Chapter 1 – वास्तविक संख्याएँ
Real Numbers: Complete Notes, Theorems, Formulas and Solved Examples
Class 10 Maths Chapter 1 Notes में वास्तविक संख्याओं का पूरा सिद्धांत कक्षा 10 के स्तर के अनुसार समझाया गया है। इसमें संख्या-पद्धति की आवश्यक परिभाषाएँ, यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका और एल्गोरिथ्म, अंकगणित की आधारभूत प्रमेय, अभाज्य गुणनखंडन, HCF–LCM, अपरिमेय संख्याओं के प्रमाण तथा परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसार से संबंधित प्रमेय और हल सहित उदाहरण सम्मिलित हैं।
प्रत्येक विषय को परिभाषा → प्रमेय/नियम → चरणबद्ध विधि → हल सहित उदाहरण → परीक्षा में ध्यान रखने योग्य बातें के क्रम में प्रस्तुत किया गया है, इसलिए विद्यार्थी इसे अध्याय की संपूर्ण पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी—दोनों के लिए उपयोग कर सकते हैं।
अध्याय में क्या-क्या पढ़ेंगे?
- वास्तविक संख्या और संख्या-पद्धति के विभिन्न समूहों की पूर्ण परिभाषा।
- यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका तथा HCF निकालने का यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म।
- अंकगणित की आधारभूत प्रमेय और अभाज्य गुणनखंडन की अद्वितीयता।
- अभाज्य गुणनखंड विधि से HCF और LCM तथा उनके बीच संबंध।
- अपरिमेय संख्याओं को विरोधाभास विधि से सिद्ध करना।
- परिमेय संख्याओं के सांत और असांत आवर्ती दशमलव प्रसार की पहचान।
1. वास्तविक संख्याएँ क्या हैं?
परिभाषा: परिमेय संख्याओं और अपरिमेय संख्याओं के सम्मिलित समूह को वास्तविक संख्याओं का समूह कहते हैं। प्रत्येक वास्तविक संख्या को संख्या रेखा के किसी एक निश्चित बिंदु से प्रदर्शित किया जा सकता है और संख्या रेखा का प्रत्येक बिंदु किसी-न-किसी वास्तविक संख्या को निरूपित करता है। वास्तविक संख्याओं के समूह को R से दर्शाते हैं।
R = Q ∪ Q′
प्राकृतिक संख्याएँ (N)
वस्तुओं की गिनती के लिए प्रयुक्त संख्याएँ प्राकृतिक संख्याएँ कहलाती हैं। N = {1, 2, 3, 4, …}
पूर्ण संख्याएँ (W)
प्राकृतिक संख्याओं के समूह में शून्य को सम्मिलित करने पर पूर्ण संख्याओं का समूह प्राप्त होता है। W = {0, 1, 2, 3, …}
पूर्णांक (Z)
धनात्मक पूर्णांक, ऋणात्मक पूर्णांक और शून्य को मिलाकर पूर्णांकों का समूह बनता है। Z = {…, −2, −1, 0, 1, 2, …}
परिमेय संख्याएँ (Q)
वह संख्या जिसे p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p, q पूर्णांक और q ≠ 0 हो, परिमेय संख्या कहलाती है। जैसे 3/5, −7/2, 4 = 4/1।
अपरिमेय संख्याएँ (Q′)
वह वास्तविक संख्या जिसे p/q के रूप में व्यक्त न किया जा सके, अपरिमेय संख्या कहलाती है। इसका दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती होता है; जैसे √2, √3, √5, π।
वास्तविक संख्याएँ (R)
परिमेय और अपरिमेय दोनों प्रकार की सभी संख्याएँ वास्तविक संख्याएँ हैं। उदाहरण: −5, 0, 7/9, √2, π।
2. यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका
प्रमेयिका का कथन: यदि a और b कोई दो धनात्मक पूर्णांक हैं, तो ऐसे अद्वितीय पूर्णांक q और r विद्यमान होते हैं कि:
- a = भाज्य, b = भाजक
- q = भागफल और r = शेषफल
- 0 ≤ r < b का अर्थ है कि शेषफल सदैव शून्य या धनात्मक होगा और भाजक से छोटा होगा।
यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म से HCF निकालने की विधि
- बड़ी संख्या को छोटी संख्या से भाग देकर a = bq + r के रूप में लिखें।
- यदि r = 0 हो जाए, तो वर्तमान भाजक b ही HCF है।
- यदि r ≠ 0 हो, तो पुराने भाजक को भाज्य और शेषफल को नया भाजक मानें।
- इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ, जब तक शेषफल शून्य न हो जाए।
- जिस चरण में शेषफल शून्य होता है, उस चरण का भाजक ही दोनों संख्याओं का HCF होता है।
उदाहरण 1: 135 और 225 का HCF ज्ञात करें
अतः HCF (135, 225) = 45
उदाहरण 2: 867 और 255 का HCF ज्ञात करें
867 = 255 × 3 + 102
255 = 102 × 2 + 51
102 = 51 × 2 + 0
अतः HCF (867, 255) = 51
उदाहरण 3: सिद्ध करें कि प्रत्येक धनात्मक विषम पूर्णांक 6q + 1, 6q + 3 या 6q + 5 के रूप में होता है
किसी धनात्मक पूर्णांक a पर यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका को भाजक 6 के लिए लगाने पर:
a = 6q + r, जहाँ r = 0, 1, 2, 3, 4 या 5
इसलिए a के संभावित रूप 6q, 6q+1, 6q+2, 6q+3, 6q+4, 6q+5 हैं। इनमें 6q, 6q+2 और 6q+4 सम हैं। शेष रूप विषम हैं।
अतः प्रत्येक धनात्मक विषम पूर्णांक 6q + 1, 6q + 3 या 6q + 5 के रूप में होता है।
3. अंकगणित की आधारभूत प्रमेय
प्रमेय: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखा जा सकता है। गुणनखंडों के क्रम को छोड़कर यह गुणनखंडन अद्वितीय होता है।
आवश्यक परिभाषाएँ
अभाज्य संख्या
1 से बड़ी वह धनात्मक संख्या जिसके केवल दो धनात्मक गुणनखंड—1 और स्वयं वह संख्या—हों। जैसे 2, 3, 5, 7, 11। संख्या 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
भाज्य संख्या
1 से बड़ी वह संख्या जिसके दो से अधिक धनात्मक गुणनखंड हों। जैसे 4, 6, 8, 9, 10। संख्या 1 न अभाज्य है और न भाज्य।
सह-अभाज्य संख्याएँ
दो ऐसी धनात्मक संख्याएँ जिनका HCF 1 हो, सह-अभाज्य कहलाती हैं। जैसे 8 और 15। दोनों संख्याओं का स्वयं अभाज्य होना आवश्यक नहीं है।
अभाज्य गुणनखंडन
किसी भाज्य संख्या को केवल अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में लिखने की प्रक्रिया अभाज्य गुणनखंडन कहलाती है।
उदाहरण 4: 140 और 156 के अभाज्य गुणनखंड लिखें
140 = 2 × 2 × 5 × 7 = 2² × 5 × 7
156 = 2 × 2 × 3 × 13 = 2² × 3 × 13
अभाज्य गुणनखंड द्वारा HCF और LCM
| राशि | नियम |
|---|---|
| HCF | समान अभाज्य गुणनखंडों की न्यूनतम घातों का गुणनफल |
| LCM | सभी अभाज्य गुणनखंडों की अधिकतम घातों का गुणनफल |
उदाहरण 5: 26 और 91 का HCF तथा LCM
26 = 2 × 13 और 91 = 7 × 13
HCF = 13
LCM = 2 × 7 × 13 = 182
जाँच: 26 × 91 = 13 × 182 = 2366
HCF × LCM = दोनों संख्याओं का गुणनफल
आधारभूत प्रमेय के महत्वपूर्ण परिणाम
- किसी संख्या का अभाज्य गुणनखंडन क्रम बदलने को छोड़कर केवल एक ही होता है।
- यदि कोई अभाज्य संख्या p, a² को विभाजित करती है, तो p, a को भी विभाजित करती है।
- यदि दो धनात्मक पूर्णांक सह-अभाज्य हैं, तो उनके अभाज्य गुणनखंडों में कोई समान अभाज्य गुणनखंड नहीं होगा।
- किसी संख्या का HCF निकालते समय समान अभाज्य गुणनखंडों की छोटी घात और LCM निकालते समय सभी गुणनखंडों की बड़ी घात ली जाती है।
4. अपरिमेय संख्याएँ
