Class 10 Science Chapter 14
ऊर्जा के स्रोत
Sources of Energy – सम्पूर्ण हिंदी नोट्स
विषय-सूची
- ऊर्जा का स्रोत
- अच्छे ऊर्जा स्रोत के गुण
- ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
- अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
- जीवाश्म ईंधन
- ताप विद्युत संयंत्र
- जल विद्युत ऊर्जा
- जैवमात्रा
- बायोगैस
- पवन ऊर्जा
- सौर ऊर्जा
- सौर कुकर
- सौर सेल एवं सौर पैनल
- समुद्र से ऊर्जा
- ज्वारीय ऊर्जा
- तरंग ऊर्जा
- भूतापीय ऊर्जा
- नाभिकीय ऊर्जा
- ऊर्जा स्रोत और पर्यावरण
- महत्वपूर्ण अंतर
- महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
- Quick Revision
1. ऊर्जा का स्रोत (Source of Energy)
जिस वस्तु, पदार्थ या प्राकृतिक प्रक्रिया से उपयोगी रूप में ऊर्जा प्राप्त की जाती है, उसे ऊर्जा का स्रोत कहते हैं।
उदाहरण के लिए कोयला जलाने से ऊष्मा ऊर्जा, बहते हुए जल से यांत्रिक ऊर्जा, सूर्य से सौर ऊर्जा तथा यूरेनियम के नाभिकीय विखंडन से नाभिकीय ऊर्जा प्राप्त होती है।
हमें ऊर्जा की आवश्यकता क्यों होती है?
- भोजन पकाने के लिए
- घरों और सड़कों को प्रकाशित करने के लिए
- वाहनों को चलाने के लिए
- उद्योगों और मशीनों के संचालन के लिए
- कृषि कार्यों और सिंचाई के लिए
- विद्युत उत्पादन के लिए
- घरेलू विद्युत उपकरणों के संचालन के लिए
2. एक अच्छे ऊर्जा स्रोत के गुण
हर ऊर्जा स्रोत समान रूप से उपयोगी नहीं होता। किसी ऊर्जा स्रोत की उपयोगिता उसकी ऊर्जा क्षमता, उपलब्धता, लागत, परिवहन तथा पर्यावरणीय प्रभाव पर निर्भर करती है।
एक आदर्श अथवा अच्छे ऊर्जा स्रोत में निम्न गुण होने चाहिए:
- अधिक ऊर्जा प्रदान करे: कम मात्रा में ईंधन से अधिक मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होनी चाहिए।
- आसानी से उपलब्ध हो: ऊर्जा स्रोत को प्राप्त करने में अत्यधिक कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
- कम लागत वाला हो: उसका उत्पादन और उपयोग आर्थिक दृष्टि से लाभकारी होना चाहिए।
- भंडारण में आसान हो: ऊर्जा स्रोत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
- परिवहन में आसान हो: उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से पहुँचाया जा सके।
- प्रदूषण कम करे: ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया से पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान होना चाहिए।
- उपयोग में सुरक्षित हो: ऊर्जा स्रोत का उपयोग मनुष्य तथा अन्य जीवों के लिए अत्यधिक जोखिमपूर्ण नहीं होना चाहिए।
3. ऊर्जा के स्रोतों का वर्गीकरण
उपलब्धता और पुनः प्राप्त होने की क्षमता के आधार पर ऊर्जा स्रोतों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है:
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Renewable Sources)
- अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Non-Renewable Sources)
4. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Renewable Sources of Energy)
वे ऊर्जा स्रोत जो प्रकृति में लगातार उपलब्ध रहते हैं अथवा प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा अपेक्षाकृत कम समय में पुनः प्राप्त हो जाते हैं, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।
उदाहरण
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- जल ऊर्जा
- बायोगैस
- ज्वारीय ऊर्जा
- तरंग ऊर्जा
- भूतापीय ऊर्जा
लाभ
- इनके समाप्त होने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।
- अधिकांश स्रोत पर्यावरण के लिए जीवाश्म ईंधनों की तुलना में स्वच्छ होते हैं।
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
- दीर्घकालीन ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए उपयोगी हैं।
सीमाएँ
- कई नवीकरणीय स्रोत मौसम और स्थान पर निर्भर करते हैं।
- प्रारंभिक संयंत्र लागत अधिक हो सकती है।
- ऊर्जा उत्पादन हमेशा समान दर से नहीं होता।
- ऊर्जा के भंडारण की आवश्यकता पड़ सकती है।
5. अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (Non-Renewable Sources)
वे ऊर्जा स्रोत जिनका भंडार पृथ्वी पर सीमित है और जिन्हें उपयोग करने के बाद मानव समय-मान पर शीघ्र पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता, अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।
उदाहरण
- कोयला
- पेट्रोलियम
- प्राकृतिक गैस
- नाभिकीय ईंधन जैसे यूरेनियम
6. जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels)
करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर रहने वाले पौधों और जीवों के अवशेष भूगर्भीय परिवर्तनों, उच्च ताप और दाब के कारण धीरे-धीरे ईंधनों में परिवर्तित हो गए। इन ईंधनों को जीवाश्म ईंधन कहते हैं।
मुख्य जीवाश्म ईंधन
- कोयला (Coal)
- पेट्रोलियम (Petroleum)
- प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
जीवाश्म ईंधनों के लाभ
- इनसे बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- इनका उपयोग लंबे समय से विकसित तकनीकों द्वारा किया जा रहा है।
- इनका भंडारण और परिवहन कई परिस्थितियों में सुविधाजनक है।
- उद्योग और परिवहन क्षेत्र में इनका व्यापक उपयोग होता है।
जीवाश्म ईंधनों की समस्याएँ
- इनका भंडार सीमित है।
- दहन से कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है।
- कोयले और पेट्रोलियम के दहन से वायु प्रदूषण हो सकता है।
- कुछ ईंधनों के दहन से सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड निकल सकते हैं।
- ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में योगदान करते हैं।
7. ताप विद्युत संयंत्र (Thermal Power Plant)
वह विद्युत संयंत्र जिसमें कोयला या अन्य ईंधन जलाकर उत्पन्न ऊष्मा से पानी को भाप में बदला जाता है और उस भाप से टरबाइन घुमाकर विद्युत उत्पन्न की जाती है, ताप विद्युत संयंत्र कहलाता है।
कार्यविधि
- कोयले को बॉयलर में जलाया जाता है।
- उत्पन्न ऊष्मा से पानी गर्म होकर उच्च दाब की भाप में बदलता है।
- भाप टरबाइन की ब्लेडों पर गिरती है और टरबाइन घूमता है।
- टरबाइन जनित्र (Generator) से जुड़ा होता है।
- जनित्र के घूमने से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है।
- भाप को संघनित्र में ठंडा करके पुनः पानी में बदला जा सकता है।
लाभ
- बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन किया जा सकता है।
- आवश्यकता के अनुसार लंबे समय तक बिजली उत्पन्न की जा सकती है।
हानियाँ
- कोयला अनवीकरणीय संसाधन है।
- वायु प्रदूषण उत्पन्न होता है।
- कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है।
- राख तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ उत्पन्न होते हैं।
8. जल विद्युत ऊर्जा (Hydroelectric Energy)
बहते अथवा ऊँचाई पर संचित जल की स्थितिज और गतिज ऊर्जा का उपयोग करके उत्पन्न विद्युत को जल विद्युत ऊर्जा कहते हैं।
कार्यविधि
- नदी के जल को बाँध बनाकर ऊँचाई पर संचित किया जाता है।
- संचित जल में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होती है।
- जल को पाइप या Penstock से नीचे भेजा जाता है।
- तेज गति से बहता जल टरबाइन को घुमाता है।
- टरबाइन जनित्र को घुमाता है।
- जनित्र विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है।
लाभ
- यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
- विद्युत उत्पादन के दौरान सीधे ईंधन का दहन नहीं होता।
- बाँध का जल सिंचाई में भी उपयोग किया जा सकता है।
बड़े बाँधों की समस्याएँ
- बड़े क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं।
- लोगों का विस्थापन हो सकता है।
- वन और प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं।
- स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन हो सकता है।
9. जैवमात्रा (Biomass)
पौधों और जीवों से प्राप्त ऐसे जैविक पदार्थ जिनका उपयोग ईंधन के रूप में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है, जैवमात्रा कहलाते हैं।
उदाहरण
- लकड़ी
