Class 10 Science Chapter 15 हमारा पर्यावरण Notes in Hindi

Class 10 Science Chapter 15 हमारा पर्यावरण Notes in Hindi

Class 10 Science Chapter 15 – हमारा पर्यावरण
Our Environment

इस अध्याय में हम अपने पर्यावरण, पारितंत्र, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल, पोषण स्तर, ऊर्जा प्रवाह, अपघटक, जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों और पर्यावरण पर मानव गतिविधियों के प्रभाव का अध्ययन करेंगे।

यह अध्याय बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से खाद्य श्रृंखला, 10% नियम, अपघटक, जैव आवर्धन और ओजोन परत से प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

1. पर्यावरण (Environment)

परिभाषा: हमारे चारों ओर उपस्थित सभी जैविक और अजैविक घटक, जो किसी न किसी प्रकार से जीवों को प्रभावित करते हैं, मिलकर पर्यावरण (Environment) बनाते हैं।

पर्यावरण में केवल पेड़-पौधे और जीव-जंतु ही शामिल नहीं होते, बल्कि वायु, जल, मिट्टी, तापमान, सूर्य का प्रकाश तथा अन्य भौतिक कारक भी इसके महत्वपूर्ण भाग हैं।

पर्यावरण के दो मुख्य घटक होते हैं:

  • जैविक घटक (Biotic Components) – पौधे, जीव-जंतु, मनुष्य, जीवाणु, कवक आदि।
  • अजैविक घटक (Abiotic Components) – वायु, जल, मिट्टी, प्रकाश, तापमान और खनिज आदि।

2. पारितंत्र (Ecosystem)

परिभाषा: किसी क्षेत्र में रहने वाले जीवों तथा उनके अजैविक पर्यावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं से बनी कार्यात्मक इकाई को पारितंत्र या Ecosystem कहते हैं।

उदाहरण के लिए जंगल, तालाब, झील, नदी, घास का मैदान और खेत सभी पारितंत्र के उदाहरण हैं।

पारितंत्र की संरचना Structure of Ecosystem
पारितंत्र की संरचना – Structure of Ecosystem

प्राकृतिक पारितंत्र

जो पारितंत्र प्रकृति में स्वयं विकसित होते हैं उन्हें प्राकृतिक पारितंत्र कहते हैं। जैसे – जंगल, तालाब, झील, समुद्र आदि।

कृत्रिम पारितंत्र

जिन पारितंत्रों का निर्माण और रखरखाव मनुष्य द्वारा किया जाता है, उन्हें कृत्रिम पारितंत्र कहते हैं। जैसे – खेत, बगीचा और Aquarium।

3. पारितंत्र के घटक

पारितंत्र के घटकों को मुख्य रूप से दो वर्गों में बाँटा जाता है:

(A) अजैविक घटक

निर्जीव भौतिक तथा रासायनिक कारक अजैविक घटक कहलाते हैं। इनमें सूर्य का प्रकाश, तापमान, जल, वायु, मिट्टी और खनिज शामिल हैं।

(B) जैविक घटक

जीवित घटकों को तीन मुख्य समूहों में बाँटा जाता है:

  • उत्पादक (Producers)
  • उपभोक्ता (Consumers)
  • अपघटक (Decomposers)

4. उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक

उत्पादक (Producers)

वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उत्पादक कहलाते हैं।

हरे पौधे और शैवाल प्रमुख उत्पादक हैं। सूर्य पारितंत्र में ऊर्जा का मूल स्रोत है और उत्पादक इस सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं।

उपभोक्ता (Consumers)

जो जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते तथा भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें उपभोक्ता कहते हैं।

उपभोक्ता कई प्रकार के होते हैं:

  • प्राथमिक उपभोक्ता: शाकाहारी जीव, जैसे हिरण, खरगोश, टिड्डा।
  • द्वितीयक उपभोक्ता: प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाने वाले जीव।
  • तृतीयक उपभोक्ता: उच्च स्तर के मांसाहारी जीव।

अपघटक (Decomposers)

जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव मृत जीवों तथा जैविक अपशिष्टों को सरल पदार्थों में विघटित करते हैं। इन्हें अपघटक कहते हैं।

5. खाद्य श्रृंखला (Food Chain)