पूर्ण परिभाषा: जिस वास्तविक संख्या को p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता, जहाँ p और q पूर्णांक तथा q ≠ 0 हों, उसे अपरिमेय संख्या कहते हैं। अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार न कभी समाप्त होता है और न ही उसके अंकों का कोई निश्चित समूह लगातार दोहराता है। इसलिए उसका दशमलव प्रसार असांत अनावर्ती होता है।
परिमेय और अपरिमेय संख्या में अंतर
| परिमेय संख्या | अपरिमेय संख्या |
|---|---|
| p/q के रूप में लिखी जा सकती है। | p/q के रूप में नहीं लिखी जा सकती। |
| दशमलव प्रसार सांत या असांत आवर्ती होता है। | दशमलव प्रसार असांत अनावर्ती होता है। |
| उदाहरण: 3/4, −2, 0.333… | उदाहरण: √2, √3, √5, π |
विरोधाभास विधि का अर्थ
किसी कथन को सिद्ध करने के लिए पहले उसके विपरीत को सत्य मान लिया जाता है। यदि इस मान्यता से कोई असंभव या विरोधी परिणाम प्राप्त होता है, तो प्रारंभिक विपरीत मान्यता गलत और मूल कथन सत्य सिद्ध होता है। अपरिमेयता के अधिकांश प्रमाण इसी विधि से किए जाते हैं।
उदाहरण 6: सिद्ध करें कि √2 अपरिमेय है
विरोधाभास विधि: मान लें कि √2 परिमेय है। तब सह-अभाज्य पूर्णांक p, q के लिए
√2 = p/q ⇒ 2q² = p²
इससे p² सम है, अतः p भी सम होगा। मान लें p = 2k।
2q² = 4k² ⇒ q² = 2k²
अतः q भी सम है। इससे p और q दोनों में 2 सार्व गुणनखंड हुआ, जो उनके सह-अभाज्य होने के विरुद्ध है।
अतः √2 एक अपरिमेय संख्या है।
उदाहरण 7: सिद्ध करें कि √5 अपरिमेय है
मान लें √5 = m/n, जहाँ m, n सह-अभाज्य हैं।
5n² = m²
अतः 5, m को विभाजित करेगा। मान लें m = 5k। तब n² = 5k², इसलिए 5, n को भी विभाजित करेगा। यह सह-अभाज्यता के विरुद्ध है।
अतः √5 अपरिमेय है।
उदाहरण 8: सिद्ध करें कि 1/√2 अपरिमेय है
यदि 1/√2 = p/q परिमेय हो, तो √2 = q/p भी परिमेय होगा। परंतु √2 अपरिमेय है। यह विरोधाभास है।
अतः 1/√2 अपरिमेय है।
उदाहरण 9: सिद्ध करें कि 7√5 अपरिमेय है
यदि 7√5 परिमेय हो, तो इसे परिमेय संख्या 7 से भाग देने पर √5 भी परिमेय होगा, जबकि √5 अपरिमेय है।
अतः 7√5 अपरिमेय है।
उदाहरण 10: सिद्ध करें कि 3 + 2√5 अपरिमेय है
यदि 3 + 2√5 = p/q हो, तो
√5 = (p − 3q)/2q
दायाँ पक्ष परिमेय है, जिससे √5 परिमेय हो जाएगा। यह असंभव है।
अतः 3 + 2√5 अपरिमेय है।
5. परिमेय संख्याएँ और दशमलव प्रसार
प्रत्येक परिमेय संख्या को दशमलव रूप में व्यक्त किया जा सकता है। उसका दशमलव प्रसार या तो कुछ अंकों के बाद समाप्त हो जाता है अथवा कभी समाप्त नहीं होता, लेकिन अंकों का कोई निश्चित समूह बार-बार दोहराता है। मान लें कि x = p/q एक परिमेय संख्या है, जहाँ p और q सह-अभाज्य पूर्णांक हैं तथा q ≠ 0। दशमलव प्रसार का प्रकार सरलतम हर q के अभाज्य गुणनखंडों पर निर्भर करता है।
सांत दशमलव
वह दशमलव प्रसार जो दशमलव के बाद सीमित अंकों पर समाप्त हो जाए। जैसे 0.5, 1.25, 3.0625।
असांत आवर्ती दशमलव
वह दशमलव प्रसार जो समाप्त न हो, परंतु एक अंक या अंकों का समूह निश्चित क्रम में बार-बार दोहराए। जैसे 0.333… और 0.142857142857…।
सांत दशमलव प्रसार
कारण: हर में केवल 2 और 5 होने पर अंश और हर को उपयुक्त घात से गुणा करके हर को 10k बनाया जा सकता है। इसलिए भिन्न को सीमित दशमलव स्थानों वाली संख्या के रूप में लिखा जा सकता है। यहाँ k = max(m,n) लिया जा सकता है।
उदाहरण 11: 21/16 का दशमलव प्रसार
21/16 = 21/2⁴ = (21 × 5⁴)/10⁴ = 13125/10000