- गोबर
- फसल अवशेष
- सूखी पत्तियाँ
- कृषि अपशिष्ट
लकड़ी और गोबर के सीधे दहन से धुआँ उत्पन्न हो सकता है और ऊर्जा का उपयोग भी हमेशा दक्षतापूर्वक नहीं होता। इसलिए जैवमात्रा को बेहतर ईंधन में परिवर्तित करना अधिक उपयोगी हो सकता है।
10. बायोगैस (Biogas)
गोबर, कृषि अपशिष्ट तथा अन्य जैविक पदार्थों का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन कराने पर बनने वाली ईंधन गैस को बायोगैस कहते हैं।
बायोगैस में मुख्य रूप से मीथेन होती है, जो इसके ईंधन गुण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है।
बायोगैस संयंत्र की कार्यविधि
- गोबर तथा पानी को मिलाकर घोल बनाया जाता है।
- घोल को मिश्रण टैंक से अपघटन कक्ष में भेजा जाता है।
- ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीव जैविक पदार्थों का अपघटन करते हैं।
- इस प्रक्रिया से बायोगैस उत्पन्न होती है।
- गैस को पाइप द्वारा उपयोग के स्थान तक पहुँचाया जाता है।
- बची हुई स्लरी खाद के रूप में उपयोग की जा सकती है।
बायोगैस के लाभ
- यह अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है।
- जैविक कचरे का उपयोग होता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी है।
- बची हुई स्लरी अच्छी जैविक खाद बन सकती है।
- गोबर को सीधे जलाने की आवश्यकता कम होती है।
11. पवन ऊर्जा (Wind Energy)
गतिशील वायु में उपस्थित गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते हैं। पवन टरबाइन की सहायता से इस ऊर्जा को यांत्रिक तथा फिर विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है।
कार्यविधि
- तेज हवा टरबाइन के ब्लेडों को घुमाती है।
- ब्लेडों से जुड़ा शाफ्ट घूमता है।
- शाफ्ट जनित्र को चलाता है।
- जनित्र विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है।
Wind Energy Farm क्या है?
किसी बड़े क्षेत्र में बड़ी संख्या में पवन टरबाइन लगाकर विद्युत उत्पादन करने की व्यवस्था को पवन ऊर्जा फार्म कहा जाता है।
लाभ
- ईंधन की आवश्यकता नहीं होती।
- पवन नवीकरणीय स्रोत है।
- संचालन के दौरान सीधे धुआँ उत्पन्न नहीं होता।
सीमाएँ
- पर्याप्त तेज तथा नियमित हवा की आवश्यकता होती है।
- बड़े भू-क्षेत्र की आवश्यकता हो सकती है।
- हर स्थान पर पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना व्यावहारिक नहीं है।
- प्रारंभिक स्थापना लागत अधिक हो सकती है।
12. सौर ऊर्जा (Solar Energy)
सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली प्रकाश और ऊष्मा ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं।
सूर्य पृथ्वी के लिए ऊर्जा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत है। पवन, जलचक्र तथा जैवमात्रा जैसे कई ऊर्जा स्रोत भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य की ऊर्जा पर निर्भर करते हैं।
सौर ऊर्जा के उपयोग
- सौर कुकर
- सौर जल तापक
- सौर सेल
- सौर पैनल
- सौर विद्युत संयंत्र
- दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति
लाभ
- नवीकरणीय स्रोत है।
- सूर्य का प्रकाश निःशुल्क उपलब्ध है।
- उपयोग के समय सीधे धुआँ उत्पन्न नहीं होता।
- दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी है।
सीमाएँ
- रात में सूर्य का प्रकाश उपलब्ध नहीं होता।
- बादल और मौसम ऊर्जा उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।
- बड़े पैमाने पर ऊर्जा के लिए बड़े क्षेत्र की आवश्यकता हो सकती है।
- ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता पड़ सकती है।
13. सौर कुकर (Solar Cooker)
वह उपकरण जो सूर्य के प्रकाश को ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित करके भोजन पकाने के लिए उपयोग करता है, सौर कुकर कहलाता है।
सौर कुकर की संरचना एवं कार्य
- कुकर का आंतरिक भाग सामान्यतः काला रखा जाता है ताकि अधिक ऊष्मा अवशोषित हो।
- काँच की प्लेट ऊष्मा को अंदर बनाए रखने में सहायता करती है।
- दर्पण या परावर्तक सूर्य की किरणों को कुकर की ओर निर्देशित कर सकता है।