जीवों की वह क्रमिक श्रृंखला जिसमें एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में ग्रहण करता है और भोजन तथा ऊर्जा एक जीव से दूसरे जीव में पहुँचती है, खाद्य श्रृंखला कहलाती है।
खाद्य श्रृंखला Food Chain
खाद्य श्रृंखला – Food Chain
घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज

इस श्रृंखला में घास उत्पादक है। टिड्डा प्राथमिक उपभोक्ता, मेंढक द्वितीयक उपभोक्ता तथा साँप और बाज उच्च स्तर के उपभोक्ता हैं।

याद रखें: खाद्य श्रृंखला में तीर उस दिशा को दिखाता है जिस दिशा में भोजन और ऊर्जा का स्थानांतरण होता है।

6. खाद्य जाल (Food Web)

जब किसी पारितंत्र की अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं, तो उनसे बनने वाले जाल को खाद्य जाल (Food Web) कहते हैं।
खाद्य जाल Food Web
खाद्य जाल – Food Web

एक जीव कई प्रकार के जीवों को खा सकता है और स्वयं भी एक से अधिक जीवों का भोजन बन सकता है। इसी कारण प्राकृतिक पारितंत्र में खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ी रहती हैं।

खाद्य जाल पारितंत्र को अधिक स्थिर बनाता है क्योंकि किसी एक खाद्य स्रोत की कमी होने पर जीव दूसरे उपलब्ध खाद्य स्रोत का उपयोग कर सकते हैं।

7. पोषण स्तर (Trophic Levels)

खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण या स्तर को पोषण स्तर (Trophic Level) कहा जाता है।
पोषण स्तर Trophic Levels
खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषण स्तर
पोषण स्तर जीव उदाहरण
प्रथम उत्पादक हरे पौधे
द्वितीय प्राथमिक उपभोक्ता टिड्डा, हिरण
तृतीय द्वितीयक उपभोक्ता मेंढक
चतुर्थ तृतीयक उपभोक्ता साँप, बाज

8. पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह एवं 10% नियम

पारितंत्र में ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है। हरे पौधे सूर्य की ऊर्जा को प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन में संचित रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। यह ऊर्जा खाद्य श्रृंखला के माध्यम से एक पोषण स्तर से अगले स्तर तक जाती है।

10 प्रतिशत ऊर्जा नियम 10 Percent Law
पोषण स्तरों में ऊर्जा का स्थानांतरण – 10% नियम

10% नियम (Ten Percent Law)

एक पोषण स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का केवल लगभग 10 प्रतिशत भाग अगले पोषण स्तर तक पहुँचता है। शेष ऊर्जा का बड़ा भाग जीवों की जैविक क्रियाओं तथा ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में खर्च हो जाता है।

उदाहरण:

10000 J → 1000 J → 100 J → 10 J

यदि उत्पादकों में 10,000 जूल ऊर्जा उपलब्ध है तो प्राथमिक उपभोक्ता तक लगभग 1,000 जूल, द्वितीयक उपभोक्ता तक लगभग 100 जूल और अगले स्तर तक लगभग 10 जूल ऊर्जा पहुँच सकती है।

परीक्षा बिंदु: खाद्य श्रृंखलाएँ सामान्यतः बहुत लंबी नहीं होतीं क्योंकि प्रत्येक अगले पोषण स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा बहुत कम होती जाती है।

ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय क्यों है?

सूर्य से प्राप्त ऊर्जा उत्पादकों में जाती है, फिर उत्पादकों से उपभोक्ताओं में पहुँचती है। प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है और वह वापस पिछले पोषण स्तर पर नहीं लौटता। इसलिए पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।

9. अपघटक की भूमिका

अपघटक की भूमिका Role of Decomposers
अपघटक द्वारा पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण

अपघटक पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जीवाणु और कवक मृत पौधों, मृत जीवों और जैविक अपशिष्टों को विघटित करके सरल पदार्थों में बदल देते हैं।

अपघटकों के प्रमुख कार्य:

  • मृत जीवों और जैविक कचरे का विघटन करना।
  • पर्यावरण को मृत जैविक पदार्थों से मुक्त रखना।
  • पोषक तत्वों को वापस मिट्टी में पहुँचाना।
  • पदार्थों के प्राकृतिक पुनर्चक्रण में सहायता करना।
  • मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में योगदान देना।
यदि अपघटक न हों तो क्या होगा?
मृत जीव और जैविक अपशिष्ट लगातार जमा होते जाएँगे तथा पोषक तत्वों का प्राकृतिक पुनर्चक्रण बाधित हो जाएगा।

10. जैव आवर्धन (Biological Magnification)

कुछ हानिकारक और अपघटित न होने वाले रासायनिक पदार्थों की सांद्रता का खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर बढ़ते जाना जैव आवर्धन कहलाता है।

कीटनाशक जैसे कुछ रसायन आसानी से विघटित नहीं होते। वे मिट्टी या जल में पहुँचकर पौधों और छोटे जीवों में प्रवेश करते हैं और खाद्य श्रृंखला के माध्यम से उच्च उपभोक्ताओं तक पहुँचते हैं।

खाद्य श्रृंखला के शीर्ष स्तर पर स्थित जीवों में इन पदार्थों की सांद्रता सबसे अधिक हो सकती है।

उदाहरण: यदि किसी जल स्रोत में हानिकारक रसायन मौजूद हैं, तो वे प्लवक → छोटी मछली → बड़ी मछली → मनुष्य की खाद्य श्रृंखला के माध्यम से बढ़ती सांद्रता में पहुँच सकते हैं।

11. जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Biodegradable Substances): वे पदार्थ जिन्हें जीवाणु, कवक तथा अन्य जैविक प्रक्रियाएँ सरल पदार्थों में विघटित कर सकती हैं।

उदाहरण – भोजन का बचा हुआ भाग, कागज, पत्तियाँ, लकड़ी, फल-सब्जियों के छिलके आदि।

अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ (Non-Biodegradable Substances): वे पदार्थ जिन्हें प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से विघटित नहीं किया जा सकता।

उदाहरण – प्लास्टिक, काँच, कुछ धातुएँ तथा अनेक कृत्रिम रसायन।

जैव निम्नीकरणीय अजैव निम्नीकरणीय
सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित होते हैं। आसानी से विघटित नहीं होते।
प्राकृतिक पुनर्चक्रण संभव है। लंबे समय तक पर्यावरण में रह सकते हैं।
उदाहरण: पत्तियाँ, भोजन, कागज उदाहरण: प्लास्टिक, काँच

3R सिद्धांत

  • Reduce: अनावश्यक वस्तुओं और कचरे की मात्रा कम करना।
  • Reuse: वस्तुओं का दोबारा उपयोग करना।
  • Recycle: उपयोग की गई सामग्री को संसाधित करके नई वस्तु बनाना।

12. ओजोन परत (Ozone Layer)

ओजोन ऑक्सीजन का एक रूप है जिसका अणु तीन ऑक्सीजन परमाणुओं (O₃) से मिलकर बना होता है।

वायुमंडल के ऊपरी भाग में उपस्थित ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Rays) के बड़े भाग को अवशोषित कर पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।

ओजोन परत का महत्व

  • हानिकारक UV किरणों को अवशोषित करती है।
  • जीवों को UV विकिरण के हानिकारक प्रभावों से बचाती है।
  • पौधों और अन्य जीवों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ओजोन क्षय (Ozone Depletion)

कुछ रसायन, विशेषकर CFCs (Chlorofluorocarbons), समतापमंडल में पहुँचकर ओजोन को नुकसान पहुँचा सकते हैं। CFC का उपयोग पुराने प्रकार के रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर और कुछ एरोसोल उत्पादों में किया जाता था।

बहुत महत्वपूर्ण: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है।

13. कार्बन चक्र (Carbon Cycle)

कार्बन चक्र Carbon Cycle
प्रकृति में कार्बन का चक्रण – Carbon Cycle
प्रकृति में कार्बन का वायुमंडल, जीवों, मिट्टी, महासागरों तथा अन्य स्रोतों के बीच लगातार स्थानांतरण कार्बन चक्र कहलाता है।

हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण के समय वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं। यह कार्बन भोजन के रूप में पौधों में संचित हो जाता है।

