने नए समुद्री मार्गों की खोज की।

इन खोजों का उद्देश्य एशिया तक सीधे पहुँचने और व्यापारिक लाभ प्राप्त करने के नए रास्ते खोजना था।

क्रिस्टोफर कोलंबस

1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस अटलांटिक महासागर पार करते हुए अमेरिका पहुँचा।

वास्को-दा-गामा

1498 में वास्को-दा-गामा समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट पहुँचा।

इसके बाद यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का महत्व तेजी से बढ़ा।

याद रखें:
1492 – कोलंबस अमेरिका पहुँचा।
1498 – वास्को-दा-गामा भारत पहुँचा।

7. अमेरिका का विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ना

यूरोपीय समुद्री यात्राओं के बाद अमेरिका और यूरोप के बीच संपर्क तेजी से बढ़ा।

अमेरिका से सोना और चाँदी यूरोप पहुँचा।

नई कृषि उपज भी दुनिया के अन्य हिस्सों तक पहुँची।

लेकिन इस संपर्क का स्थानीय मूल निवासियों पर विनाशकारी प्रभाव भी पड़ा।

यूरोप से पहुँची बीमारियों के प्रति स्थानीय लोगों में प्रतिरोधक क्षमता कम थी।

इस कारण उनकी बड़ी आबादी महामारी से प्रभावित हुई।

इसके साथ यूरोपीय उपनिवेशवाद का विस्तार भी हुआ।

8. उपनिवेशवाद और विश्व व्यापार

यूरोपीय शक्तियाँ एशिया, अफ्रीका और अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने लगीं।

उपनिवेशों से कच्चा माल प्राप्त किया जाता था।

औद्योगिक देशों में इस कच्चे माल से तैयार वस्तुएँ बनाई जाती थीं।

फिर उन वस्तुओं को उपनिवेशों सहित दुनिया के अन्य बाजारों में बेचा जाता था।

औपनिवेशिक व्यापार का सामान्य क्रम:
उपनिवेश से कच्चा माल

औद्योगिक देश में उत्पादन

तैयार वस्तु

विश्व बाजार में बिक्री

इस व्यवस्था में औपनिवेशिक शक्तियों को आर्थिक लाभ मिलता था, जबकि उपनिवेशों की अर्थव्यवस्थाएँ उनके हितों के अनुसार ढाली जाती थीं।

9. 19वीं शताब्दी में विश्व अर्थव्यवस्था

19वीं शताब्दी में दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच आर्थिक संबंध बहुत तेजी से बढ़े।

इस दौर में तीन प्रकार के प्रवाह विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे।

प्रवाह अर्थ
व्यापार का प्रवाह वस्तुओं का एक देश से दूसरे देश जाना
श्रम का प्रवाह लोगों का रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाना
पूँजी का प्रवाह एक देश की पूँजी का दूसरे देश में निवेश होना
VVI:
19वीं शताब्दी की विश्व अर्थव्यवस्था को समझने के लिए वस्तु, श्रम और पूँजी के प्रवाह को जरूर याद रखें।

10. कृषि और विश्व बाजार

यूरोप में जनसंख्या और औद्योगिक शहरों के बढ़ने से खाद्यान्न की माँग बढ़ी।

दुनिया के दूसरे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि विकसित की गई।

रेलवे ने खेतों को बंदरगाहों से जोड़ा।

जहाजों से खाद्यान्न लंबी दूरी तक पहुँचाया जाने लगा।

इससे स्थानीय कृषि भी विश्व बाजार से जुड़ने लगी।

किसान केवल स्थानीय बाजार के लिए नहीं, बल्कि दूर के बाजारों के लिए भी उत्पादन करने लगे।

11. लोगों का अंतरराष्ट्रीय प्रवास

19वीं शताब्दी में लाखों लोग बेहतर रोजगार और जीवन की तलाश में एक देश से दूसरे देश गए।