- अंदर का तापमान बढ़ने पर भोजन पकता है।
लाभ
- ईंधन खर्च नहीं होता।
- धुआँ नहीं निकलता।
- सौर ऊर्जा का सीधा उपयोग होता है।
सीमाएँ
- रात में उपयोग नहीं किया जा सकता।
- बादल वाले दिनों में प्रभावशीलता कम हो सकती है।
- भोजन पकने में अधिक समय लग सकता है।
- हर प्रकार की cooking के लिए समान रूप से सुविधाजनक नहीं है।
14. सौर सेल एवं सौर पैनल (Solar Cell and Solar Panel)
सौर सेल की परिभाषा
वह युक्ति जो सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है, सौर सेल (Solar Cell) कहलाती है।
अनेक सौर सेलों को उचित रूप से जोड़कर बनाई गई व्यवस्था को सौर पैनल (Solar Panel) कहा जाता है।
सौर सेल के उपयोग
- कृत्रिम उपग्रह
- कैलकुलेटर
- सौर लैंप
- सड़क प्रकाश व्यवस्था
- दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली
- घरों की rooftop solar systems
लाभ
- चलने वाले यांत्रिक भाग बहुत कम या नहीं होते।
- संचालन के दौरान शोर कम होता है।
- दूरस्थ क्षेत्रों में उपयोगी है।
- सूर्य के प्रकाश से सीधे विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है।
सीमाएँ
- प्रारंभिक लागत अधिक हो सकती है।
- उत्पादन सूर्य के प्रकाश पर निर्भर करता है।
- रात्रि उपयोग के लिए बैटरी या अन्य ऊर्जा भंडारण आवश्यक हो सकता है।
15. समुद्र से प्राप्त ऊर्जा
समुद्र ऊर्जा का विशाल स्रोत है। समुद्र से विभिन्न रूपों में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। Class 10 स्तर पर इसके प्रमुख रूप हैं:
- ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)
- तरंग ऊर्जा (Wave Energy)
- महासागरीय तापीय ऊर्जा (Ocean Thermal Energy)
16. ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy)
चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण समुद्र के जल स्तर में नियमित रूप से होने वाली वृद्धि और कमी को ज्वार-भाटा कहते हैं। ज्वार के दौरान जल की गति अथवा जल स्तर के अंतर से प्राप्त ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं।
विद्युत कैसे बनाई जाती है?
उपयुक्त तटीय क्षेत्रों में बाँध अथवा बैराज बनाया जा सकता है। ज्वार के समय आने-जाने वाले जल को टरबाइन से प्रवाहित करके टरबाइन घुमाई जाती है, जो जनित्र के माध्यम से विद्युत उत्पन्न करती है।
सीमाएँ
- केवल उपयुक्त तटीय स्थानों पर संभव है।
- निर्माण लागत अधिक हो सकती है।
- समुद्री पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ सकता है।
17. तरंग ऊर्जा (Wave Energy)
समुद्र की सतह पर उत्पन्न तरंगों में निहित गतिज ऊर्जा को तरंग ऊर्जा कहते हैं।
विशेष उपकरणों द्वारा समुद्री तरंगों की ऊपर-नीचे या आगे-पीछे की गति को यांत्रिक गति में बदलकर जनित्र चलाया जा सकता है और विद्युत प्राप्त की जा सकती है।
लाभ
- नवीकरणीय स्रोत है।
- ईंधन जलाने की आवश्यकता नहीं होती।
सीमाएँ
- ऊर्जा उत्पादन समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
- उपयुक्त समुद्री तटों की आवश्यकता होती है।
- उपकरणों की स्थापना और रखरखाव महँगा हो सकता है।
18. महासागरीय तापीय ऊर्जा (Ocean Thermal Energy)
समुद्र की सतह के गर्म जल और गहराई में स्थित ठंडे जल के तापमान के अंतर का उपयोग करके प्राप्त ऊर्जा को महासागरीय तापीय ऊर्जा कहते हैं।
इस ऊर्जा का उपयोग तभी व्यावहारिक रूप से किया जा सकता है जब सतही और गहरे समुद्री जल के तापमान में पर्याप्त अंतर उपलब्ध हो।
19. भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy)
पृथ्वी के आंतरिक भाग में उपस्थित ऊष्मा से प्राप्त ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।
कुछ क्षेत्रों में पृथ्वी के अंदर अत्यधिक गर्म चट्टानों के संपर्क में आने से भूमिगत जल गर्म होकर भाप में बदल सकता है। इस भाप का उपयोग टरबाइन चलाने और विद्युत उत्पन्न करने में किया जा सकता है।
लाभ
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत माना जाता है।
- उपयुक्त स्थानों पर लगातार ऊर्जा उपलब्ध हो सकती है।