जब जानवर पौधों या अन्य जीवों को खाते हैं तो कार्बन उनके शरीर में पहुँचता है। श्वसन, अपघटन और ईंधनों के दहन द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड फिर वायुमंडल में पहुँचती है।

14. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)

नाइट्रोजन चक्र Nitrogen Cycle
प्रकृति में नाइट्रोजन का चक्रण – Nitrogen Cycle
वायुमंडल, मिट्टी, पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों के बीच नाइट्रोजन का लगातार चक्रण नाइट्रोजन चक्र कहलाता है।

वायुमंडल में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है, लेकिन अधिकांश पौधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन का सीधे उपयोग नहीं कर सकते।

नाइट्रोजन स्थिरीकरण

कुछ जीवाणु, जैसे Rhizobium, वायुमंडलीय नाइट्रोजन को ऐसे यौगिकों में बदलने में सहायता करते हैं जिन्हें पौधे उपयोग कर सकें। बिजली चमकने जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाएँ भी नाइट्रोजन स्थिरीकरण में योगदान देती हैं।

पौधों और जीवों में नाइट्रोजन

पौधे मिट्टी से नाइट्रोजन यौगिक ग्रहण करते हैं। जानवर पौधों या अन्य जानवरों को खाकर नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं। नाइट्रोजन प्रोटीन तथा अन्य महत्वपूर्ण जैव-अणुओं के निर्माण में आवश्यक है।

अपघटन और पुनर्चक्रण

जीवों की मृत्यु के बाद अपघटक उनके नाइट्रोजन युक्त पदार्थों को विघटित करते हैं। विभिन्न जीवाणुओं की क्रिया से नाइट्रोजन यौगिकों का परिवर्तन होता रहता है और अंततः कुछ नाइट्रोजन फिर वायुमंडल में वापस पहुँच जाती है।

15. पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव

पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव
पारितंत्र में मानव हस्तक्षेप – Human Interference in Ecosystem

मानव गतिविधियाँ पर्यावरण और प्राकृतिक पारितंत्रों को बड़े स्तर पर प्रभावित कर सकती हैं। संसाधनों का असंतुलित उपयोग पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

वनों की कटाई

वनों की अत्यधिक कटाई से जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होते हैं, जैव विविधता प्रभावित होती है तथा मिट्टी के कटाव की समस्या बढ़ सकती है।

प्रदूषण

औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक, वाहन और अन्य स्रोत वायु, जल तथा मिट्टी को प्रदूषित कर सकते हैं। इसका प्रभाव मनुष्य सहित पूरे पारितंत्र पर पड़ता है।

अतिदोहन (Overexploitation)

प्राकृतिक संसाधनों का उनकी पुनःपूर्ति की क्षमता से अधिक उपयोग अतिदोहन कहलाता है। अत्यधिक शिकार, अत्यधिक मछली पकड़ना और संसाधनों का अनियंत्रित उपयोग इसके उदाहरण हैं।

जैव विविधता में कमी

आवास विनाश, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण कई प्रजातियों की संख्या कम हो सकती है।

16. पर्यावरण संरक्षण के उपाय

  • पेड़ों की कटाई कम करना और वृक्षारोपण बढ़ाना।
  • प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग को कम करना।
  • जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय कचरे को अलग रखना।
  • Reduce, Reuse और Recycle के सिद्धांत का पालन करना।
  • जल और ऊर्जा की बचत करना।
  • वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना।
  • प्रदूषण कम करने के उपाय अपनाना।
  • प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।

17. खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में अंतर

खाद्य श्रृंखला खाद्य जाल
भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण का एक सीधा क्रम है। अनेक खाद्य श्रृंखलाओं का आपस में जुड़ा जाल है।
ऊर्जा प्रवाह का एक मार्ग दर्शाती है। ऊर्जा प्रवाह के अनेक मार्ग दर्शाता है।
तुलनात्मक रूप से सरल होती है। अधिक जटिल होती है।

18. परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण बिंदु

  • सूर्य पारितंत्र में ऊर्जा का मूल स्रोत है।
  • हरे पौधे प्रथम पोषण स्तर पर होते हैं।
  • खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण को पोषण स्तर कहते हैं।
  • अगले पोषण स्तर तक लगभग 10% ऊर्जा पहुँचती है।
  • पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।
  • जीवाणु और कवक प्रमुख अपघटक हैं।
  • अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ लंबे समय तक पर्यावरण में रह सकते हैं।
  • खाद्य श्रृंखला में हानिकारक पदार्थों की सांद्रता बढ़ना जैव आवर्धन है।
  • ओजोन का रासायनिक सूत्र O₃ है।
  • ओजोन परत UV किरणों से सुरक्षा प्रदान करती है।

19. महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. पारितंत्र क्या है?