यूरोप से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की ओर गए।

एशिया से भी मजदूर दुनिया के विभिन्न उपनिवेशों में भेजे गए।

इससे श्रम बाजार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ने लगा।

प्रवास:
रोजगार, निवास या अन्य कारणों से लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रवास कहलाता है।

12. गिरमिटिया मजदूर

19वीं शताब्दी में भारत से बड़ी संख्या में मजदूरों को अनुबंध पर दूसरे देशों और उपनिवेशों में काम करने के लिए भेजा गया।

इन मजदूरों को आम बोलचाल में गिरमिटिया मजदूर कहा गया।

“गिरमिट” शब्द अंग्रेजी शब्द “Agreement” के बदले हुए उच्चारण से बना माना जाता है।

गिरमिटिया मजदूर:
एक निश्चित अवधि के अनुबंध के आधार पर विदेशों में काम करने के लिए भेजे गए भारतीय मजदूर।

उन्हें मॉरीशस, फिजी, कैरेबियाई द्वीपों और अन्य क्षेत्रों में ले जाया गया।

कई मजदूर बागानों, खानों और निर्माण कार्यों में काम करते थे।

उनकी कार्य और जीवन परिस्थितियाँ अक्सर कठिन होती थीं।

लोग विदेश क्यों गए?

  • गरीबी
  • रोजगार की कमी
  • ऋण
  • बेहतर आय की आशा
  • औपनिवेशिक श्रम की माँग

भारतीय अनुबंधित श्रम व्यवस्था को 1921 तक समाप्त कर दिया गया।

13. भारत और विश्व व्यापार

भारत प्राचीन समय से ही विश्व व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

भारतीय कपड़े, मसाले और अन्य वस्तुएँ दुनिया के अनेक क्षेत्रों में प्रसिद्ध थीं।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के व्यापार की प्रकृति में बड़ा परिवर्तन आया।

भारत से कपास, जूट, नील, चाय और अन्य कच्चे माल का निर्यात बढ़ा।

दूसरी ओर ब्रिटेन से मशीन से बनी तैयार वस्तुएँ भारत में आने लगीं।

इससे भारत औपनिवेशिक विश्व अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ गया।

14. भारत का व्यापार अधिशेष और औपनिवेशिक हित

कई अवधियों में भारत के निर्यात का मूल्य उसके आयात से अधिक था।

इसे व्यापार अधिशेष कहा जाता है।

व्यापार अधिशेष:
जब किसी देश के निर्यात का मूल्य उसके आयात के मूल्य से अधिक हो, तो उसे व्यापार अधिशेष कहते हैं।

लेकिन औपनिवेशिक व्यवस्था में इस अधिशेष का पूरा लाभ भारतीय जनता को नहीं मिलता था।

ब्रिटेन इस आय का उपयोग अपने औपनिवेशिक प्रशासन तथा अन्य बाहरी भुगतानों में भी करता था।

इसलिए केवल व्यापार अधिशेष होना भारत की आर्थिक समृद्धि का प्रमाण नहीं था।

15. तकनीक ने विश्व व्यापार को कैसे बदला?

नई तकनीकों ने विश्व व्यापार को तेज और सस्ता बनाया।

रेलवे

रेलवे ने उत्पादन क्षेत्रों को बंदरगाहों और बड़े बाजारों से जोड़ा।

भाप के जहाज

भाप के जहाजों से समुद्री यात्रा अधिक नियमित और तेज हुई।

टेलीग्राफ

टेलीग्राफ से व्यापारिक सूचनाएँ बहुत तेजी से भेजी जाने लगीं।

रेफ्रिजरेशन

शीत भंडारण और रेफ्रिजरेटेड जहाजों के विकास से मांस तथा अन्य खराब होने वाली वस्तुओं को लंबी दूरी तक भेजना आसान हुआ।

याद रखें:
रेलवे + भाप जहाज + टेलीग्राफ + रेफ्रिजरेशन = विश्व व्यापार का तेज विस्तार