- जीवाश्म ईंधन के दहन की आवश्यकता नहीं होती।
सीमाएँ
- केवल विशिष्ट भूगर्भीय क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध है।
- ड्रिलिंग और संयंत्र निर्माण महँगा हो सकता है।
20. नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
परमाणु के नाभिक में होने वाले परिवर्तन के दौरान मुक्त होने वाली अत्यधिक ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं।
नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
जब किसी भारी परमाणु नाभिक, जैसे यूरेनियम के उपयुक्त समस्थानिक, पर न्यूट्रॉन की क्रिया से वह दो या अधिक हल्के नाभिकों में विभाजित होता है और साथ में बहुत अधिक ऊर्जा तथा अतिरिक्त न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन कहते हैं।
नाभिकीय विद्युत संयंत्र की कार्यविधि
- नाभिकीय रिएक्टर में नियंत्रित नाभिकीय विखंडन कराया जाता है।
- विखंडन से बड़ी मात्रा में ऊष्मा ऊर्जा उत्पन्न होती है।
- इस ऊष्मा का उपयोग भाप उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
- भाप टरबाइन को घुमाती है।
- टरबाइन जनित्र को चलाता है।
- जनित्र विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करता है।
नाभिकीय ऊर्जा के लाभ
- बहुत कम मात्रा के ईंधन से बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन संभव है।
- संचालन के दौरान जीवाश्म ईंधन आधारित संयंत्रों जैसा प्रत्यक्ष CO₂ उत्सर्जन नहीं होता।
समस्याएँ और सीमाएँ
- रेडियोधर्मी अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान चुनौतीपूर्ण है।
- संयंत्र में उच्च स्तर की सुरक्षा आवश्यक होती है।
- निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था की लागत अधिक होती है।
- दुर्घटना की स्थिति में गंभीर रेडियोधर्मी जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
21. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
वह प्रक्रिया जिसमें दो हल्के परमाणु नाभिक आपस में मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं और बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है, नाभिकीय संलयन कहलाती है।
सूर्य तथा अन्य तारों की ऊर्जा का मूल स्रोत नाभिकीय संलयन है। इसके लिए अत्यधिक उच्च तापमान और विशेष परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।
| नाभिकीय विखंडन | नाभिकीय संलयन |
|---|---|
| भारी नाभिक टूटता है। | हल्के नाभिक आपस में जुड़ते हैं। |
| नाभिकीय रिएक्टरों में नियंत्रित रूप से उपयोग किया जाता है। | सूर्य और तारों में स्वाभाविक रूप से होता है। |
| ऊर्जा मुक्त होती है। | बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त हो सकती है। |
22. ऊर्जा स्रोतों के उपयोग का पर्यावरण पर प्रभाव
ऊर्जा का उत्पादन और उपयोग पर्यावरण से पूरी तरह अलग नहीं है। लगभग प्रत्येक ऊर्जा तकनीक का किसी न किसी रूप में पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है।
जीवाश्म ईंधन
- वायु प्रदूषण उत्पन्न कर सकते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन बढ़ाते हैं।
- खनन से भूमि और पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।
जल विद्युत
- बड़े बाँधों से वन क्षेत्र डूब सकते हैं।
- लोगों का विस्थापन हो सकता है।
- नदी पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।
पवन ऊर्जा
- बड़े भू-क्षेत्र की आवश्यकता हो सकती है।
- कुछ स्थानों पर पक्षियों तथा स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव संभव है।
सौर ऊर्जा
- संचालन के दौरान अपेक्षाकृत स्वच्छ है।
- बड़े संयंत्रों के लिए भूमि की आवश्यकता होती है।
- पैनलों के निर्माण और जीवन-अंत अपशिष्ट का उचित प्रबंधन आवश्यक है।
नाभिकीय ऊर्जा
- रेडियोधर्मी अपशिष्ट उत्पन्न होता है।
- सुरक्षित भंडारण आवश्यक है।
- उच्च सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है।
23. ऊर्जा स्रोतों का विवेकपूर्ण उपयोग क्यों आवश्यक है?