उत्तर: किसी क्षेत्र के जीवों और उनके अजैविक पर्यावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं से बनी कार्यात्मक इकाई पारितंत्र कहलाती है।

प्रश्न 2. खाद्य श्रृंखला क्या है?

उत्तर: जीवों का वह क्रम जिसमें एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में ग्रहण करता है और ऊर्जा एक जीव से दूसरे जीव तक पहुँचती है, खाद्य श्रृंखला कहलाती है।

प्रश्न 3. पोषण स्तर किसे कहते हैं?

उत्तर: खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण या स्तर को पोषण स्तर कहते हैं।

प्रश्न 4. 10% नियम क्या है?

उत्तर: खाद्य श्रृंखला में एक पोषण स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का लगभग 10 प्रतिशत भाग ही अगले पोषण स्तर तक पहुँचता है।

प्रश्न 5. अपघटक कौन होते हैं?

उत्तर: जीवाणु और कवक जैसे जीव जो मृत जैविक पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित करते हैं, अपघटक कहलाते हैं।

प्रश्न 6. अपघटकों का क्या महत्व है?

उत्तर: अपघटक मृत जीवों और जैविक अपशिष्टों का विघटन करते हैं तथा पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस पहुँचाकर पदार्थों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं।

प्रश्न 7. जैव आवर्धन क्या है?

उत्तर: खाद्य श्रृंखला में उच्च पोषण स्तरों की ओर जाने पर कुछ अविघटनीय हानिकारक पदार्थों की सांद्रता का बढ़ना जैव आवर्धन कहलाता है।

प्रश्न 8. ओजोन परत हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों के बड़े भाग को अवशोषित करके पृथ्वी पर जीवों की रक्षा करती है।

प्रश्न 9. जैव निम्नीकरणीय पदार्थ क्या हैं?

उत्तर: वे पदार्थ जिन्हें सूक्ष्मजीव प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा सरल पदार्थों में विघटित कर सकते हैं, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं।

प्रश्न 10. खाद्य जाल क्या है?

उत्तर: किसी पारितंत्र में आपस में जुड़ी अनेक खाद्य श्रृंखलाओं के जाल को खाद्य जाल कहते हैं।

प्रश्न 11. ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय क्यों होता है?

उत्तर: प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का बड़ा भाग जैविक क्रियाओं और ऊष्मा के रूप में खर्च हो जाता है और वह वापस पिछले स्तर पर नहीं लौटता। इसलिए ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।

प्रश्न 12. CFC का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: CFC वायुमंडल की ओजोन परत को क्षति पहुँचा सकते हैं, जिससे हानिकारक UV किरणों से मिलने वाली प्राकृतिक सुरक्षा कम हो सकती है।

20. Quick Revision

  • Environment: जीवों के चारों ओर उपस्थित जैविक और अजैविक परिस्थितियाँ।
  • Ecosystem: जीव तथा उनका अजैविक पर्यावरण एक कार्यात्मक इकाई के रूप में।
  • Producer: अपना भोजन स्वयं बनाने वाले जीव।
  • Consumer: भोजन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर जीव।
  • Decomposer: मृत जैविक पदार्थों का अपघटन करने वाले जीव।
  • Food Chain: भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण का क्रम।
  • Food Web: आपस में जुड़ी अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ।
  • Trophic Level: खाद्य श्रृंखला का प्रत्येक चरण।
  • 10% Rule: अगले पोषण स्तर तक लगभग 10% ऊर्जा पहुँचती है।
  • Biomagnification: उच्च पोषण स्तर पर हानिकारक पदार्थों की बढ़ती सांद्रता।
  • Ozone: O₃; UV किरणों से सुरक्षा में महत्वपूर्ण।
  • 3R: Reduce, Reuse, Recycle.