16. प्रथम विश्व युद्ध और विश्व अर्थव्यवस्था

प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला।

इस युद्ध ने विश्व अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया।

यूरोपीय देशों ने युद्ध पर बहुत अधिक धन खर्च किया।

उत्पादन का बड़ा हिस्सा युद्ध संबंधी आवश्यकताओं में लग गया।

युद्ध के लिए सैनिकों और हथियारों की भारी माँग हुई।

यूरोपीय देशों ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में ऋण और वस्तुएँ लीं।

इससे संयुक्त राज्य अमेरिका की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।

मुख्य परिवर्तन:
युद्ध से पहले अमेरिका यूरोप से पूँजी प्राप्त करता था, लेकिन युद्ध के बाद वह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय ऋणदाता बन गया।

17. युद्ध के बाद की आर्थिक कठिनाइयाँ

प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद विश्व अर्थव्यवस्था तुरंत सामान्य नहीं हुई।

कई देशों पर भारी कर्ज था।

उद्योगों को युद्धकालीन उत्पादन से सामान्य उत्पादन की ओर लौटना पड़ा।

कई क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ी।

कृषि उत्पादन बढ़ने और माँग में बदलाव से किसानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

इन परिस्थितियों ने आगे आने वाले आर्थिक संकट को गंभीर बनाने में भूमिका निभाई।

18. 1929 की महामंदी

1929 में विश्व अर्थव्यवस्था एक गंभीर आर्थिक संकट में फँस गई।

इसे महामंदी या Great Depression कहा जाता है।

महामंदी:
1929 से शुरू हुआ गंभीर वैश्विक आर्थिक संकट जिसमें उत्पादन, व्यापार, कीमतों और रोजगार में भारी गिरावट आई।

महामंदी के प्रमुख प्रभाव

  • औद्योगिक उत्पादन घटा।
  • अंतरराष्ट्रीय व्यापार कम हुआ।
  • बेरोजगारी बढ़ी।
  • कृषि उत्पादों की कीमतें गिरीं।
  • बैंक और व्यापारिक संस्थाएँ संकट में आईं।
  • विश्व अर्थव्यवस्था में अस्थिरता बढ़ी।

19. महामंदी का भारत पर प्रभाव

भारत भी विश्व बाजार से जुड़ा हुआ था।

इसलिए महामंदी का प्रभाव भारत पर भी पड़ा।

भारत के आयात और निर्यात में गिरावट आई।

कृषि वस्तुओं की कीमतें तेजी से घटीं।

लेकिन किसानों को कई आर्थिक दायित्व पूरे करने पड़ते थे।

इससे किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा।

कई किसानों को अपने खर्च पूरे करने के लिए अधिक उपज बेचनी पड़ी।

परीक्षा में लिखें:
महामंदी ने भारतीय किसानों को विशेष रूप से प्रभावित किया क्योंकि कृषि कीमतें गिर गईं, जबकि उनके आर्थिक दायित्व उसी अनुपात में कम नहीं हुए।

20. द्वितीय विश्व युद्ध और विश्व अर्थव्यवस्था

द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक चला।

इस युद्ध ने दुनिया के बड़े हिस्से में भारी विनाश किया।

यूरोप और एशिया के कई औद्योगिक क्षेत्रों को नुकसान पहुँचा।

युद्ध के बाद विश्व अर्थव्यवस्था को फिर से स्थिर करने की आवश्यकता महसूस हुई।

देशों ने यह समझा कि महामंदी जैसी आर्थिक अस्थिरता और विनाशकारी प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग जरूरी है।

21. ब्रेटन वुड्स व्यवस्था

1944 में अमेरिका के न्यू हैम्पशायर स्थित ब्रेटन वुड्स में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

इसका उद्देश्य युद्ध के बाद की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाना था।

इस व्यवस्था से दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना का रास्ता बना।

संस्था मुख्य उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग और वित्तीय स्थिरता में सहायता
विश्व बैंक पुनर्निर्माण और विकास के लिए वित्तीय सहायता
याद रखें:
ब्रेटन वुड्स सम्मेलन – 1944
महत्वपूर्ण संस्थाएँ – IMF और World Bank