21/16 = 1.3125, अतः यह सांत दशमलव है।
उदाहरण 12: 43/625 का दशमलव प्रसार
43/625 = 43/5⁴ = (43 × 2⁴)/10⁴ = 688/10000
43/625 = 0.0688
उदाहरण 13: 483/40 का दशमलव प्रसार
483/40 = 483/(2³ × 5) = (483 × 5²)/10³ = 12075/1000
483/40 = 12.075
असांत आवर्ती दशमलव प्रसार
उदाहरण 14: 4/3 का दशमलव प्रसार
q = 3, जो 2m5n के रूप में नहीं है।
4/3 = 1.333… = 1.3̅, अतः असांत आवर्ती है।
उदाहरण 15: 29/7 का दशमलव प्रसार
q = 7; इसमें 2 और 5 से भिन्न अभाज्य गुणनखंड है।
29/7 = 4.142857142857…, अतः असांत आवर्ती है।
| सरलतम हर का रूप | दशमलव प्रसार | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2m5n | सांत | 21/16 = 1.3125 |
| 2 और 5 के अलावा अन्य अभाज्य गुणनखंड | असांत आवर्ती | 4/3 = 1.333… |
दशमलव प्रसार की प्रकृति पहचानने की चरणबद्ध विधि
- दी गई परिमेय संख्या को p/q के रूप में लिखें।
- अंश और हर का HCF निकालकर भिन्न को सरलतम रूप में बदलें।
- सरलतम हर q का अभाज्य गुणनखंडन करें।
- यदि हर में केवल 2 और/या 5 हों, तो दशमलव प्रसार सांत होगा।
- यदि हर में 2 और 5 के अतिरिक्त कोई अन्य अभाज्य गुणनखंड हो, तो दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होगा।
उदाहरण 16: बिना भाग दिए 77/210 के दशमलव प्रसार की प्रकृति बताएँ
पहले भिन्न को सरलतम रूप में बदलें:
77/210 = 11/30
30 = 2 × 3 × 5
हर में 3 भी है, जो 2 और 5 से भिन्न अभाज्य गुणनखंड है।
अतः 77/210 का दशमलव प्रसार असांत आवर्ती होगा।
त्वरित पुनरावृत्ति
- यूक्लिड प्रमेयिका: a = bq + r, 0 ≤ r < b
- प्रत्येक भाज्य संख्या का अभाज्य गुणनखंडन अद्वितीय होता है।
- दो संख्याओं के लिए HCF × LCM = संख्याओं का गुणनफल।
- √2, √3, √5 जैसी संख्याएँ अपरिमेय हैं।
- हर 2m5n हो तो दशमलव सांत होता है।
- हर में 2 और 5 के अलावा अन्य अभाज्य गुणनखंड हो तो दशमलव असांत आवर्ती होता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न
- यूक्लिड विभाजन एल्गोरिथ्म से 405 और 252 का HCF ज्ञात करें।
- 144 और 180 का HCF तथा LCM अभाज्य गुणनखंड विधि से निकालें।
- सिद्ध करें कि √3 अपरिमेय है।
- सिद्ध करें कि 5 + 3√2 अपरिमेय है।
- बताएँ कि 13/3125 का दशमलव प्रसार सांत होगा या असांत आवर्ती।
- बिना वास्तविक भाग दिए 77/210 के दशमलव प्रसार की प्रकृति ज्ञात करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
वास्तविक संख्या किसे कहते हैं?
परिमेय तथा अपरिमेय संख्याओं के सम्मिलित समूह को वास्तविक संख्याएँ कहते हैं।
यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका का सूत्र क्या है?
a = bq + r, जहाँ 0 ≤ r < b।
किस परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार सांत होता है?
सरलतम रूप में जिसके हर के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और 5 हों।
अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार कैसा होता है?
अपरिमेय संख्या का दशमलव प्रसार असांत और अनावर्ती होता है।
क्या दो संख्याओं के लिए HCF × LCM का संबंध लागू होता है?
हाँ। दो धनात्मक पूर्णांकों के लिए HCF × LCM = दोनों संख्याओं का गुणनफल होता है।
नोट: यह अध्ययन सामग्री Bihar Board Class 10 Mathematics के अध्याय “वास्तविक संख्याएँ” की तैयारी और पुनरावृत्ति के लिए तैयार की गई है।