ऊर्जा की माँग लगातार बढ़ रही है, जबकि अनेक पारंपरिक ऊर्जा संसाधन सीमित हैं। इसलिए ऊर्जा का उपयोग सोच-समझकर करना आवश्यक है।
ऊर्जा संरक्षण के उपाय
- अनावश्यक बिजली का उपयोग बंद करें।
- ऊर्जा-दक्ष उपकरणों का उपयोग करें।
- सार्वजनिक परिवहन और साझा परिवहन को बढ़ावा दें।
- जहाँ संभव हो सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करें।
- ईंधन और बिजली की अनावश्यक बर्बादी रोकें।
24. नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में अंतर
| आधार | नवीकरणीय स्रोत | अनवीकरणीय स्रोत |
|---|---|---|
| उपलब्धता | प्राकृतिक रूप से पुनः प्राप्त होते रहते हैं। | भंडार सीमित होता है। |
| समाप्त होने की संभावना | उचित उपयोग पर अपेक्षाकृत कम | लगातार उपयोग से समाप्त हो सकते हैं। |
| उदाहरण | सूर्य, पवन, जल, बायोगैस | कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस |
| पर्यावरणीय प्रभाव | अनेक स्रोत अपेक्षाकृत कम प्रदूषणकारी | विशेषकर जीवाश्म ईंधन अधिक प्रदूषणकारी हो सकते हैं। |
25. प्रमुख ऊर्जा स्रोत – एक नजर में
| ऊर्जा स्रोत | प्रकार | मुख्य उपयोग | मुख्य सीमा |
|---|---|---|---|
| कोयला | अनवीकरणीय | ताप विद्युत | प्रदूषण और सीमित भंडार |
| जल | नवीकरणीय | जल विद्युत | बड़े बाँधों का पर्यावरणीय प्रभाव |
| सूर्य | नवीकरणीय | ताप एवं विद्युत | सूर्य के प्रकाश पर निर्भरता |
| पवन | नवीकरणीय | विद्युत उत्पादन | तेज एवं नियमित हवा आवश्यक |
| बायोगैस | नवीकरणीय | ईंधन | जैविक सामग्री की नियमित आपूर्ति |
| भूतापीय | नवीकरणीय | विद्युत/ताप | स्थान विशेष पर उपलब्ध |
| नाभिकीय | अनवीकरणीय ईंधन आधारित | बड़े पैमाने पर विद्युत | रेडियोधर्मी अपशिष्ट और सुरक्षा |
26. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
उत्तर: अच्छा ऊर्जा स्रोत अधिक ऊर्जा देने वाला, आसानी से उपलब्ध, कम लागत वाला, भंडारण एवं परिवहन में आसान तथा कम प्रदूषणकारी होना चाहिए।
उत्तर: वे ऊर्जा स्रोत जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा लगातार पुनः उपलब्ध होते रहते हैं या अपेक्षाकृत कम समय में पुनः प्राप्त किए जा सकते हैं, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।
उत्तर: वे ऊर्जा स्रोत जिनका भंडार सीमित है और जिन्हें उपयोग के बाद मानव समय-मान पर शीघ्र पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता, अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।
उत्तर: प्राचीन पौधों और जीवों के अवशेषों से लाखों वर्षों में बने कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधन जीवाश्म ईंधन कहलाते हैं।
उत्तर: ईंधन जलाकर पानी से भाप बनाई जाती है। भाप टरबाइन घुमाती है और टरबाइन से जुड़ा जनित्र विद्युत उत्पन्न करता है।
उत्तर: ऊँचाई पर संचित या बहते जल की ऊर्जा का उपयोग करके उत्पन्न विद्युत को जल विद्युत ऊर्जा कहते हैं।
उत्तर: गोबर और अन्य जैविक पदार्थों के ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में सूक्ष्मजीवी अपघटन से प्राप्त ईंधन गैस को बायोगैस कहते हैं।
उत्तर: सौर सेल वह युक्ति है जो सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।
उत्तर: काली सतह ऊष्मीय विकिरण की अच्छी अवशोषक होती है, इसलिए यह अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करने में सहायता करती है।
उत्तर: पवन ऊर्जा के प्रभावी उपयोग के लिए पर्याप्त तेज और नियमित हवा की आवश्यकता होती है।
उत्तर: समुद्र में ज्वार-भाटा के कारण जल स्तर और जल गति में होने वाले परिवर्तन से प्राप्त ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं।
उत्तर: पृथ्वी के आंतरिक भाग की ऊष्मा से प्राप्त ऊर्जा भूतापीय ऊर्जा कहलाती है।
उत्तर: भारी परमाणु नाभिक के छोटे नाभिकों में विभाजित होने तथा इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ऊर्जा मुक्त होने की प्रक्रिया नाभिकीय विखंडन कहलाती है।