22. युद्ध के बाद विश्व व्यापार का विस्तार

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई देशों में आर्थिक पुनर्निर्माण शुरू हुआ।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर बढ़ने लगा।

तकनीक और परिवहन में तेजी से सुधार हुआ।

कई एशियाई और अफ्रीकी देश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र हुए।

इन नए स्वतंत्र देशों ने आर्थिक विकास और औद्योगीकरण की दिशा में प्रयास किए।

विश्व अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे नए आर्थिक केंद्र विकसित होने लगे।

23. आधुनिक भूमंडलीकरण

20वीं शताब्दी के अंतिम दशकों में विश्व अर्थव्यवस्था का आपसी जुड़ाव और तेज हुआ।

परिवहन की लागत कम हुई।

कंटेनर परिवहन ने माल ढुलाई को तेज और सुविधाजनक बनाया।

कंप्यूटर और इंटरनेट ने सूचना के आदान-प्रदान को बहुत तेज कर दिया।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कई देशों में उत्पादन और निवेश का विस्तार किया।

एक ही वस्तु के अलग-अलग हिस्से कई देशों में बनाए जाने लगे।

बहुराष्ट्रीय कंपनी:
ऐसी कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन, निवेश या व्यापारिक गतिविधियाँ संचालित करती है।
आज का भूमंडलीकरण:
तेज परिवहन + इंटरनेट + अंतरराष्ट्रीय निवेश + बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ + विश्व बाजार

24. भूमंडलीकरण के प्रभाव

संभावित लाभ संभावित चुनौतियाँ
अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार छोटे उत्पादकों पर बड़ी कंपनियों का दबाव
नई तकनीक का प्रसार असमान प्रतिस्पर्धा
निवेश के नए अवसर आर्थिक असमानता की समस्या
उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प वैश्विक संकटों का तेजी से फैलना
विश्व बाजारों का जुड़ाव स्थानीय उद्योगों पर दबाव
निष्कर्ष:
भूमंडलीकरण देशों को आर्थिक रूप से जोड़ता है, लेकिन इसका प्रभाव सभी देशों, उद्योगों और लोगों पर एक जैसा नहीं होता।

25. महत्वपूर्ण तिथियाँ

वर्ष घटना
1492 क्रिस्टोफर कोलंबस अमेरिका पहुँचा
1498 वास्को-दा-गामा समुद्री मार्ग से भारत पहुँचा
19वीं शताब्दी वस्तु, श्रम और पूँजी के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह का तेज विस्तार
1914–1918 प्रथम विश्व युद्ध
1921 भारतीय अनुबंधित श्रम व्यवस्था समाप्त
1929 महामंदी की शुरुआत
1939–1945 द्वितीय विश्व युद्ध
1944 ब्रेटन वुड्स सम्मेलन

26. महत्वपूर्ण शब्दावली

भूमंडलीकरण:
दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों के आपस में अधिक जुड़ने की प्रक्रिया।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार:
दो या दो से अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार।
प्रवास:
लोगों का रोजगार या निवास के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
गिरमिटिया मजदूर:
अनुबंध के आधार पर विदेशों में काम करने के लिए भेजे गए भारतीय मजदूर।
व्यापार अधिशेष:
निर्यात का मूल्य आयात से अधिक होना।
महामंदी:
1929 से शुरू हुआ गंभीर वैश्विक आर्थिक संकट।
बहुराष्ट्रीय कंपनी:
एक से अधिक देशों में आर्थिक गतिविधियाँ संचालित करने वाली कंपनी।

27. परीक्षा के लिए VVI Points

  • रेशम मार्ग – एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाला प्राचीन व्यापारिक नेटवर्क
  • कोलंबस अमेरिका पहुँचा – 1492
  • वास्को-दा-गामा भारत पहुँचा – 1498
  • 19वीं सदी के तीन प्रमुख प्रवाह – व्यापार, श्रम और पूँजी
  • अनुबंधित भारतीय मजदूर – गिरमिटिया मजदूर
  • भारतीय अनुबंधित श्रम व्यवस्था समाप्त – 1921
  • प्रथम विश्व युद्ध – 1914–1918
  • महामंदी – 1929
  • द्वितीय विश्व युद्ध – 1939–1945
  • ब्रेटन वुड्स सम्मेलन – 1944
  • ब्रेटन वुड्स से जुड़ी प्रमुख संस्थाएँ – IMF और World Bank

28. महत्वपूर्ण लघु प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. भूमंडलीकरण क्या है?
उत्तर: दुनिया के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं, बाजारों, व्यापार और निवेश के आपस में अधिक जुड़ने की प्रक्रिया को भूमंडलीकरण कहते हैं।
प्रश्न 2. रेशम मार्ग क्या था?
उत्तर: रेशम मार्ग स्थल और समुद्री व्यापारिक मार्गों का विशाल नेटवर्क था, जो एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ता था।
प्रश्न 3. वास्को-दा-गामा भारत कब पहुँचा?
उत्तर: वास्को-दा-गामा 1498 में समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट पहुँचा।
प्रश्न 4. 19वीं शताब्दी की विश्व अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख प्रवाह कौन-से थे?
उत्तर: वस्तुओं का व्यापार, श्रम का प्रवास और पूँजी का अंतरराष्ट्रीय प्रवाह तीन प्रमुख प्रवाह थे।
प्रश्न 5. गिरमिटिया मजदूर किसे कहा जाता था?
उत्तर: निश्चित अवधि के अनुबंध पर विदेशों में काम करने के लिए भेजे गए भारतीय मजदूरों को गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था।
प्रश्न 6. व्यापार अधिशेष क्या है?
उत्तर: जब किसी देश के निर्यात का मूल्य उसके आयात से अधिक होता है, तो उसे व्यापार अधिशेष कहते हैं।
प्रश्न 7. तकनीक ने विश्व व्यापार को कैसे बढ़ाया?
उत्तर: रेलवे, भाप के जहाज, टेलीग्राफ और रेफ्रिजरेशन ने माल तथा सूचनाओं की आवाजाही को तेज और आसान बनाया, जिससे विश्व व्यापार का विस्तार हुआ।
प्रश्न 8. महामंदी कब शुरू हुई?
उत्तर: महामंदी 1929 में शुरू हुई।
प्रश्न 9. महामंदी का भारतीय किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: कृषि वस्तुओं की कीमतों में भारी गिरावट से किसानों की आय कम हुई, जबकि उनके कई आर्थिक दायित्व बने रहे। इससे उन पर आर्थिक दबाव बढ़ा।
प्रश्न 10. ब्रेटन वुड्स सम्मेलन कब हुआ?
उत्तर: ब्रेटन वुड्स सम्मेलन 1944 में हुआ।
प्रश्न 11. ब्रेटन वुड्स से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक प्रमुख संस्थाएँ हैं।
प्रश्न 12. बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है?
उत्तर: ऐसी कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन, निवेश या व्यापारिक गतिविधियाँ संचालित करती है, बहुराष्ट्रीय कंपनी कहलाती है।

29. महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. 19वीं शताब्दी में विश्व अर्थव्यवस्था के विकास का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

19वीं शताब्दी में दुनिया के विभिन्न देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से बढ़े।

इस दौर में वस्तुओं का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ा।

लाखों लोग रोजगार की तलाश में एक देश से दूसरे देश गए।

पूँजीपति दूसरे देशों में निवेश करने लगे।

रेलवे और भाप के जहाजों ने परिवहन को तेज किया।

टेलीग्राफ ने सूचनाओं के आदान-प्रदान की गति बढ़ाई।

इस प्रकार वस्तु, श्रम और पूँजी के प्रवाह ने विश्व अर्थव्यवस्था को पहले से अधिक आपस में जोड़ दिया।