उत्तर: रेडियोधर्मी अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान और विकिरण सुरक्षा इसकी प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
उत्तर: बड़े क्षेत्र का जलमग्न होना और स्थानीय लोगों का विस्थापन दो प्रमुख समस्याएँ हैं।
उत्तर: उनका भंडार सीमित है तथा उनके दहन से वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।
27. परीक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण बिंदु
- अच्छे ऊर्जा स्रोत से कम मात्रा में अधिक उपयोगी ऊर्जा प्राप्त होनी चाहिए।
- कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन हैं।
- जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हैं।
- ताप विद्युत संयंत्र में ईंधन की रासायनिक ऊर्जा अंततः विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
- जल विद्युत में संचित जल की स्थितिज ऊर्जा का उपयोग होता है।
- बायोगैस में मीथेन प्रमुख ज्वलनशील घटक है।
- पवन ऊर्जा गतिशील वायु की गतिज ऊर्जा है।
- सौर सेल सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
- सौर कुकर में काली सतह ऊष्मा अवशोषण बढ़ाती है।
- ज्वारीय ऊर्जा समुद्र के ज्वार-भाटा से प्राप्त होती है।
- तरंग ऊर्जा समुद्री तरंगों की गति से प्राप्त होती है।
- भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा से प्राप्त होती है।
- नाभिकीय विखंडन से बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
- नाभिकीय ऊर्जा की प्रमुख चुनौती रेडियोधर्मी अपशिष्ट है।
- किसी ऊर्जा स्रोत का चयन करते समय लागत के साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी देखना चाहिए।
28. Quick Revision
- ऊर्जा स्रोत: जिससे उपयोगी ऊर्जा प्राप्त हो।
- नवीकरणीय: सौर, पवन, जल, बायोगैस, ज्वारीय, तरंग और भूतापीय ऊर्जा।
- अनवीकरणीय: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और नाभिकीय ईंधन।
- जीवाश्म ईंधन: कोयला + पेट्रोलियम + प्राकृतिक गैस।
- Thermal Power: ईंधन → ऊष्मा → भाप → टरबाइन → Generator → Electricity
- Hydroelectric Power: संचित जल → टरबाइन → Generator → Electricity
- Biogas: जैविक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से प्राप्त गैस।
- Wind Energy: गतिशील वायु की गतिज ऊर्जा।
- Solar Cell: सूर्य का प्रकाश → विद्युत ऊर्जा।
- Tidal Energy: ज्वार-भाटा से प्राप्त ऊर्जा।
- Wave Energy: समुद्री तरंगों से प्राप्त ऊर्जा।
- Geothermal Energy: पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा से प्राप्त ऊर्जा।
- Nuclear Energy: परमाणु नाभिक में परिवर्तन से प्राप्त ऊर्जा।
- Nuclear Fission: भारी नाभिक का छोटे नाभिकों में विभाजन।
- Nuclear Fusion: हल्के नाभिकों का मिलकर भारी नाभिक बनाना।
29. अध्याय सारांश
ऊर्जा आधुनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। पारंपरिक रूप से कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का व्यापक उपयोग किया गया है, लेकिन इनके सीमित भंडार तथा पर्यावरणीय प्रभावों के कारण नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का महत्व बढ़ता जा रहा है।
सौर, पवन, जल, बायोगैस, ज्वारीय, तरंग और भूतापीय ऊर्जा जैसे स्रोत दीर्घकालीन ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं नाभिकीय ऊर्जा बहुत कम ईंधन से बड़ी मात्रा में ऊर्जा दे सकती है, लेकिन इसके साथ रेडियोधर्मी अपशिष्ट और सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ जुड़ी हैं।
इसलिए किसी भी ऊर्जा स्रोत का चयन केवल उससे मिलने वाली ऊर्जा के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी उपलब्धता, लागत, दक्षता, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