प्रश्न 2. गिरमिटिया मजदूरों की व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

उत्तर:

19वीं शताब्दी में भारत के अनेक गरीब मजदूरों को अनुबंध के आधार पर विदेशों में काम करने के लिए भेजा गया।

इन मजदूरों को गिरमिटिया मजदूर कहा गया।

वे मॉरीशस, फिजी और कैरेबियाई क्षेत्रों सहित कई उपनिवेशों में गए।

वे मुख्य रूप से बागानों, खानों और निर्माण कार्यों में काम करते थे।

गरीबी, रोजगार की कमी और बेहतर आय की आशा उनके प्रवास के प्रमुख कारण थे।

कई स्थानों पर उनकी काम और रहने की परिस्थितियाँ कठिन थीं।

भारतीय अनुबंधित श्रम व्यवस्था को 1921 तक समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 3. महामंदी के कारण विश्व और भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

1929 से शुरू हुई महामंदी ने विश्व अर्थव्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया।

औद्योगिक उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में गिरावट आई।

बेरोजगारी बढ़ी और कृषि वस्तुओं की कीमतें गिर गईं।

भारत भी विश्व बाजार से जुड़ा था, इसलिए यहाँ भी आयात-निर्यात प्रभावित हुआ।

कृषि उत्पादों की कीमतें गिरने से किसानों की आय कम हुई।

किसानों के आर्थिक दायित्व उसी अनुपात में कम नहीं हुए, इसलिए उनकी कठिनाइयाँ बढ़ीं।

प्रश्न 4. आधुनिक भूमंडलीकरण के प्रमुख कारणों और प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:

आधुनिक भूमंडलीकरण को तेज परिवहन, संचार तकनीक, इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय निवेश ने गति दी।

कंटेनर परिवहन से माल ढुलाई सस्ती और तेज हुई।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कई देशों में उत्पादन और निवेश करना शुरू किया।

इससे विश्व बाजार पहले से अधिक जुड़ गया।

नई तकनीक और वस्तुओं का प्रसार तेजी से हुआ।

लेकिन छोटे उत्पादकों को बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी।

इसलिए भूमंडलीकरण ने नए आर्थिक अवसरों के साथ नई चुनौतियाँ भी पैदा कीं।

30. Quick Revision – पूरा Chapter एक नजर में

विश्व व्यापार का विकास

प्राचीन व्यापारिक मार्ग

रेशम मार्ग

समुद्री मार्गों की खोज

उपनिवेशवाद

औद्योगीकरण

वस्तु + श्रम + पूँजी का प्रवाह

विश्व बाजार का विस्तार

आधुनिक भूमंडलीकरण

20वीं शताब्दी का क्रम

1914–1918 – प्रथम विश्व युद्ध

1929 – महामंदी

1939–1945 – द्वितीय विश्व युद्ध

1944 – ब्रेटन वुड्स व्यवस्था

IMF और World Bank

युद्धोत्तर आर्थिक पुनर्निर्माण

आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था

10 बातें जरूर याद रखें

  1. भूमंडलीकरण की जड़ें आधुनिक समय से बहुत पहले तक जाती हैं।
  2. रेशम मार्ग प्राचीन विश्व व्यापार का महत्वपूर्ण नेटवर्क था।
  3. 1492 में कोलंबस अमेरिका पहुँचा।
  4. 1498 में वास्को-दा-गामा भारत पहुँचा।
  5. 19वीं सदी में वस्तु, श्रम और पूँजी के प्रवाह का विस्तार हुआ।
  6. अनुबंधित भारतीय मजदूरों को गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था।
  7. प्रथम विश्व युद्ध 1914–1918 तक चला।
  8. 1929 में महामंदी शुरू हुई।
  9. 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन हुआ।
  10. आधुनिक भूमंडलीकरण में परिवहन, इंटरनेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बड़ी भूमिका है।